Chapter 1. भवान्यष्टकम् | BSEB 10 Sanskrit Objective


प्रथमः पाठः : भवान्यष्टकम् (वस्तुनिष्ठ प्रश्नोत्तरी)

प्रथमः पाठः : भवान्यष्टकम्

50 बहुविकल्पीय वस्तुनिष्ठ प्रश्न (Objective Questions) उत्तर एवं विस्तृत व्याख्या सहित

1–10: प्रथमः श्लोकः - अनन्यशरणता (पहला श्लोक - अनन्य शरणता)
1. 'भवान्यष्टकम्' पाठे कस्याः देव्याः स्तुतिः कृता अस्ति? ('भवानीष्टकम्' पाठ में किस देवी की स्तुति की गई है?)
(A) भगवत्याः भवान्याः (दुर्गायाः)
(B) लक्ष्म्याः
(C) सरस्वत्याः
(D) पार्वत्याः केवलम्
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (A) भगवत्याः भवान्याः (दुर्गायाः)
व्याख्या: यह संपूर्ण स्तोत्र जगज्जननी भवानी (माँ दुर्गा/पार्वती) की अनन्य भक्ति और शरण में समर्पित है।
2. कविः कस्याः एकां गतिं मन्यते? (कवि किसको अपनी एकमात्र गति/आश्रय मानता है?)
(A) भवान्याः
(B) विद्यायाः
(C) जायायाः
(D) भृत्यस्य
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (A) भवान्याः
व्याख्या: श्लोक की प्रत्येक अंतिम पंक्ति (टेक) में कहा गया है— "गतिस्त्वं गतिस्त्वं त्वमेका भवानि॥"
3. श्लोकानुसारं कः न अस्ति? (श्लोक के अनुसार विपत्ति में कौन काम नहीं आता?)
(A) तातः (पिता) माता च
(B) बन्धुः दाता च
(C) पुत्रः पुत्री च
(D) एतत् सर्वम्
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (D) एतत् सर्वम्
व्याख्या: श्लोक 1 में स्पष्ट लिखा है— "न तातो न माता न बन्धुर्न दाता, न पुत्रो न पुत्री..." (सांसारिक रिश्ते स्थायी सहारा नहीं हैं)।
4. कविः कस्याः कृते वदति 'न वृत्तिर्ममैव'? (कवि किसके लिए कहता है कि मेरी कोई आजीविका/वृत्ति भी नहीं है?)
(A) भवान्याः समीपे
(B) राज्ञः समीपे
(C) मित्रस्य समीपे
(D) शत्रोः समीपे
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (A) भवान्याः समीपे
व्याख्या: कवि सब कुछ त्यागकर कहता है कि न मेरे पास कोई विद्या है न आजीविका, केवल भवानी ही मेरी गति हैं।
5. 'तातः' इति पदस्य कः अर्थः अस्ति? ('तातः' पद का क्या अर्थ है?)
(A) पिता / जनकः
(B) माता
(C) भ्राता
(D) मित्रम्
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (A) पिता / जनकः
व्याख्या: संस्कृत साहित्य में 'तातः' का अर्थ पिता होता है।
6. 'जाया' इति पदस्य पर्यायपदम् किम्? ('जाया' पद का क्या अर्थ है?)
(A) पत्नी / भार्या
(B) पुत्री
(C) माता
(D) भगिनी
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (A) पत्नी / भार्या
व्याख्या: 'जाया' शब्द का शाब्दिक अर्थ धर्मपत्नी होता है।
7. 'भर्ता' इति पदस्य कः अर्थः? ('भर्ता' पद का क्या अर्थ है?)
(A) स्वामी / पतिः
(B) सेवकः
(C) पुत्रः
(D) पिता
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (A) स्वामी / पतिः
व्याख्या: पालन-पोषण करने वाले स्वामी या पति को 'भर्ता' कहते हैं।
8. 'गतिस्त्वम्' इति पदस्य सन्धि-विच्छेदः कः? ('गतिस्त्वम्' का सही सन्धि-विच्छेद क्या है?)
(A) गतिः + त्वम्
(B) गति + त्वम्
(C) गती + त्वम्
(D) गतो + त्वम्
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (A) गतिः + त्वम्
व्याख्या: विसर्ग के बाद 'त्' आने पर विसर्ग का 'स्' हो जाता है (विसर्ग सन्धि: गतिः + त्वम् = गतिस्त्वम्)।
9. 'त्वमेका' इति पदस्य सन्धि-विच्छेदः कः? ('त्वमेका' का सन्धि-विच्छेद क्या होगा?)
