बिहार बोर्ड कक्षा 10 संस्कृत (पीयूषम् भाग 2)
प्रथमः पाठः – "मङ्गलम्" (50 महत्वपूर्ण वस्तुनिष्ठ प्रश्नोत्तर)
1
प्रथमः पाठः कः अस्ति? / पहला पाठ कौन सा है?
उत्तर: (A) मङ्गलम्
व्याख्या: पृष्ठ 1 की छवि में स्पष्ट रूप से "प्रथमः पाठः मङ्गलम्" अंकित है।
2
'मङ्गलम्' पाठे कति मन्त्राः संकलिताः सन्ति? / 'मंगलम' पाठ में कुल कितने मंत्र संकलित हैं?
उत्तर: (A) पञ्च
व्याख्या: पाठ परिचय की अंतिम पंक्ति में लिखा है: "अस्मिन् पाठे परमात्मपरा उपनिषदां पद्यात्मकाः पञ्च मन्त्राः संकलिताः सन्ति।"
3
उपनिषदः कस्य अन्तिमे भागे तिष्ठन्ति? / उपनिषद वैदिक वांग्मय के किस भाग में स्थित हैं?
उत्तर: (A) वैदिकवाङ्गमयस्य अन्तिमे भागे
व्याख्या: परिचय भाग के अनुसार: "उपनिषदः वैदिकवाङ्मयस्य अन्तिमे भागे दर्शनशास्त्रस्य सिद्धान्तान् प्रकटयन्ति।"
4
उपनिषदः केषां सिद्धान्तान् प्रकटयन्ति? / उपनिषद किसके सिद्धांतों को प्रकट करते हैं?
उत्तर: (A) दर्शनशास्त्रस्य
व्याख्या: उपनिषद दर्शनशास्त्र के सिद्धांतों को प्रकट करते हैं।
5
उपनिषत्सु कस्य महिमा प्रधानतया गीयते? / उपनिषदों में किसकी महिमा मुख्य रूप से गाई जाती है?
उत्तर: (A) परमपुरुषस्य परमात्मनः
व्याख्या: पाठ परिचय: "सर्वत्र परमपुरुषस्य परमात्मनः महिमा प्रधानतया गीयते।"
6
केन जगत् व्याप्तमनुशासितं च अस्ति? / किसके द्वारा यह संपूर्ण संसार व्याप्त और अनुशासित है?
उत्तर: (A) परमात्मना
व्याख्या: "तेन परमात्मना जगत् व्याप्तमनुशासितं चास्ति।"
7
सर्वेषां तपसां परमं लक्ष्यं किम्? / सभी तपस्याओं का परम लक्ष्य क्या है?
उत्तर: (A) परमात्मा
व्याख्या: परिचय पंक्ति: "स एव सर्वेषां तपसां परमं लक्ष्यम्।"
8
सत्यस्य मुखं केन पात्रेण अपिहितम् अस्ति? / सत्य का मुख किस पात्र से ढका हुआ है?
उत्तर: (A) हिरण्मयेन
व्याख्या: श्लोक 1: "हिरण्मयेन पात्रेण सत्यस्यापिहितं मुखम्।"
9
'हिरण्मयेन पात्रेण...' इति मन्त्रः कस्मात् उपनिषदः सङ्कलितः? / यह पहला मंत्र किस उपनिषद से लिया गया है?
उत्तर: (A) ईशावास्योपनिषदः
व्याख्या: छवि में मंत्र के अंत में संकेत है: (ईशावास्य० 15)।
10
पूषन्! सत्यधर्माय दृष्टये किम् अपावृणु? / हे पूषन! सत्यधर्म की प्राप्ति के लिए किसे हटा दें?
उत्तर: (A) हिरण्मयं पात्रम्
व्याख्या: अन्वय 1 के अनुसार: "हे पूषन्! सत्यस्य मुखं हिरण्मयेन पात्रेण अपिहितं... तत् अपावृणु।"
11
अणोः अणीयान् कः अस्ति? / अणु से भी सूक्ष्म कौन है?
उत्तर: (A) आत्मा
व्याख्या: श्लोक 2: "अणोरणीयान् महतो महीयान् आत्मास्य जन्तोर्निहितो गुहायाम्।"
12
महतः महीयान् कः अस्ति? / महान से भी महान् कौन है?
