बिहार बोर्ड कक्षा 10 संस्कृत 'पीयूषम्' (भाग 2)
त्रयोदशः पाठः – "विश्वशान्तिः" | 50 महत्वपूर्ण वस्तुनिष्ठ प्रश्नोत्तर (MCQs)
1. 'विश्वशान्तिः' पाठः 'पीयूषम्' भाग-2 पाठ्यपुस्तकस्य कतमः पाठः अस्ति? / 'विश्वशान्तिः' पाठ किस क्रम का पाठ है?
उत्तर एवं स्पष्टीकरण देखें
उत्तर: (B) त्रयोदशः (13th)
स्पष्टीकरण: दिए गए पृष्ठ पर शीर्षक में स्पष्ट लिखा है— "त्रयोदशः पाठः विश्वशान्तिः"।
2. अस्मिन् पाठे कस्य वातावरणस्य चित्रणं निरूपितम् अस्ति? / इस पाठ में किस वातावरण का चित्रण किया गया है?
उत्तर एवं स्पष्टीकरण देखें
उत्तर: (B) अशान्तिवातावरणस्य
स्पष्टीकरण: पाठ के प्रारंभ में कहा गया है— "पाठेऽस्मिन् संसारे वर्तमानस्य अशान्तिवातावरणस्य चित्रणं तत्समाधानोपायश्च निरूपयति।"
3. देशेषु कीदृशी अशान्तिः वर्तते? / देशों में कैसी अशांति विद्यमान है?
उत्तर एवं स्पष्टीकरण देखें
उत्तर: (C) आन्तरिकी बाह्या च
स्पष्टीकरण: पाठ्यांश के अनुसार— "देशेषु आन्तरिकी बाह्या च अशान्तिः वर्तते।"
4. अशान्तिः कीदृशी वर्तते इति दुःखस्य विषयः? / अशांति कैसी है जो दुःख का विषय है?
उत्तर एवं स्पष्टीकरण देखें
उत्तर: (B) सार्वभौमिकी
स्पष्टीकरण: पाठ्यांश के अनुसार— "सेयम् अशान्तिः सार्वभौमिकी वर्तते इति दुःखस्य विषयः।"
5. सर्वे जनाः कया चिन्तिताः सन्ति? / सभी लोग किससे चिंतित हैं?
उत्तर एवं स्पष्टीकरण देखें
उत्तर: (B) अशान्त्या
स्पष्टीकरण: पाठ में लिखा है— "सर्वे जनाः तया अशान्त्या चिन्तिताः सन्ति।"
6. वस्तुतः संसारः कस्य सागरस्य कूलमध्यासीनो दृश्यते? / वास्तव में संसार किस सागर के किनारे स्थित दिखाई देता है?
उत्तर एवं स्पष्टीकरण देखें
उत्तर: (B) अशान्तिसागरस्य
स्पष्टीकरण: पाठ्यांश में कहा गया है— "वस्तुतः संसारः अशान्तिसागरस्य कूलमध्यासीनो दृश्यते।"
7. अशान्तिः कस्य विनाशाय कल्पते? / अशांति किसके विनाश का कारण बनती है?
उत्तर एवं स्पष्टीकरण देखें
उत्तर: (A) मानवताविनाशाय
स्पष्टीकरण: पाठ्यांश के अनुसार— "अशान्तिश्च मानवताविनाशाय कल्पते।"
8. अद्य कानि बहून्याविष्कृतानि सन्ति? / आज किन चीज़ों का बहुत आविष्कार हो चुका है?
उत्तर एवं स्पष्टीकरण देखें
उत्तर: (B) विश्वविध्वंसकान्यस्त्राणि
स्पष्टीकरण: पाठ के अनुसार— "अद्य विश्वविध्वंसकान्यस्त्राणि बहून्याविष्कृतानि सन्ति।"
9. अद्य कस्य भयम् अस्ति? / आज किसका भय बना हुआ है?
उत्तर एवं स्पष्टीकरण देखें
उत्तर: (B) मानवतानाशस्य
स्पष्टीकरण: पाठ्यांश में लिखा है— "तैरेव मानवतानाशस्य भयम्।"
10. अशान्तेः कारणं तस्या निवारणोपायश्च कथं चिन्तनीयौ? / अशांति का कारण और निवारण का उपाय कैसे सोचा जाना चाहिए?
