Chapter 13. विश्वशान्तिः | BSEB 10 Sanskrit Subjective


BSEB Class 10 Sanskrit Chapter 13 - विश्वशान्तिः Subjective Questions

बिहार बोर्ड (BSEB) कक्षा 10 संस्कृत

पीयूषम् (भाग-2) | त्रयोदशः पाठः – "विश्वशान्तिः"

महत्वपूर्ण विषयनिष्ठ (Subjective) प्रश्नोत्तर

लघु उत्तरीय प्रश्न (2 अंक वाले)
प्र. 1 'विश्वशान्तिः' पाठ में किस समस्या का चित्रण किया गया है?
इस पाठ में वर्तमान संसार में व्याप्त अशान्ति के वातावरण, उसके प्रमुख कारणों तथा इसके समाधान के उपायों का निरूपण किया गया है।
प्र. 2 संसार में किस प्रकार का वातावरण दिखाई देता है?
वर्तमान संसार में प्रायः सभी देशों में उपद्रव और अशान्ति दिखाई देती है। कहीं आंतरिक अशांति है तो कहीं देशों के बीच शीतयुद्ध (Cold War) चल रहा है।
प्र. 3 अशान्ति के दो प्रमुख कारण कौन-कौन से हैं?
अशान्ति के दो मुख्य कारण द्वेष (ईर्ष्या) और असहिष्णुता हैं।
प्र. 4 अशान्ति से किसका विनाश होता है?
अशान्ति से मानवता और पूरे विश्व का विनाश होता है।
प्र. 5 द्वेष और असहिष्णुता में क्या संबंध है?
द्वेष से ही असहिष्णुता जन्म लेती है। ये दोनों दोष आपस में मिलकर शत्रुता (वैर) को बढ़ावा देते हैं।
प्र. 6 स्वार्थ किस प्रकार वैर (शत्रुता) को बढ़ाता है?
स्वार्थ से प्रेरित व्यक्ति अहंभाव के कारण दूसरे के धर्म, जाति, संपत्ति, भाषा या उत्कर्ष को सहन नहीं कर पाता, जिससे वैर बढ़ता है।
प्र. 7 नीतिकारों के अनुसार अशान्ति का निवारण कैसे संभव है?
जब तक अशान्ति के कारण (द्वेष और असहिष्णुता) को जानकर उसका निवारण नहीं किया जाता, तब तक शान्ति संभव नहीं है।
प्र. 8 भगवान बुद्ध ने वैर (शत्रुता) के शमन के विषय में क्या कहा था?
भगवान बुद्ध ने कहा था कि वैर (शत्रुता) से वैर का शमन (शांति) कभी संभव नहीं है। वैर का शमन अवैर (अशत्रुता/सहानुभूति), करुणा और मैत्रीभाव से ही संभव है।
प्र. 9 "अयं निजः परो वेति..." श्लोक का क्या अर्थ है?
इस श्लोक का अर्थ है— "यह मेरा है और यह पराया है, ऐसी सोच संकुचित बुद्धि (लघु चेतसाम्) वाले लोगों की होती है। उदार चरित्र वालों के लिए तो संपूर्ण पृथ्वी ही परिवार (वसुधैव कुटुम्बकम्) के समान है।"
प्र. 10 संयुक्त राष्ट्र संघ (UNO) जैसी संस्थाओं का क्या कार्य है?
संयुक्त राष्ट्र संघ जैसी अंतरराष्ट्रीय संस्थाएँ देशों के बीच होने वाले विवादों को सुलझाती हैं और संभावित विश्वयुद्ध को रोकती हैं।
प्र. 11 परपीड़न (दूसरों को कष्ट देना) का क्या परिणाम होता है?
परपीड़न से स्वयं का विनाश होता है, जबकि परोपकार से शान्ति मिलती है।
प्र. 12 परोपकार से किसकी प्राप्ति होती है?
परोपकार से शान्ति और आत्म-संतोष की प्राप्ति होती है।
प्र. 13 शास्त्रों के अनुसार केवल उपदेश पर्याप्त क्यों नहीं है?
केवल शुष्क उपदेश पर्याप्त नहीं है, जब तक कि उस उपदेश को जीवन में कार्यान्वित (आचरण में लागू) न किया जाए।
प्र. 14 "ज्ञानं भारः क्रियां बिना" का क्या अर्थ है?
इसका अर्थ है— आचरण (व्यावहारिक प्रयोग) के बिना ज्ञान केवल एक बोझ के समान बन जाता है।
प्र. 15 विश्वशान्ति का सूर्योदय कब और कैसे दिखाई देता है?
जब एक देश विपत्ति के समय दूसरे देश की सहायता राशि और राहत सामग्री भेजकर मदद करता है, तब विश्वशान्ति का सूर्योदय दिखाई देता है।
प्र. 16 अशान्ति रूपी सागर के तट पर कौन स्थित दिखाई देता है?
संपूर्ण संसार अशान्ति रूपी सागर के तट पर स्थित दिखाई देता है।
प्र. 17 राजनीतिज्ञों की अशान्ति फैलाने में क्या भूमिका होती है?
