Chapter 1. अर्थव्यवस्था एवं इसके विकास का इतिहास | BSEB 10 Economics Notes


बिहार बोर्ड (BSEB) कक्षा 10 — अर्थशास्त्र

अर्थशास्त्र — अध्याय 1

अर्थव्यवस्था एवं इसके विकास का इतिहास (Economy and History of Its Development)

अध्याय अवलोकन (Overview)

यह अध्याय अर्थशास्त्र की आधारशिला है, जिसमें मानव समाज की आजीविका अर्जन की प्रणालियों और भारत के आर्थिक इतिहास का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया गया है। अध्याय स्पष्ट करता है कि स्वतंत्रता से पूर्व लगभग 200 वर्षों के ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन ने किस प्रकार भारत की "सोने की चिड़िया" वाली समृद्ध अर्थव्यवस्था को एक कच्चे माल निर्यातक और तैयार माल आयातक उपनिवेश में बदल दिया। इसके उपरांत, स्वतंत्रता के बाद भारत द्वारा अपनाई गई मिश्रित अर्थव्यवस्था, योजना आयोग द्वारा संचालित पंचवर्षीय योजनाएँ, राष्ट्रीय विकास परिषद, और आर्थिक संवृद्धि के मापदंडों (राष्ट्रीय आय, प्रति व्यक्ति आय, मानव विकास सूचकांक - HDI) का विवेचन किया गया है। अंत में, बिहार के आर्थिक पिछड़ेपन के ऐतिहासिक व भौगोलिक कारणों तथा इसे दूर करने के उपायों पर प्रकाश डाला गया है।

पाठ का परिचय (Introduction):

  • अर्थव्यवस्था (Economy): समाज की सभी आर्थिक क्रियाओं (उत्पादन, उपभोग, विनिमय, वितरण) का समग्र संगठन जिसके माध्यम से लोग अपनी आजीविका अर्जित करते हैं और आवश्यकताओं की संतुष्टि करते हैं।
  • औपनिवेशिक शासन (Colonialism): जब कोई शक्तिशाली और समृद्ध राष्ट्र किसी कमजोर या पिछड़े राष्ट्र पर अपना राजनीतिक और आर्थिक नियंत्रण स्थापित कर उसके प्राकृतिक व मानवीय संसाधनों का दोहन अपने मातृ-देश के लाभ के लिए करता है।
  • आर्थिक विकास (Economic Development): यह एक सतत एवं दीर्घकालिक प्रक्रिया है, जिसके अंतर्गत देश के वास्तविक राष्ट्रीय उत्पाद, प्रति व्यक्ति आय और जनसामान्य के जीवन स्तर में गुणात्मक व मात्रात्मक सुधार होता है।
  • सतत विकास (Sustainable Development): ऐसा विकास जो वर्तमान पीढ़ी की आवश्यकताओं को पूरा करते हुए भावी पीढ़ियों की आवश्यकताओं और संसाधनों की क्षमता से समझौता नहीं करता।

1. अर्थव्यवस्था की अवधारणा एवं अर्थशास्त्रियों के कथन

1. मानव समाज की सभी आर्थिक क्रियाओं का ऐसा संगठन जिसके माध्यम से लोग आजीविका अर्जित करते हैं, अर्थव्यवस्था कहलाती है।
2. "अर्थव्यवस्था आजीविका अर्जन की एक प्रणाली है" — यह प्रसिद्ध परिभाषा ब्राउन (A. J. Brown) ने दी थी।
3. प्रसिद्ध अर्थशास्त्री आर्थर लुईस के अनुसार, "आर्थिक विकास का अर्थ किसी राष्ट्र के उत्पादन के साधनों और प्रति व्यक्ति उत्पाद में वृद्धि होना है।"
4. उत्पादन, उपभोग, विनिमय और वितरण मानव की मौलिक आर्थिक क्रियाएँ मानी जाती हैं।
5. जिस समाज में साधनों के स्वामित्व और नियंत्रण के आधार पर अर्थव्यवस्था संचालित होती है, उसे आर्थिक ढांचा कहते हैं।
6. प्राचीन काल में भारत अपने समृद्ध हस्तशिल्प, वस्त्र उद्योग और व्यापार के कारण "सोने की चिड़िया" कहलाता था।
7. ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने प्लासी के युद्ध (1757) के बाद भारत में अपने आर्थिक व राजनीतिक शोषण की नींव रखी।
8. अंग्रेजों ने भारत में लगभग 200 वर्षों (1757 से 1947) तक शासन किया।
9. अंग्रेजों की भारत में प्रमुख प्रशासनिक और आर्थिक नीति "फूट डालो और शासन करो" (Divide and Rule) थी।
10. ब्रिटिश शासन के दौरान भारत केवल इंग्लैंड के उद्योगों के लिए कच्चे माल का निर्यातक और वहाँ की फैक्ट्रियों के तैयार माल का आयातक बनकर रह गया था।