उत्तर एवं स्पष्टीकरण देखें
उत्तर: (B) सावधानतया
स्पष्टीकरण: पाठ के अनुसार— "अशान्तेः कारणं तस्याः निवारणोपायश्च सावधानतया चिन्तनीयौ।"
11. "कारणे ज्ञाते निवारणस्य उपायोऽपि ज्ञायते" इति का? / "कारण ज्ञात होने पर निवारण का उपाय भी पता चल जाता है" यह क्या है?
उत्तर एवं स्पष्टीकरण देखें
उत्तर: (B) नीतिः
स्पष्टीकरण: पाठ्यांश के अनुसार— "कारणे ज्ञाते निवारणस्य उपायोऽपि ज्ञायते इति नीतिः।"
12. अशान्तेः कारणद्वयं किम् अस्ति? / अशांति के दो मुख्य कारण क्या हैं?
उत्तर एवं स्पष्टीकरण देखें
उत्तर: (B) द्वेषः असहिष्णुता च
स्पष्टीकरण: पाठ में उल्लिखित है— "वस्तुतः द्वेषः असहिष्णुता च अशान्तेः कारणद्वयम्।"
13. द्वेषः कम् जनयति? / द्वेष किसको जन्म देता है?
उत्तर एवं स्पष्टीकरण देखें
उत्तर: (A) असहिष्णुताम्
स्पष्टीकरण: पाठ में लिखा है— "द्वेषः एव असहिष्णुतां जनयति।"
14. द्वेष-असहिष्णुता इति इमौ दोषौ परस्परं किं उत्पादयतः? / द्वेष और असहिष्णुता मिलकर क्या उत्पन्न करते हैं?
उत्तर एवं स्पष्टीकरण देखें
उत्तर: (A) वैरम्
स्पष्टीकरण: पाठ्यांश के अनुसार— "इमौ दोषौ परस्परं वैरमुत्पादयतः।"
15. कः वैरं प्रवर्धयति? / कौन दुश्मनी (वैर) को बढ़ाता है?
उत्तर एवं स्पष्टीकरण देखें
उत्तर: (B) स्वार्थः
स्पष्टीकरण: पाठ में स्पष्ट वर्णित है— "स्वार्थश्च वैरं प्रवर्धयति।"
16. स्वार्थप्रेरितः जनः किं न सहते? / स्वार्थ से प्रेरित मनुष्य क्या सहन नहीं कर पाता?
उत्तर एवं स्पष्टीकरण देखें
उत्तर: (A) परस्य धर्मं जातिं सम्पत्तिं क्षेत्रं भाषां वा
स्पष्टीकरण: पाठ के अनुसार— "स्वार्थप्रेरितो जनः अहम्भावेन परस्य धर्मं जातिं सम्पत्तिं क्षेत्रं भाषां वा न सहते।"
17. स्वार्थप्रेरितः जनः आत्मनः एव किं मन्यते? / स्वार्थप्रेरित मनुष्य केवल अपने को ही क्या मानता है?
उत्तर एवं स्पष्टीकरण देखें
उत्तर: (A) सर्वमुत्कृष्टम्
स्पष्टीकरण: पाठ में लिखा है— "आत्मन एव सर्वमुत्कृष्टमिति मन्यते।"
18. अत्र के विशेषेण प्रेरकाः सन्ति? / यहाँ विशेष रूप से अशांति के प्रेरक कौन हैं?
उत्तर एवं स्पष्टीकरण देखें
उत्तर: (A) राजनीतिज्ञाः
स्पष्टीकरण: पाठ्यांश के अनुसार— "राजनीतिज्ञाश्च अत्र विशेषेण प्रेरकाः।"
19. कः बलपूर्वकं निवारणीयः? / किसे बलपूर्वक दूर किया जाना चाहिए?
उत्तर एवं स्पष्टीकरण देखें
उत्तर: (A) स्वार्थोपदेशः
स्पष्टीकरण: पाठ में उल्लिखित है— "स्वार्थोपदेशः बलपूर्वकं निवारणीयः।"
20. यदि परोपकारं प्रति प्रवृत्तिः उत्पाद्यते तदा सर्वे किं त्यजेयुः? / यदि परोपकार के प्रति भावना पैदा हो तो सब क्या त्याग देंगे?
उत्तर एवं स्पष्टीकरण देखें
उत्तर: (A) स्वार्थम्
स्पष्टीकरण: पाठ्यांश में कहा गया है— "परोपकारं प्रति यदि प्रवृत्तिः उत्पाद्यते तदा सर्वे स्वार्थं त्यजेयुः।"
21. अत्र महापुरुषाः विद्वांसः चिन्तकाश्च कीदृशाः न सन्ति? / यहाँ महापुरुष, विद्वान और चिंतक कैसे नहीं हैं?
