अध्याय 1: भारत : संसाधन एवं उपयोग
100 महत्वपूर्ण स्मरणीय तथ्य एवं परीक्षापयोगी संपूर्ण अध्ययन नोट्स
पाठ का परिचय एवं अवलोकन
बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (BSEB) कक्षा 10 भूगोल (खंड-क) का पहला और सबसे विस्तृत अध्याय 'भारत : संसाधन एवं उपयोग' (India : Resources and Utilization) है। यह अध्याय व्यावहारिक रूप से भूगोल की रीढ़ है, जो संसाधन की बुनियादी अवधारणा से लेकर भारत में उपलब्ध समस्त प्राकृतिक संपदाओं के वितरण, उपयोगिता और संरक्षण का व्यापक विश्लेषण करता है।
प्रसिद्ध भूगोलवेत्ता जिम्मरमैन के अनुसार, "संसाधन होते नहीं, बनते हैं।" कोई भी प्राकृतिक पदार्थ तब संसाधन बनता है जब मानव अपनी तकनीकी क्षमता, ज्ञान और आर्थिक कौशल से उसका उपयोग अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए करता है।
यह अध्याय एक मुख्य खंड तथा पांच प्रमुख उप-इकाइयों (Sub-units) में विभाजित है:
- मुख्य पाठ: संसाधन की संकल्पना, वर्गीकरण (उत्पत्ति, उपयोगिता, स्वामित्व और विकास स्तर के आधार पर), संसाधन नियोजन एवं सतत पोषणीय विकास।
- इकाई 1 (क) प्राकृतिक संसाधन (भूमि एवं मृदा संसाधन): भू-उपयोग प्रारूप, मृदा निर्माण, प्रमुख मृदाएं (जलोढ़, काली, लाल-पीली, लैटराइट, मरुस्थलीय, पर्वतीय), मृदा अपरदन एवं संरक्षण।
- इकाई 1 (ख) जल संसाधन: जल की उपलब्धता, बहुउद्देशीय नदी घाटी परियोजनाएं (भाखड़ा नांगल, दामोदर, हीराकुंड, कोसी आदि), जल संकट एवं वर्षा जल संचयन।
- इकाई 1 (ग) वन एवं वन्यजीव संसाधन: वनों का वर्गीकरण, जैव विविधता, वन विनाश के कारण, सामाजिक वानिकी, राष्ट्रीय उद्यान, वन्यजीव अभयारण्य और रेड डाटा बुक।
- इकाई 1 (घ) खनिज संसाधन: धात्विक एवं अधात्विक खनिज, लौह अयस्क (हेमेटाइट, मैग्नेटाइट), मैंगनीज, बॉक्साइट, तांबा, अभ्रक, चूना पत्थर एवं खनिज पेटियां।
- इकाई 1 (ङ) शक्ति (ऊर्जा) संसाधन: पारंपरिक ऊर्जा (कोयला, पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस, जलविद्युत, परमाणु ऊर्जा) तथा गैर-पारंपरिक ऊर्जा स्रोत (सौर, पवन, बायोगैस, भूतापीय)।
1. संसाधन: संकल्पना, वर्गीकरण एवं संरक्षण (तथ्य 1 - 21)
- 1मानवीय आवश्यकताओं को पूरा करने वाले सभी जैविक और अजैविक पदार्थ 'संसाधन' कहलाते हैं।
- 2प्रसिद्ध भूगोलवेत्ता जिम्मरमैन का प्रसिद्ध कथन है—"संसाधन होते नहीं, बनते हैं।"
- 3उत्पत्ति के आधार पर संसाधनों को दो वर्गों में बांटा जाता है: जैव (Biotic) और अजैव (Abiotic) संसाधन।
- 4उपयोगिता या समाप्यता के आधार पर संसाधन दो प्रकार के होते हैं: नवीकरणीय (Renewable) और अनवीकरणीय (Non-renewable)।
- 5सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, जल और वन नवीकरणीय संसाधनों के उदाहरण हैं।
