बिहार बोर्ड कक्षा 10 : वर्णिका (भाग-2)
पाठ 4: नगर
लेखक: सुजाता
प्रश्न 1 लेखक ने कहानी का शीर्षक ‘नगर’ क्यों रखा ? शीर्षक की सार्थकता स्पष्ट करें।
उत्तर: लेखक ने इस कहानी का शीर्षक ‘नगर’ इसलिए रखा है क्योंकि पूरी कहानी एक बड़े और व्यस्त नगर (मदुरै) की संवेदनहीन कार्यप्रणाली, प्रशासनिक अव्यवस्था और जटिल औपचारिकताओं के इर्द-गिर्द घूमती है। एक असहाय, अनपढ़ ग्रामीण माँ (वल्लि अम्माल) अपनी गंभीर रूप से बीमार बेटी के इलाज के लिए नगर के बड़े अस्पताल आती है, लेकिन वहाँ की अमानवीय नौकरशाही, कर्मचारियों की उपेक्षा और जटिल प्रक्रियाओं के कारण उसे बिना इलाज कराए ही लौटना पड़ता है। यह शीर्षक नगर की संवेदनहीनता, आपाधापी और आत्मीयता के अभाव को सटीक रूप से उजागर करता है; अतः यह शीर्षक पूर्णतः सार्थक और उपयुक्त है।
प्रश्न 2 पाप्पाति कौन थी और वह शहर क्यों लायी गयी थी ?
उत्तर: पाप्पाति मदुरै के पास स्थित मूनाडिप्यट्टि गाँव की रहने वाली वल्लि अम्माल की लगभग बारह वर्ष की पुत्री थी। उसे बहुत तेज बुखार था। गाँव के प्राइमरी हेल्थ सेंटर के डॉक्टर ने परीक्षण के बाद उसकी गंभीर स्थिति को देखकर उसे तुरंत मदुरै के बड़े अस्पताल ले जाने की सलाह दी थी। इसलिए वल्लि अम्माल उसे इलाज और जीवन रक्षा के लिए शहर (मदुरै) लेकर आई थी।
प्रश्न 3 बड़े डॉक्टर ने अपने अधीनस्थ डॉक्टरों से पाप्पाति को अस्पताल में भर्ती कर लेने के लिए क्यों कहा ? विचार करें।
उत्तर: बड़े डॉक्टर विदेश से उच्च शिक्षा प्राप्त और अनुभवी चिकित्सक (प्रोफेसर) थे। उन्होंने जब पाप्पाति का सूक्ष्म परीक्षण किया, तो पाया कि वह ‘एक्यूट केस ऑफ मेनिनजाइटिस’ (मस्तिष्क ज्वर) नामक एक अत्यंत गंभीर और जानलेवा बीमारी से ग्रस्त थी। उन्होंने हाल ही में ब्रिटिश मेडिकल जर्नल में इस रोग की नई दवाओं के बारे में पढ़ा था। वे जानते थे कि यदि पाप्पाति को तुरंत भर्ती करके उचित चिकित्सा सुविधा नहीं दी गई, तो उसकी जान जा सकती है। इसलिए उन्होंने मानवीय दृष्टिकोण और चिकित्सीय गंभीरता को देखते हुए अधीनस्थ डॉक्टरों को उसे तत्काल एडमिट करने का आदेश दिया।
प्रश्न 4 बड़े डॉक्टर के आदेश के बावजूद पाप्पाति अस्पताल में भर्ती क्यों नहीं हो पाती ?
