BSEB कक्षा 10 इतिहास — अध्याय 8: प्रेस-संस्कृति एवं राष्ट्रवाद
1. अध्याय परिचय (Introduction)
आधुनिक विश्व के निर्माण और राष्ट्रवाद के प्रसार में मुद्रण तकनीक (प्रिंटिंग प्रेस) तथा प्रेस-संस्कृति की भूमिका अत्यंत निर्णायक रही। छापाखाने के आविष्कार से पहले पुस्तकें हाथ से पांडुलिपि के रूप में लिखी जाती थीं, जो दुर्लभ, महंगी तथा जनसाधारण की पहुँच से बाहर थीं। मुद्रण तकनीक के विकास ने ज्ञान का लोकतांत्रिकरण किया।
भारत में आधुनिक राष्ट्रवाद के उत्थान, स्वतंत्रता संग्राम की वैचारिक पृष्ठभूमि तैयार करने और ब्रिटिश साम्राज्य की दमनकारी नीतियों के विरुद्ध जनमत तैयार करने में पत्र-पत्रिकाओं ने प्रमुख भूमिका निभाई।
2. अध्याय का संक्षिप्त विवरण (Overview)
- मुद्रण तकनीक का प्रारंभिक इतिहास: मुद्रण की तकनीक सबसे पहले पूर्व एशिया (चीन, जापान और कोरिया) में विकसित हुई। चीन में ब्लॉक प्रिंटिंग (काठ की तख्ती पर छपाई) से कागजी मुद्रा और सिविल सेवा की पुस्तकों की छपाई शुरू हुई।
- यूरोप में मुद्रण का प्रवेश: 1295 ई. में मार्को पोलो चीन से ब्लॉक प्रिंटिंग की तकनीक इटली लाया। 15वीं सदी के मध्य में जर्मनी के गुटेनबर्ग ने आधुनिक मुद्रण यंत्र (मूवेबल टाइप) का आविष्कार किया।
- धार्मिक सुधार आंदोलन एवं प्रेस: मार्टिन लूथर के 95 थीसिस (95 Theses) ने धर्मसुधार आंदोलन (Protestant Reformation) की नींव रखी, जिसे मुद्रण ने जन-जन तक पहुँचाया।
- भारत में मुद्रण का आगमन: 16वीं सदी में पुर्तगाली जेसुइट पादरियों द्वारा गोवा में पहला प्रिंटिंग प्रेस लाया गया।
- भारतीय राष्ट्रवाद और प्रेस: राजा राममोहन राय, बाल गंगाधर तिलक, महात्मा गांधी आदि ने समाचार-पत्रों को सामाजिक कुरीतियों के उन्मूलन तथा अंग्रेजों के विरुद्ध राष्ट्रीय चेतना जागृत करने का मुख्य हथियार बनाया।
- ब्रिटिश दमनकारी कानून: भारतीय प्रेस के बढ़ते प्रभाव को दबाने के लिए अंग्रेजों ने 1799 का सेंसरशिप, चार्ल्स मेटकाफ की प्रेस स्वतंत्रता (1835), और लॉर्ड लिटन का कुख्यात वर्नाक्युलर प्रेस एक्ट (1878) लागू किया।
3. प्रमुख बिंदु एवं महत्वपूर्ण वन-लाइनर (Important One-Liners)
विश्व में मुद्रण कला का विकास
- कागज का आविष्कार: चीन में ईसा की दूसरी सदी (लगभग 105 ई.) में त्साई लून (Ts'ai Lun) ने किया।
- ब्लॉक प्रिंटिंग: सबसे पहले चीन में लकड़ी के ठप्पों (Woodblock) द्वारा छपाई की शुरुआत हुई।
- विश्व की पहली मुद्रित पुस्तक: जापान की 'डायमंड सूत्र' (868 ई.) मानी जाती है।
- यूरोप में तकनीक स्थानांतरण: 1295 ई. में प्रसिद्ध खोजी यात्री मार्को पोलो चीन से काठ की छपाई की तकनीक इटली लेकर आया।
- आधुनिक प्रेस के जनक: जर्मनी के मेंज नगर के योहान गुटेनबर्ग ने 1430-1440 के दशक में आधुनिक छापेखाने का आविष्कार किया।
- गुटेनबर्ग द्वारा छापी गई पहली पुस्तक: बाइबिल (Bible), जिसकी 180 प्रतियाँ छापने में करीब 3 साल लगे थे।
