BSEB कक्षा 10 इतिहास — अध्याय 6: शहरीकरण एवं शहरी जीवन
1. अध्याय परिचय (Introduction)
औद्योगीकरण और आधुनिकीकरण की प्रक्रिया ने मानव सभ्यता के रहन-सहन और बस्तियों के स्वरूप को आमूल-चूल बदल दिया। 18वीं सदी के उत्तरार्ध से शुरू हुए औद्योगिक विकास ने गाँवों से शहरों की ओर बड़े पैमाने पर पलायन को जन्म दिया, जिससे शहरीकरण (Urbanization) की गति तेज हुई।
अध्याय 'शहरीकरण एवं शहरी जीवन' शहरों के विकास के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक आयामों का विश्लेषण करता है। यह 19वीं सदी के दुनिया के सबसे बड़े औद्योगिक महानगर लंदन तथा भारत के प्रमुख व्यापारिक व औद्योगिक केंद्र बंबई (मुंबई) और बिहार के ऐतिहासिक केंद्र पटना के विकास, संरचना, स्लम-संस्कृति तथा जीवन-शैलियों का तुलनात्मक अध्ययन प्रस्तुत करता है।
2. अध्याय का संक्षिप्त विवरण (Overview)
- शहरीकरण की पृष्ठभूमि: कृषि आधारित ग्रामीण अर्थव्यवस्था से उद्योग और सेवा आधारित शहरी अर्थव्यवस्था में रूपांतरण की प्रक्रिया शहरीकरण कहलाती है।
- लंदन — विश्व का पहला आधुनिक महानगर: औद्योगिक क्रांति के कारण इंग्लैंड का लंदन शहर वैश्विक व्यापार, वित्त और उत्पादन का केंद्र बना। मजदूरों की भीड़, आवास संकट, और प्रदूषण की समस्या ने शहर के पुनर्गठन को बाध्य किया।
- सामाजिक जीवन और वर्ग-विभाजन: शहरों ने व्यक्तिवाद और स्वतंत्रता को बढ़ावा दिया, लेकिन साथ ही अमीर और गरीब के बीच गहरी खाई बनाई। 'टेनेमेंट्स' (चालें/गंदी बस्तियां) और 'चार्टिज्म' आंदोलन इसी की उपज थे।
- शहरी सुधार व नगर नियोजन: लंदन में भूमिगत रेलवे (Underground Railway), सीवरेज सिस्टम तथा एबेनेजर हॉवर्ड की 'गार्डन सिटी' (Garden City) की योजना। पेरिस में बैरन हॉसमैन का पुनर्निर्माण।
- भारत में औपनिवेशिक शहरीकरण: प्रेसीडेंसी शहरों (बंबई, कलकत्ता, मद्रास) का विकास। भारत में एक ओर पारंपरिक वि-शहरीकरण (De-urbanization) हुआ, तो दूसरी ओर बंदरगाह आधारित आधुनिक शहरों का विस्तार हुआ।
- बंबई (मुंबई) — सपनों का शहर: सात टापुओं का नगर, सूती कपड़ा मिलों का केंद्र, चॉल संस्कृति, और भूमि पुनर्ग्रहण (Reclamation) परियोजनाएँ।
- बिहार और पटना का ऐतिहासिक नगर स्वरूप: प्राचीन पाटलिपुत्र से शेरशाह सूरी के समय के पुनरुद्धार, मीर कासिम काल, गोलघर निर्माण और 1912 में बिहार की राजधानी बनने की ऐतिहासिक यात्रा।
3. प्रमुख बिंदु एवं महत्वपूर्ण वन-लाइनर (Important One-Liners)
शहरीकरण की सामान्य अवधारणा एवं यूरोपीय परिप्रेक्ष्य
- शहरीकरण (Urbanization): वह प्रक्रिया जिसके द्वारा कोई समाज या क्षेत्र ग्रामीण से शहरी चरित्र में परिवर्तित होता है।
- शहरी जीवन के तीन मुख्य निर्धारक तत्व: जनसंख्या का घनत्व, गैर-कृषि व्यवसायों (उद्योग, व्यापार, सेवा) की प्रधानता, तथा सामाजिक विविधता।
- 1850 तक इंग्लैंड की आबादी: इंग्लैंड की 50% से अधिक आबादी शहरों में रहने लगी थी; इंग्लैंड ऐसा पहला देश था।
- लंदन की आबादी: 1810 ई. में लंदन की आबादी लगभग 10 लाख थी, जो 1880 ई. तक बढ़कर 40 लाख से अधिक हो गई।
- चार्ल्स बूथ (Charles Booth): 1887 में लंदन के ईस्ट एंड में गरीबों और मजदूरों के जीवन स्तर पर पहला विस्तृत सामाजिक सर्वेक्षण करने वाला व्यक्ति; उसने पाया कि लंदन के 20% से अधिक लोग अत्यंत विपन्नता में जी रहे थे।
- टेनेमेंट्स (Tenements): कामगारों के लिए बनाए गए अत्यधिक भीड़भाड़ वाले, अस्वस्थ और संकीर्ण बहुमंजिला मकान।
- परोपकारी नगर सुधारक: ऑक्टेविया हिल और पीबॉडी जैसे समाज सुधारकों ने गरीबों के लिए सुरक्षित और हवादार आवास बनाने की वकालत की।
लंदन का नगर-नियोजन, परिवहन एवं जन आंदोलन
