Chapter 2. प्रेम अयनि श्री राधिका, करील के कुंजन ऊपर वारौं | BSEB 10 Hindi Book PDF download


BSEB Class 10 Hindi Chapter 2 "प्रेम अयनि श्री राधिका" PDF Download

बिहार बोर्ड (BSEB) कक्षा 10वीं के विद्यार्थियों के लिए हिंदी (गोधूलि भाग-2) काव्य खंड का अध्याय 2 "प्रेम अयनि श्री राधिका / करील के कुंजन ऊपर वारौं" कृष्णभक्ति शाखा के महान कवि रसखान द्वारा रचित एक अत्यंत भक्तिपूर्ण पाठ है। यदि आप इस पाठ की PDF को ऑनलाइन पढ़ना चाहते हैं या डाउनलोड करना चाहते हैं, तो नीचे दिए गए एम्बेडेड PDF व्यूअर और डाउनलोड बटन का प्रयोग कर सकते हैं।

बोर्ड (Board) बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (BSEB)
कक्षा (Class) 10वीं (Class 10th)
विषय (Subject) हिंदी (गोधूलि भाग-2 - काव्य खंड)
अध्याय (Chapter) अध्याय 2 (Chapter 2) - प्रेम अयनि श्री राधिका
कवि (Poet) रसखान (कृष्णभक्त कवि)

पाठ का सारांश (Chapter Overview)

यह अध्याय कृष्णभक्त कवि रसखान द्वारा रचित दो पदों (दोहा व सवैया) पर आधारित है:

प्रथम पद ('प्रेम अयनि श्री राधिका'): इसमें कवि रसखान ने श्री राधा और श्री कृष्ण के अलौकिक प्रेम का वर्णन किया है। कवि श्री राधिका को प्रेम का गृह (आवास) और श्री कृष्ण को प्रेम का रंग (स्वरूप) मानते हैं। वे कहते हैं कि इन दोनों को देखने के बाद नेत्र ऐसे हो गए हैं जैसे धनुष से छूटा हुआ बाण, जो फिर लौटकर नहीं आता।

द्वितीय पद ('करील के कुंजन ऊपर वारौं'): इस सवैये में कवि की श्री कृष्ण और ब्रजभूमि के प्रति अनन्य भक्ति प्रकट हुई है। रसखान कहते हैं कि कृष्ण की लाठी और कम्बल के लिए वे तीनों लोकों का राज्य त्याग सकते हैं। ब्रज की कंटीली झाड़ियों (करील के कुंजों) के सुख के सामने वे सोने के करोड़ों महलों (करोड़ों इन्द्रपुरी के सुख) को भी न्योछावर करने को तैयार हैं।

मुख्य संदेश: "या लकुटी अरु कामरिया पर राज तिहूँ पुर को तजि डारौं।" - यह पाठ ईश्वर के प्रति निश्छल समर्पण और भक्ति की सर्वोपरिता को दर्शाता है।

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आप नीचे दिए गए फ़्रेम में सीधे इस पाठ की PDF ऑनलाइन पढ़ सकते हैं:

परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण प्रश्न (Important Points)

  • 'प्रेम अयनि श्री राधिका' कविता के रचयिता कौन हैं? - रसखान।
  • कवि रसखान ने श्री राधिका और श्री कृष्ण को क्या कहा है? - श्री राधिका को प्रेम का गृह (अयनि) तथा श्री कृष्ण को प्रेम का स्वरूप/खजाना कहा है।
  • रसखान ब्रज के कुंजों पर क्या न्योछावर करने को तैयार हैं? - करोड़ों इन्द्रपुरी/सोने के महलों (कंधौत के धाम) के सुख को।

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