उत्तर एवं स्पष्टीकरण देखें
उत्तर: (A) विरलाः (दुर्लभाः)
स्पष्टीकरण: पाठ्यांश के अनुसार— "अत्र महापुरुषाः विद्वांसः चिन्तकाश्च न विरलाः सन्ति।"
22. केवलं शुष्कः उपदेशः न पर्याप्तः, अपितु तस्य किम् अनिवार्यम्? / केवल सूखा उपदेश पर्याप्त नहीं है, जीवन में क्या अनिवार्य है?
उत्तर एवं स्पष्टीकरण देखें
उत्तर: (A) कार्यान्वयनम्
स्पष्टीकरण: पाठ के अनुसार— "शुष्कः उपदेशश्च न पर्याप्तः, प्रत्युत तस्य कार्यान्वयनञ्च जीवनेऽनिवार्यम्।"
23. "ज्ञानं भारः क्रियाम् बिना" इति कस्य कथनस्य भावः? / "बिना क्रिया के ज्ञान भार स्वरूप होता है" यह क्या दर्शाता है?
उत्तर एवं स्पष्टीकरण देखें
उत्तर: (A) ज्ञानस्य व्यावहारिकप्रयोगः आवश्यकः
स्पष्टीकरण: पाठ में सूक्ति उद्धृत है— "ज्ञानं भारः क्रियां बिना" अर्थात् आचरण के बिना ज्ञान भार के समान है।
24. देशानां मध्ये विवादान् शमयितुं काः संस्थाः सन्ति? / देशों के बीच विवादों को शांत करने के लिए कौन-सी संस्थाएँ हैं?
उत्तर एवं स्पष्टीकरण देखें
उत्तर: (A) संयुक्तराष्ट्रसंघप्रभृतयः
स्पष्टीकरण: पाठ्यांश के अनुसार— "देशानां मध्ये च विवादान् शमयितुमेव संयुक्तराष्ट्रसंघप्रभृतयः संस्थाः सन्ति।"
25. संयुक्तराष्ट्रसंघादयः संस्थाः काले-काले किम् निवारयन्ति? / संयुक्त राष्ट्र संघ जैसी संस्थाएं समय-समय पर किसे रोकती हैं?
उत्तर एवं स्पष्टीकरण देखें
उत्तर: (A) विश्वयुद्धम्
स्पष्टीकरण: पाठ में लिखा है— "ताश्च काले-काले आशङ्कितमपि विश्वयुद्धं निवारयन्ति।"
26. पुराकाले वैरेण वैरस्य शमनम् असम्भवम् इति कः उक्तवान्? / प्राचीन काल में "वैर से वैर का शमन असंभव है" किसने कहा था?
उत्तर एवं स्पष्टीकरण देखें
उत्तर: (A) भगवान् बुद्धः
स्पष्टीकरण: पाठ्यांश के अनुसार— "भगवान् बुद्धः पुराकाले एव वैरेण वैरस्य शमनम् असम्भवं प्रोक्तवान्।"
27. केन वैरस्य शान्तिः भवति? / किससे वैर (शत्रुता) की शांति होती है?
उत्तर एवं स्पष्टीकरण देखें
उत्तर: (A) अवैरेण करुणया मैत्रीभावेन च
स्पष्टीकरण: पाठ के अनुसार— "अवैरेण करुणया मैत्रीभावेन च वैरस्य शान्तिः भवतीति सर्वे मन्यन्ते।"
28. "अयं निजः परो वेति गणना लघुचेतसाम्" – एषा गणना केषां भवति? / "यह मेरा है, यह पराया है" ऐसी सोच किनकी होती है?
उत्तर एवं स्पष्टीकरण देखें
उत्तर: (A) लघुचेतसाम् (क्षुद्रहृदयानाम्)
स्पष्टीकरण: श्लोक में स्पष्ट लिखा है— "अयं निजः परो वेति गणना लघुचेतसाम्।"
29. उदारचरितानां कृते सम्पूर्ण संसारः किम् अस्ति? / उदार हृदय वालों के लिए संपूर्ण संसार क्या है?
उत्तर एवं स्पष्टीकरण देखें
उत्तर: (A) कुटुम्बकम् (परिवारः)
स्पष्टीकरण: श्लोक के द्वितीय पाद में लिखा है— "उदारचरितानां तु वसुधैव कुटुम्बकम्।"
30. 'परपीडनम्' कस्मै जायते? / दूसरों को पीड़ा पहुँचाना किसके लिए होता है?
