अध्याय 1 –  रासायनिक अभिक्रियाएँ एवं समीकरण | BSEB 10 Science Subjective


अध्याय 1: रासायनिक अभिक्रियाएँ एवं समीकरण

BSEB Class 10 विज्ञान (रसायनशास्त्र) | समीकरण संतुलन, अभिक्रियाओं के प्रकार, संक्षारण एवं विकृतगंधिता सम्पूर्ण नोट्स

खण्ड 1: 50 वस्तुनिष्ठ एक-पंक्ति प्रश्नोत्तर (One-Liners)
  1. मैग्नीशियम रिबन को वायु में जलाने से पहले रेगमाल से रगड़कर साफ क्यों किया जाता है? — मूल मैग्नीशियम ऑक्साइड (MgO) की सुरक्षात्मक परत को हटाने के लिए
  2. मैग्नीशियम रिबन को वायु में जलाने पर कैसी ज्वाला उत्पन्न होती है? — चमकदार श्वेत ज्वाला (Dazzling White Flame)
  3. मैग्नीशियम रिबन के दहन के फलस्वरूप प्राप्त सफेद चूर्ण का रासायनिक नाम क्या है? — मैग्नीशियम ऑक्साइड (MgO)
  4. किसी रासायनिक अभिक्रिया में भाग लेने वाले मूल पदार्थों को क्या कहते हैं? — अभिकारक (Reactants)
  5. रासायनिक अभिक्रिया के उपरांत उत्पन्न नए गुणधर्म वाले पदार्थों को क्या कहा जाता है? — उत्पाद (Products)
  6. रासायनिक समीकरण को संतुलित करना किस सार्वभौमिक नियम पर आधारित है? — द्रव्यमान संरक्षण का नियम (Law of Conservation of Mass)
  7. द्रव्यमान संरक्षण के नियम के अनुसार, किसी रासायनिक अभिक्रिया में द्रव्यमान का क्या होता है? — न तो निर्माण हो सकता है और न ही विनाश
  8. असंतुलित रासायनिक समीकरण, जिसमें दोनों पक्षों में परमाणुओं की संख्या बराबर न हो, क्या कहलाता है? — कंकाली (ढांचा) रासायनिक समीकरण (Skeletal Equation)
  9. रासायनिक समीकरण को संतुलित करने की सबसे प्रचलित प्रारंभिक विधि कौन-सी है? — हिट एंड ट्रायल विधि (अनुमान विधि / Hit and Trial Method)
  10. रासायनिक समीकरण में भौतिक अवस्थाओं को दर्शाने वाले प्रतीक (s), (l), (g), (aq) का क्या अर्थ है? — क्रमशः ठोस (Solid), द्रव (Liquid), गैस (Gas), तथा जलीय विलयन (Aqueous)
  11. रासायनिक समीकरण में जब जल के आगे (g) लिखा हो, तो इसका क्या तात्पर्य है? — जल का उपयोग भाप (वाष्प / Steam) के रूप में किया गया है।
  12. बिना बुझे चूने (Quick Lime) का रासायनिक नाम और सूत्र क्या है? — कैल्शियम ऑक्साइड (CaO)
  13. बुझे हुए चूने (Slaked Lime) का रासायनिक नाम और सूत्र क्या है? — कैल्शियम हाइड्रॉक्साइड [Ca(OH)2]
  14. बिना बुझे चूने पर जल मिलाने पर कौन-सी अभिक्रिया होती है? — तीव्र ऊष्माक्षेपी संयोजन अभिक्रिया
  15. दीवारों पर सफेदी करने के 2-3 दिन बाद दीवारों पर चमकदार परत किस यौगिक के बनने से आती है? — कैल्शियम कार्बोनेट (CaCO3)
  16. संयोजन अभिक्रिया (Combination Reaction) में कितने उत्पाद बनते हैं? — सदैव केवल एक ही उत्पाद बनता है।
  17. जिन रासायनिक अभिक्रियाओं में उत्पाद के निर्माण के साथ-साथ ऊष्मा भी उत्पन्न होती है, वे क्या कहलाती हैं? — ऊष्माक्षेपी अभिक्रियाएं (Exothermic Reactions)
  18. मानव शरीर में भोजन के पाचन के दौरान होने वाला 'श्वसन' (Respiration) कैसी अभिक्रिया है? — ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया
  19. प्राकृतिक गैस (मीथेन) का दहन किस प्रकार की अभिक्रिया का उदाहरण है? — ऊष्माक्षेपी दहन अभिक्रिया
  20. शाक-सब्जियों तथा जैव अपशिष्टों का विघटित होकर कम्पोस्ट बनना कैसी अभिक्रिया है? — ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया
  21. जिन रासायनिक अभिक्रियाओं में अभिकारकों को तोड़ने हेतु ऊष्मा, प्रकाश या विद्युत ऊर्जा का अवशोषण होता है, वे क्या कहलाती हैं? — ऊष्माशोषी अभिक्रियाएं (Endothermic Reactions)
  22. फेरस सल्फेट क्रिस्टल (FeSO4·7H2O) का प्राकृतिक रंग कैसा होता है? — हल्का हरा (Light Green)
  23. फेरस सल्फेट को गर्म करने पर निकलने वाली सल्फर की तीक्ष्ण लाक्षणिक गंध वाली गैसें कौन-सी हैं? — सल्फर डाइऑक्साइड (SO2) तथा सल्फर ट्राइऑक्साइड (SO3)
  24. फेरस सल्फेट के तापीय अपघटन से बनने वाले भूरे-लाल रंग के ठोस उत्पाद का नाम क्या है? — फेरिक ऑक्साइड (Fe2O3)
  25. चूना पत्थर (संगमरमर / खड़िया) का रासायनिक सूत्र क्या है? — कैल्शियम कार्बोनेट (CaCO3)
  26. सीमेंट उद्योग में सर्वाधिक प्रयुक्त होने वाला प्रमुख कच्चा माल कौन-सा है? — कैल्शियम ऑक्साइड (CaO / बिना बुझा चूना)
  27. लेड नाइट्रेट [Pb(NO3)2] के चूर्ण को गर्म करने पर निकलने वाले भूरे रंग के धुएं वाली गैस कौन-सी है? — नाइट्रोजन डाइऑक्साइड (NO2)
  28. जल के विद्युत-अपघटन (Electrolysis of Water) में कैथोड (ऋणात्मक इलेक्ट्रोड) पर कौन-सी गैस मुक्त होती है? — हाइड्रोजन गैस (H2)
  29. जल के विद्युत-अपघटन में एनोड (धनात्मक इलेक्ट्रोड) पर कौन-सी गैस एकत्रित होती है? — ऑक्सीजन गैस (O2)
  30. जल के विद्युत-अपघटन में कैथोड तथा एनोड पर एकत्र गैसों का आयतन अनुपात कितना होता है? — 2 : 1 (H2 : O2)
  31. सूर्य के प्रकाश में रखने पर श्वेत सिल्वर क्लोराइड (AgCl) किस रंग में परिवर्तित हो जाता है? — धूसर रंग (ग्रे / Grey) में
  32. श्याम-श्वेत (Black and White) फोटोग्राफी में किन दो प्रकाश-संवेदी रसायनों का उपयोग किया जाता है? — सिल्वर ब्रोमाइड (AgBr) तथा सिल्वर क्लोराइड (AgCl)
  33. कॉपर सल्फेट (CuSO4) के नीले जलीय विलयन में लोहे की कील डालने पर विलयन का रंग कैसा हो जाता है? — हल्का हरा (फेरस सल्फेट बनने से)
  34. लोहे की कील पर तांबे का भूरा निक्षेप जमना किस प्रकार की अभिक्रिया का उदाहरण है? — विस्थापन अभिक्रिया (Displacement Reaction)
  35. सोडियम सल्फेट (Na2SO4) तथा बेरियम क्लोराइड (BaCl2) के बीच अभिक्रिया से किस रंग का अवक्षेप बनता है? — श्वेत अवक्षेप (बेरियम सल्फेट, BaSO4)
  36. वे अभिक्रियाएं जिनमें अभिकारकों के बीच आयनों का पारस्परिक आदान-प्रदान (विनिमय) होता है, क्या कहलाती हैं? — द्विविस्थापन अभिक्रियाएं (Double Displacement Reactions)
  37. किसी रासायनिक अभिक्रिया में बने जल में अघुलनशील ठोस पदार्थ को क्या कहते हैं? — अवक्षेप (Precipitate)
  38. किसी पदार्थ में ऑक्सीजन का जुड़ना अथवा हाइड्रोजन का निकलना क्या कहलाता है? — उपचयन (ऑक्सीकरण / Oxidation)
  39. किसी पदार्थ में हाइड्रोजन का जुड़ना अथवा ऑक्सीजन का ह्रास (निकलना) क्या कहलाता है? — अपचयन (Reduction)
  40. वे अभिक्रियाएं जिनमें एक अभिकारक का उपचयन तथा दूसरे का अपचयन एक साथ होता है, क्या कहलाती हैं? — रेडॉक्स अभिक्रियाएं (उपचयन-अपचयन अभिक्रियाएं)
  41. तांबे (कॉपर) के चूर्ण को वायु में गर्म करने पर उस पर किस रंग की परत चढ़ जाती है? — काले रंग की कॉपर(II) ऑक्साइड (CuO) की परत
  42. काले कॉपर(II) ऑक्साइड पर हाइड्रोजन गैस प्रवाहित करने पर क्या होता है? — काली परत पुनः चमकीले भूरे तांबे (Cu) में बदल जाती है
  43. CuO + H2 → Cu + H2O में अपचायक (Reducing Agent) का कार्य कौन कर रहा है? — हाइड्रोजन (H2)
  44. आर्द्र वायु के संपर्क में आने पर लोहे की वस्तुओं पर लाल-भूरे रंग की पपड़ीदार परत जमना क्या कहलाता है? — लोहे पर जंग लगना (संक्षारण / Rusting)
  45. लोहे के जंग का रासायनिक सूत्र क्या होता है? — Fe2O3·xH2O (जलयोजित फेरिक ऑक्साइड)
  46. चांदी की वस्तुओं पर वायु में उपस्थित सल्फर से क्रिया के कारण किस रंग की परत चढ़ती है? — काली परत (सिल्वर सल्फाइड, Ag2S)
  47. तांबे की सतह पर नम वायु के संपर्क से किस रंग की संक्षारण परत जम जाती है? — हरी परत [क्षारीय कॉपर कार्बोनेट, CuCO3·Cu(OH)2]
  48. वसायुक्त तथा तैलीय खाद्य पदार्थों का वायु के संपर्क में आकर उपचयित हो जाने से गंध व स्वाद का बिगड़ना क्या कहलाता है? — विकृतगंधिता (Rancidity)
  49. आलू के चिप्स की थैलियों में उपचयन रोकने के लिए कौन-सी कम सक्रिय गैस भरी जाती है? — नाइट्रोजन गैस (N2)
  50. विकृतगंधिता को रोकने के लिए भोजन में मिलाए जाने वाले रासायनिक पदार्थों को क्या कहते हैं? — प्रति-ऑक्सीकारक (एंटीऑक्सीडेंट्स / Antioxidants)
खण्ड 2: 25 लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर (Short Answer Questions)
प्रश्न 1: रासायनिक अभिक्रिया किसे कहते हैं? इसके किन्हीं चार प्रमुख लक्षणों का उल्लेख कीजिए।