(A) त्वम् + एका
(B) त्व + एका
(C) त्वा + एका
(D) त्वमे + का
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (A) त्वम् + एका
व्याख्या: त्वम् (सर्वनाम) + एका (विशेषण) = त्वमेका (केवल तुम ही एक)।
10. 'भृत्यः' इति पदस्य विलोमपदम् किम्? ('भृत्यः' का विलोम शब्द क्या है?)
(A) स्वामी / प्रभुः
(B) दासः
(C) सेवकः
(D) किङ्करः
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (A) स्वामी / प्रभुः
व्याख्या: भृत्यः का अर्थ नौकर/सेवक होता है, जिसका विलोम स्वामी या प्रभु होता है।
11–20: द्वितीयः श्लोकः - संसारपारस्य पाशः (दूसरा श्लोक - संसार का बंधन)
11. कविः कुत्र पपात् (पतितः)? (कवि कहाँ गिर पड़ा है?)
(A) भवाब्धौ (संसारसमुद्रे)
(B) कूपे
(C) नद्याम्
(D) गृहे
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (A) भवाब्धौ (संसारसमुद्रे)
व्याख्या: द्वितीय श्लोक में कहा गया है— "भवाब्धावपारे महादुःखभीरुः पपात" (अपार संसार रूपी समुद्र में पतन हो गया है)।
12. कविः कीदृशे भवाब्धौ पतितः अस्ति? (कवि कैसे संसार रूपी सागर में गिरा है?)
(A) अपारे महादुःखभीरौ
(B) सुगमे
(C) जलेन पूर्णे
(D) न कस्मिंश्चित्
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (A) अपारे महादुःखभीरौ
व्याख्या: ऐसा संसार-सागर जो अपार है और जहाँ महान दुःखों का भय है।
13. कविः स्व आत्मानम् कीदृशं वदति? (कवि स्वयं को कैसा बताता है?)
(A) प्रकामी प्रलोभी प्रमत्तः
(B) ज्ञानी
(C) धीरः
(D) दयालुः
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (A) प्रकामी प्रलोभी प्रमत्तः
व्याख्या: श्लोक 2 के अनुसार कवि स्वीकार करता है— "पपात प्रकामी प्रलोभी प्रमत्तः" (अत्यधिक कामुक, लोभी और असावधान)।
14. कविः केन प्रबद्धः अस्ति? (कवि किससे बँधा हुआ है?)
(A) कुसंसारपाशेन
(B) रज्ज्वा
(C) श्रङ्खलया
(D) वस्त्रेण
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (A) कुसंसारपाशेन
व्याख्या: "कुसंसारपाशप्रबद्धः सदाहम्" (संसार रूपी कुत्सित मोह-पाश में सदा बँधा हुआ हूँ)।
15. 'भवाब्धौ' इति पदे कः समासः अस्ति? ('भवाब्धौ' पद में कौन-सा समास है?)
(A) रूपक कर्मधारयः
(B) द्विगुः
(C) द्वन्द्वः
(D) अव्ययीभावः
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (A) रूपक कर्मधारयः
व्याख्या: भवः एव अब्धिः = भवाब्धिः (संसार रूपी समुद्र - सप्तमी एकवचन में भवाब्धौ)।
16. 'प्रलोभी' इति पदस्य कः अर्थः? ('प्रलोभी' पद का क्या अर्थ है?)
(A) अत्यधिकं लोभी / लालची
(B) दानी
(C) दयावान्
(D) शान्तः
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (A) अत्यधिकं लोभी / लालची
व्याख्या: प्रकृष्टः लोभी इति प्रलोभी (अत्यंत लोभ करने वाला)।
17. 'प्रमत्तः' इति पदे कः प्रत्ययः? ('प्रमत्तः' में कौन-सा प्रत्यय है?)
(A) क्त
(B) क्त्वा
(C) तुमुन्
(D) शतृ
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (A) क्त
व्याख्या: प्र + मद् (मत्त होना) + क्त प्रत्यय = प्रमत्तः (असावधान/मदहोश)।
18. 'पपात' इति क्रियापदे कः लकारः? ('पपात' में कौन-सा लकार है?)
