बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (BSEB) कक्षा 10 इतिहास
अध्याय 7: "व्यापार और भूमंडलीकरण" — 50 महत्वपूर्ण प्रश्न एवं उत्तर
अति-लघु उत्तरीय प्रश्न (One-Liner / 1 अंक वाले प्रश्न)
1. प्राचीन काल में किस स्थल मार्ग से एशिया और यूरोप का व्यापार होता था?
रेशम मार्ग (Silk Route) से।
2. पहला विश्व बाजार के रूप में कौन-सा शहर उभरकर आया?
सिकंदरिया (Alexandria), जिसकी स्थापना अलेक्जेंडर (सिकंदर) ने मिस्र में की थी।
3. आधुनिक युग में 'भूमंडलीकरण' (Globalization) की शुरुआत किस दशक से मानी जाती है?
1990 के दशक से।
4. गिरमिटिया मजदूर किसे कहा जाता था?
अनुबंधित (एग्रीमेंट के तहत काम करने वाले) मजदूरों को।
5. भारत के किस क्षेत्र से अधिकांश गिरमिटिया मजदूर बाहर भेजे जाते थे?
उत्तर प्रदेश के पूर्वी भाग और पश्चिमी बिहार (भोजपुर, छपरा, सीवान आदि) से।
6. विश्वव्यापी आर्थिक मंदी (Great Depression) की शुरुआत किस वर्ष हुई?
1929 ई. में (अक्टूबर 1929 के वॉल स्ट्रीट क्रैश से)।
7. आर्थिक मंदी का सबसे गंभीर प्रभाव किस देश पर पड़ा?
संयुक्त राज्य अमेरिका (USA) पर।
8. ब्रिटेन वुड्स सम्मेलन (Bretton Woods Conference) किस वर्ष आयोजित हुआ?
जुलाई 1944 ई. में (न्यू हैंपशायर, अमेरिका में)।
9. 'ब्रिटेन वुड्स की जुड़वां संतान' (Bretton Woods Twins) किन्हें कहा जाता है?
अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) और विश्व बैंक (World Bank) को।
10. विश्व व्यापार संगठन (WTO) की स्थापना कब हुई थी?
1 जनवरी 1995 ई. को (GATT के स्थान पर)।
11. G-77 की स्थापना किन देशों द्वारा की गई थी?
विकासशील देशों द्वारा (अपनी आर्थिक संप्रभुता और नई अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक प्रणाली की मांग हेतु)।
12. कॉर्न लॉ (Corn Law) किस देश में लागू किया गया था?
ब्रिटेन में (मक्के के आयात पर रोक लगाने हेतु)।
13. 'दी कॉमर्स ऑफ नेशन' (The Commerce of Nation) पुस्तक के लेखक कौन थे?
कॉन्डलिफ (J.B. Condliffe)।
14. अमेरिका के शेयर बाजार का मुख्य केंद्र कौन-सा है जो 1929 में धराशायी हुआ था?
वॉल स्ट्रीट एक्सचेंज (Wall Street Exchange)।
15. ओपेक (OPEC) की स्थापना कब हुई थी?
1960 ई. में (बगदाद सम्मेलन द्वारा)।
16. न्यू डील (New Deal) नीति किस अमेरिकी राष्ट्रपति ने लागू की थी?
फ्रेंकलिन डी. रूजवेल्ट (Franklin D. Roosevelt) ने।
17. भारत में नई आर्थिक नीति (NEP) किस वर्ष लागू की गई?
1991 ई. में (उदारीकरण, निजीकरण और वैश्वीकरण - LPG मॉडल)।
18. त्रिनिदाद में मोहर्रम के मेले को किस नाम से जाना जाता था?
होसे (Hosay) - जिसमें सभी धर्म और नस्ल के मजदूर भाग लेते थे।
19. चटनी म्यूजिक (Chutney Music) किस क्षेत्र में लोकप्रिय हुआ?
त्रिनिदाद और गुयाना में (भारतीय प्रवासियों द्वारा विकसित संगीत)।
20. सिल्क रूट मुख्य रूप से किन दो महाद्वीपों को जोड़ता था?