वह प्रक्रम जिसमें एक या एक से अधिक पदार्थ (अभिकारक) परस्पर अंतःक्रिया करके पूर्णतः नए रासायनिक गुणधर्मों वाले एक या अधिक नए पदार्थों (उत्पादों) का निर्माण करते हैं, रासायनिक अभिक्रिया कहलाती है।
प्रमुख लक्षण: 1. अवस्था में परिवर्तन, 2. रंग में परिवर्तन, 3. गैस का निकास या उत्सर्जन, 4. तापमान में परिवर्तन (ऊष्मा का उत्सर्जन या अवशोषण), अथवा अवक्षेप का बनना।

प्रश्न 2: रासायनिक समीकरण को संतुलित करना क्यों आवश्यक है?

द्रव्यमान संरक्षण के नियम के अनुसार, किसी भी रासायनिक अभिक्रिया में द्रव्यमान का न तो सृजन हो सकता है और न ही विनाश। अर्थात अभिक्रिया के पूर्व उपस्थित कुल अभिकारकों का द्रव्यमान, अभिक्रिया के पश्चात बने कुल उत्पादों के द्रव्यमान के सदैव बराबर होना चाहिए। अतः दोनों पक्षों में प्रत्येक तत्व के परमाणुओं की संख्या को समान करने हेतु रासायनिक समीकरण को संतुलित करना अनिवार्य होता है।

प्रश्न 3: संयोजन अभिक्रिया (Combination Reaction) क्या है? एक उदाहरण देकर समझाइए।

वह रासायनिक अभिक्रिया जिसमें दो या दो से अधिक अभिकारक परस्पर संयोग करके केवल एकल उत्पाद का निर्माण करते हैं, संयोजन अभिक्रिया कहलाती है।
उदाहरण: बिना बुझे चूने पर जल मिलाने पर बुझा हुआ चूना बनता है और अत्यधिक ऊष्मा उत्पन्न होती है:

CaO(s) + H2O(l) → Ca(OH)2(aq) + ऊष्मा

प्रश्न 4: वियोजन (अपघटन) अभिक्रिया को संयोजन अभिक्रिया के विपरीत क्यों कहा जाता है? समीकरण सहित स्पष्ट करें।

संयोजन अभिक्रिया में दो या अधिक पदार्थ मिलकर एक एकल उत्पाद बनाते हैं (A + B → AB); जबकि वियोजन अभिक्रिया में ठीक इसके विपरीत एक एकल अभिकारक टूटकर दो या दो से अधिक सरल उत्पादों में विघटित हो जाता है (AB → A + B)।

संयोजन: 2H2 + O2 → 2H2O
वियोजन: 2H2O →विद्युत 2H2 + O2

प्रश्न 5: श्वसन को ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया क्यों माना जाता है? वैज्ञानिक कारण दीजिए।

जीवित रहने के लिए हमें ऊर्जा की आवश्यकता होती है जो हमें भोजन से मिलती है। पाचन क्रिया में कार्बोहाइड्रेट टूटकर ग्लूकोज (C6H12O6) बनाते हैं। श्वसन प्रक्रम के दौरान यह ग्लूकोज हमारी कोशिकाओं में उपस्थित ऑक्सीजन के साथ मिलकर मंद दहन द्वारा ऑक्सीकृत होता है तथा प्रचुर मात्रा में एटीपी (ATP) ऊर्जा मुक्त करता है। चूंकि इसमें ऊर्जा निकलती है, अतः श्वसन एक ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया है:

C6H12O6(aq) + 6O2(aq) → 6CO2(aq) + 6H2O(l) + ऊर्जा

प्रश्न 6: दीवारों पर सफेदी करने के दो-तीन दिन बाद दीवारों पर चमकदार सफेद परत क्यों दिखाई देती है?

सफेदी करने के लिए प्रयुक्त बुझा चूना [Ca(OH)2] जब दीवारों पर पोता जाता है, तो वह वायुमंडल में उपस्थित कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) गैस के साथ धीमी गति से अभिक्रिया करता है। दो-तीन दिन में दीवार की सतह पर कैल्शियम कार्बोनेट (CaCO3) की एक अत्यंत पतली, चमकदार और कठोर परत बन जाती है, जिससे दीवारों में संगमरमर जैसी चमक आ जाती है:

Ca(OH)2(aq) + CO2(g) → CaCO3(s) + H2O(l)

प्रश्न 7: फेरस सल्फेट क्रिस्टलों को गर्म करने पर क्या प्रेक्षण दिखाई देते हैं? संतुलित रासायनिक समीकरण लिखिए।

जब हल्के हरे रंग के फेरस सल्फेट क्रिस्टलों (FeSO4·7H2O) को शुष्क परखनली में गर्म किया जाता है, तो पहले उनका क्रिस्टलन जल उड़ जाने से हरा रंग गायब हो जाता है। फिर अधिक गर्म करने पर यह टूटकर लाल-भूरे रंग का फेरिक ऑक्साइड (Fe2O3) बनाता है तथा जलते हुए गंधक (सल्फर) की तीखी दमघोंटू गंध वाली दो गैसें (SO2SO3) निकलती हैं:

2FeSO4(s) →ऊष्मा (Δ) Fe2O3(s) + SO2(g)↑ + SO3(g)↑

प्रश्न 8: लेड नाइट्रेट को गर्म करने पर होने वाली अभिक्रिया का संतुलित समीकरण तथा प्रेक्षण लिखिए।

जब सफेद रंग के लेड नाइट्रेट चूर्ण को क्वथन नली में गर्म किया जाता है, तो चटकने की आवाज के साथ भूरे रंग का घना धुआं निकलता है जो नाइट्रोजन डाइऑक्साइड (NO2) गैस का होता है, तथा परखनली में पीले रंग का लेड ऑक्साइड (PbO) अवशेष बचता है:

2Pb(NO3)2(s) →ऊष्मा (Δ) 2PbO(s) [पीला] + 4NO2(g)↑ [भूरा धुआं] + O2(g)↑

प्रश्न 9: विस्थापन (Displacement) और द्विविस्थापन (Double Displacement) अभिक्रियाओं में मुख्य अंतर क्या है?