राजनीतिज्ञ अपने स्वार्थ सिद्धि के लिए लोगों को उकसाते हैं और समाज व देशों के बीच अशान्ति एवं द्वेष उत्पन्न करते हैं।
प्र. 18 अहंभाव मनुष्य को किस ओर ले जाता है?
अहंभाव मनुष्य को स्वार्थ और दूसरों के प्रति द्वेष की ओर ले जाता है, जिससे समाज में कलह उत्पन्न होती है।
प्र. 19 उदारचरित वाले व्यक्तियों की क्या पहचान है?
उदारचरित वाले व्यक्ति भेद-भाव से परे रहकर संपूर्ण संसार के निवासियों को अपना कुटुंब (परिवार) मानते हैं।
प्र. 20 अशान्ति के कारण कौन-कौन से विनाशकारी अस्त्रों का निर्माण हुआ है?
अशान्ति के कारण मानव जाति के विनाश के लिए अनेक प्रकार के विध्वंसकारी अस्त्र-शस्त्रों (जैसे परमाणु बम आदि) का निर्माण हुआ है।
प्र. 21 संसार में कौन-कौन से दो प्रकार के युद्ध/कलह दिखाई देते हैं?
संसार में राज्यों/देशों के बीच आंतरिक कलह तथा प्रत्यक्ष युद्ध या प्रच्छन्न 'शीतयुद्ध' (Cold War) दिखाई देते हैं।
प्र. 22 स्वार्थोपदेश को कैसे रोका जा सकता है?
स्वार्थोपदेश को बलपूर्वक नियंत्रित करके और लोगों में परोपकार तथा परमार्थ की भावना का विकास करके रोका जा सकता है।
प्र. 23 विश्व के महापुरुषों और चिंतकों का क्या कर्तव्य है?
महापुरुषों और विचारकों का कर्तव्य है कि वे जन-जन, समाज-समाज और राज्य-राज्य में परमार्थ (लोक-कल्याण) की भावना जागृत करें।
प्र. 24 संस्कृत साहित्य में 'वसुधैव कुटुम्बकम्' का क्या संदेश है?
इसका संदेश है कि संपूर्ण विश्व एक परिवार है, और हमें संकुचित विचारधारा त्यागकर विश्व बंधुत्व की भावना अपनानी चाहिए।
प्र. 25 अशान्ति वातावरण में मानव जीवन कैसा हो जाता है?
अशान्तिपूर्ण वातावरण में मनुष्य का जीवन चिंताग्रस्त, असुरक्षित तथा दुखमय हो जाता है।
प्र. 26 विश्वशान्ति स्थापना के लिए कौन-कौन से गुण आवश्यक हैं?
दया, करुणा, अवैर (सहानुभूति), परोपकार, सहनशीलता और मैत्रीभाव।
प्र. 27 शीतयुद्ध (Cold War) से क्या तात्पर्य है?
जब दो या दो से अधिक देशों के बीच बिना हथियारों के मानसिक, राजनीतिक या कूटनीतिक तनाव की स्थिति रहती है, तो उसे शीतयुद्ध कहते हैं।
प्र. 28 वर्तमान समय में कौन दुःखी हैं?
वर्तमान समय में अशान्ति और असुरक्षा के वातावरण से संसार के सभी मनुष्य दुःखी और चिंतित हैं।
प्र. 29 एक देश दूसरे देश के उत्कर्ष को देखकर क्या करता है?
एक देश दूसरे देश की उन्नति (उत्कर्ष) को देखकर उससे ईर्ष्या करता है और उसकी उन्नति को नष्ट करने का निरंतर प्रयास करता है।
प्र. 30 'विश्वशान्तिः' पाठ का मूल उद्देश्य क्या है?
इस पाठ का मूल उद्देश्य संसार से वैर और अशान्ति को मिटाकर विश्व बंधुत्व, परोपकार और शान्ति की स्थापना करना है।
दीर्घ उत्तरीय एवं व्याख्यात्मक प्रश्न (5 अंक वाले)
प्र. 31 'विश्वशान्तिः' पाठ का सारांश अपने शब्दों में लिखें।
'विश्वशान्तिः' पाठ में वर्तमान विश्व में फैली अशान्ति और उसके समाधान का विस्तृत निरूपण किया गया है। आज लगभग सभी देशों में आंतरिक या बाह्य अशान्ति व्याप्त है। कई देशों में शीतयुद्ध चल रहा है। अशान्ति के मुख्य कारण ईर्ष्या (द्वेष) और असहिष्णुता हैं। स्वार्थ के कारण लोग दूसरों के उत्कर्ष को सहन नहीं कर पाते। इस अशान्ति को मिटाने के लिए महात्मा बुद्ध का संदेश 'वैर से वैर शांत नहीं होता' और नीतिकारों का 'वसुधैव कुटुम्बकम्' का सिद्धांत प्रासंगिक है। अंतरराष्ट्रीय संस्थाएँ युद्ध रोकने का प्रयास कर रही हैं। संकट के समय एक-दूसरे की मदद करने से विश्वशान्ति का मार्ग प्रशस्त होता है।
प्र. 32 संसार में अशान्ति के प्रमुख कारणों तथा उनके निवारण के उपायों का वर्णन करें।