- 6कोयला, पेट्रोलियम और खनिज अनवीकरणीय तथा समाप्य संसाधनों के उदाहरण हैं।
- 7स्वामित्व के आधार पर संसाधन चार प्रकार के होते हैं: व्यक्तिगत, सामुदायिक, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय।
- 8किसी देश की तटरेखा से 200 समुद्री मील (Nautical Miles) तक का महासागरीय क्षेत्र 'अपवर्जक आर्थिक क्षेत्र' (EEZ) कहलाता है।
- 9200 समुद्री मील से परे का खुला महासागरीय क्षेत्र 'अंतरराष्ट्रीय संसाधन' होता है, जिस पर किसी एकल देश का अधिकार नहीं होता।
- 10विकास के स्तर के आधार पर संसाधन चार प्रकार के होते हैं: संभावी (Potential), विकसित (Developed), भंडार (Stock) और संचित कोष (Reserves)।
- 11संसाधनों के विवेकपूर्ण और मितव्ययी उपयोग की योजना को 'संसाधन नियोजन' (Resource Planning) कहा जाता है।
- 12पर्यावरण को बिना नुकसान पहुंचाए वर्तमान और भावी पीढ़ी दोनों की आवश्यकताओं को पूरा करना 'सतत पोषणीय विकास' (Sustainable Development) कहलाता है।
- 13सतत विकास की अवधारणा को सर्वप्रथम 'ब्रंटलैंड आयोग' ने 1987 में अपनी रिपोर्ट "अवर कॉमन फ्यूचर" में प्रस्तुत किया था।
- 14"हमारे पास हर व्यक्ति की आवश्यकता पूर्ति के लिए बहुत कुछ है, लेकिन किसी के लालच की संतुष्टि के लिए नहीं" यह कथन महात्मा गांधी का है।
- 15वर्ष 1968 में पर्यावरण और संसाधन संरक्षण की वकालत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 'क्लब ऑफ रोम' ने की थी।
- 16ई. एफ. शूमाकर ने अपनी पुस्तक 'स्मॉल इज ब्यूटीफुल' (Small is Beautiful, 1974) में गांधीजी के विचारों को प्रस्तुत किया।
- 17प्रथम पृथ्वी सम्मेलन (Earth Summit) जून 1992 में ब्राजील के रियो डी जेनेरो शहर में आयोजित हुआ था।
- 18रियो सम्मेलन में वैश्विक सतत विकास को प्राप्त करने के लिए 21 सूत्रीय कार्ययोजना 'एजेंडा 21' स्वीकृत की गई थी।
- 19द्वितीय पृथ्वी सम्मेलन 1997 में न्यूयॉर्क में आयोजित हुआ (इसे 'प्लस 5 सम्मेलन' भी कहा जाता है)।
- 20ग्लोबल वार्मिंग और ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में कटौती हेतु 1997 में जापान में 'क्योटो सम्मेलन' (Kyoto Protocol) हुआ था।
- 21तृतीय पृथ्वी सम्मेलन वर्ष 2002 में दक्षिण अफ्रीका के जोहान्सबर्ग शहर में आयोजित किया गया था।
2. भूमि एवं मृदा संसाधन [इकाई 1 (क)] (तथ्य 22 - 42)
- 22भारत का कुल भौगोलिक क्षेत्रफल 32.8 लाख वर्ग किलोमीटर है।
- 23भारत के कुल क्षेत्रफल के लगभग 43% भाग पर मैदान, 30% भाग पर पर्वत और 27% भाग पर पठार का विस्तार है।
- 24भारत में कुल भौगोलिक क्षेत्रफल के मात्र लगभग 54% भाग पर ही कृषि कार्य (शुद्ध बोया गया क्षेत्र और परती भूमि) किया जाता है।