- इंग्लैंड में प्रिंटिंग प्रेस: 1476 ई. में विलियम कैक्सटन ने इंग्लैंड में पहला प्रिंटिंग प्रेस स्थापित किया।
मार्टिन लूथर का प्रसिद्ध कथन: "मुद्रण ईश्वर की दी हुई महानतम देन है, यह सबसे बड़ा तोहफा है।"
- इरेस्मस (Erasmus): लातिनी विद्वान और कैथोलिक सुधारक, जिसने मुद्रित पुस्तकों के प्रसार और सस्ती लोकप्रियता की आलोचना की थी।
लुई सेबेस्टियन मर्सिए का कथन: फ्रांसीसी उपन्यासकार मर्सिए ने कहा था: "हे निरंकुश शासकों! अब तुम्हारे काँपने का वक्त आ गया है, आभासी लेखक की कलम के जोर से तुम्हारी सत्ता हिल उठेगी।"
भारत में प्रेस का आगमन एवं विकास
- भारत में प्रथम प्रिंटिंग प्रेस: 1556 ई. में पुर्तगाली जेसुइट ईसाई मिशनरियों द्वारा गोवा में स्थापित किया गया।
- भारत का पहला समाचार-पत्र: 1780 ई. में जेम्स ऑगस्टस हिक्की द्वारा कोलकाता से प्रकाशित 'बंगाल गजट' (Bengal Gazette - The Calcutta General Advertiser)।
- किसी भारतीय द्वारा प्रकाशित पहला अंग्रेजी अखबार: 1816 ई. में गंगाधर भट्टाचार्य द्वारा निकाला गया 'बंगाल गजट'।
- भारतीय प्रेस का अग्रदूत / पुनर्जागरण के जनक: राजा राममोहन राय।
- संवाद कौमुदी (1821): राजा राममोहन राय द्वारा बांग्ला भाषा में प्रकाशित (सती प्रथा के विरोध का प्रमुख मंच)।
- मिरात-उल-अखबार (1822): राजा राममोहन राय द्वारा प्रकाशित पहला फारसी साप्ताहिक अखबार।
- जाम-ए-जहाँनुमा (1822): भारत का पहला उर्दू समाचार-पत्र।
- शम्स-उल-अखबार (1823): फारसी में प्रकाशित अखबार।
- मुंबई समाचार (1822): गुजराती भाषा का पहला दैनिक समाचार-पत्र।
- उदंत मार्तंड (1826): 30 मई 1826 को कोलकाता से पंडित जुगल किशोर शुक्ल द्वारा संपादित हिंदी का पहला समाचार-पत्र। (इसी कारण प्रतिवर्ष 30 मई को 'हिंदी पत्रकारिता दिवस' मनाया जाता है)।
प्रमुख भारतीय समाचार-पत्र, पत्रिकाएँ एवं संपादक
| समाचार-पत्र / पत्रिका | भाषा | संपादक / संस्थापक |
|---|---|---|
| केसरी | मराठी | बाल गंगाधर तिलक |
| मराठा | अंग्रेजी | बाल गंगाधर तिलक |
| अमृत बाजार पत्रिका | बांग्ला / अंग्रेजी | शिशिर कुमार घोष एवं मोतीलाल घोष |
| यंग इंडिया / हरिजन / नवजीवन | अंग्रेजी / गुजराती | महात्मा गांधी |
| अल-हिलाल / अल-बलाग | उर्दू | मौलाना अबुल कलाम आजाद |
| द हिंदू | अंग्रेजी | जी. सुब्रह्मण्यम अय्यर (1878) |
| द बंगाली | अंग्रेजी | सुरेन्द्रनाथ बनर्जी |
| हिंदू पैट्रियाट | अंग्रेजी | हरिश्चंद्र मुखर्जी (नील विद्रोह का समर्थन) |
| कवि वचन सुधा / हरिश्चंद्र मैगजीन | हिंदी | भारतेंदु हरिश्चंद्र |
| प्रताप | हिंदी | गणेश शंकर विद्यार्थी (कानपुर) |
| कॉमरेड | अंग्रेजी | मौलाना मोहम्मद अली जौहर |
| गदर | उर्दू / पंजाबी | लाला हरदयाल (1913, सैन फ्रांसिस्को) |
| इंडिपेंडेंट | अंग्रेजी | मोतीलाल नेहरू |
| सर्चलाइट | अंग्रेजी | सच्चिदानंद सिन्हा / मुरली मनोहर प्रसाद (बिहार) |
| बिहार बंधु (1872) | हिंदी | केशवराम भट्ट (बिहार का पहला हिंदी पत्र) |