कारण:

  1. द्वेष (ईर्ष्या): एक देश या व्यक्ति दूसरे की उन्नति देखकर ईर्ष्या करता है।
  2. असहिष्णुता: दूसरों के धर्म, जाति, भाषा या विचारों को सहन न कर पाना।
  3. स्वार्थ और अहंभाव: केवल अपने हित के बारे में सोचना और दूसरों के अधिकारों का हनन करना।

निवारण के उपाय:

  1. स्वार्थ की भावना को त्यागकर परोपकार और परमार्थ की भावना अपनाना।
  2. वैर को अवैर, करुणा और मैत्रीभाव से समाप्त करना।
  3. 'वसुधैव कुटुम्बकम्' के सिद्धांत को आचरण में उतारना।
प्र. 33 "अयं निजः परो वेति गणना लघुचेतसाम्। उदारचरितानां तु वसुधैव कुटुम्बकम्॥" - इस श्लोक की सप्रसंग व्याख्या करें।

प्रसंग: यह श्लोक 'विश्वशान्तिः' पाठ से उद्धृत है। इसमें भारतीय नीतिशास्त्र के उदार दृष्टिकोण को दर्शाया गया है।

व्याख्या: नीतिकार कहते हैं कि "यह मेरा है और यह पराया है"—ऐसी सोच केवल छोटी सोच या संकुचित मन वाले (लघुचेतसाम्) व्यक्तियों की होती है। इसके विपरीत, जो लोग महान सोच और उदार हृदय वाले (उदारचरितानाम्) होते हैं, वे पूरी पृथ्वी के निवासियों को अपने परिवार का सदस्य मानते हैं। यदि संसार के सभी लोग इस भावना को अपना लें, तो विश्व से युद्ध, कलह और अशान्ति का नामोनिशान मिट जाएगा।