2. अर्थव्यवस्था के प्रकार (स्वामित्व के आधार पर)

11. उत्पादन के साधनों के स्वामित्व के आधार पर अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से तीन प्रकार की होती है।
12. पूँजीवादी अर्थव्यवस्था, समाजवादी अर्थव्यवस्था और मिश्रित अर्थव्यवस्था — ये तीन प्रमुख प्रणालियाँ हैं।
13. जिस अर्थव्यवस्था में उत्पादन के साधनों का स्वामित्व निजी व्यक्तियों के पास होता है और उसका मुख्य उद्देश्य निजी लाभ कमाना होता है, उसे पूँजीवादी अर्थव्यवस्था (Capitalist Economy) कहते हैं।
14. पूँजीवादी अर्थव्यवस्था के प्रमुख उदाहरण: अमेरिका, जापान, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, फ्रांस आदि हैं।
15. जिस अर्थव्यवस्था में उत्पादन के साधनों का स्वामित्व और प्रबंधन संपूर्ण समाज अथवा राज्य (सरकार) के हाथों में होता है, उसे समाजवादी अर्थव्यवस्था (Socialist Economy) कहते हैं।
16. समाजवादी अर्थव्यवस्था का मुख्य उद्देश्य समाज का अधिकतम जनकल्याण (Social Welfare) करना होता है।
17. समाजवादी अर्थव्यवस्था के प्रमुख उदाहरण: रूस, चीन, क्यूबा आदि हैं।
18. जिस अर्थव्यवस्था में पूँजीवाद और समाजवाद दोनों का सह-अस्तित्व पाया जाता है, उसे मिश्रित अर्थव्यवस्था (Mixed Economy) कहते हैं।
19. मिश्रित अर्थव्यवस्था में निजी और सार्वजनिक दोनों क्षेत्र एक साथ मिलकर कार्य करते हैं।
20. भारत एक मिश्रित अर्थव्यवस्था का सर्वश्रेष्ठ उदाहरण है।

3. अर्थव्यवस्था की संरचना एवं तीनों क्षेत्र

21. भारतीय अर्थव्यवस्था की संरचना को मुख्य रूप से तीन क्षेत्रों में विभाजित किया जाता है।
22. प्राथमिक क्षेत्र को कृषि क्षेत्र (Agricultural Sector) भी कहा जाता है।
23. प्राथमिक क्षेत्र के अंतर्गत कृषि, पशुपालन, मत्स्य पालन, वानिकी और खनन जैसी प्राकृतिक गतिविधियाँ आती हैं।
24. द्वितीयक क्षेत्र को औद्योगिक क्षेत्र (Industrial Sector) भी कहा जाता है।
25. द्वितीयक क्षेत्र के अंतर्गत विनिर्माण (Manufacturing), कल-कारखाने, कुटीर उद्योग, भवन निर्माण और बिजली-गैस आपूर्ति आते हैं।
26. तृतीयक क्षेत्र को सेवा क्षेत्र (Service Sector) कहा जाता है।
27. तृतीयक क्षेत्र के अंतर्गत परिवहन, संचार, व्यापार, बैंकिंग, बीमा, शिक्षा और स्वास्थ्य आते हैं।
28. तृतीयक क्षेत्र प्राथमिक और द्वितीयक दोनों क्षेत्रों के उत्पादन कार्यों में सहायता और सेवा प्रदान करता है।
29. स्वतंत्रता के समय (1947 में) भारत की राष्ट्रीय आय में सर्वाधिक योगदान प्राथमिक (कृषि) क्षेत्र का था।
30. वर्तमान समय में भारत की राष्ट्रीय आय (GDP) में सर्वाधिक योगदान तृतीयक (सेवा) क्षेत्र का है।