विस्थापन अभिक्रिया: इसमें एक अधिक क्रियाशील तत्व किसी कम क्रियाशील तत्व को उसके यौगिक (लवण विलयन) से अलग कर स्वयं उसका स्थान ले लेता है।

Fe(s) + CuSO4(aq) → FeSO4(aq) + Cu(s)
द्विविस्थापन अभिक्रिया: इसमें दो भिन्न यौगिक अपने आयनों का परस्पर विनिमय (आदान-प्रदान) करके दो नए यौगिकों का निर्माण करते हैं।
Na2SO4(aq) + BaCl2(aq) → BaSO4(s)↓ + 2NaCl(aq)

प्रश्न 10: अवक्षेपण अभिक्रिया (Precipitation Reaction) किसे कहते हैं? एक उपयुक्त उदाहरण दीजिए।

वह रासायनिक अभिक्रिया जिसमें दो घुलनशील जलीय विलयनों के परस्पर मिलने पर एक जल में अघुलनशील ठोस पदार्थ (अवक्षेप) बनता है जो विलयन में नीचे बैठ जाता है, अवक्षेपण अभिक्रिया कहलाती है।
उदाहरण: लेड नाइट्रेट तथा पोटैशियम आयोडाइड विलयनों को मिलाने पर लेड आयोडाइड का चमकीला पीला अवक्षेप बनता है:

Pb(NO3)2(aq) + 2KI(aq) → PbI2(s)↓ [पीला अवक्षेप] + 2KNO3(aq)

प्रश्न 11: कॉपर सल्फेट के जलीय विलयन में लोहे की कील डुबोने पर विलयन का नीला रंग क्यों बदल जाता है?

सक्रियता श्रेणी में लोहा (Fe) तांबे (Cu) से अधिक क्रियाशील है। जब लोहे की कील कॉपर सल्फेट के नीले विलयन में डाली जाती है, तो लोहा तांबे को विस्थापित करके फेरस सल्फेट (FeSO4) बना लेता है, जिसके कारण विलयन का नीला रंग बदलकर हल्का हरा हो जाता है तथा निष्कासित तांबा लोहे की कील पर लाल-भूरे रंग के रूप में जमा हो जाता है:

Fe(s) + CuSO4(aq) [नीला] → FeSO4(aq) [हरा] + Cu(s)

प्रश्न 12: रेडॉक्स अभिक्रिया किसे कहते हैं? ZnO + C → Zn + CO में उपचयित तथा अपचयित पदार्थों की पहचान कीजिए।

वह रासायनिक अभिक्रिया जिसमें एक अभिकारक का उपचयन (ऑक्सीकरण) तथा दूसरे अभिकारक का अपचयन एक ही समय में साथ-साथ होता है, रेडॉक्स (Redox) अभिक्रिया कहलाती है।
दी गई अभिक्रिया: ZnO + C → Zn + CO में:
कार्बन (C) का उपचयन होकर CO बन रहा है (ऑक्सीजन का जुड़ना)।
जिंक ऑक्साइड (ZnO) का अपचयन होकर Zn बन रहा है (ऑक्सीजन का हटना)।

प्रश्न 13: संक्षारण (Corrosion) क्या है? लोहे के संक्षारण के लिए कौन-सी दो परिस्थितियां अनिवार्य हैं?

जब कोई धातु अपने आस-पास की वायुमंडलीय नमी (जलवाष्प), ऑक्सीजन, अम्ल आदि के संपर्क में आती है, तो उसकी सतह पर अवांछित यौगिकों की परत बनने से धातु का धीरे-धीरे क्षय होने लगता है। इसे संक्षारण कहते हैं।
लोहे पर जंग लगने हेतु दो अनिवार्य परिस्थितियां हैं:
1. ऑक्सीजन (वायु) की उपस्थिति।
2. नमी (जलवाष्प या जल) की उपस्थिति। (इनमें से किसी एक के अभाव में जंग नहीं लग सकता)।

प्रश्न 14: विकृतगंधिता (Rancidity) क्या है? इसे रोकने के कोई दो व्यावहारिक उपाय लिखिए।

वसायुक्त अथवा तैलीय खाद्य पदार्थों को लंबे समय तक खुली हवा में रखने पर वे वायुमंडलीय ऑक्सीजन द्वारा उपचयित (ऑक्सीकृत) हो जाते हैं, जिससे उनके स्वाद और गंध में अप्रिय बदलाव आ जाता है। इस परिघटना को विकृतगंधिता कहते हैं।
रोकने के उपाय:
1. खाद्य पदार्थों के पैकेटों में से ऑक्सीजन हटाकर अक्रिय नाइट्रोजन गैस (N2) भरना।
2. भोजन को वायुरोधी बर्तनों (Airtight containers) में रखना अथवा फ्रिज (रेफ्रिजरेटर) में कम ताप पर रखना।

प्रश्न 15: तेल एवं वसायुक्त खाद्य पदार्थों को नाइट्रोजन से प्रभावित (फ्लश) क्यों किया जाता है?

वायु में उपस्थित ऑक्सीजन एक सक्रिय गैस है जो तैलीय और वसायुक्त खाद्य पदार्थों (जैसे आलू के चिप्स, नमकीन) का तेजी से उपचयन कर उन्हें बासी, बदबूदार और स्वादहीन (विकृतगंधी) बना देती है। इसके विपरीत, नाइट्रोजन (N2) एक अत्यंत कम क्रियाशील अक्रिय गैस है। जब पैकेटों में नाइट्रोजन भरी जाती है, तो यह एक निष्क्रिय वातावरण बनाकर भोजन का ऑक्सीजन से संपर्क पूरी तरह काट देती है, जिससे चिप्स कई महीनों तक कुरकुरे और ताजे बने रहते हैं।

प्रश्न 16: जल के विद्युत अपघटन में एक परखनली में एकत्रित गैस की मात्रा दूसरी परखनली से दोगुनी क्यों होती है?

जल का रासायनिक सूत्र H2O होता है, जिसमें हाइड्रोजन और ऑक्सीजन के परमाणुओं का अनुपात सदैव 2 : 1 होता है। जब जल में विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है, तो इसके अपघटन से 2 अणु हाइड्रोजन गैस (H2) के तथा केवल 1 अणु ऑक्सीजन गैस (O2) का बनता है:

2H2O(l) →विद्युत 2H2(g)↑ [कैथोड पर] + O2(g)↑ [एनोड पर]
अतः आवोगाद्रो के नियमानुसार, कैथोड पर एकत्र हाइड्रोजन गैस का आयतन एनोड पर एकत्र ऑक्सीजन गैस के आयतन से ठीक दोगुना (2:1) होता है।

प्रश्न 17: प्रकाशीय वियोजन (Photolytic Decomposition) क्या है? इसका एक महत्वपूर्ण उपयोग बताइए।

वह वियोजन (अपघटन) अभिक्रिया जो सूर्य के प्रकाश की ऊर्जा द्वारा संपन्न होती है, प्रकाशीय वियोजन कहलाती है।
उदाहरण: सूर्य के प्रकाश में सिल्वर ब्रोमाइड टूटकर धूसर चांदी और ब्रोमीन गैस बनाता है:

2AgBr(s) →सूर्य का प्रकाश 2Ag(s) + Br2(g)↑
उपयोग: इस अभिक्रिया का व्यापक उपयोग पारंपरिक श्याम-श्वेत (Black and White) फोटोग्राफी में फोटोग्राफिक प्लेटों पर चित्र उभारने हेतु किया जाता है।

प्रश्न 18: किसी पदार्थ 'X' के विलयन का उपयोग सफेदी करने के लिए होता है। (i) पदार्थ 'X' का नाम व सूत्र लिखिए, (ii) पदार्थ 'X' की जल के साथ अभिक्रिया का समीकरण दीजिए।

(i) पदार्थ 'X' का रासायनिक नाम कैल्शियम ऑक्साइड तथा इसका रासायनिक सूत्र CaO (बिना बुझा चूना) है।
(ii) पदार्थ 'X' (CaO) की जल के साथ अभिक्रिया:

CaO(s) [पदार्थ X] + H2O(l) → Ca(OH)2(aq) [बुझा हुआ चूना] + अत्यधिक ऊष्मा

प्रश्न 19: गर्म तांबे (कॉपर) के ऊपर से जब हाइड्रोजन गैस गुजारी जाती है, तो उसकी काली सतह भूरी क्यों हो जाती है?