उत्तर: (A) आत्मा
व्याख्या: आत्मा अणु से सूक्ष्म और महान से भी महान है।
13
आत्मा जन्तोः कुत्र निहितः अस्ति? / आत्मा प्राणी की कहाँ स्थित/निहित है?
उत्तर: (A) हृदयद्रूपगुहायाम्
व्याख्या: श्लोक के अनुसार आत्मा प्राणी के हृदय रूपी गुफा में स्थित है ("जन्तोर्निहितो गुहायाम्")।
14
'अणोरणीयान् महतो महीयान्...' इति मन्त्रः कस्मात् ग्रन्थात् गृहीतः? / यह द्वितीय मंत्र किस उपनिषद से है?
उत्तर: (A) कठोपनिषदः
व्याख्या: छवि में मंत्र के अंत में दिया गया है: (कठ० 1.2.20)।
15
अकतुः धातुप्रसादात् कस्य महिमानं पश्यति? / निष्काम पुरुष ईश्वर की कृपा से किसकी महिमा को देखता है?
उत्तर: (A) आत्मनः
व्याख्या: "तमक्रतुः पश्यति वीतशोको धातुप्रसादान्महिमानमात्मनः।"
16
किम् एव जयते? / किसकी ही विजय होती है?
उत्तर: (A) सत्यम्
व्याख्या: प्रसिद्ध मंत्रांश: "सत्यमेव जयते नानृतम्"।
17
किं न जयते? / किसकी विजय नहीं होती है?
उत्तर: (A) अनृतम्
व्याख्या: "सत्यमेव जयते नानृतम्" - असत्य (अनृत) की कभी विजय नहीं होती।
18
केन देवयानः पन्थाः विततः भवति? / किससे देवलोक का मार्ग प्रशस्त/विस्तृत होता है?
उत्तर: (A) सत्येन
व्याख्या: श्लोक 3: "सत्येन पन्था विततो देवयानः"।
19
आप्तकामाः ऋषयः केन सत्यस्य परमं निधानं प्राप्नुवन्ति? / मोक्ष की इच्छा वाले ऋषि किसके द्वारा सत्य के परम स्थान को प्राप्त करते हैं?
उत्तर: (A) सत्येन
व्याख्या: "येनाक्रमन्त्यृषयो ह्याप्तकामा यत्र तत् सत्यस्य परमं निधानम्।"
20
'सत्यमेव जयते नानृतम्...' इति मन्त्रः कस्मात् उपनिषदः उद्धृतः? / 'सत्यमेव जयते' मंत्र किस उपनिषद से उद्धृत है?
उत्तर: (A) मुण्डकोपनिषदः
व्याख्या: तृतीय मंत्र के अंत में संदर्भ दिया है: (मुण्डक० 3.1.6)।
21
यथा नद्यः स्यन्दमानाः कुत्र अस्तं गच्छन्ति? / जैसे बहती हुई नदियाँ कहाँ विलीन/अस्त हो जाती हैं?
उत्तर: (A) समुद्रे
व्याख्या: श्लोक 4: "यथा नद्यः स्यन्दमानाः समुद्रेऽस्तं गच्छन्ति नामरूपे विहाय।"
22
नद्यः किं विहाय समुद्रे अस्तं गच्छन्ति? / नदियाँ क्या छोड़कर समुद्र में विलीन होती हैं?
उत्तर: (A) नामरूपे
व्याख्या: नदियाँ अपने नाम और रूप को त्यागकर समुद्र में एकाकार हो जाती हैं।
23
विद्वान् किं विमुक्तः भूत्वा परात्परं पुरुषम् उपैति? / विद्वान पुरुष किससे मुक्त होकर परम दिव्य पुरुष (ईश्वर) को प्राप्त करता है?
उत्तर: (A) नामरूपात्
व्याख्या: "तथा विद्वान् नामरूपाद् विमुक्तः परात्परं पुरुषमुपैति दिव्यम्।"
24
'यथा नद्यः स्यन्दमानाः समुद्रे...' इति मन्त्रः कस्मात् उपनिषदः अस्ति? / यह चौथा मंत्र किस उपनिषद का है?
उत्तर: (A) मुण्डकोपनिषदः
व्याख्या: चतुर्थ मंत्र मुण्डकोपनिषद के 3.2.8 से संकलित है।
25
वेदाहमेतं पुरुषं महान्तम् ______ वर्णम्? (रिक्तस्थानं पूरयत)
उत्तर: (A) आदित्य
व्याख्या: श्लोक 5: "वेदाहमेतं पुरुषं महान्तम् आदित्यवर्णं तमसः परस्तात्।"
26
तमः परस्तात् कः वर्णः अस्ति? / अज्ञान/अंधकार से परे कौन से वर्ण वाले महान पुरुष हैं?