एशिया को यूरोप और उत्तरी अफ्रीका से।
लघु उत्तरीय प्रश्न (Short Answer Questions / 2-3 अंक वाले प्रश्न)
21. भूमंडलीकरण (वैश्वीकरण) से आप क्या समझते हैं?
भूमंडलीकरण वह प्रक्रिया है जिसके माध्यम से दुनिया की विभिन्न अर्थव्यवस्थाओं, संस्कृतियों, सूचनाओं और समाजों का एकीकरण होता है। इसमें वस्तुओं, सेवाओं, पूंजी, तकनीक और मानव संसाधन का बिना किसी भौगोलिक बाधा के अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मुक्त प्रवाह होता है।
22. विश्व बाजार (World Market) किसे कहते हैं?
वैसा बाजार जहाँ विश्व के तमाम देशों की वस्तुएं आम उपभोक्ताओं को बिक्री के लिए उपलब्ध होती हैं, उसे विश्व बाजार कहते हैं। उदाहरण के लिए, 19वीं सदी में मैनचेस्टर, लिवरपूल और प्राचीन काल में सिकंदरिया विश्व बाजार के प्रमुख केंद्र थे।
23. गिरमिटिया मजदूर कौन थे? उन्हें किन देशों में ले जाया जाता था?
औपनिवेशिक काल में एक निश्चित समझौते (एग्रीमेंट या 'गिरमिट') के तहत तय अवधि के लिए बागानों में काम करने वाले अनुबंधित मजदूरों को गिरमिटिया कहा जाता था। उन्हें फिजी, मॉरीशस, त्रिनिदाद, टोबैगो, गुयाना और सूरीनाम जैसे देशों में गन्ने और चाय के बागानों में मजदूरी के लिए ले जाया जाता था।
24. रेशम मार्ग (Silk Route) का ऐतिहासिक महत्व क्या था?
रेशम मार्ग प्राचीन और मध्यकाल में चीन से लेकर मध्य एशिया, भूमध्य सागर और यूरोप तक फैला विशाल व्यापारिक मार्ग था। इसके जरिए चीनी रेशम, भारतीय मसाले, चीनी मिट्टी के बर्तन पश्चिम भेजे जाते थे और बदले में सोना-चांदी एशिया आता था। यह व्यापार के साथ-साथ बौद्ध धर्म, ईसाई धर्म और इस्लाम के प्रसार का भी मुख्य जरिया बना।
25. 1929 की आर्थिक मंदी के कोई दो प्रमुख कारण लिखें।
- कृषि क्षेत्र में अति-उत्पादन: युद्ध के बाद अनाजों का अत्यधिक उत्पादन हुआ, जिससे कीमतें गिर गईं और किसानों की आय कम हो गई।
- अमेरिकी ऋण प्रणाली का लड़खड़ाना: अमेरिका ने यूरोपीय देशों को कर्ज देना बंद कर दिया तथा घरेलू स्तर पर कर्ज वसूली सख्त कर दी, जिससे उद्योग और बैंक ठप पड़ गए।
26. कॉर्न लॉ (Corn Law) क्या था? इसे क्यों समाप्त किया गया?
ब्रिटेन के बड़े भूस्वामियों के दबाव में सरकार ने बाहर से आने वाले सस्ते मक्के (कॉर्न) के आयात पर प्रतिबंध लगा दिया था, जिसे कॉर्न लॉ कहा गया। इसके कारण ब्रिटेन में खाद्य सामग्री के दाम बहुत बढ़ गए। उद्योगपतियों और शहरी जनता के कड़े विरोध के बाद सरकार को इसे समाप्त करना पड़ा।
27. ब्रिटेन वुड्स सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य क्या था?
द्वितीय विश्व युद्ध के बाद तबाह हो चुकी वैश्विक अर्थव्यवस्था को स्थिर करना, औद्योगिक देशों में आर्थिक स्थिरता और पूर्ण रोजगार बनाए रखना तथा सदस्य देशों के बीच मौद्रिक और वित्तीय सहयोग को बढ़ावा देना इसका मुख्य उद्देश्य था।
28. बहुराष्ट्रीय कंपनी (MNC) किसे कहते हैं? उदाहरण दें।
वह कंपनी जो अपने गृह देश के अलावा एक या एक से अधिक देशों में उत्पादन, परिसंपत्तियों और सेवाओं का स्वामित्व या नियंत्रण रखती है, बहुराष्ट्रीय कंपनी कहलाती है। जैसे— सैमसंग, टाटा मोटर्स, कोका-कोला, नोकिया आदि।
29. आर्थिक मंदी का भारतीय कृषि और किसानों पर क्या प्रभाव पड़ा?