- 25पंजाब और हरियाणा में 80% से अधिक भूमि पर खेती होती है, जबकि पूर्वोत्तर राज्यों (अरुणाचल प्रदेश आदि) में यह 10% से भी कम है।
- 26राष्ट्रीय वन नीति 1952 के अनुसार देश के पारिस्थितिक संतुलन के लिए कम से कम 33% भूभाग पर वन होना अनिवार्य है।
- 27भारत में सर्वाधिक विस्तृत और सबसे उपजाऊ मिट्टी 'जलोढ़ मिट्टी' (Alluvial Soil) है।
- 28जलोढ़ मिट्टी भारत के लगभग 6.4 करोड़ हेक्टेयर क्षेत्र (उत्तरी विशाल मैदान और तटीय डेल्टाओं) में फैली है।
- 29नदियों द्वारा लाई गई नवीन जलोढ़ मिट्टी को 'खादर' और पुरानी जलोढ़ मिट्टी को 'बांगर' कहा जाता है।
- 30खादर मिट्टी अधिक बारीक, उपजाऊ और नदियों के बाढ़ क्षेत्र में पाई जाती है।
- 31काली मिट्टी को स्थानीय भाषा में 'रेगुर मिट्टी' (Regur Soil) कहा जाता है।
- 32काली मिट्टी का निर्माण बेसाल्ट लावा चट्टानों के विखंडन और अपक्षय से हुआ है।
- 33कपास की खेती के लिए सर्वाधिक उपयुक्त मिट्टी 'काली मिट्टी' है (इसे काली कपासी मिट्टी भी कहते हैं)।
- 34काली मिट्टी में नमी धारण करने की क्षमता अत्यधिक होती है और सूखने पर इसमें गहरी दरारें पड़ जाती हैं।
- 35काली मिट्टी का मुख्य विस्तार महाराष्ट्र, गुजरात, मध्य प्रदेश और कर्नाटक के दक्कन ट्रैप क्षेत्र में है।
- 36लोहे के अंश (आयरन ऑक्साइड) की उपस्थिति के कारण 'लाल मिट्टी' का रंग लाल दिखाई देता है।
- 37'लैटराइट' (Laterite) शब्द की उत्पत्ति ग्रीक भाषा के शब्द 'लेटर' (Later) से हुई है, जिसका अर्थ 'ईंट' होता है।
- 38तीव्र निक्षालन (Leaching) और अत्यधिक वर्षा वाले उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में लैटराइट मिट्टी का निर्माण होता है।
- 39लैटराइट मिट्टी पर खाद और उर्वरक डालकर काजू, चाय और कॉफी की अच्छी फसल ली जा सकती है।
- 40मरुस्थलीय मृदा राजस्थान, उत्तरी गुजरात और दक्षिणी पंजाब के शुष्क भागों में पाई जाती है।
- 41पर्वतीय ढलानों पर मृदा अपरदन को रोकने के लिए 'समोच्च जुताई' (Contour Ploughing) और 'सीढ़ीनुमा खेती' (Terrace Farming) की जाती है।
- 42हवा द्वारा होने वाले मृदा अपरदन को रोकने के लिए खेतों के किनारों पर पेड़ों की कतार लगाना 'रक्षक मेखला' (Shelter Belts) कहलाता है।
3. जल संसाधन [इकाई 1 (ख)] (तथ्य 43 - 62)
- 43पृथ्वी के धरातल के लगभग 71% भाग पर जल और 29% भाग पर स्थल का विस्तार है।
- 44जल की विशाल उपस्थिति के कारण ही अंतरिक्ष से देखने पर पृथ्वी को 'नीला ग्रह' (Blue Planet) कहा जाता है।
- 45पृथ्वी पर उपलब्ध कुल जल का 96.5% भाग महासागरों में खारे जल के रूप में स्थित है।
- 46विश्व में मीठे या अलवणीय जल (Freshwater) की मात्रा कुल जल का मात्र 2.5% है।