गर्म करने पर तांबे की सतह पर कॉपर(II) ऑक्साइड की एक काली परत (CuO) जम गई थी। जब इस काले कॉपर ऑक्साइड पर हाइड्रोजन गैस (H2) प्रवाहित की जाती है, तो एक रेडॉक्स अभिक्रिया होती है जिसमें हाइड्रोजन ऑक्सीजन को खींचकर जल बना लेती है और कॉपर ऑक्साइड पुनः शुद्ध चमकीले लाल-भूरे तांबे (Cu) में अपचयित हो जाता है:

CuO(s) [काला] + H2(g) →ऊष्मा Cu(s) [भूरा] + H2O(g)

प्रश्न 20: उपचायक (ऑक्सीकारक) और अपचायक में अंतर स्पष्ट कीजिए।

उपचायक (ऑक्सीकारक / Oxidising Agent): वह पदार्थ जो किसी अन्य पदार्थ को ऑक्सीजन प्रदान करता है अथवा उससे हाइड्रोजन हटाता है (अर्थात अभिक्रिया में उसका स्वयं का अपचयन होता है)।
अपचायक (Reducing Agent): वह पदार्थ जो किसी अन्य पदार्थ से ऑक्सीजन खींचता है अथवा उसे हाइड्रोजन प्रदान करता है (अर्थात अभिक्रिया में उसका स्वयं का उपचयन होता है)।

प्रश्न 21: सिल्वर के शोधन में सिल्वर नाइट्रेट के विलयन से सिल्वर प्राप्त करने के लिए कॉपर धातु द्वारा विस्थापन किया जाता है। इस प्रक्रिया के लिए रासायनिक समीकरण लिखिए।

सक्रियता श्रेणी में कॉपर धातु चांदी (सिल्वर) से अधिक क्रियाशील है, अतः कॉपर सिल्वर नाइट्रेट विलयन से चांदी को विस्थापित कर देता है:

2AgNO3(aq) [रंगहीन] + Cu(s) → Cu(NO3)2(aq) [नीला] + 2Ag(s)↓ [चमकदार चांदी]

प्रश्न 22: लोहे की वस्तुओं को हम पेंट क्यों करते हैं?

लोहा वायुमंडल में उपस्थित ऑक्सीजन और नमी (जलवाष्प) से सीधे संपर्क में आने पर संक्षारित होकर जंग (Fe2O3·xH2O) बना लेता है, जिससे वह कमजोर और नष्ट हो जाता है। जब लोहे पर पेंट की परत चढ़ा दी जाती है, तो पेंट लोहे और वायुमंडलीय नमी के बीच एक अभेद सुरक्षात्मक भौतिक अवरोध का कार्य करता है। संपर्क टूट जाने से लोहे पर जंग नहीं लगता और उसकी आयु बढ़ जाती है।

प्रश्न 23: दानेदार जस्ते (जिंक) पर तनु सल्फ्यूरिक अम्ल की क्रिया कराने पर क्या होता है? नामांकित समीकरण दीजिए।

जब दानेदार जिंक पर तनु सल्फ्यूरिक अम्ल डाला जाता है, तो तीव्र बुदबुदाहट के साथ रंगहीन, गंधहीन हाइड्रोजन गैस (H2) निकलती है तथा जिंक सल्फेट लवण बनता है। फ्लास्क को छूने पर वह गर्म महसूस होता है क्योंकि यह एक ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया है:

Zn(s) + H2SO4(aq) → ZnSO4(aq) + H2(g)↑ + ऊष्मा

प्रश्न 24: निम्नलिखित रासायनिक समीकरण को संतुलित कीजिए:
Fe + H2O → Fe3O4 + H2

1. दाईं ओर ऑक्सीजन के 4 परमाणु हैं, अतः बाईं ओर H2O को 4 से गुणा करते हैं:
Fe + 4H2O → Fe3O4 + H2
2. अब बाईं ओर 8 हाइड्रोजन हो गए, अतः दाईं ओर H2 को 4 से गुणा करते हैं:
Fe + 4H2O → Fe3O4 + 4H2
3. दाईं ओर लोहे के 3 परमाणु हैं, अतः बाईं ओर Fe को 3 से गुणा करते हैं।
संतुलित समीकरण:

3Fe(s) + 4H2O(g) → Fe3O4(s) + 4H2(g)↑

प्रश्न 25: किसी रासायनिक समीकरण को अधिक सूचनाप्रद (Informative) कैसे बनाया जा सकता है?

रासायनिक समीकरण को अधिक उपयोगी बनाने के तीन प्रमुख तरीके हैं:
1. अभिकारकों और उत्पादों की भौतिक अवस्थाओं के संकेत लिखकर—जैसे (s), (l), (g), (aq)।
2. अभिक्रिया में होने वाले ऊष्मा परिवर्तनों को दर्शाकर—जैसे उत्पाद की ओर + ऊष्मा (ऊष्माक्षेपी) या - ऊष्मा (ऊष्माशोषी)।
3. अभिक्रिया की आवश्यक परिस्थितियों—जैसे तापमान, दाब तथा उत्प्रेरक (Catalyst) को तीर () के ऊपर या नीचे लिखकर।

खण्ड 3: 15 दीर्घ उत्तरीय प्रश्नोत्तर (Long Answer Questions)
प्रश्न 1: रासायनिक अभिक्रियाओं के पाँचों मुख्य प्रकारों—संयोजन, वियोजन, विस्थापन, द्विविस्थापन तथा उपचयन-अपचयन (रेडॉक्स) की परिभाषा दीजिए तथा प्रत्येक का एक-एक संतुलित रासायनिक समीकरण सहित विस्तृत विवेचना कीजिए।

रासायनिक अभिक्रियाएं परमाणुओं के बीच बंधों के टूटने और नए बंधों के बनने पर आधारित होती हैं। इनके पाँच मुख्य प्रकार निम्नलिखित हैं:

  • 1. संयोजन अभिक्रिया (Combination Reaction): जब दो या अधिक तत्व अथवा यौगिक मिलकर एकल उत्पाद बनाते हैं:
    2Mg(s) + O2(g) → 2MgO(s)   (मैग्नीशियम का दहन)
  • 2. वियोजन अभिक्रिया (Decomposition Reaction): जब एक एकल अभिकारक ऊष्मा, प्रकाश या विद्युत द्वारा टूटकर दो या अधिक सरल उत्पाद बनाता है:
    CaCO3(s) →ऊष्मा (Δ) CaO(s) + CO2(g)↑   (चूना पत्थर का तापीय अपघटन)
  • 3. विस्थापन अभिक्रिया (Displacement Reaction): जब अधिक क्रियाशील तत्व किसी कम क्रियाशील तत्व को उसके लवण के विलयन से विस्थापित कर देता है:
    Zn(s) + CuSO4(aq) → ZnSO4(aq) + Cu(s)
  • 4. द्विविस्थापन अभिक्रिया (Double Displacement Reaction): जब दो भिन्न आयनिक यौगिक अपने आयनों का पारस्परिक विनिमय करके अवक्षेप या नए यौगिक बनाते हैं:
    Na2SO4(aq) + BaCl2(aq) → BaSO4(s)↓ [श्वेत अवक्षेप] + 2NaCl(aq)
  • 5. उपचयन-अपचयन (रेडॉक्स) अभिक्रिया: जिसमें एक अभिकारक का उपचयन (ऑक्सीजन का जुड़ना) तथा दूसरे का अपचयन (ऑक्सीजन का हटना) एक साथ होता है:
    MnO2 + 4HCl → MnCl2 + 2H2O + Cl2
    (यहाँ HCl का Cl2 में उपचयन तथा MnO2 का MnCl2 में अपचयन हो रहा है)।
प्रश्न 2: रासायनिक समीकरण को संतुलित करने की 'हिट एंड ट्रायल' विधि के सभी चरणों का विस्तृत वर्णन कीजिए। निम्नलिखित असंतुलित समीकरण को चरणबद्ध संतुलित करके समझाइए: Fe + H2O → Fe3O4 + H2

संतुलन का सिद्धांत: द्रव्यमान संरक्षण नियम के अनुसार दोनों ओर प्रत्येक तत्व के परमाणुओं की संख्या समान होनी चाहिए।

चरणबद्ध संतुलन प्रक्रिया:

  • चरण 1: सूत्रों के चारों ओर बॉक्स बनाना: समीकरण के किसी भी सूत्र के भीतर कोई बदलाव नहीं किया जा सकता:
    [Fe] + [H2O] → [Fe3O4] + [H2]
  • चरण 2: दोनों पक्षों में परमाणुओं की संख्या की सूची बनाना:
    तत्व अभिकारकों में परमाणुओं की संख्या (LHS) उत्पादों में परमाणुओं की संख्या (RHS)
    Fe13
    H22
    O14
  • चरण 3: सर्वाधिक परमाणु वाले तत्व (ऑक्सीजन) को संतुलित करना: RHS में 4 ऑक्सीजन हैं, अतः LHS में H2O के आगे गुणांक 4 लगाते हैं:
    [Fe] + 4[H2O] → [Fe3O4] + [H2]
  • चरण 4: हाइड्रोजन परमाणुओं को संतुलित करना: अब LHS में 4 × 2 = 8 हाइड्रोजन परमाणु हैं। RHS में 8 हाइड्रोजन करने के लिए H2 के आगे 4 लगाते हैं:
    [Fe] + 4[H2O] → [Fe3O4] + 4[H2]
  • चरण 5: लोहे (Fe) के परमाणुओं को संतुलित करना: RHS में 3 Fe हैं, अतः LHS में Fe के आगे 3 लगाते हैं:
    3[Fe] + 4[H2O] → [Fe3O4] + 4[H2]
  • चरण 6: अंतिम जांच तथा भौतिक अवस्थाएं लिखना:
    LHS: Fe=3, H=8, O=4 | RHS: Fe=3, H=8, O=4 (समीकरण पूर्णतः संतुलित है)।
    3Fe(s) + 4H2O(g) → Fe3O4(s) + 4H2(g)↑
प्रश्न 3: वियोजन (अपघटन) अभिक्रियाओं के तीनों रूपों—ऊष्मीय वियोजन, विद्युत-अपघटनी वियोजन तथा प्रकाशीय वियोजन की विस्तार से व्याख्या कीजिए। प्रत्येक का नामांकित संतुलित रासायनिक समीकरण दीजिए।