उत्तर एवं स्पष्टीकरण देखें
उत्तर: (A) आत्मनाशाय
स्पष्टीकरण: पाठ्यांश के अनुसार— "परपीडनम् आत्मनाशाय जायते।"
31. कः शान्तिकारणं भवति? / कौन शांति का कारण होता है?
उत्तर एवं स्पष्टीकरण देखें
उत्तर: (A) परोपकारः
स्पष्टीकरण: पाठ में उल्लिखित है— "परोपकारश्च शान्तिकारणं भवति।"
32. सङ्कटकाले अन्ये देशाः किं प्रेषयन्ति? / संकट के समय अन्य देश क्या भेजते हैं?
उत्तर एवं स्पष्टीकरण देखें
उत्तर: (A) सहायताराशिं सामग्रीं च
स्पष्टीकरण: पाठ में लिखा है— "अद्यापि परस्य देशस्य सङ्कटकाले अन्ये देशाः सहायताराशिं सामग्रीं च प्रेषयन्ति।"
33. अनेन केन विश्वशान्तेः सूर्योदयः दृश्यते? / विपत्ति में सहायता भेजने से किसका सूर्योदय दिखाई देता है?
उत्तर एवं स्पष्टीकरण देखें
उत्तर: (A) विश्वशान्तेः
स्पष्टीकरण: पाठ के अंत में स्पष्ट है— "इति विश्वशान्तेः सूर्योदयः दृश्यते।"
34. 'शीतयुद्धम्' इति पदस्य कः अर्थः? / 'शीतयुद्धम्' पद का क्या अर्थ है?
उत्तर एवं स्पष्टीकरण देखें
उत्तर: (A) प्रच्छन्नयुद्धम् (Cold War)
स्पष्टीकरण: शब्दार्थ सारणी में दिया गया है— "शीतयुद्धम् - प्रच्छन्नयुद्धं / शीतयुद्ध (Cold war)"।
35. 'कूलम्' पदस्य कः अर्थः? / 'कूलम्' पद का अर्थ क्या है?
उत्तर एवं स्पष्टीकरण देखें
उत्तर: (A) तटम् (किनारा)
स्पष्टीकरण: शब्दार्थ तालिका के अनुसार— "कूलम् - तटम् / किनारा"।
36. 'मोदमानानि' पदस्य कः अर्थः? / 'मोदमानानि' शब्द का क्या अर्थ है?
उत्तर एवं स्पष्टीकरण देखें
उत्तर: (A) प्रसन्नानि (आनन्दित)
स्पष्टीकरण: शब्दार्थ तालिका में उल्लिखित है— "मोदमानानि - प्रसन्नानि / आनन्दित"।
37. 'विध्वंसकानि' पदस्य कः अर्थः? / 'विध्वंसकानि' पद का क्या अर्थ है?
उत्तर एवं स्पष्टीकरण देखें
उत्तर: (A) नाशकानि (नष्ट करने वाले)
स्पष्टीकरण: शब्दार्थ सारणी के अनुसार— "विध्वंसकानि - नाशकानि / नष्ट करने वाले"।
38. 'कलहम्' शब्दस्य पर्यायपदम् किम्? / 'कलहम्' शब्द का पर्यायवाची/अर्थ क्या है?
उत्तर एवं स्पष्टीकरण देखें
उत्तर: (A) विवादम् (झगड़ा)
स्पष्टीकरण: शब्दार्थ तालिका के अनुसार— "कलहम् - विवादम् / झगड़ा"।
39. 'आश्रित्य' पदस्य कः अर्थः? / 'आश्रित्य' पद का अर्थ क्या है?
उत्तर एवं स्पष्टीकरण देखें
उत्तर: (A) अवलम्ब्य (सहारा लेकर)
स्पष्टीकरण: शब्दार्थ सारणी के अनुसार— "आश्रित्य - अवलम्ब्य / सहारा लेकर"।
40. 'वर्धयन्ति' पदस्य कः अर्थः? / 'वर्धयन्ति' क्रियापद का अर्थ क्या है?
उत्तर एवं स्पष्टीकरण देखें
उत्तर: (A) बढ़ाते हैं
स्पष्टीकरण: शब्दार्थ सारणी में दिया गया है— "वर्धयन्ति - बढ़ाते हैं"।
41. कस्य उत्कर्षं दृष्ट्वा अपरः देशः तस्य उत्कर्षनाशाय यतते? / किसकी उन्नति देखकर दूसरा देश उसके विनाश में लग जाता है?