उत्तर: बड़े डॉक्टर के स्पष्ट आदेश के बावजूद पाप्पाति अस्पताल में इसलिए भर्ती नहीं हो सकी क्योंकि:
- अस्पताल के कर्मचारियों की संवेदनहीनता व लापरवाही: क्लर्क और अन्य अधीनस्थ कर्मचारियों ने डॉक्टर के आदेश को गंभीरता से नहीं लिया और वल्लि अम्माल को एक काउंटर से दूसरे काउंटर तक भटकाते रहे।
- अनपढ़ता और अज्ञानता: वल्लि अम्माल पूर्णतः अनपढ़ और ग्रामीण महिला थी। वह अस्पताल के कमरों के नंबर, चिट की प्रक्रियाओं और औपचारिकताओं को समझने में असमर्थ थी।
- बेड न होने का बहाना: अंत में क्लर्क ने यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि इस समय कोई बेड खाली नहीं है और उसे अगली सुबह 7:30 बजे आने को कहा। इन सभी कारणों से गंभीर रूप से पीड़ित पाप्पाति भर्ती नहीं हो सकी।
प्रश्न 5 वल्लि अम्माल का चरित्र चित्रण करें।
उत्तर: वल्लि अम्माल कहानी की केंद्रीय पात्र है, जिसके चरित्र की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
- ममतामयी और समर्पित माँ: वह अपनी पुत्री पाप्पाति से असीम प्रेम करती है। बेटी की बीमारी की खबर सुनते ही वह अकेली मदुरै जैसे अनजान और बड़े शहर में इलाज के लिए पहुँच जाती है।
- सरल और अनपढ़ ग्रामीण महिला: वह शहरी वातावरण, अस्पताल के नियमों और अंग्रेजी कागजी प्रक्रियाओं से बिल्कुल अनभिज्ञ और भयभीत रहने वाली एक सीधी-सादी महिला है।
- धार्मिक और आस्थावान: अस्पताल की अव्यवस्था और डॉक्टरों के जटिल व्यवहार से निराश होकर वह अपनी बेटी के ठीक होने के लिए वैदीश्वरन जी के मंदिर में रेज़गारी भेंट चढ़ाने की मनौती मानती है तथा झाड़-फूँक व वैद्यों पर भरोसा करने को विवश हो जाती है।
- अकेली व बेबस: पति की मृत्यु के बाद वह जीवन के संघर्षों को अकेले झेलती है, परंतु नगर की संवेदनहीनता के आगे वह असहाय सिद्ध होती है।
प्रश्न 6 कहानी का सारांश प्रस्तुत करें।
उत्तर: 'नगर' कहानी सुजाता द्वारा रचित एक यथार्थवादी कथा है। मूनाडिप्यट्टि गाँव की अनपढ़ विधवा वल्लि अम्माल अपनी 12 वर्षीय पुत्री पाप्पाति को गंभीर बुखार होने पर मदुरै के बड़े सरकारी अस्पताल लाती है। वहाँ के बड़े डॉक्टर पाप्पाति का परीक्षण कर उसे 'एक्यूट मेनिनजाइटिस' बताते हैं और तुरंत अस्पताल में भर्ती करने का निर्देश देते हैं।
किंतु, अस्पताल का प्रशासनिक ढाँचा और कर्मचारी पूरी तरह संवेदनहीन व लापरवाह होते हैं। अनपढ़ वल्लि अम्माल को चिट पर दस्तखत कराने और अलग-अलग कमरों के चक्कर लगाने के नाम पर घंटों भटकाया जाता है। अंततः उसे कहा जाता है कि आज कोई बेड खाली नहीं है, वह कल सुबह आए।
अस्पताल के दुर्गंधयुक्त, अजनबी और डरावने माहौल तथा बेटी की बिगड़ती हालत को देखकर वल्लि अम्माल घबरा जाती है। वह अपनी अचेत बेटी को सीने से लगाकर अस्पताल से बाहर निकल आती है और साइकिल रिक्शा से बस अड्डे की ओर चल पड़ती है। वह निर्णय लेती है कि वह अपनी बेटी को गाँव ले जाकर झाड़-फूँक व वैद्य से ही दिखाएगी और मंदिर में भगवान को भेंट चढ़ाएगी। उधर जब बड़े डॉक्टर को पता चलता है कि पाप्पाति भर्ती नहीं हुई, तो वे कर्मचारियों पर गुस्सा होते हैं, लेकिन तब तक वल्लि अम्माल अपनी बेटी को लेकर शहर से रवाना हो चुकी होती है। यह कहानी नगर की अमानवीय व्यवस्था और स्वास्थ्य तंत्र की विफलता को दर्शाती है।
किंतु, अस्पताल का प्रशासनिक ढाँचा और कर्मचारी पूरी तरह संवेदनहीन व लापरवाह होते हैं। अनपढ़ वल्लि अम्माल को चिट पर दस्तखत कराने और अलग-अलग कमरों के चक्कर लगाने के नाम पर घंटों भटकाया जाता है। अंततः उसे कहा जाता है कि आज कोई बेड खाली नहीं है, वह कल सुबह आए।
अस्पताल के दुर्गंधयुक्त, अजनबी और डरावने माहौल तथा बेटी की बिगड़ती हालत को देखकर वल्लि अम्माल घबरा जाती है। वह अपनी अचेत बेटी को सीने से लगाकर अस्पताल से बाहर निकल आती है और साइकिल रिक्शा से बस अड्डे की ओर चल पड़ती है। वह निर्णय लेती है कि वह अपनी बेटी को गाँव ले जाकर झाड़-फूँक व वैद्य से ही दिखाएगी और मंदिर में भगवान को भेंट चढ़ाएगी। उधर जब बड़े डॉक्टर को पता चलता है कि पाप्पाति भर्ती नहीं हुई, तो वे कर्मचारियों पर गुस्सा होते हैं, लेकिन तब तक वल्लि अम्माल अपनी बेटी को लेकर शहर से रवाना हो चुकी होती है। यह कहानी नगर की अमानवीय व्यवस्था और स्वास्थ्य तंत्र की विफलता को दर्शाती है।
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