1929 की मंदी से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे माल के दाम आधे हो गए। भारत से गेहूं और पटसन (जूट) का निर्यात गिर गया। किसानों की उपज की कीमतें आधी रह गईं, लेकिन ब्रिटिश सरकार ने लगान माफ नहीं किया, जिससे किसान गहरे कर्ज में डूब गए और उन्हें अपने सोने-गहने बेचने पड़े।
30. 'न्यू डील' (New Deal) क्या थी?
1933 में अमेरिकी राष्ट्रपति फ्रेंकलिन डी. रूजवेल्ट ने आर्थिक मंदी के दुष्प्रभावों से उबरने के लिए 'न्यू डील' की घोषणा की। इसके तहत बैंकिंग प्रणाली में सुधार, बेरोजगारों को सार्वजनिक निर्माण कार्यों में रोजगार, किसानों को वित्तीय सब्सिडी और सामाजिक सुरक्षा योजनाएं लागू की गईं।
31. ओपेक (OPEC) क्या है? इसके गठन का क्या उद्देश्य था?
ओपेक (Organization of the Petroleum Exporting Countries) तेल निर्यातक देशों का एक स्थायी संगठन है। इसका मुख्य उद्देश्य सदस्य देशों की पेट्रोलियम नीतियों का समन्वय करना, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों को स्थिर रखना और तेल कंपनियों के मनमाने शोषण से अपने आर्थिक हितों की रक्षा करना है।
32. G-77 देशों की स्थापना क्यों हुई?
द्वितीय विश्व युद्ध के बाद स्वतंत्र हुए अधिकांश विकासशील देशों को ब्रिटेन वुड्स संस्थाओं (IMF और विश्व बैंक) से अपेक्षित लाभ नहीं मिला। पश्चिमी देशों के आर्थिक वर्चस्व का मुकाबला करने और अपनी कच्ची सामग्री का उचित मूल्य पाने के लिए विकासशील देशों ने एकजुट होकर 1964 में G-77 समूह बनाया।
33. द्वितीय विश्व युद्ध के बाद अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की क्या भूमिका रही?
IMF ने युद्ध के बाद सदस्य देशों के भुगतान संतुलन (Balance of Payments) के घाटे को पूरा करने के लिए वित्तीय सहायता दी तथा विभिन्न देशों की मुद्राओं की विनिमय दरों को स्थिर रखने में केंद्रीय भूमिका निभाई।
34. सिकंदरिया नगर का विश्व बाजार के रूप में महत्व स्पष्ट करें।
मिस्र में नील नदी के मुहाने पर बसा सिकंदरिया तीनों महाद्वीपों (एशिया, अफ्रीका और यूरोप) के व्यापारिक मार्गों के संगम पर स्थित था। यह प्राचीन विश्व का सबसे बड़ा बंदरगाह बना, जहाँ रेशम, मसाले, इत्र, हाथीदांत और अनाज का अंतरराष्ट्रीय व्यापार होता था।
35. 19वीं सदी में भारत से गिरमिटिया मजदूरों के प्रवासन के क्या कारण थे?
- ब्रिटिश नीतियों के कारण भारतीय कुटीर एवं हस्तशिल्प उद्योग नष्ट हो गए।
- लगान की ऊंची दरें और अकाल के कारण किसान भूमिहीन और कंगाल हो गए।
- नए उपनिवेशों में गन्ने की खेती के लिए सस्ते और अनुशासित श्रम की भारी मांग थी, जिसके झांसे में एजेंटों ने इन गरीबों को फंसाया।
36. आर्थिक महामंदी से अमेरिकी बैंकिंग व्यवस्था कैसे चरमराई?