(A) लिट् लकारः (परोक्ष भूतकालः)
(B) लट् लकारः
(C) लोट् लकारः
(D) लङ् लकारः
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (A) लिट् लकारः (परोक्ष भूतकालः)
व्याख्या: पत् (गिरना) धातु लिट् लकार प्रथम पुरुष एकवचन = पपात (गिरा/गिर पड़ा)।
19. 'कुसंसारपाशप्रबद्धः' इति पदे कः समासः? ('कुसंसारपाशप्रबद्धः' में कौन-सा समास है?)
(A) तृतीया तत्पुरुषः / कर्मधारयः
(B) द्विगुः
(C) द्वन्द्वः
(D) अव्ययीभावः
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (A) तृतीया तत्पुरुषः / कर्मधारयः
व्याख्या: कुत्सितः संसारः एव पाशः, तेन प्रबद्धः (बुरे संसार के बंधन से बँधा हुआ)।
20. 'महादुःखभीरुः' इति पदस्य विग्रहः कः? ('महादुःखभीरुः' का क्या अर्थ है?)
(A) महान् दुःखात् भीरुः (महान दुःख से डरने वाला)
(B) दुःखेन हीनः
(C) दुःखं न जानाति
(D) दुःखस्य दाता
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (A) महान् दुःखात् भीरुः (महान दुःख से डरने वाला)
व्याख्या: पञ्चमी तत्पुरुष समास— महादुःखात् भीरुः (बड़े-बड़े कष्टों से भयभीत)।
21–30: तृतीय-चतुर्थ श्लोकौ - अज्ञानस्य स्वीकारः (अज्ञानता की स्वीकारोक्ति)
21. कविः किम् किम् न जानाति इति श्लोक ३ वदति? (कवि क्या-क्या नहीं जानने की बात कहता है?)
(A) दानं ध्यानयोगं च
(B) तन्त्रं स्तोत्रमन्त्रं च
(C) पूजां न्यासयोगं च
(D) एतत् सर्वम्
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (D) एतत् सर्वम्
व्याख्या: श्लोक 3 के अनुसार— "न जानामि दानं न च ध्यानयोगं, न जानामि तन्त्रं न च स्तोत्रमन्त्रम्। न जानामि पूजां न च न्यासयोगम्..."
22. कविः किम् न जानाति इति श्लोक ४ वदति? (श्लोक 4 में कवि किस-किसकी अनभिज्ञता बताता है?)
(A) पुण्यं तीर्थं च
(B) मुक्तिं लयं च
(C) भक्तिं व्रतं च
(D) एतत् सर्वम्
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (D) एतत् सर्वम्
व्याख्या: "न जानामि पुण्यं न जानामि तीर्थं, न जानामि मुक्तिं लयं वा कदाचित्। न जानामि भक्तिं व्रतं वापि मातः..."
23. कविः मातुः भवान्याः पुरतः स्वकीयाम् काम् अङ्गीकरोति? (कवि माँ भवानी के सामने अपनी किस बात को स्वीकार करता है?)
(A) साधनायाः अज्ञानताम् (अक्षमताम्)
(B) पाण्डित्यम्
(C) धनम्
(D) शक्तिम्
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (A) साधनायाः अज्ञानताम् (अक्षमताम्)
व्याख्या: कवि निष्कपट भाव से स्वीकार करता है कि वह किसी तंत्र-मंत्र, पूजा-पाठ या योग को नहीं जानता, केवल माँ की शरण में है।
24. 'जानामि' इति क्रियापदे का धातुः? ('जानामि' में कौन-सी धातु है?)
(A) ज्ञा (ज्ञाने)
(B) जान्
(C) जा
(D) ज्ञ
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (A) ज्ञा (ज्ञाने)
व्याख्या: ज्ञा (जानना) धातु लट् लकार उत्तम पुरुष एकवचन = जानामि (मैं जानता हूँ)।
25. 'ध्यानयोगम्' इति पदे कः समासः? ('ध्यानयोगम्' में कौन-सा समास है?)
(A) षष्ठी तत्पुरुषः / द्वन्द्वः
(B) द्विगुः
(C) अव्ययीभावः
(D) बहुव्रीहिः
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (A) षष्ठी तत्पुरुषः / द्वन्द्वः
व्याख्या: ध्यानस्य योगः = ध्यानयोगः (ध्यान की साधना)।
26. 'पुण्यम्' इति पदस्य विलोमपदम् किम्? ('पुण्यम्' का विलोम शब्द क्या है?)