उत्तर: (A) आदित्यवर्णः
व्याख्या: ईश्वर को अंधकार से परे सूर्य के समान प्रकाशमान (आदित्यवर्ण) बताया गया है।
27
तमेव विदित्वा मानवः किम् प्रत्येति (अत्येति)? / ज्ञानी पुरुष ईश्वर को जानकर किसे पार कर जाता है?
उत्तर: (A) मृत्युम्
व्याख्या: श्लोक 5: "तमेव विदित्वाति मृत्युमेति नान्यः पन्था विद्यतेऽयनाय।"
28
ज्ञानात् (परमात्मज्ञानात्) ऋते मृत्योः तरणाय अन्यः कः पन्थाः अस्ति? / मृत्यु को तैरने (पार करने) का कोई अन्य मार्ग है?
उत्तर: (A) न कोऽपि
व्याख्या: ईश्वर को जानने के अतिरिक्त परम पद (मोक्ष) पाने का कोई दूसरा मार्ग नहीं है।
29
'वेदाहमेतं पुरुषं महान्तम्...' इति मन्त्रः कस्मात् ग्रन्थात् गृहीतः? / यह पाँचवाँ मंत्र किस उपनिषद से गृहीत है?
उत्तर: (A) श्वेताश्वतरोपनिषदः
व्याख्या: अंतिम मंत्र के अंत में उद्धरण दिया है: (श्वेताश्वतर० 3.8)।
30
'हिरण्मयेन' पदस्य कः अर्थः? / 'हिरण्मयेन' शब्द का क्या अर्थ है?
उत्तर: (A) स्वर्णमयेन
व्याख्या: शब्दार्थ सूची के अनुसार: हिरण्मयेन = स्वर्णमयेन = सोने-सा / ज्योतिर्मय।
31
'पात्रेण' पदस्य अर्थः कः अस्ति? / 'पात्रेण' का अर्थ क्या है?
उत्तर: (A) आवरणेन
व्याख्या: शब्दार्थ: पात्रेण = आवरणेन = पात्र से / आवरण से।
32
'अपिहितम्' पदस्य कः पर्यायः? / 'अपिहितम्' शब्द का अर्थ क्या है?
उत्तर: (A) आच्छादितम्
व्याख्या: शब्दार्थ सूची: अपिहितम् = आच्छादितम् = ढका हुआ।
33
'मुखम्' पदस्य कः अर्थः अत्र वर्णिता? / यहाँ 'मुखम्' पद का क्या अर्थ दिया गया है?
उत्तर: (A) आस्यम् / द्वारम्
व्याख्या: शब्दार्थ: मुखम् = आस्यम्, द्वारम् = मुख, द्वार।
34
'अपावृणु' इति पदस्य कः अर्थः? / 'अपावृणु' का अर्थ क्या है?
उत्तर: (A) अपसारय
व्याख्या: शब्दार्थ सूची के अनुसार: अपावृणु = अपसारय = हटा दें।
35
'दृष्टये' पदस्य कः अर्थः? / 'दृष्टये' शब्द का क्या अर्थ है?
उत्तर: (A) उपलब्धये
व्याख्या: शब्दार्थ: दृष्टये = उपलब्धये = प्राप्ति के लिए।
36
'अणोः' पदस्य कः अर्थः? / 'अणोः' पद का अर्थ क्या है?
उत्तर: (A) सूक्ष्मात्
व्याख्या: शब्दार्थ तालिका: अणोः = सूक्ष्मात् = अणु से, सूक्ष्म से।
37
'वीतशोकः' कः भवति? / 'वीतशोकः' (शोक रहित) कौन हो जाता है?
उत्तर: (A) यः परमात्मानम् पश्यति
व्याख्या: जो व्यक्ति ईश्वर/आत्मा की महिमा का साक्षात्कार कर लेता है, वह शोकरहित हो जाता है।
38
'सत्यमेव जयते नानृतम्' इत्यत्र 'नानृतम्' पदस्य विच्छेदः कः? / 'नानृतम्' का संधि विच्छेद क्या है?
उत्तर: (A) न + अनृतम्
व्याख्या: न (अ) + अनृतम् (अ) = नानृतम् (दीर्घ स्वर संधि)।
39
'स्यान्दमानाः' इति पदस्य कः अर्थः? / 'स्यन्दमानाः' पद का क्या अर्थ है?