प्र. 34 विश्वशान्ति में परोपकार और अंतरराष्ट्रीय संगठनों (जैसे UN) की भूमिका का स्पष्टीकरण करें।
विश्वशान्ति की स्थापना में परोपकार एक नैतिक आधार है, जबकि अंतरराष्ट्रीय संगठन व्यावहारिक मंच प्रदान करते हैं। जब कोई देश प्राकृतिक आपदा या संकट में होता है, तो अन्य देश उसे राहत सामग्री और आर्थिक सहायता भेजते हैं—यह परोपकार विश्वशान्ति के सूर्योदय जैसा प्रतीत होता है। दूसरी ओर, संयुक्त राष्ट्र संघ (UNO) जैसी संस्थाएँ विभिन्न राष्ट्रों के आपसी विवादों को वार्ता और कूटनीति के माध्यम से सुलझाती हैं, जिससे बड़े युद्धों की आशंका टल जाती है।
प्र. 35 "ज्ञानं भारः क्रियां बिना" पंक्ति के आलोक में व्यावहारिक ज्ञान का महत्व स्पष्ट करें।
इस पंक्ति का अर्थ है— बिना व्यवहार या आचरण के ज्ञान केवल एक भारी बोझ के समान है। पाठ में कहा गया है कि विश्वशान्ति के लिए केवल बड़े-बड़े उपदेश देना या नीतियाँ बनाना पर्याप्त नहीं है। जब तक शान्ति, प्रेम, करुणा और परोपकार के इन सिद्धांतों को जीवन में कार्यान्वित (आचरण में लागू) नहीं किया जाएगा, तब तक संसार से अशान्ति समाप्त नहीं हो सकती। सच्चा ज्ञान वही है जो आचरण में दिखाई दे।
एक-पंक्तिय (One-Liner) अभ्यास प्रश्न एवं उत्तर
प्र. 36 वर्तमान संसार में प्रायः सभी देशों में क्या दिखाई देता है?
उपद्रव और अशान्ति।
प्र. 37 अशान्ति के कारण कौन-सा सागर उमड़ता हुआ दिखाई देता है?
अशान्ति सागर (अशान्ति का समुद्र)।
प्र. 38 अशान्ति से किसका विनाश निश्चित है?
मानवता का विनाश।
प्र. 39 द्वेष किसको जन्म देता है?
असहिष्णुता को।
प्र. 40 असहिष्णुता से किसकी उत्पत्ति होती है?
वैर (शत्रुता) की।
प्र. 41 स्वार्थ से प्रेरित मनुष्य क्या भूल जाता है?
परोपकार और परमार्थ की भावना।
प्र. 42 किसके द्वारा वैर का शमन असंभव माना गया है?
वैर (शत्रुता) के द्वारा वैर का शमन असंभव है।
प्र. 43 प्राचीन काल में किसने वैर का शमन अवैर से संभव बताया था?
भगवान बुद्ध ने।
प्र. 44 संकुचित बुद्धि वाले लोग क्या सोचते हैं?
"यह मेरा है और यह पराया है" (अयं निजः परो वेति)।
प्र. 45 उदार चरित्र वाले लोगों के लिए पूरी पृथ्वी क्या है?
परिवार (कुटुम्ब)।
प्र. 46 परपीड़न (दूसरों को दुःखी करना) का क्या परिणाम होता है?
आत्म-विनाश।
प्र. 47 देशों के बीच विवादों को शांत करने के लिए कौन सी संस्थाएँ कार्य कर रही हैं?
संयुक्त राष्ट्र संघ (UNO) आदि।
प्र. 48 क्रिया (आचरण) के बिना ज्ञान कैसा होता है?
भार (बोझ) स्वरूप।
प्र. 49 संकट के समय एक देश द्वारा दूसरे देश की सहायता करना किसका प्रतीक है?
विश्वशान्ति के सूर्योदय का।
प्र. 50 'विश्वशान्तिः' पाठ में नीतिकार किसका उद्घोष करते हैं?
"उदारचरितानां तु वसुधैव कुटुम्बकम्" का।

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