वॉल स्ट्रीट शेयर बाजार क्रैश होते ही निवेशकों ने घबराकर बैंकों से जमा पूंजी निकालनी शुरू कर दी। चूंकि बैंकों ने अत्यधिक अनुत्पादक कर्ज बांट रखे थे, कर्जदार पैसा लौटाने में असमर्थ रहे। परिणामस्वरूप लगभग 4,000 से अधिक बैंक दिवालिया हो गए और बंद हो गए।
37. 'होसे' (Hosay) मेला क्या था और यह सांस्कृतिक समावेशन का प्रतीक कैसे बना?
त्रिनिदाद में भारतीय मजदूरों द्वारा मुहर्रम के जुलूस को 'होसे' नाम दिया गया। इसमें केवल मुस्लिम ही नहीं, बल्कि हिंदू, अफ्रीकी मूल के मजदूर और अन्य समुदाय भी समान रूप से शामिल होते थे। यह विभिन्न संस्कृतियों के घुलने-मिलने का अनोखा उदाहरण बना।
38. अप्रत्यक्ष कर (Tariff) और संरक्षणवाद (Protectionism) से वैश्विक व्यापार पर क्या असर पड़ा?
1929 की मंदी के दौरान अमेरिका और यूरोपीय देशों ने अपने घरेलू उद्योगों को बचाने के लिए आयात पर भारी सीमा शुल्क (Tariff) लगा दिया। इस संरक्षणवादी नीति से अंतरराष्ट्रीय व्यापार लगभग ठप हो गया और मंदी और ज्यादा गंभीर हो गई।
39. सूचना प्रौद्योगिकी (IT) ने भूमंडलीकरण को कैसे गति दी?
कंप्यूटर, इंटरनेट और मोबाइल संचार के विकास से विश्व के किसी भी कोने में डेटा, वित्तीय लेनदेन और सूचनाएं पलक झपकते पहुँचने लगीं। इसने आउटसोर्सिंग (BPO) और वैश्विक ई-कॉमर्स को जन्म देकर दुनिया को एक 'ग्लोबल विलेज' में बदल दिया।
40. उदारीकरण (Liberalization) और निजीकरण (Privatization) में क्या अंतर है?
- उदारीकरण: सरकार द्वारा उद्योगों और व्यापार पर लगाए गए अनावश्यक प्रशासनिक प्रतिबंधों, लाइसेंस और कोटा प्रणाली को समाप्त या शिथिल करना।
- निजीकरण: सरकारी स्वामित्व वाले उपक्रमों या सार्वजनिक संपत्तियों के प्रबंधन और हिस्सेदारी को निजी हाथों में सौंपना।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Long Answer Questions / 4-5 अंक वाले प्रश्न)
41. 1929 की विश्वव्यापी आर्थिक महामंदी के प्रमुख कारणों और इसके वैश्विक प्रभावों की विस्तृत समीक्षा करें।
1929 की आर्थिक मंदी आधुनिक विश्व इतिहास की सबसे विनाशकारी मंदी थी:
- प्रमुख कारण:
- कृषि में अति-उत्पादन: प्रथम विश्व युद्ध के बाद कृषि उत्पादन चरम पर पहुँचा जिससे अनाजों की कीमतें गिरीं, किसानों की क्रय शक्ति समाप्त हो गई।
- अमेरिकी पूंजी पर अत्यधिक निर्भरता: यूरोप के देश पुनर्निर्माण के लिए अमेरिकी कर्जों पर टिके थे। अमेरिका ने मंदी की आहट पाते ही ऋण वापस बुला लिए।
- वॉल स्ट्रीट क्रैश (1929): शेयर बाजार में अत्यधिक सट्टेबाजी के कारण 24 और 29 अक्टूबर 1929 को शेयरों के दाम औंधे मुंह गिरे, जिसने संपूर्ण वित्तीय ढांचा हिला दिया।
- वैश्विक प्रभाव:
- अमेरिका में भारी बेरोजगारी फैली, लाखों लोग सड़कों पर आ गए और उत्पादन में 40% तक गिरावट आई।
- जर्मनी की अर्थव्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई, जिसने आगे चलकर हिटलर और नाजीवाद के उदय को जन्म दिया।
- अंतरराष्ट्रीय व्यापार में 60% से अधिक की गिरावट दर्ज की गई।