(A) पापम्
(B) सत्यम्
(C) तीर्थम्
(D) धर्मः
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (A) पापम्
व्याख्या: पुण्यम् का विपरीतार्थक शब्द पापम् होता है।
27. 'मुक्तिम्' इति पदस्य पर्यायपदम् किम्? ('मुक्तिम्' का क्या पर्याय है?)
(A) मोक्षम् / अपवर्गम्
(B) बन्धनम्
(C) जन्म
(D) संसारम्
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (A) मोक्षम् / अपवर्गम्
व्याख्या: जन्म-मरण के फेर से छूटने को मुक्ति या मोक्ष कहते हैं।
28. 'मातः' इति पदं कस्याः विभक्तेः रूपम्? ('मातः' किस विभक्ति का रूप है?)
(A) सम्बोधनस्य (एकवचनम्)
(B) प्रथमा
(C) द्वितीया
(D) षष्ठी
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (A) सम्बोधनस्य (एकवचनम्)
व्याख्या: ऋकारान्त स्त्रीलिङ्ग 'मातृ' (माता) शब्द का सम्बोधन एकवचन रूप 'हे मातः!' (हे माँ!) बनता है।
29. 'कदाचित्' इति पदं कीदृशं पदम् अस्ति? ('कदाचित्' कैसा पद है?)
(A) अव्ययपदम्
(B) संज्ञा
(C) विशेषणम्
(D) क्रिया
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (A) अव्ययपदम्
व्याख्या: 'कदाचित्' (कभी भी) समयसूचक अव्यय शब्द है।
30. 'स्तोत्रमन्त्रम्' इति पदस्य विग्रहः कः? ('स्तोत्रमन्त्रम्' पद में कौन-सा समास है?)
(A) स्तोत्रं च मन्त्रं च तयोः समाहारः (द्वन्द्व समासः)
(B) स्तोत्रस्य मन्त्रम्
(C) स्तोत्रेण मन्त्रम्
(D) स्तोत्राय मन्त्रम्
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (A) स्तोत्रं च मन्त्रं च तयोः समाहारः (द्वन्द्व समासः)
व्याख्या: स्तोत्र और मंत्र का समूह = समाहार द्वन्द्व समास।
31–40: पञ्चम-षष्ठ श्लोकौ - स्वदोषकथनं देवानाम् अनभिज्ञता च
31. श्लोक ५ अनुसारं कविः कीदृशः अस्ति? (श्लोक 5 के अनुसार कवि अपने अवगुण कैसे बताता है?)
(A) कुकर्मी कुसङ्गी कुबुद्धिः कुदासः
(B) कुलाचारहीनः कदाचारलीनः
(C) कुदृष्टिः कुवाक्यप्रबन्धः
(D) एतत् सर्वम्
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (D) एतत् सर्वम्
व्याख्या: श्लोक 5 में कवि दीनता व्यक्त करते हुए कहता है— "कुकर्मी कुसङ्गी कुबुद्धिः कुदासः, कुलाचारहीनः कदाचारलीनः। कुदृष्टिः कुवाक्यप्रबन्धः सदाहम्..."
32. कविः केषां देवानाम् पूजनं न जानाति इति श्लोक ६ वदति? (कवि किन देवों की विधि विधान से अनभिज्ञता बताता है?)
(A) प्रजेशं (ब्रह्माणम्) रमेशं (विष्णुम्)
(B) महेशं (शिवम्) सुरेशं (इन्द्रम्)
(C) दिनेशं (सूर्यम्) निशीथेश्वरं (चन्द्रम्) वा
(D) एतान् सर्वान्
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (D) एतान् सर्वान्
व्याख्या: श्लोक 6 में लिखा है— "प्रजेशं रमेशं महेशं सुरेशं, दिनेशं निशीथेश्वरं वा कदाचित्। न जानामि चान्यत् सदाहं शरण्ये..."
33. 'निशीथेश्वरः' इति कस्य नाम अस्ति? ('निशीथेश्वरः' किसका पर्यायवाची है?)
(A) चन्द्रस्य (रात्रेशः)
(B) सूर्यस्य
(C) इन्द्रस्य
(D) वरुणस्य
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (A) चन्द्रस्य (रात्रेशः)
व्याख्या: निशीथ (रात्रि) का ईश्वर = चन्द्रमा।
34. 'दिनेशः' इति पदस्य कः अर्थः अस्ति? ('दिनेशः' पद का क्या अर्थ है?)