- 47अलवणीय जल का लगभग 70% भाग हिमनदों (ग्लेशियरों) और ध्रुवीय बर्फ की चादरों के रूप में जमा है।
- 48भारत में विश्व की कुल वर्षा का लगभग 4% भाग प्राप्त होता है।
- 49बहुउद्देशीय नदी घाटी परियोजनाओं को भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पं. जवाहरलाल नेहरू ने "आधुनिक भारत का मंदिर" कहा था।
- 50'दामोदर घाटी परियोजना' (DVC) स्वतंत्र भारत की पहली नदी घाटी परियोजना है (1948 में स्थापित)।
- 51दामोदर घाटी परियोजना संयुक्त राज्य अमेरिका की 'टेनेसी घाटी परियोजना' (TVA) के मॉडल पर आधारित है।
- 52'भाखड़ा-नांगल परियोजना' सतलुज नदी पर स्थित है और यह भारत का एक प्रमुख विशाल बांध है।
- 53'हीराकुंड परियोजना' ओडिशा में महानदी पर स्थित है और यह भारत का सबसे लंबा बांध है।
- 54'नागार्जुन सागर परियोजना' आंध्र प्रदेश और तेलंगाना की सीमा पर कृष्णा नदी पर स्थित है।
- 55'सरदार सरोवर बांध' गुजरात में नर्मदा नदी पर बनाया गया है।
- 56'कोसी परियोजना' उत्तर बिहार में कोसी नदी पर स्थित है (भीमनगर बैराज)।
- 57बिहार की सबसे पुरानी नहर प्रणाली 'सोन नहर प्रणाली' है, जिसका निर्माण 1874 में हुआ था।
- 58राजस्थान में थार मरुस्थल को हरा-भरा करने वाली प्रसिद्ध नहर 'इंदिरा गांधी नहर' (राजस्थान नहर) है।
- 59छत पर वर्षा जल संचयन (Rooftop Rainwater Harvesting) को कानूनी रूप से अनिवार्य करने वाला भारत का पहला राज्य तमिलनाडु है।
- 60पश्चिमी हिमालय में सिंचाई और घरेलू उपयोग के लिए बनाई गई जल वाहिकाओं को 'गुल' अथवा 'कुल' (Kuhl) कहा जाता है।
- 61राजस्थान के शुष्क क्षेत्रों में वर्षा जल संचयन के लिए बनाए जाने वाले भूमिगत जलकुंड को 'टांका' (Tanka) कहते हैं।
- 62मेघालय की खासी और जयंतिया पहाड़ियों में सिंचाई के लिए 'बांस ड्रिप सिंचाई प्रणाली' (Bamboo Drip Irrigation) प्रचलित है।
4. वन एवं वन्यजीव संसाधन [इकाई 1 (ग)] (तथ्य 63 - 78)
- 63भारत में कुल भौगोलिक क्षेत्रफल के लगभग 21.7% से 24.6% भूभाग पर वनों और वृक्षों का आवरण पाया जाता है।
- 64क्षेत्रफल की दृष्टि से भारत में सर्वाधिक वन क्षेत्र वाला राज्य मध्य प्रदेश है।
- 65प्रतिशत की दृष्टि से सर्वाधिक वन आवरण वाला राज्य मिजोरम है (केंद्र शासित प्रदेशों में लक्षद्वीप)।
- 66भारत में सबसे कम वन क्षेत्र वाला राज्य हरियाणा है।
- 67प्रशासनिक दृष्टि से वनों को तीन वर्गों में बांटा गया है: आरक्षित वन (Reserved), रक्षित वन (Protected) और अवर्गीकृत वन (Unclassed)।
- 68आरक्षित वनों में पशु चराने और लकड़ी काटने पर सरकार का पूर्णतः कड़ा प्रतिबंध होता है।
- 69सुंदरवन डेल्टा (पश्चिम बंगाल) में खारे पानी में उगने वाले वनों को 'मैंग्रोव वन' (ज्वारीय वन) कहते हैं।