उत्तर: (A) प्रवहन्त्यः
व्याख्या: "यथा नद्यः स्यन्दमानाः" का अर्थ है - जिस प्रकार बहती हुई नदियाँ।
40
'विहाय' पदे कः प्रत्ययः अस्ति? / 'विहाय' पद में कौन सा प्रत्यय है?
उत्तर: (A) ल्यप्
व्याख्या: वि (उपसर्ग) + हा (धातु) + ल्यप् प्रत्यय से 'विहाय' (छोड़कर) रूप बनता है।
41
'विदित्वा' पदे कः प्रत्ययः अस्ति? / 'विदित्वा' पद में कौन सा प्रत्यय है?
उत्तर: (A) क्त्वा
व्याख्या: विद् (धातु) + क्त्वा प्रत्यय = विदित्वा (जानकर)।
42
'समुद्रेऽस्तम्' इति पदस्य संधि-विच्छेदः कः? / 'समुद्रेऽस्तम्' का संधि विच्छेद क्या है?
उत्तर: (A) समुद्रे + अस्तम्
व्याख्या: समुद्रे + अस्तम् = समुद्रेऽस्तम् (पूर्वरूप संधि)।
43
'पीयूषम्' (Class 10) अस्य अध्यायस्य पृष्ठ-संख्या का अस्ति? / इस अध्याय की पृष्ठ संख्या क्या है?
उत्तर: (A) 1 एवं 2
व्याख्या: दोनों पृष्ठों के सबसे नीचे क्रमशः पीयूषम् ( 1 ) और ( 2 ) अंकित है।
44
उपनिषदः कस्य पद्यात्मकाः मन्त्राः अत्र सङ्कलिताः? / उपनिषद के किस प्रकार के मंत्र संकलित हैं?
उत्तर: (A) पद्यात्मकाः
व्याख्या: पाठ परिचय में स्पष्ट लिखा है: "उपनिषदां पद्यात्मकाः पञ्च मन्त्राः संकलिताः सन्ति।"
45
'सत्यस्यापिहितम्' पदस्य विच्छेदः कः? / 'सत्यस्यापिहितम्' का संधि विच्छेद क्या होगा?
उत्तर: (A) सत्यस्य + अपिहितम्
व्याख्या: सत्यस्य + अपिहितम् = सत्यस्यापिहितम् (दीर्घ स्वर संधि)।
46
'पुरुषमुपैति' पदस्य संधि-विच्छेदः कः? / 'पुरुषमुपैति' का संधि विच्छेद क्या है?
उत्तर: (A) पुरुषम् + उपैति
व्याख्या: पुरुषम् + उपैति = पुरुषमुपैति।
47
'कथम्' / 'मङ्गलम्' पाठे कस्य महिमा मुख्यतया गीयते? / मङ्गलम् पाठ में मुख्य रूप से किसकी महिमा का गान है?
उत्तर: (A) परमात्मनः
व्याख्या: इस पाठ में ईश्वर/परमात्मा की सर्वव्यापकता और महिमा का ही प्रतिपादन किया गया है।
48
'सत्यधर्मवान्' इत्यस्य कृते श्लोके कः शब्दः प्रयुक्तः? / सत्य धर्म वाले व्यक्ति के लिए श्लोक/शब्दार्थ में कौन सा शब्द आया है?
उत्तर: (A) सत्यधर्माय
व्याख्या: शब्दार्थ सूची के अनुसार: सत्यधर्माय = सत्यधर्मवते = सत्यधर्मवान् के लिए।
49
'अत्येति' पदस्य कः अर्थः अस्ति? / 'अत्येति' पद का क्या अर्थ है?
उत्तर: (A) पारं करोति
व्याख्या: "विदित्वाति मृत्युमेति" का अर्थ है कि ज्ञान द्वारा जीव मृत्यु को पार कर जाता है।
50
'मङ्गलम्' पाठस्य प्रथमो मन्त्रः कः अस्ति? / मङ्गलम् पाठ का पहला मंत्र कौन सा है?
उत्तर: (A) हिरण्मयेन पात्रेण...
व्याख्या: 'मङ्गलम्' पाठ ईशावास्योपनिषद के प्रथम मंत्र "हिरण्मयेन पात्रेण सत्यस्यापिहितं मुखम्" से प्रारंभ होता है।
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