ब्रिटिश प्रेस कानून एवं नियंत्रण नीतियां
- प्रेस सेंसरशिप एक्ट (1799): लॉर्ड वेलेस्ली द्वारा नेपोलियन के आक्रमण के भय और ब्रिटिश नीतियों की रक्षा के लिए लागू किया गया।
- लाइसेंसिंग रेगुलेशन एक्ट (1823): जॉन एडम्स द्वारा लाया गया कड़ा कानून, जिसके तहत बिना लाइसेंस अखबार निकालना अपराध घोषित हुआ (इसी कानून के कारण राजा राममोहन राय का 'मिरात-उल-अखबार' बंद हुआ)।
- 'भारतीय प्रेस का मुक्तिदाता' (Liberator of Indian Press): चार्ल्स मेटकाफ (1835 के लिबरेशन ऑफ द इंडियन प्रेस एक्ट के माध्यम से प्रतिबंध हटाने के कारण)।
- गैगिंग एक्ट (Gagging Act - 1857): 1857 की क्रांति के समय लॉर्ड कैनिंग द्वारा लाया गया नियंत्रण कानून।
- वर्नाक्युलर प्रेस एक्ट (Vernacular Press Act - 1878):
- लागूकर्ता: लॉर्ड लिटन।
- उद्देश्य: देसी (भारतीय भाषाई) समाचार-पत्रों पर कड़ा प्रतिबंध लगाना। इसे 'मुंह बंद करने वाला कानून' कहा गया।
- अमृत बाजार पत्रिका: रातों-रात बांग्ला से अंग्रेजी भाषा में बदल गई थी ताकि इस कानून से बचा जा सके।
- रद्दीकरण: 1881 ई. में लॉर्ड रिपन द्वारा इसे निरस्त किया गया।
- न्यूजपेपर्स (इन्साइटमेंट टू ऑफेंसेस) एक्ट (1908): क्रांतिकारी गतिविधियों और राष्ट्रवाद की उग्र सामग्री छापने पर प्रेस जब्त करने का प्रावधान।
- इंडियन प्रेस एक्ट (1910): लॉर्ड मिंटो द्वितीय के समय प्रेस से भारी जमानत राशि (Security Deposit) वसूलने का दमनकारी कानून।
4. बिहार से जुड़े प्रमुख ऐतिहासिक तथ्य (BSEB विशेष)
परीक्षा उपयोगी विशेष तथ्य:
- बिहार बंधु: 1872 ई. में कोलकाता से शुरू हुआ, जो 1874 ई. में पटना लाया गया। यह बिहार का पहला हिंदी समाचार-पत्र था (संस्थापक: केशवराम भट्ट)।
- नूर-उल-अनवार (1853): बिहार (आरा) से प्रकाशित होने वाला पहला उर्दू अखबार।
- बिहार हेराल्ड (1875): गुरुप्रसाद सेन द्वारा शुरू किया गया बिहार का पहला अंग्रेजी साप्ताहिक पत्र।
- द मदरलैंड: 1921 में असहयोग आंदोलन के समय सदाकत आश्रम (पटना) से मौलाना मजहरुल हक द्वारा प्रकाशित पत्र।
- सर्चलाइट: 1918 में सच्चिदानंद सिन्हा और हसन इमाम द्वारा शुरू किया गया अंग्रेजी समाचार-पत्र, जिसने बिहार में राष्ट्रीय आंदोलन को तेज गति दी।
5. मुद्रण क्रांति और राष्ट्रवाद का अंतर्संबंध
- राष्ट्रीय चेतना का प्रसार: मुद्रण ने देश के अलग-अलग भाषाई क्षेत्रों के लोगों को औपनिवेशिक शोषण, आर्थिक दोहन (Drain of Wealth), और राजनीतिक अधिकारों के मुद्दों पर एक साझा मंच प्रदान किया।
- सामाजिक-धार्मिक सुधार: बाल विवाह, सती प्रथा, जाति-प्रथा और अस्पृश्यता जैसी कुरीतियों के विरुद्ध जनमत तैयार करने में पत्र-पत्रिकाओं ने प्रमुख भूमिका निभाई।
- क्रांतिकारी राष्ट्रवाद को बढ़ावा: बालगंगाधर तिलक के 'केसरी' और लाला हरदयाल के 'गदर' जैसे पत्रों ने युवाओं में ब्रिटिश सत्ता के विरुद्ध सशस्त्र क्रांति और बलिदान की भावना भरी।
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