- 70हिमालय के पहाड़ी क्षेत्रों में 'चीड़' (Pine) के वृक्ष से 'टैक्सोल' नामक रसायन प्राप्त होता है, जो कैंसर की अचूक दवा है।
- 71संकटग्रस्त जीव-जंतुओं और वनस्पतियों की सूची अंतरराष्ट्रीय संस्था IUCN द्वारा 'रेड डाटा बुक' (Red Data Book) में प्रकाशित की जाती है।
- 72भारत में वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए 'वन्यजीव संरक्षण अधिनियम' वर्ष 1972 में लागू किया गया।
- 73भारत में बाघों की घटती संख्या को रोकने के लिए 'प्रोजेक्ट टाइगर' (Project Tiger) वर्ष 1973 में शुरू हुआ।
- 74उत्तराखंड के चमोली जिले में वनों की कटाई रोकने के लिए सुंदरलाल बहुगुणा के नेतृत्व में 1973 में 'चिपको आंदोलन' चलाया गया था।
- 75भारत का राष्ट्रीय पशु बाघ (Panthera tigris) और राष्ट्रीय पक्षी मोर (मयूर) है।
- 76भारत का पहला राष्ट्रीय उद्यान 'जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान' (उत्तराखंड) है, जिसे 1936 में हेली नेशनल पार्क के नाम से स्थापित किया गया था।
- 77असम का 'काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान' एक सींग वाले गैंडे के लिए विश्व विख्यात है।
- 78गुजरात का 'गिर राष्ट्रीय उद्यान' एशियाई शेरों (बब्बर शेर) का एकमात्र प्राकृतिक आवास है।
5. खनिज संसाधन [इकाई 1 (घ)] (तथ्य 79 - 96)
- 79धरातल के नीचे प्राकृतिक रासायनिक और भौतिक क्रियाओं से निर्मित निश्चित आंतरिक संरचना वाले पदार्थों को 'खनिज' कहते हैं।
- 80जिन खनिजों में धातु का अंश पाया जाता है, उन्हें 'धात्विक खनिज' कहते हैं (उदा. लोहा, तांबा, बॉक्साइट, मैंगनीज)।
- 81जिन खनिजों में धातु नहीं पाई जाती, उन्हें 'अधात्विक खनिज' कहते हैं (उदा. अभ्रक, चूना पत्थर, जिप्सम)।
- 82लोहा एवं इस्पात को आधुनिक औद्योगिक सभ्यता का 'आधारस्तंभ' या 'मेरुदंड' माना जाता है।
- 83लौह अयस्क के प्रमुख चार प्रकार हैं: मैग्नेटाइट, हेमेटाइट, लिमोनाइट और सिडेराइट।
- 84सर्वोत्तम कोटि का चुंबकीय लौह अयस्क 'मैग्नेटाइट' है (जिसमें 70% से अधिक शुद्ध लोहा होता है)।
- 85भारत में औद्योगिक रूप से सर्वाधिक उपयोग किया जाने वाला लौह अयस्क 'हेमेटाइट' है।
- 86भारत में लौह अयस्क का सबसे बड़ा उत्पादक राज्य ओडिशा है (इसके बाद कर्नाटक और छत्तीसगढ़)।
- 87कर्नाटक में स्थित 'कुद्रेमुख' की खानें लौह अयस्क के भारी संचित भंडार के लिए प्रसिद्ध हैं।
- 88इस्पात (स्टील) निर्माण में लोहे को मजबूती देने और जंग-रोधी बनाने के लिए 'मैंगनीज' का उपयोग किया जाता है।
- 89एक टन इस्पात बनाने में लगभग 10 किलोग्राम मैंगनीज की आवश्यकता होती है।
- 90भारत में मैंगनीज का सबसे बड़ा उत्पादक राज्य मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र है।
- 91एल्युमिनियम धातु का मुख्य अयस्क बॉक्साइट (Bauxite) है।