42. 19वीं शताब्दी में विश्व बाजार के स्वरूप और इसकी विशेषताओं का वर्णन करें।
औद्योगिक क्रांति के बाद 19वीं सदी में पहली बार एक एकीकृत विश्व बाजार का निर्माण हुआ:
- कच्चे माल और तैयार माल का चक्र: ब्रिटेन, फ्रांस जैसे औद्योगिक देश कच्चे माल (कपास, रबर, खनिज) के आयातक बने और तैयार औद्योगिक वस्तुओं के निर्यातक। एशिया और अफ्रीका के देश औपनिवेशिक मंडी बनकर रह गए।
- परिवहन और संचार का जाल: वाष्पचालित जहाजों (Steamships) और रेलवे के विस्तार ने दूर-दराज के भीतरी इलाकों को बंदरगाहों और वैश्विक बाजारों से जोड़ दिया।
- तीन प्रकार के अंतरराष्ट्रीय प्रवाह: अर्थशास्त्रियों के अनुसार इसमें तीन मुख्य प्रवाह थे— व्यापार का प्रवाह (वस्तुओं का आदान-प्रदान), श्रम का प्रवाह (लाखों मजदूरों का पलायन), और पूंजी का प्रवाह (अल्पकालिक और दीर्घकालिक विदेशी निवेश)।
43. भूमंडलीकरण के भारत पर पड़े सकारात्मक और नकारात्मक प्रभावों का आलोचनात्मक मूल्यांकन करें।
1991 के आर्थिक सुधारों के बाद भारत तेजी से वैश्विक अर्थव्यवस्था से जुड़ा:
- सकारात्मक प्रभाव:
- विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) में भारी वृद्धि हुई और विदेशी मुद्रा भंडार मजबूत हुआ।
- सूचना प्रौद्योगिकी (IT) और सेवा क्षेत्र (BPO) में भारत दुनिया का अग्रणी देश बना, जिससे लाखों रोजगार सृजित हुए।
- भारतीय उपभोक्ताओं को बेहतर गुणवत्ता वाली विदेशी वस्तुएं प्रतिस्पर्धी दामों पर मिलने लगीं।
- टाटा, इंफोसिस जैसी भारतीय कंपनियां खुद बहुराष्ट्रीय कंपनियां बनकर उभरीं।
- नकारात्मक प्रभाव:
- बहुराष्ट्रीय कंपनियों की प्रतिस्पर्धा के आगे भारत के कई लघु एवं कुटीर उद्योग बंद हो गए।
- कृषि क्षेत्र में सरकारी सहायता घटने और बहुराष्ट्रीय बीजों की ऊंची लागत से किसानों पर कर्ज का बोझ बढ़ा।
- अमीर और गरीब के बीच की आर्थिक खाई और अधिक चौड़ी हुई।
44. ब्रिटेन वुड्स प्रणाली (Bretton Woods System) क्या थी? इसने द्वितीय विश्व युद्ध के बाद की अर्थव्यवस्था को कैसे प्रभावित किया?
जुलाई 1944 में अमेरिका के न्यू हैंपशायर में 44 देशों के प्रतिनिधियों का एक सम्मेलन हुआ, जिसे ब्रिटेन वुड्स सम्मेलन कहा जाता है:
- संस्थागत ढांचा: इसके तहत दो प्रमुख वैश्विक वित्तीय संस्थाएं स्थापित हुईं—
- अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF): बाह्य असंतुलन और मुद्रा दरों की स्थिरता के लिए।
- विश्व बैंक (IBRD): युद्ध से तबाह देशों के पुनर्निर्माण और विकास के लिए।
- मुद्रा प्रणाली: इसमें फिक्स्ड एक्सचेंज रेट (स्थिर विनिमय दर) व्यवस्था अपनाई गई, जिसमें दुनिया की मुद्राओं को अमेरिकी डॉलर से और डॉलर को सोने ($35 प्रति औंस) से जोड़ा गया।
- प्रभाव: इसने पश्चिमी औद्योगिक देशों और जापान में आर्थिक स्थिरता, व्यापार वृद्धि और तेजी से औद्योगीकरण का मार्ग प्रशस्त किया। हालांकि, 1970 के दशक में डॉलर के संकट के कारण यह व्यवस्था टूट गई।