4. आर्थिक संवृद्धि, विकास और सतत विकास

31. सामान्यतः 'आर्थिक संवृद्धि' (Economic Growth) शब्द का प्रयोग विकसित राष्ट्रों के संदर्भ में किया जाता है।
32. 'आर्थिक विकास' (Economic Development) शब्द का प्रयोग विकासशील अथवा अविकसित राष्ट्रों के संदर्भ में किया जाता है।
33. आर्थिक संवृद्धि केवल परिमाणात्मक (Quantitative) परिवर्तन को दर्शाती है।
34. आर्थिक विकास परिमाणात्मक और गुणात्मक (Qualitative) दोनों प्रकार के परिवर्तनों का समावेशी रूप है।
35. ऐसा विकास जो वर्तमान पीढ़ी के साथ-साथ आने वाली पीढ़ियों के पर्यावरण और संसाधनों को सुरक्षित रखे, सतत विकास (Sustainable Development) कहलाता है।
36. ब्रुंडलैंड आयोग (Brundtland Commission) ने 1987 में अपनी रिपोर्ट 'अवर कॉमन फ्यूचर' में सतत विकास की अवधारणा दी थी।
37. जब आर्थिक विकास का लाभ समाज के अंतिम और सबसे निचले पायदान के व्यक्ति तक पहुँचे, तो उसे समावेशी विकास (Inclusive Development) कहते हैं।
38. गरीबी का दुष्चक्र (Vicious Circle of Poverty) की प्रसिद्ध अवधारणा अर्थशास्त्री रेग्नर नर्क्स (Ragnar Nurkse) ने दी थी।
39. "गरीबी इसलिए है क्योंकि वह गरीब है" — यह कथन रेग्नर नर्क्स के गरीबी के दुष्चक्र सिद्धांत का सार है।
40. गरीबी के दुष्चक्र में कम आय के कारण कम बचत, कम निवेश, कम उत्पादकता और पुनः कम आय का चक्र निरंतर चलता रहता है।

5. आर्थिक नियोजन एवं योजना आयोग

41. देश के प्राथमिक लक्ष्यों को ध्यान में रखकर सीमित प्राकृतिक और मानवीय संसाधनों का व्यवस्थित उपयोग करना आर्थिक नियोजन (Economic Planning) कहलाता है।
42. भारत में योजना आयोग (Planning Commission) की स्थापना 15 मार्च 1950 को की गई थी।
43. योजना आयोग एक गैर-संवैधानिक और परामर्शदात्री संस्था थी।
44. योजना आयोग के पदेन अध्यक्ष देश के प्रधानमंत्री होते थे।
45. भारत के योजना आयोग के प्रथम अध्यक्ष पंडित जवाहरलाल नेहरू थे।
46. योजना आयोग के प्रथम उपाध्यक्ष गुलजारीलाल नंदा थे।
47. भारत में प्रथम पंचवर्षीय योजना की अवधि 1951 से 1956 तक थी।
48. प्रथम पंचवर्षीय योजना मुख्य रूप से कृषि क्षेत्र के विकास पर केंद्रित थी (हैरोड-डोमर मॉडल पर आधारित)।
49. द्वितीय पंचवर्षीय योजना (1956-1961) में मुख्य बल भारी उद्योगों और खनिजों पर दिया गया (पी.सी. महालनोबिस मॉडल)।
50. 12वीं और अंतिम पंचवर्षीय योजना का कार्यकाल 2012 से 2017 तक निर्धारित था।