(A) सूर्यः (दिनपतिः)
(B) चन्द्रः
(C) शिवः
(D) अग्निः
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (A) सूर्यः (दिनपतिः)
व्याख्या: दिनस्य ईशः = दिनेशः अर्थात् सूर्य देव।
35. 'रमेशः' इति कस्य नाम अस्ति? ('रमेशः' किसका नाम है?)
(A) विष्णोः (रमायाः ईशः)
(B) ब्रह्मणः
(C) शिवस्य
(D) इन्द्रस्य
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (A) विष्णोः (रमायाः ईशः)
व्याख्या: रमा (लक्ष्मी) के पति होने से भगवान विष्णु को 'रमेशः' कहा जाता है।
36. 'कुकर्मी' इति पदस्य विलोमपदम् किम्? ('कुकर्मी' का विलोम शब्द क्या है?)
(A) सुकर्मी / सत्कर्मी
(B) दुष्कर्मी
(C) असत्कर्मी
(D) पापी
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (A) सुकर्मी / सत्कर्मी
व्याख्या: कुकर्मी (बुरे काम करने वाला) का विलोम सुकर्मी (अच्छे काम करने वाला) होता है।
37. 'कदाचारलीनः' इति पदे कः समासः? ('कदाचारलीनः' में कौन-सा समास है?)
(A) सप्तमी तत्पुरुषः
(B) द्विगुः
(C) द्वन्द्वः
(D) अव्ययीभावः
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (A) सप्तमी तत्पुरुषः
व्याख्या: कदाचारे लीनः = कदाचारलीनः (बुरे आचरण में डूबा हुआ)।
38. 'शरण्ये' इति पदं कस्याः सम्बोधनम् अस्ति? ('शरण्ये' किसके लिए सम्बोधित है?)
(A) शरणदायिन्याः भवान्याः कृते
(B) नृपाय
(C) मित्राय
(D) गुरवे
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (A) शरणदायिन्याः भवान्याः कृते
व्याख्या: शरण देने वाली जगदम्बा भवानी को 'शरण्ये!' कहकर पुकारा गया है।
39. 'कुबुद्धिः' इति पदस्य विग्रहः कः? ('कुबुद्धिः' का क्या अर्थ है?)
(A) कुत्सिता बुद्धिः यस्य सः (बुरी बुद्धि वाला)
(B) सुबुद्धिः
(C) बुद्धिमान्
(D) विद्वान्
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (A) कुत्सिता बुद्धिः यस्य सः (बुरी बुद्धि वाला)
व्याख्या: दुष्ट या कुत्सित बुद्धि धारण करने वाला व्यक्ति (बहुव्रीहि समास)।
40. 'सुरेशः' इति पदे सन्धि-विच्छेदः कः? ('सुरेशः' का सन्धि-विच्छेद क्या होगा?)
(A) सुर + ईशः
(B) सु + रेशः
(C) सुरा + ईशः
(D) सुरो + ईशः
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (A) सुर + ईशः
व्याख्या: सुर + ईशः = सुरेशः (देवताओं के राजा इन्द्र - अ + ई = ए, गुण स्वर सन्धि)।
41–50: पाठ्यांश-व्याकरणम् स्तोत्र-महिमा पुस्तक-सूचना च
41. 'भवान्यष्टकम्' स्तोत्रस्य रचयिता कः अस्ति? ('भवानीष्टकम्' स्तोत्र के रचयिता कौन हैं?)
(A) श्रीमदादिशङ्कराचार्यः
(B) कालिदासः
(C) बाणभट्टः
(D) तुलसीदासः
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (A) श्रीमदादिशङ्कराचार्यः
व्याख्या: 'भवानी अष्टकम्' जगद्गुरु आदि शंकराचार्य जी द्वारा रचित एक अत्यंत प्रसिद्ध भक्ति स्तोत्र है।
42. 'भवान्यष्टकम्' स्तोत्रे कति श्लोकाः सन्ति? ('भवानीष्टकम्' में मुख्य रूप से कितने पद्य हैं?)