45. औपनिवेशिक काल में भारतीय अर्थव्यवस्था पर औपनिवेशिक व्यापारिक नीतियों के विनाशकारी प्रभावों की व्याख्या करें।
ईस्ट इंडिया कंपनी और बाद में ब्रिटिश क्राउन की नीतियों ने भारत को आर्थिक रूप से पंगु बना दिया:
- वि-औद्योगीकरण (De-industrialization): ब्रिटेन की मशीनों से बने सस्ते कपड़ों ने भारत के पारंपरिक हथकरघा और कपड़ा उद्योग को तबाह कर दिया। ढाका और मुर्शिदाबाद जैसे कपड़ा केंद्र उजड़ गए।
- व्यापार की दिशा में बदलाव: भारत जो सदियों से तैयार सूती और रेशमी वस्त्रों का दुनिया में सबसे बड़ा निर्यातक था, उसे केवल कच्चे माल (कच्चा कपास, नील, चाय, अफीम) का निर्यातक बना दिया गया।
- धन का निष्कासन (Drain of Wealth): दादाभाई नौरोजी के अनुसार भारत का राजस्व, प्रशासनिक खर्चे, गृह प्रभार (Home Charges) और अधिकारियों की पेंशन के रूप में अथाह धन ब्रिटेन भेजा गया, जिससे भारत में पूंजी निर्माण नहीं हो सका।
46. गिरमिटिया व्यवस्था (Indentured Labour System) के स्वरूप और मजदूरों की जीवन-स्थितियों का सजीव चित्रण करें।
19वीं सदी में दास प्रथा की समाप्ति के बाद बागान मालिकों ने सस्ते श्रम के लिए गिरमिटिया प्रथा शुरू की, जिसे इतिहासकार 'नई दास प्रथा' भी कहते हैं:
- भर्ती का तरीका: दलाल (एजेंट) झूठे वादे करके, गंतव्य की दूरी और काम की प्रकृति छिपाकर गरीब ग्रामीणों को अनुबंधित करते थे।
- कार्यस्थल पर स्थितियां: फिजी, कैरेबियन देशों और मॉरीशस में उनसे दिन में 12 से 14 घंटे तक कठोर शारीरिक श्रम कराया जाता था। मजदूरी बेहद कम थी और रहने की जगह गंदी और अमानवीय थी।
- अधिकारविहीन जीवन: यदि कोई मजदूर काम से भागने की कोशिश करता, तो उसे जेल में डाल दिया जाता था और कोड़े मारे जाते थे।
- सांस्कृतिक प्रतिरोध: विपरीत परिस्थितियों में भी इन मजदूरों ने अपनी संस्कृति को बचाए रखा और चटनी संगीत, रामलीला और होसे मेले जैसे नए सांस्कृतिक रूप विकसित किए।
47. अठारहवीं और उन्नीसवीं सदी में अंतरराष्ट्रीय व्यापार के विकास में तकनीकी नवाचारों की भूमिका स्पष्ट करें।
तकनीक ने विश्व व्यापार की गति और भूगोल को पूरी तरह बदल दिया:
- रेलवे का विस्तार: रेलवे ने बंदरगाहों को देशों के भीतरी उत्पादन क्षेत्रों से जोड़ा, जिससे गेहूं, कोयला और कपास जैसे भारी माल की ढुलाई सस्ती और तेज हुई।
- वाष्प चालित जहाज (Steamships): भाप से चलने वाले विशाल जहाजों ने महासागरों की दूरियां घटा दीं और मालवहन क्षमता को कई गुना बढ़ा दिया।
- रेफ्रिजरेटेड जहाज (Refrigerated Ships): 1870 के दशक में शीतलन तकनीक वाले जहाज आने से अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया से यूरोप तक मांस का परिवहन संभव हुआ। इससे यूरोप में गरीबों को भी सस्ता मांस मिलने लगा।
- टेलीग्राफ: 1860 के दशक में समुद्र के नीचे बिछाए गए टेलीग्राफ केबलों ने लंदन, न्यूयॉर्क और बंबई के व्यापारियों के बीच सूचनाओं का तुरंत आदान-प्रदान सुगम बनाया।
48. प्राचीन काल से आधुनिक काल तक व्यापारिक मार्गों के विकास का ऐतिहासिक अनुक्रम स्पष्ट करें।