6. नीति आयोग एवं राष्ट्रीय विकास परिषद

51. 1 जनवरी 2015 को योजना आयोग को समाप्त कर नीति आयोग (NITI Aayog) की स्थापना की गई।
52. नीति आयोग का गठन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में किया गया।
53. NITI का पूर्ण रूप National Institution for Transforming India (राष्ट्रीय भारत परिवर्तन संस्थान) है।
54. नीति आयोग के पदेन अध्यक्ष भी देश के प्रधानमंत्री होते हैं।
55. नीति आयोग केंद्र और राज्यों के बीच सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism) को बढ़ावा देने वाली एक 'थिंक टैंक' संस्था है।
56. पंचवर्षीय योजनाओं का अंतिम अनुमोदन और समीक्षा करने वाली संस्था राष्ट्रीय विकास परिषद (NDC) थी।
57. राष्ट्रीय विकास परिषद (National Development Council) का गठन 6 अगस्त 1952 को हुआ था।
58. राष्ट्रीय विकास परिषद के अध्यक्ष भी देश के प्रधानमंत्री होते हैं, और सभी राज्यों के मुख्यमंत्री इसके सदस्य होते हैं।
59. देश के आर्थिक विकास की गति को तेज करने के लिए केंद्र और राज्यों के बीच समन्वय NDC द्वारा स्थापित किया जाता था।
60. नीति आयोग का मुख्यालय नई दिल्ली में स्थित है।

7. विकास के मापदंड: आय एवं सूचकांक

61. किसी देश में एक वित्तीय वर्ष में उत्पादित अंतिम वस्तुओं और सेवाओं के कुल मौद्रिक मूल्य को राष्ट्रीय आय (National Income) कहते हैं।
62. कुल राष्ट्रीय आय को देश की कुल जनसंख्या से भाग देने पर प्रति व्यक्ति आय (Per Capita Income - PCI) प्राप्त होती है।
63. गणितीय सूत्र: प्रति व्यक्ति आय = कुल राष्ट्रीय आय / कुल जनसंख्या
64. विश्व बैंक अपनी 'विश्व विकास रिपोर्ट' में देशों को विकसित, मध्यम और निम्न आय वर्ग में बाँटने के लिए प्रति व्यक्ति आय को आधार बनाता है।
65. उच्च प्रति व्यक्ति आय वाले देशों को विकसित देश कहा जाता है (जैसे—अमेरिका, जापान, जर्मनी)।
66. कम प्रति व्यक्ति आय वाले देशों को विकासशील देश कहा जाता है (जैसे—भारत)।
67. मानव विकास सूचकांक को अंग्रेजी में HDI (Human Development Index) कहा जाता है।
68. HDI की अवधारणा का विकास पाकिस्तानी अर्थशास्त्री महबूब-उल-हक ने 1990 में किया था।
69. नोबेल पुरस्कार विजेता भारतीय अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन ने महबूब-उल-हक के साथ मिलकर HDI का प्रारूप तैयार किया था।
70. संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) द्वारा प्रतिवर्ष मानव विकास रिपोर्ट (HDR) प्रकाशित की जाती है।
71. मानव विकास सूचकांक (HDI) के मुख्य तीन सूचक (घटक) होते हैं: जीवन प्रत्याशा (स्वास्थ्य), शिक्षा (ज्ञान), और जीवन स्तर (प्रति व्यक्ति आय)।
72. जीवन की भौतिक गुणवत्ता सूचकांक (PQLI) का प्रतिपादन अर्थशास्त्री मॉरिस डी. मॉरिस ने किया था।
73. PQLI के तीन मुख्य घटक हैं: जीवन प्रत्याशा, शिशु मृत्यु दर और मौलिक साक्षरता।
74. राष्ट्रीय विकास रिपोर्ट के अनुसार भारत मध्यम मानव विकास वाले देशों के समूह में आता है।
75. भारत में पहली मानव विकास रिपोर्ट अप्रैल 2002 में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के समय जारी की गई थी।

8. आधारिक संरचना (Infrastructure)