- 92भारत में बॉक्साइट का सबसे बड़ा उत्पादक राज्य ओडिशा है (पंचपतमाली खानें प्रसिद्ध हैं)।
- 93भारत में तांबे का सर्वाधिक उत्पादन मध्य प्रदेश (मलांजखंड खदान) और राजस्थान (खेतड़ी खदान) में होता है।
- 94विद्युत का उत्तम कुचालक और उच्च ताप रोधी होने के कारण 'अभ्रक' (Mica) का उपयोग इलेक्ट्रॉनिक व विद्युत उद्योगों में होता है।
- 95उच्च कोटि के सफेद अभ्रक को 'रूबी अभ्रक' (Ruby Mica) कहा जाता है।
- 96सीमेंट उद्योग का सबसे प्रमुख कच्चा माल चूना पत्थर (Limestone) है।
6. शक्ति (ऊर्जा) संसाधन [इकाई 1 (ङ)] (तथ्य 97 - 100)
- 97कोयले को कार्बन की मात्रा के आधार पर चार श्रेणियों में बांटा जाता है: एन्थ्रेसाइट (सर्वोत्तम, 90% से अधिक कार्बन), बिटुमिनस (सामान्य घरेलू कोयला), लिग्नाइट (भूरा कोयला), और पीट (न्यूनतम कोटि का कोयला)।
- 98भारत का लगभग 98% कोयला 'गोंडवाना समूह' की चट्टानों में पाया जाता है (दामोदर, सोन, महानदी और गोदावरी घाटी में), जिसकी आयु लगभग 20 करोड़ वर्ष है।
- 99भारत में पहली बार खनिज तेल (पेट्रोलियम) का कुआं 1867 में असम के माकुम में खोदा गया था, तथा 1889 में असम के 'डिगबोई' में देश का पहला तेल क्षेत्र मिला।
- 100मुंबई तट से 176 किलोमीटर दूर अरब सागर में स्थित 'मुंबई हाई' (स्थापना 1974) भारत का सबसे बड़ा अपतटीय कच्चा तेल उत्पादक क्षेत्र है; भारत का पहला परमाणु ऊर्जा केंद्र 1969 में तारापुर (महाराष्ट्र) में स्थापित हुआ था, जबकि राजस्थान के भादला और गुजरात के चारणका में देश के विशालतम सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित हैं।
त्वरित पुनरावलोकन: प्रमुख सम्मेलन, कानून एवं अग्रणी राज्य
| विषय / आयाम | महत्वपूर्ण वर्ष / घटना | संबंधित संस्था / स्थान / राज्य | प्रमुख सार / परिणाम |
|---|---|---|---|
| प्रथम पृथ्वी सम्मेलन | जून 1992 | रियो डी जेनेरो (ब्राजील) | सतत पोषणीय विकास हेतु 'एजेंडा 21' स्वीकृत |
| क्योटो प्रोटोकॉल | 1997 | क्योटो (जापान) | ग्रीनहाउस गैसों में कटौती (ग्लोबल वार्मिंग नियंत्रण) |
| वन्यजीव संरक्षण अधिनियम | 1972 | भारत सरकार | वन्यजीवों के शिकार व व्यापार पर रोक |
| प्रोजेक्ट टाइगर | 1973 | भारत (जिम कॉर्बेट से प्रारंभ) | बाघों के संरक्षण हेतु राष्ट्रीय परियोजना |
| चिपको आंदोलन | 1973 | चमोली (उत्तराखंड) | सुंदरलाल बहुगुणा के नेतृत्व में वन रक्षा |
| लौह अयस्क उत्पादन | वर्तमान | ओडिशा (प्रथम स्थान) | हेमेटाइट अयस्क का प्रमुख भंडार |
| सर्वाधिक वन क्षेत्र | वर्तमान | मध्य प्रदेश (क्षेत्रफल), मिजोरम (%) | पर्यावरण संतुलन हेतु 33% वन अनिवार्य |
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