वियोजन अभिक्रियाओं में अभिकारकों के बंधों को विखंडित करने हेतु ऊर्जा की आवश्यकता होती है। ऊर्जा के स्रोत के आधार पर यह तीन प्रकार की होती हैं:

  • 1. ऊष्मीय वियोजन (Thermal Decomposition): जब अपघटन की अभिक्रिया ऊष्मा (गर्मी) देकर कराई जाती है:
    कैल्शियम कार्बोनेट का अपघटन: चूना पत्थर को भट्ठी में गर्म करने पर बुझा चूना और CO2 गैस बनती है:
    CaCO3(s) →ऊष्मा (Δ) CaO(s) + CO2(g)↑
    लेड नाइट्रेट का अपघटन: सफेद लेड नाइट्रेट गर्म करने पर पीला लेड ऑक्साइड और भूरी NO2 गैस देता है:
    2Pb(NO3)2(s) →Δ 2PbO(s) + 4NO2(g)↑ + O2(g)↑
  • 2. विद्युत-अपघटन (Electrolytic Decomposition): जब किसी यौगिक की गलित अवस्था अथवा जलीय विलयन में विद्युत धारा प्रवाहित करके उसका वियोजन किया जाता है:
    अम्लीकृत जल का विद्युत अपघटन:
    2H2O(l) →विद्युत धारा 2H2(g)↑ [कैथोड पर] + O2(g)↑ [एनोड पर]
    गलित सोडियम क्लोराइड का अपघटन:
    2NaCl(l) →विद्युत धारा 2Na(s) + Cl2(g)↑
  • 3. प्रकाशीय वियोजन (Photolytic Decomposition): जब अपघटन की क्रिया सूर्य के प्रकाश (फोटॉनों) की ऊर्जा द्वारा संपन्न होती है:
    सिल्वर क्लोराइड का धूप में अपघटन:
    2AgCl(s) [श्वेत] →सूर्य का प्रकाश 2Ag(s) [धूसर] + Cl2(g)↑
    सिल्वर ब्रोमाइड का अपघटन:
    2AgBr(s) [हल्का पीला] →सूर्य का प्रकाश 2Ag(s) + Br2(g)↑
प्रश्न 4: जल के विद्युत अपघटन (Electrolysis of Water) के प्रयोग का स्वच्छ नामांकित चित्र सहित विस्तृत वर्णन कीजिए। सिद्ध कीजिए कि जल में हाइड्रोजन और ऑक्सीजन का आयतन अनुपात 2:1 होता है। दोनों गैसों का परीक्षण कैसे करेंगे?

प्रायोगिक व्यवस्था: एक प्लास्टिक का मग लेकर उसकी तली में दो छिद्र करते हैं और उनमें रबड़ की डाट लगाकर दो कार्बन (ग्रेफाइट) की छड़ें लगा देते हैं। इन इलेक्ट्रोडों को एक 6 वोल्ट की बैटरी, स्विच और तारों से जोड़ते हैं। मग में इतना जल भरते हैं कि इलेक्ट्रोड डूब जाएं और जल की चालकता बढ़ाने के लिए उसमें तनु सल्फ्यूरिक अम्ल (H2SO4) की कुछ बूंदें मिला देते हैं। जल से भरी दो अंशांकित परखनलियों को दोनों इलेक्ट्रोडों के ऊपर उलटकर रख देते हैं।

कार्यप्रणाली एवं रासायनिक अभिक्रियाएं: जब परिपथ में विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है, तो दोनों इलेक्ट्रोडों पर गैसों के बुलबुले बनते दिखाई देते हैं जो परखनलियों से जल को नीचे विस्थापित कर देते हैं:

  • कैथोड पर (ऋणात्मक इलेक्ट्रोड - अपचयन): हाइड्रोजन आयन इलेक्ट्रॉन ग्रहण कर हाइड्रोजन गैस बनाते हैं:
    2H+ + 2e- → H2(g)↑
  • एनोड पर (धनात्मक इलेक्ट्रोड - ऑक्सीकरण): जल अणु ऑक्सीजन गैस मुक्त करते हैं:
    2H2O → O2(g)↑ + 4H+ + 4e-
  • कुल रासायनिक अभिक्रिया:
    2H2O(l) →विद्युत अपघटन 2H2(g) + O2(g)

आयतन अनुपात 2:1 का वैज्ञानिक कारण: संतुलित समीकरण से स्पष्ट है कि जल के दो अणुओं के वियोजन से 2 अणु हाइड्रोजन गैस के तथा केवल 1 अणु ऑक्सीजन गैस का बनता है। आवोगाद्रो के नियमानुसार, समान ताप और दाब पर गैसों के अणुओं की संख्या उनके आयतन के समानुपाती होती है। अतः कैथोड पर एकत्र हाइड्रोजन गैस का आयतन एनोड पर एकत्र ऑक्सीजन गैस से ठीक दोगुना (2 : 1) होता है।

गैसों का परीक्षण:
कैथोड वाली गैस (H2): जलती हुई तीली ले जाने पर वह नीली लौ और विशिष्ट 'पॉप' ध्वनि के साथ फटती हुई जलती है।
एनोड वाली गैस (O2): जलती हुई अगरबत्ती या तीली ले जाने पर वह और अधिक तेजी से प्रज्वलित हो उठती है (दहन में सहायक)।

प्रश्न 5: रेडॉक्स (उपचयन-अपचयन) अभिक्रियाओं की आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक संकल्पना क्या है? निम्नलिखित रासायनिक अभिक्रियाओं में उपचयित, अपचयित, उपचायक तथा अपचायक पदार्थों की सारणीबद्ध पहचान कीजिए:
(i) 4Na + O2 → 2Na2O
(ii) CuO + H2 → Cu + H2O
(iii) MnO2 + 4HCl → MnCl2 + 2H2O + Cl2

आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक संकल्पना:
उपचयन (Oxidation): किसी परमाणु, अणु या आयन द्वारा इलेक्ट्रॉनों का त्याग करना उपचयन कहलाता है (धनावेश में वृद्धि)।
अपचयन (Reduction): किसी परमाणु, अणु या आयन द्वारा इलेक्ट्रॉनों को ग्रहण करना अपचयन कहलाता है (धनावेश में कमी या ऋणावेश में वृद्धि)।

अभिक्रियाओं का विस्तृत सारणीबद्ध विश्लेषण:

अभिक्रिया उपचयित पदार्थ (Oxidised) अपचयित पदार्थ (Reduced) उपचायक (ऑक्सीकारक / Oxidising Agent) अपचायक (Reducing Agent)
(i) 4Na + O2 → 2Na2O Na (सोडियम ने ऑक्सीजन जोड़ी / इलेक्ट्रॉन त्यागे) O2 (ऑक्सीजन ने इलेक्ट्रॉन ग्रहण किए) O2 Na
(ii) CuO + H2 → Cu + H2O H2 (हाइड्रोजन में ऑक्सीजन जुड़ी) CuO (कॉपर ऑक्साइड से ऑक्सीजन हटी) CuO H2
(iii) MnO2 + 4HCl → MnCl2 + 2H2O + Cl2 HCl (हाइड्रोजन हटकर Cl2 बना) MnO2 (ऑक्सीजन हटकर MnCl2 बना) MnO2 HCl
प्रश्न 6: लोहे पर जंग लगने की रासायनिक क्रियाविधि (Rusting of Iron) समझाइए। संक्षारण से होने वाली राष्ट्रीय आर्थिक हानियों तथा संक्षारण से बचाव के पाँच वैज्ञानिक उपायों का विस्तृत वर्णन कीजिए।

जंग लगने की रासायनिक क्रियाविधि:
लोहे पर जंग लगना एक जटिल विद्युत-रासायनिक एवं मंद उपचयन प्रक्रम है। आर्द्र वायुमंडल में लोहे की सतह पर उपस्थित जल की बूंद में घुली CO2 और O2 एक सूक्ष्म विद्युत-रासायनिक सेल बना लेती हैं:

  • एनोड पर लोहा ऑक्सीकृत होकर फेरस आयनों में बदलता है:
    2Fe(s) → 2Fe2+ + 4e-
  • कैथोड पर जल और ऑक्सीजन इलेक्ट्रॉन ग्रहण करते हैं:
    O2 + 4H+ + 4e- → 2H2O
  • फेरस आयन पुनः वायुमंडलीय ऑक्सीजन और नमी से क्रिया करके जलयोजित फेरिक ऑक्साइड (जंग) की पपड़ीदार परत बनाते हैं:
    4Fe2+ + O2 + 4H2O + 2xH2O → 2Fe2O3·xH2O [जंग] + 8H+