(A) अष्टौ (8 श्लोकाः)
(B) दश
(C) पञ्च
(D) द्वादश
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (A) अष्टौ (8 श्लोकाः)
व्याख्या: 'अष्टकम्' शब्द का अर्थ ही 8 श्लोकों का भक्ति काव्य संग्रह होता है।
43. 'भवानि' इति पदं कस्याः विभक्तेः रूपम्? ('भवानि' किस विभक्ति का रूप है?)
(A) सम्बोधनस्य (एकवचनम्)
(B) प्रथमा
(C) द्वितीया
(D) षष्ठी
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (A) सम्बोधनस्य (एकवचनम्)
व्याख्या: ईकारान्त स्त्रीलिङ्ग 'भवानी' शब्द का सम्बोधन एकवचन रूप 'हे भवानि!' बनता है।
44. 'सदाहम्' इति पदस्य सन्धि-विच्छेदः कः? ('सदाहम्' का सही सन्धि-विच्छेद क्या है?)
(A) सदा + अहम्
(B) सद् + अहम्
(C) सदो + अहम्
(D) सदि + अहम्
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (A) सदा + अहम्
व्याख्या: सदा + अहम् = सदाहम् (आ + अ = आ, दीर्घ स्वर सन्धि)।
45. 'कुसङ्गी' इति पदस्य विलोमपदम् किम्? ('कुसङ्गी' का विलोम शब्द क्या है?)
(A) सुसङ्गी / सत्सङ्गी
(B) कुसङ्गः
(C) असङ्गी
(D) पापी
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (A) सुसङ्गी / सत्सङ्गी
व्याख्या: कुसङ्गी (बुरी संगति वाला) का विलोम सत्सङ्गी (अच्छी संगति वाला) होता है।
46. 'प्रजेशः' इति कस्य नाम अस्ति? ('प्रजेशः' किसका पर्यायवाची है?)
(A) ब्रह्मणः (प्रजानां पतिः/ईशः)
(B) विष्णोः
(C) शिवस्य
(D) इन्द्रस्य
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (A) ब्रह्मणः (प्रजानां पतिः/ईशः)
व्याख्या: प्रजा के स्वामी/सृष्टिकर्ता होने से ब्रह्मा जी को 'प्रजेशः' कहते हैं।
47. 'महेशः' इति पदे कः सन्धिः? ('महेशः' पद में कौन-सी सन्धि है?)
(A) गुण स्वर सन्धिः (महा + ईशः)
(B) दीर्घ सन्धिः
(C) वृद्धि सन्धिः
(D) यण् सन्धिः
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (A) गुण स्वर सन्धिः (महा + ईशः)
व्याख्या: महा + ईशः = महेशः (आ + ई = ए, गुण स्वर सन्धि)।
48. 'भवान्यष्टकम्' पाठस्य मुख्यः भावः कः? ('भवानीष्टकम्' पाठ का मुख्य भाव क्या है?)
(A) सर्वसमर्पणम् अनन्य-भक्तिभावश्च
(B) धनयाचना
(C) पाण्डित्यप्रदर्शनम्
(D) संसारसुखम्
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (A) सर्वसमर्पणम् अनन्य-भक्तिभावश्च
व्याख्या: अपने सभी अवगुणों को स्वीकार करते हुए देवी भवानी के चरणों में सर्वस्व न्योछावर करना ही इसका भाव है।
49. 'भवानीष्टकम्' इति कतमः पाठः अस्ति? ('भवानीष्टकम्' कौन-सा पाठ है?)
(A) प्रथमः पाठः (पाठ-1)
(B) द्वितीयः पाठः
(C) तृतीयः पाठः
(D) चतुर्थः पाठः
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (A) प्रथमः पाठः (पाठ-1)
व्याख्या: चित्र में पृष्ठ पर सबसे ऊपर स्पष्ट लिखा है— "प्रथमः पाठः भवानीष्टकम्"
50. 'भवानीष्टकम्' इति पाठः कस्यां पुस्तके संकलितः अस्ति? (यह पाठ किस पुस्तक में संकलित है?)
(A) पीयूषम् द्रुतपाठाय (पृष्ठ १)
(B) अमृता
(C) शेमुषी
(D) मणिका
उत्तर एवं व्याख्या देखें
उत्तर: (A) पीयूषम् द्रुतपाठाय (पृष्ठ १)
व्याख्या: पृष्ठ के निचले भाग में स्पष्ट अंकित है— "पीयूषम् द्रुतपाठाय ( 1 )"

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