उत्तर एवं स्पष्टीकरण देखें
उत्तर: (A) अपरस्य देशस्य
स्पष्टीकरण: पाठ में लिखा है— "एको देशः अपरस्य उत्कर्षं दृष्ट्वा द्वेष्टि, तस्य देशस्य उत्कर्षनाशाय निरन्तरं प्रयतते।"
42. शत्रुराज्यानि किं वर्धयन्ति? / शत्रु राज्य क्या बढ़ाते हैं?
उत्तर एवं स्पष्टीकरण देखें
उत्तर: (A) कलहम्
स्पष्टीकरण: पाठ्यांश के अनुसार— "तेन शत्रुराज्यानि मोदमानानि कलहं वर्धयन्ति।"
43. "वसुधैव" पदस्य सन्धि-विच्छेदः कः? / 'वसुधैव' पद का संधि-विच्छेद क्या होगा?
उत्तर एवं स्पष्टीकरण देखें
उत्तर: (A) वसुधा + एव
स्पष्टीकरण: वृद्धि स्वर संधि के नियम से (आ + ए = ऐ), वसुधा + एव = वसुधैव बनता है।
44. "उदारचरितानाम्" इत्यस्मिन् पदे का विभक्तिः अस्ति? / 'उदारचरितानाम्' पद में कौन-सी विभक्ति है?
उत्तर एवं स्पष्टीकरण देखें
उत्तर: (A) षष्ठी विभक्तिः (बहुवचनम्)
स्पष्टीकरण: राम शब्द के षष्ठी बहुवचन (रामाणाम्) की भांति उदारचरित शब्द का रूप 'उदारचरितानाम्' बनता है।
45. "वैरेण" पदस्य तृतीयाविभक्तेः मूलशब्दः कः? / 'वैरेण' पद का मूल शब्द क्या है?
उत्तर एवं स्पष्टीकरण देखें
उत्तर: (A) वैरम्
स्पष्टीकरण: अकारान्त नपुंसकलिंग 'वैर' शब्द का तृतीया विभक्ति एकवचन में रूप 'वैरेण' बनता है।
46. 'लघुचेतसाम्' शब्दस्य कः समासः अस्ति? / 'लघुचेतसाम्' में कौन-सा समास है?
उत्तर एवं स्पष्टीकरण देखें
उत्तर: (A) बहुव्रीहि समासः
स्पष्टीकरण: 'लघु चेतः येषां ते' (जिनका हृदय छोटा है), यह अन्य पद प्रधान होने से बहुव्रीहि समास है।
47. 'परोपकारः' शब्दस्य सन्धि-विच्छेदः कः? / 'परोपकारः' शब्द का सही संधि-विच्छेद क्या है?
उत्तर एवं स्पष्टीकरण देखें
उत्तर: (A) पर + उपकारः
स्पष्टीकरण: गुण स्वर संधि के नियमानुसार (अ + उ = ओ), 'पर + उपकारः' का 'परोपकारः' बनता है।
48. भारतीय नीतिकाराः किं उद्घोषयन्ति? / भारतीय नीतिकार किसकी घोषणा करते हैं?
उत्तर एवं स्पष्टीकरण देखें
उत्तर: (A) सत्यमेव जयते / वसुधैव कुटुम्बकम्
स्पष्टीकरण: पाठ्यांश के अनुसार भारतीय नीतिकार "अयं निजः परो वेति... वसुधैव कुटुम्बकम्" का सत्य उद्घोष करते हैं।
49. 'अशान्तिः' पदस्य विपरीतार्थकः (विलोम) शब्दः कः? / 'अशान्तिः' का विलोम शब्द क्या है?
उत्तर एवं स्पष्टीकरण देखें
उत्तर: (A) शान्तिः
स्पष्टीकरण: अशांति का विलोम 'शांति' होता है।
50. 'विश्वशान्तिः' पाठस्य मूलसन्देशः कः अस्ति? / 'विश्वशान्तिः' पाठ का मूल संदेश क्या है?
उत्तर एवं स्पष्टीकरण देखें
उत्तर: (A) परोपकारेण सद्भावेन च विश्वशान्तिः सम्भवा
स्पष्टीकरण: इस पाठ का मुख्य संदेश यही है कि वैर, स्वार्थ और द्वेष को त्यागकर परोपकार व विश्व-बंधुत्व से ही विश्व शांति संभव है।
0 Comments