आर्थिक हानियां: संक्षारण के कारण प्रतिवर्ष देश में करोड़ों टन लोहा नष्ट हो जाता है। रेल पटरियां, पुल, समुद्री जहाज, गाड़ियां और इमारती ढांचे कमजोर होकर गिर जाते हैं, जिनकी मरम्मत और प्रतिस्थापन में अरबों रुपये का राष्ट्रीय नुकसान होता है।

बचाव के पाँच प्रमुख वैज्ञानिक उपाय:

  • 1. रोगन एवं पेंटिंग: धातु की सतह पर प्राइमर, इनेमल पेंट अथवा ग्रीस की अभेद्य परत लगाना।
  • 2. यशदलेपन (Galvanisation): पिघले हुए जस्ते (जिंक) में लोहे को डुबोकर उस पर जिंक की सूक्ष्म परत चढ़ाना (जिंक स्वयं बलिदान होकर लोहे की रक्षा करता है)।
  • 3. विद्युत-लेपन (Electroplating): क्रोमियम अथवा टिन जैसी संक्षारण-रोधी धातुओं की विद्युत द्वारा पतली परत चढ़ाना।
  • 4. ऐनोडीकरण (Anodising): विशेष रूप से ऐल्युमिनियम पर सल्फ्यूरिक अम्ल के विद्युत-अपघटन द्वारा मोटी ऑक्साइड झिल्ली विकसित करना।
  • 5. मिश्रधातु बनाना (Alloying): लोहे में क्रोमियम और निकेल मिलाकर 'स्टेनलेस स्टील' बनाना, जिसमें कभी जंग नहीं लगता।
प्रश्न 7: विकृतगंधिता (Rancidity) क्या है? यह किस प्रकार की रासायनिक अभिक्रिया का परिणाम है? खाद्य प्रसंस्करण एवं दैनिक जीवन में खाद्य पदार्थों को विकृतगंधिता से सुरक्षित रखने के पाँच वैज्ञानिक उपायों का सविस्तार वर्णन कीजिए।

विकृतगंधिता: जब तेल और वसा युक्त खाद्य पदार्थ लंबे समय तक वायुमंडलीय ऑक्सीजन के संपर्क में रहते हैं, तो वसा और तेलों का धीमा स्वतः-उपचयन (Auto-oxidation) हो जाता है। इसके फलस्वरूप दुर्गंधयुक्त वाष्पशील एल्डिहाइड, कीटोन और कार्बनिक अम्ल बन जाते हैं, जिससे भोजन का स्वाद खट्टा या कड़वा हो जाता है तथा उसमें से अत्यंत अप्रिय सड़ी हुई गंध आने लगती है। इस स्थिति को विकृतगंधिता कहते हैं।

खाद्य पदार्थों को सुरक्षित रखने के पाँच वैज्ञानिक उपाय:

  • 1. प्रति-ऑक्सीकारकों (Antioxidants) का उपयोग: वसायुक्त खाद्य पदार्थों में औद्योगिक स्तर पर बीएचए (BHA - ब्यूटाइलेटेड हाइड्रॉक्सीएनिसोल) तथा बीएचटी (BHT) जैसे रासायनिक प्रति-ऑक्सीकारक मिलाए जाते हैं। ये रसायन स्वयं पहले उपचयित हो जाते हैं और भोजन के तेल व वसा को ऑक्सीकृत होने से बचा लेते हैं। प्राकृतिक प्रति-ऑक्सीकारक के रूप में विटामिन-सी और विटामिन-ई का प्रयोग होता है।
  • 2. नाइट्रोजन गैस द्वारा पैकेजिंग (Nitrogen Flushing): आलू के चिप्स, भुजिया और नमकीन के पैकेटों में से संपूर्ण वायु निकालकर निष्क्रिय नाइट्रोजन गैस (N2) भरी जाती है। ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में उपचयन की कोई संभावना नहीं रहती।
  • 3. वायुरोधी पात्रों में भंडारण (Airtight Storage): भोजन को सीलबंद वायुरोधी डिब्बों में रखने से ताजी हवा का प्रवाह रुक जाता है, जिससे उपचयन की दर अत्यंत मंद हो जाती है।
  • 4. प्रशीतन (Refrigeration - फ्रिज में रखना): रेफ्रिजरेटर का तापमान बहुत कम (लगभग 4°C) होता है। ताप कम होने से रासायनिक अभिक्रियाओं की गति और एंजाइमी क्रियाएं अत्यंत धीमी हो जाती हैं, जिससे भोजन कई दिनों तक खराब नहीं होता।
  • 5. प्रकाश से दूर अंधकारमय स्थानों पर रखना: सूर्य का प्रकाश उपचयन अभिक्रियाओं हेतु उत्प्रेरक का कार्य करता है। तेलों और अचारों को रंगीन बोतलों में अंधेरे कमरों में रखने से प्रकाश-रासायनिक उपचयन रुक जाता है।
प्रश्न 8: संयोजन, वियोजन और विस्थापन अभिक्रियाओं के मध्य अंतर स्पष्ट करने के लिए एक-एक सुव्यवस्थित प्रायोगिक क्रियाकलाप का रेखाचित्र सहित विस्तृत वर्णन कीजिए।

तीन भिन्न प्रायोगिक क्रियाकलापों द्वारा इन अभिक्रियाओं को स्पष्ट रूप से समझा जा सकता है:

  • क्रियाकलाप 1 (संयोजन अभिक्रिया - चूने और जल की क्रिया):
    एक बीकर में लगभग 5 ग्राम बिना बुझा चूना (CaO) लेते हैं और उसमें धीरे-धीरे 50 mL जल मिलाते हैं।
    प्रेक्षण: बीकर में सनसनाहट की तीव्र ध्वनि होती है, जल खौलने लगता है और बीकर अत्यधिक गर्म हो जाता है।
    निष्कर्ष: दो अभिकारक मिलकर एकल उत्पाद बनाते हैं और ऊष्मा मुक्त होती है:
    CaO(s) + H2O(l) → Ca(OH)2(aq) + ऊष्मा
  • क्रियाकलाप 2 (वियोजन अभिक्रिया - फेरस सल्फेट का तापन):
    एक शुष्क क्वथन नली में 2 ग्राम हरे फेरस सल्फेट के क्रिस्टल लेते हैं और चिमटे से पकड़कर बर्नर की लौ पर गर्म करते हैं।
    प्रेक्षण: क्रिस्टलों का हरा रंग उड़कर लाल-भूरा हो जाता है और सल्फर के जलने जैसी तीखी दमघोंटू गंध वाली गैसें निकलती हैं।
    निष्कर्ष: एकल अभिकारक ऊष्मा पाकर तीन उत्पादों में टूट जाता है:
    2FeSO4(s) →Δ Fe2O3(s) + SO2(g)↑ + SO3(g)↑
  • क्रियाकलाप 3 (विस्थापन अभिक्रिया - कॉपर सल्फेट व लोहे की कील):
    एक परखनली में 10 mL कॉपर सल्फेट का नीला विलयन लेकर उसमें रेगमाल से साफ की हुई लोहे की दो कीलें धागे से लटकाते हैं और 20 मिनट तक छोड़ देते हैं।
    प्रेक्षण: विलयन का गहरा नीला रंग बदलकर हल्का हरा हो जाता है तथा लोहे की कीलों पर लाल-भूरे तांबे की मोटी परत चढ़ जाती है।
    निष्कर्ष: अधिक क्रियाशील लोहे ने कम क्रियाशील तांबे को विस्थापित कर दिया:
    Fe(s) + CuSO4(aq) → FeSO4(aq) + Cu(s)
प्रश्न 9: निम्नलिखित रासायनिक समीकरणों को चरणबद्ध संतुलित कीजिए तथा प्रत्येक अभिक्रिया का विशिष्ट प्रकार (संयोजन, वियोजन, विस्थापन आदि) पहचानिए:
(i) HNO3 + Ca(OH)2 → Ca(NO3)2 + H2O
(ii) NaOH + H2SO4 → Na2SO4 + H2O
(iii) NaCl + AgNO3 → AgCl + NaNO3
(iv) BaCl2 + H2SO4 → BaSO4 + HCl
(v) Al + CuCl2 → AlCl3 + Cu

संतुलित समीकरण एवं अभिक्रिया के प्रकार:

  • (i) 2HNO3 + Ca(OH)2 → Ca(NO3)2 + 2H2O
    संतुलन: दोनों ओर नाइट्रेट मूलक (NO3) को 2 करने हेतु HNO3 के आगे 2 लगाया, जिससे हाइड्रोजन 4 हो गए, अतः जल के आगे 2 लगाया।
    अभिक्रिया का प्रकार: उदासीनीकरण अभिक्रिया (द्विविस्थापन अभिक्रिया)
  • (ii) 2NaOH + H2SO4 → Na2SO4 + 2H2O
    संतुलन: सोडियम को 2 करने हेतु NaOH के आगे 2 लगाया, फिर हाइड्रोजन और ऑक्सीजन संतुलित करने हेतु H2O के आगे 2 लगाया।
    अभिक्रिया का प्रकार: उदासीनीकरण (द्विविस्थापन अभिक्रिया)
  • (iii) NaCl + AgNO3 → AgCl↓ + NaNO3
    संतुलन: यह समीकरण पहले से ही पूर्णतः संतुलित है (प्रत्येक तत्व के परमाणु दोनों ओर समान हैं)।
    अभिक्रिया का प्रकार: अवक्षेपण अभिक्रिया (द्विविस्थापन अभिक्रिया)
  • (iv) BaCl2 + H2SO4 → BaSO4↓ + 2HCl
    संतुलन: क्लोरीन और हाइड्रोजन को 2 करने हेतु HCl के आगे 2 लगाया।
    अभिक्रिया का प्रकार: अवक्षेपण अभिक्रिया (द्विविस्थापन अभिक्रिया)
  • (v) 2Al + 3CuCl2 → 2AlCl3 + 3Cu
    संतुलन: क्लोरीन के ल.स.प. (LCM = 6) को बराबर करने हेतु CuCl2 को 3 से तथा AlCl3 को 2 से गुणा किया; फिर Al को 2 तथा Cu को 3 किया।
    अभिक्रिया का प्रकार: विस्थापन अभिक्रिया (Displacement Reaction)
प्रश्न 10: एक चमकदार भूरे रंग का तत्व 'X' वायु की उपस्थिति में गर्म करने पर काले रंग का हो जाता है। इस काले यौगिक पर पुनः हाइड्रोजन गैस प्रवाहित करने पर तत्व 'X' वापस प्राप्त हो जाता है:
(i) तत्व 'X' तथा काले रंग के यौगिक 'Y' की पहचान कीजिए।
(ii) दोनों रासायनिक परिवर्तनों के संतुलित रासायनिक समीकरण लिखिए।
(iii) दूसरी अभिक्रिया में उपचयित तथा अपचयित पदार्थों के नाम बताइए।

(i) तत्व 'X' तथा यौगिक 'Y' की पहचान:
• चमकदार भूरे रंग का तत्व 'X' = तांबा (कॉपर / Cu) है।
• गर्म करने पर बनने वाला काले रंग का यौगिक 'Y' = कॉपर(II) ऑक्साइड (CuO) है।

(ii) रासायनिक समीकरण:
प्रथम अभिक्रिया (तांबे का वायु में दहन/उपचयन):

2Cu(s) [चमकदार भूरा तत्व X] + O2(g) →ऊष्मा 2CuO(s) [काला यौगिक Y]
द्वितीय अभिक्रिया (काले यौगिक पर हाइड्रोजन गैस का प्रवाह):
CuO(s) [यौगिक Y] + H2(g) →ऊष्मा Cu(s) [तत्व X पुनः प्राप्त] + H2O(g)

(iii) दूसरी अभिक्रिया में पदार्थों की पहचान:
उपचयित पदार्थ (Oxidised substance): H2 (हाइड्रोजन ने ऑक्सीजन ग्रहण कर जल बनाया)।
अपचयित पदार्थ (Reduced substance): CuO (कॉपर ऑक्साइड ने ऑक्सीजन त्यागकर कॉपर बनाया)।
ऑक्सीकारक (उपचायक): CuO | अपचायक: H2

प्रश्न 11: ऊष्माक्षेपी (Exothermic) और ऊष्माशोषी (Endothermic) अभिक्रियाओं में मूलभूत अंतर क्या है? प्रत्येक के दो-दो व्यावहारिक एवं औद्योगिक उदाहरण संतुलित रासायनिक समीकरणों सहित विस्तार से समझाइए।

ऊष्मा ऊर्जा के आदान-प्रदान के आधार पर रासायनिक अभिक्रियाओं का तुलनात्मक विवरण:

विशेषता ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया (Exothermic) ऊष्माशोषी अभिक्रिया (Endothermic)
ऊष्मा का प्रवाह निकाय से पर्यावरण में ऊष्मा मुक्त (उत्सर्जित) होती है। पर्यावरण से निकाय में ऊष्मा अवशोषित होती है।
तापमान परिवर्तन अभिक्रिया मिश्रण और पात्र का तापमान बढ़ जाता है अभिक्रिया मिश्रण का तापमान घट जाता है (ठंडा लगता है)।
ऊर्जा स्तर अभिकारकों की ऊर्जा उत्पादों से अधिक होती है (ΔH ऋणात्मक)। उत्पादों की ऊर्जा अभिकारकों से अधिक होती है (ΔH धनात्मक)।

ऊष्माक्षेपी अभिक्रियाओं के दो प्रमुख उदाहरण:

  • 1. प्राकृतिक गैस (मीथेन) का दहन (घरेलू ईंधन):
    CH4(g) + 2O2(g) → CO2(g) + 2H2O(g) + 890 kJ ऊष्मा
  • 2. बिना बुझे चूने की जल से अभिक्रिया (सफेदी का घोल बनाना):
    CaO(s) + H2O(l) → Ca(OH)2(aq) + प्रचुर ऊष्मा

ऊष्माशोषी अभिक्रियाओं के दो प्रमुख उदाहरण:

  • 1. प्रकाश संश्लेषण (पौधों में भोजन निर्माण): सौर प्रकाश ऊर्जा का अवशोषण:
    6CO2 + 6H2O + सूर्य का प्रकाश → C6H12O6 + 6O2
  • 2. नाइट्रोजन और ऑक्सीजन का उच्च ताप पर संयोजन:
    N2(g) + O2(g) + ऊष्मा (लगभग 3000°C) → 2NO(g)
प्रश्न 12: फोटोग्राफी में प्रयुक्त होने वाली रासायनिक अभिक्रियाओं का वैज्ञानिक विवरण दीजिए। सिल्वर हैलाइडों के प्रकाशीय अपघटन की क्रियाविधि और इनके सुरक्षित भंडारण के नियमों की विवेचना कीजिए।

रासायनिक पृष्ठभूमि: सिल्वर हैलाइड—विशेष रूप से सिल्वर ब्रोमाइड (AgBr) तथा सिल्वर क्लोराइड (AgCl) प्रकाश के प्रति अत्यधिक संवेदनशील होते हैं। इन यौगिकों में सिल्वर आयन (Ag+) और हैलाइड आयन (Br-) दुर्बल आयनिक जालक में बंधे होते हैं।

फोटोग्राफी में क्रियाविधि:

  • जब कैमरे के शटर खुलने पर जिलेटिन लेपित फोटोग्राफिक फिल्म पर प्रकाश की किरणें (फोटॉन) पड़ती हैं, तो सिल्वर ब्रोमाइड के अणु प्रकाश ऊर्जा को अवशोषित करके तुरंत वियोजित हो जाते हैं:
    2AgBr(s) [हल्का पीला] →प्रकाश (hν) 2Ag(s) [धूसर-काला धात्विक चांदी] + Br2(g)↑
  • वस्तु के जिस भाग से जितना अधिक परावर्तित प्रकाश फिल्म पर पड़ता है, वहां उतने ही अधिक सिल्वर परमाणु (Ag) मुक्त होकर काले निक्षेप के रूप में एक अदृश्य लेटेंट छवि (Latent Image) बना लेते हैं।
  • बाद में डवलपर रसायन (जैसे हाइड्रोक्विनोन) द्वारा इस छवि को स्थायी निगेटिव (Negative) में बदल दिया जाता है तथा सोडियम थायोसल्फेट (हाइपो घोल) द्वारा अप्रयुक्त AgBr को धोकर निकाल दिया जाता है।

सुरक्षित भंडारण के नियम:
सिल्वर नाइट्रेट, सिल्वर क्लोराइड और सिल्वर ब्रोमाइड जैसे रसायनों को प्रयोगशाला में कभी भी पारदर्शी कांच की बोतलों में नहीं रखा जाता। इन्हें सदैव गहरे भूरे या काले रंग की अपारदर्शी कांच की बोतलों (Amber-colored bottles) में अच्छी तरह कॉर्क लगाकर अंधेरी अलमारियों में रखा जाता है, ताकि बाहर का सूर्य का प्रकाश या प्रयोगशाला की कृत्रिम रोशनी इन तक न पहुँच सके और इनका स्वतः प्रकाशीय अपघटन रुक सके।

प्रश्न 13: दैनिक जीवन में होने वाले विभिन्न रासायनिक एवं भौतिक परिवर्तनों की तुलना कीजिए। निम्नलिखित परिवर्तनों का वैज्ञानिक वर्गीकरण कारण सहित कीजिए: (i) दूध से दही बनना, (ii) बर्फ का पिघलना, (iii) लोहे की कील पर जंग लगना, (iv) जल में साधारण नमक का घुलना, (v) मोमबत्ती का जलना।