76. वे सभी बुनियादी सुविधाएं, प्रणालियाँ और सेवाएं जो देश के आर्थिक विकास और उत्पादन कार्यों का आधार बनती हैं, आधारिक संरचना कहलाती हैं।
77. आधारिक संरचना को मुख्य रूप से दो भागों में बांटा जाता है: आर्थिक आधारिक संरचना और सामाजिक आधारिक संरचना।
78. ऊर्जा, परिवहन (सड़क, रेल, जलमार्ग, वायुमार्ग) और संचार आर्थिक आधारिक संरचना के उदाहरण हैं।
79. शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल और आवास सामाजिक आधारिक संरचना के उदाहरण हैं।
80. जिस देश या राज्य की आधारिक संरचना जितनी अधिक मजबूत और विकसित होती है, उसका आर्थिक विकास उतना ही तीव्र होता है।

9. बिहार के संदर्भ में आर्थिक विकास एवं पिछड़ापन

81. इतिहास साक्षी है कि प्राचीन काल में बिहार ज्ञान-विज्ञान और सत्ता का वैश्विक केंद्र था (नालंदा, विक्रमशिला, पाटलिपुत्र)।
82. भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद बिहार के जीरादेई (सिवान) के रहने वाले थे।
83. "बिहार के विकास के बिना भारत का विकास संभव नहीं है" — यह ऐतिहासिक कथन पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम का है।
84. 15 नवंबर 2000 को बिहार से अलग होकर झारखंड एक नया राज्य बना।
85. झारखंड के अलग होने के बाद खनिज संपदा और अधिकांश बड़े भारी उद्योग झारखंड के हिस्से में चले गए।
86. विभाजन के बाद वर्तमान बिहार के हिस्से में मुख्य रूप से उपजाऊ मैदानी कृषि भूमि और बाढ़-प्रवण क्षेत्र ही बचे।
87. बिहार की लगभग 80% से अधिक जनसंख्या अपनी आजीविका के लिए कृषि पर निर्भर है।
88. उत्तरी बिहार लगभग हर वर्ष विनाशकारी बाढ़ की चपेट में आता है।
89. कोसी नदी को बिहार का शोक (Sorrow of Bihar) कहा जाता है।
90. जहां उत्तरी बिहार बाढ़ से कराहता है, वहीं दक्षिणी बिहार मुख्य रूप से सूखे की मार झेलता है।
91. बिहार के आर्थिक पिछड़ेपन का एक बड़ा कारण यहाँ की तेज जनसंख्या वृद्धि दर है।
92. आधारिक संरचना (सड़क, बिजली, स्वास्थ्य, उच्च शिक्षण संस्थान) का अभाव बिहार के पिछड़ेपन का प्रमुख कारण रहा है।
93. बिहार में बड़े उद्योगों और निजी पूँजी निवेश की कमी से रोजगार के अवसर सीमित रहे हैं।
94. रोजगार के अभाव में बिहार के लाखों कुशल और अकुशल युवा श्रमिकों का दूसरे राज्यों में पलायन (Migration) होता है।
95. बिहार के पिछड़ेपन को दूर करने के लिए बाढ़ एवं जल प्रबंधन पर स्थायी नीति बनाना सर्वाधिक आवश्यक है।
96. कृषि आधारित उद्योगों (जैसे—मखाना, लीची, मक्का, फल प्रसंस्करण और एथेनॉल संयंत्र) को बढ़ावा देकर बिहार की आर्थिकी सुधारी जा सकती है।
97. बिहार में शांति व्यवस्था, विधि का शासन और पारदर्शी प्रशासनिक सुधार पूँजी निवेश को आकर्षित करने के लिए आवश्यक हैं।
98. बिहार सरकार द्वारा महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए पंचायती राज संस्थाओं में 50% आरक्षण दिया गया है।
99. बिहार में ग्रामीण विकास के लिए विश्व बैंक संपोषित जीविका (JEEViKA) परियोजना अत्यंत सफल रही है।
100. आर्थिक सुधार, बेहतर सड़क-बिजली ढांचा और सुदृढ़ कानून व्यवस्था से पिछले कुछ वर्षों में बिहार की विकास दर में निरंतर सकारात्मक सुधार देखा गया है।
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