व्यापारिक मार्गों का इतिहास सभ्यता के विस्तार का इतिहास रहा है:
- प्राचीन काल: मुख्य रूप से रेशम मार्ग (Silk Route) और समुद्री तटीय मार्ग सक्रिय थे, जो भारत, चीन, रोम और फारस को जोड़ते थे।
- मध्यकाल: अरब व्यापारियों ने हिंद महासागर और भूमध्य सागर पर व्यापारिक नियंत्रण बनाया। कैरावन मार्गों द्वारा अफ्रीका और एशिया के बीच मसाले व सोना ले जाया जाता था।
- भौगोलिक खोजों का दौर (15वीं-16वीं सदी): 1498 में वास्को डी गामा द्वारा केप ऑफ गुड होप के रास्ते भारत की खोज और कोलंबस द्वारा अमेरिका की खोज ने अटलांटिक महासागर को वैश्विक व्यापार का नया केंद्र बना दिया।
- आधुनिक काल: 1869 में स्वेज नहर और 1914 में पनामा नहर के खुलने से समुद्री दूरियां हजारों मील कम हो गईं, जिससे आधुनिक वैश्विक व्यापार तंत्र का निर्माण हुआ।
49. नई अंतरराष्ट्रीय आर्थिक प्रणाली (NIEO) क्या थी और विकासशील देशों ने इसकी मांग क्यों की?
1970 के दशक में G-77 के विकासशील देशों ने 'नई अंतरराष्ट्रीय आर्थिक प्रणाली' (New International Economic Order) की मांग उठाई:
- मांग के प्रमुख कारण:
- विकासशील देशों के कच्चे माल के दाम लगातार गिर रहे थे, जबकि विकसित देशों से आयातित औद्योगिक मशीनरी महंगी हो रही थी।
- बहुराष्ट्रीय कंपनियां इन देशों के प्राकृतिक संसाधनों का अनियंत्रित दोहन कर रही थीं और लाभ अपने देश ले जा रही थीं।
- NIEO के मुख्य उद्देश्य:
- अपने प्राकृतिक संसाधनों पर विकासशील देशों का पूर्ण राष्ट्रीय संप्रभु नियंत्रण हो।
- कच्चे माल का उचित और लाभकारी मूल्य मिले।
- विकसित देशों के बाजारों में विकासशील देशों के निर्मित सामानों को आसान पहुंच मिले।
- पश्चिमी देशों से आधुनिक तकनीक का सस्ता और आसान हस्तांतरण हो।
50. प्रथम विश्व युद्ध और द्वितीय विश्व युद्ध के बीच की अवधि (अंतर-युद्ध काल) में वैश्विक व्यापार में आए बदलावों की समीक्षा करें।
1914 से 1939 के बीच का समय अंतरराष्ट्रीय आर्थिक अस्थिरता का दौर था:
- ब्रिटेन के आर्थिक वर्चस्व का अंत: युद्ध से पहले ब्रिटेन दुनिया का सबसे बड़ा कर्जदाता था, लेकिन युद्ध के खर्चों ने उसे अमेरिका का कर्जदार बना दिया। अब वैश्विक आर्थिक शक्ति का केंद्र लंदन से हटकर न्यूयॉर्क (अमेरिका) बन गया।
- मुद्रा अस्थिरता और अति-मुद्रास्फीति (Hyperinflation): जर्मनी जैसे युद्ध में पराजित देशों पर भारी क्षतिपूर्ति लादने से उनकी मुद्रा 'मार्क' का मूल्य शून्य के बराबर हो गया।
- 1929 की महामंदी: 1929 में शेयर बाजार गिरने से वैश्विक उत्पादन और रोजगार तबाह हो गया, जिसने देशों को मुक्त व्यापार छोड़कर अपने-अपने बाजारों की घेराबंदी (टैरिफ दीवारें) करने पर विवश कर दिया।
- तानाशाही का उदय: आर्थिक संकट के कारण इटली में फासीवाद और जर्मनी में नाजीवाद का उदय हुआ, जिसने अंततः दुनिया को द्वितीय विश्व युद्ध की ओर धकेल दिया।
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