भौतिक बनाम रासायनिक परिवर्तन: भौतिक परिवर्तन में केवल पदार्थ की अवस्था, आकार या रंग जैसे भौतिक गुण बदलते हैं, कोई नया पदार्थ नहीं बनता और यह सामान्यतः उत्क्रमणीय होता है। इसके विपरीत, रासायनिक परिवर्तन में पुराने बंध टूटकर पूर्णतः नए रासायनिक गुणों वाले नए पदार्थ बनते हैं और यह अपरिवर्तनीय होता है।

दिए गए परिवर्तनों का विस्तृत वर्गीकरण:

  • (i) दूध से दही का बनना — [रासायनिक परिवर्तन]:
    कारण: लैक्टोबैसिलस जीवाणुओं द्वारा दूध की लैक्टोज शर्करा का किण्वन होकर लैक्टिक अम्ल बनता है। नए रासायनिक पदार्थ बनने और दही से पुनः दूध न बनाए जा सकने के कारण यह अपरिवर्तनीय रासायनिक परिवर्तन है।
  • (ii) बर्फ का पिघलना — [भौतिक परिवर्तन]:
    कारण: बर्फ (H2O ठोस) केवल ऊष्मा पाकर द्रव जल (H2O द्रव) में बदलती है। जल के रासायनिक संघटन में कोई बदलाव नहीं होता और ठंडा करने पर पुनः बर्फ बन जाती है (उत्क्रमणीय)।
  • (iii) लोहे की कील पर जंग लगना — [रासायनिक परिवर्तन]:
    कारण: लोहा वायु और नमी से क्रिया कर जलयोजित फेरिक ऑक्साइड (Fe2O3·xH2O) बनाता है, जो लोहे से बिल्कुल भिन्न नया रासायनिक पदार्थ है।
  • (iv) जल में साधारण नमक का घुलना — [भौतिक परिवर्तन]:
    कारण: नमक केवल जल में आयनों के रूप में विसरित होता है, कोई नया रासायनिक यौगिक नहीं बनता। जल का वाष्पीकरण करके ठोस नमक को ज्यों-का-त्यों पुनः प्राप्त किया जा सकता है।
  • (v) मोमबत्ती का जलना — [भौतिक एवं रासायनिक दोनों परिवर्तनों का अनूठा संयोग]:
    कारण: मोम का पिघलना एक भौतिक परिवर्तन है (ठंडा होकर मोम पुनः जम जाता है); परंतु बत्ती के साथ मोम की वाष्प का जलकर CO2, जलवाष्प, ऊष्मा और प्रकाश उत्पन्न करना एक रासायनिक परिवर्तन है।
प्रश्न 14: किसी रासायनिक अभिक्रिया की गति (दर) को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारकों का विस्तृत वैज्ञानिक विवरण दीजिए। तापमान, सांद्रता, पृष्ठीय क्षेत्रफल तथा उत्प्रेरक की भूमिका स्पष्ट कीजिए।

रासायनिक अभिक्रिया की दर (अभिकारकों के उत्पादों में बदलने की समय दर) मुख्य रूप से अभिकारक कणों के बीच होने वाली प्रभावी टक्करों (Effective Collisions) की संख्या पर निर्भर करती है। इसे प्रभावित करने वाले मुख्य कारक निम्नलिखित हैं:

  • 1. अभिकारकों का तापमान: तापमान बढ़ाने पर अभिकारक अणुओं की गतिज ऊर्जा बढ़ जाती है। कण अत्यधिक तीव्र गति से दौड़ते हैं और उनकी परस्पर प्रभावी टक्करों की आवृत्ति बढ़ जाती है, जिससे अभिक्रिया की गति तीव्र हो जाती है (सामान्यतः 10°C ताप बढ़ाने पर अभिक्रिया की गति लगभग दोगुनी हो जाती है)।
  • 2. अभिकारकों की सांद्रता: सांद्रता अधिक होने पर प्रति इकाई आयतन में अभिकारक अणुओं की संख्या अधिक होती है। कणों की सघनता बढ़ने से उनके बीच टक्करों की संभावना बढ़ जाती है, जिससे रासायनिक अभिक्रिया तेज गति से संपन्न होती है। (जैसे तनु अम्ल की तुलना में सांद्र अम्ल धातु से अत्यंत तीव्र क्रिया करता है)।
  • 3. अभिकारकों का पृष्ठीय क्षेत्रफल (बारीक चूर्ण): ठोस अभिकारकों का आकार जितना छोटा या बारीक पिसा हुआ होगा, उसका कुल पृष्ठीय क्षेत्रफल उतना ही अधिक होगा। अधिक पृष्ठीय क्षेत्रफल उपलब्ध होने से अन्य अभिकारक अणुओं को क्रिया करने हेतु बड़ा क्षेत्र मिलता है। (जैसे लकड़ी के बड़े लट्ठे की तुलना में लकड़ी का बुरादा पल भर में जल उठता है)।
  • 4. उत्प्रेरक (Catalysts) की उपस्थिति: उत्प्रेरक वे विशिष्ट बाह्य रासायनिक पदार्थ हैं जो स्वयं बिना किसी रासायनिक परिवर्तन के अभिक्रिया की सक्रियण ऊर्जा (Activation Energy) को घटा देते हैं, जिससे सामान्यतः धीमी चलने वाली अभिक्रियाएं क्षण भर में तीव्र गति पकड़ लेती हैं। (जैसे वनस्पति तेलों के हाइड्रोजनीकरण में निकेल उत्प्रेरक का उपयोग)।
प्रश्न 15: आधुनिक पर्यावरण संरक्षण, हरित रसायन (Green Chemistry) एवं टिकाऊ विकास के संदर्भ में रासायनिक अभिक्रियाओं और समीकरणों के संतुलित ज्ञान की अनिवार्यता पर एक विस्तृत निबंध लिखिए।

21वीं सदी में रसायन विज्ञान केवल प्रयोगशालाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह वैश्विक जलवायु संकट, प्रदूषण नियंत्रण और सतत औद्योगिक विकास का केंद्रीय नियामक बन चुका है। रासायनिक अभिक्रियाओं और उनके सटीक मात्रात्मक समीकरणों का ज्ञान निम्नलिखित क्षेत्रों में अनिवार्य है:

  • 1. परमाणु मितव्ययिता (Atom Economy) एवं शून्य अपशिष्ट: हरित रसायन का मूल सिद्धांत यह है कि रासायनिक निर्माण में ऐसी अभिक्रियाओं को चुना जाए जिनमें अभिकारकों के शत-प्रतिशत परमाणु अंतिम उपयोगी उत्पाद में समाहित हो जाएं और कोई जहरीला सह-उत्पाद (अपशिष्ट) न बने। संतुलित समीकरणों के रससमीकरणमिति (Stoichiometry) के ज्ञान से कच्ची सामग्री की बर्बादी को न्यूनतम किया जाता है।
  • 2. ग्रीनहाउस गैसों और ग्लोबल वॉर्मिंग का नियमन: जीवाश्म ईंधनों (कोयला, पेट्रोल, डीजल) के पूर्ण एवं अपूर्ण दहन के रासायनिक समीकरण हमें यह सटीक गणना करने में सक्षम बनाते हैं कि वायुमंडल में कितनी कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) और विषैली कार्बन मोनोऑक्साइड (CO) मुक्त हो रही है। इसी ज्ञान के आधार पर वाहनों में 'कैटेलिटिक कन्वर्टर' लगाए जाते हैं जो विषैली गैसों को सुरक्षित गैसों में बदल देते हैं।
  • 3. ओजोन क्षरण एवं अम्लीय वर्षा का उपचार: वायुमंडल में सल्फर और नाइट्रोजन के ऑक्साइडों की जलवाष्प से होने वाली अभिक्रियाओं को समझकर ही उद्योगों में 'फ्लू-गैस डिसल्फराइजेशन' (स्क्रबर) संयंत्र लगाए जाते हैं ताकि अम्लीय वर्षा को रोका जा सके।
  • 4. हरित ऊर्जा संक्रमण (Green Hydrogen Economy): जल के सौर ऊर्जा द्वारा विद्युत-अपघटन (2H2O → 2H2 + O2) की अभिक्रिया भविष्य के शून्य-प्रदूषणकारी हाइड्रोजन ईंधन का आधार है, जो जीवाश्म ईंधनों का स्थायी और स्वच्छ विकल्प सिद्ध हो रही है।

निष्कर्ष: रासायनिक अभिक्रियाओं के सूक्ष्म तंत्र और उनके संतुलित प्रतीकों की वैज्ञानिक समझ ही मानव जाति को ऐसे नए पर्यावरण-अनुकूल मार्ग प्रदान कर सकती है, जहाँ आर्थिक प्रगति पर्यावरण के विनाश की कीमत पर न होकर उसके संरक्षण के साथ कदमताल कर सके।

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