- विश्व की पहली भूमिगत रेल (Underground Railway / London Tube):
- शुरुआत: 10 जनवरी 1863।
- पहला मार्ग: पैडिंगटन (Paddington) से फैरिंगडन स्ट्रीट (Farringdon Street) के बीच।
- प्रभाव: शहर के घने और गंदे इलाकों से लोगों का उपनगरों (Suburbs) की ओर बसना संभव हुआ।
- गार्डन सिटी (Garden City / बगीचों का शहर) की अवधारणा:
- प्रतिपादक: एबेनेजर हॉवर्ड (Ebenezer Howard) (1898 ई.)।
- उद्देश्य: कामगारों के लिए खुले पार्क, पेड़-पौधों और ताजी हवा से युक्त योजनाबद्ध रिहायशी शहर बनाना।
- उदाहरण: इस योजना पर आधारित शहर लेचवर्थ (Letchworth) और वेलविन (Welwyn) बनाए गए।
- पेरिस का आधुनिकीकरण (Haussmannization): नेपोलियन तृतीय के समय 1852 में पेरिस के प्रीफेक्ट बैरन हॉसमैन (Baron Haussmann) ने चौड़ी सड़कों (Boulevards), बड़े पार्कों और भूमिगत सीवरेज का निर्माण कर पेरिस को एक आधुनिक व भव्य शहर बनाया।
- चार्टिज्म आंदोलन (Chartism Movement): 1838 में ब्रिटेन के कामगारों द्वारा बालिग पुरुषों के मताधिकार (Universal Male Suffrage) और संसद सुधार हेतु चलाया गया आंदोलन।
- 10 घंटे का आंदोलन (Ten Hours Movement): कारखानों में काम के घंटे 10 घंटे सीमित करने के लिए मजदूरों का संगठित संघर्ष (1847 का फैक्ट्री एक्ट)।
भारत में शहरीकरण — बंबई (मुंबई)
- सात टापुओं का नगर: बंबई को मूल रूप से सात छोटे-छोटे द्वीपों का समूह माना जाता था (कोलाबा, ओल्ड वूमन आइलैंड, बंबई, माहिम, परेल, वर्ली, मझगाँव)।
- पुर्तगालियों से अंग्रेजों को हस्तांतरण: 1661 ई. में इंग्लैंड के राजा चार्ल्स द्वितीय को पुर्तगाल की राजकुमारी कैथरीन ऑफ ब्रैगेंजा से विवाह में बंबई दहेज स्वरूप मिला, जिसे 1668 ई. में ईस्ट इंडिया कंपनी को 10 पाउंड के वार्षिक किराए पर दे दिया गया।
- बंबई प्रेसीडेंसी की राजधानी: 1819 ई. में मराठा युद्ध की समाप्ति के बाद बंबई को बंबई प्रेसीडेंसी की राजधानी घोषित किया गया।
- भारत की पहली सूती कपड़ा मिल: 1854 ई. में कावसजी नानाभाई दावर (K.N. Dawar) द्वारा बंबई में स्थापित की गई।
- स्वेज नहर का खुलना (1869): स्वेज नहर खुलने से बंबई बंदरगाह का महत्व कई गुना बढ़ गया, जिसने बंबई को भारत का प्रमुख वित्तीय और व्यापारिक केंद्र बनाया।
- चॉल (Chawl): बंबई में कपड़ा मिल मजदूरों के रहने के लिए बनाई गई बहुमंजिला, संकरी, एक-कमरे वाली रिहायशी इमारतें, जहाँ खुला आंगन और साझा शौचालय होते थे।
- बॉम्बे इंप्रूवमेंट ट्रस्ट (Bombay Improvement Trust): 1898 के प्लेग की महामारी के बाद 1898 में ही स्थापित किया गया, जिसका उद्देश्य शहर के गरीबों के लिए खुली जगह और नई सड़कों का निर्माण करना था।
- भूमि पुनर्ग्रहण (Land Reclamation):
- समुद्र को पाटकर सूखी जमीन बनाने की प्रक्रिया।
- 1864 में 'बैक बे रिक्लेमेशन कंपनी' (Back Bay Reclamation Company) को पश्चिमी तट के पुनर्ग्रहण का काम सौंपा गया।
- प्रसिद्ध मरीन ड्राइव (Marine Drive) इसी भूमि पुनर्ग्रहण का परिणाम है।
- फिल्म उद्योग का केंद्र: 1913 ई. में दादा साहेब फाल्के ने भारत की पहली मूक फिल्म 'राजा हरिश्चंद्र' बनाई और बंबई भारत की 'मायानगरी' बन गया।
बिहार में शहरीकरण — पटना (पाटलिपुत्र) : विशेष बिंदु
- पाटलिपुत्र की स्थापना: ईसा पूर्व 5वीं सदी में हर्यक वंश के राजा अजातशत्रु ने पाटलिग्राम में सैन्य छावनी बनाई और उसके पुत्र उदायिन (Udayin) ने पाटलिपुत्र को मगध साम्राज्य की राजधानी बनाया।
- मौर्य काल में पाटलिपुत्र: चंद्रगुप्त मौर्य और सम्राट अशोक की राजधानी; यूनानी राजदूत मेगास्थनीज ने अपनी पुस्तक 'इंडिका' में लिखा कि पाटलिपुत्र 64 द्वारों और 570 बुर्जों वाला एक विशाल और सुंदर नगर था।
- मध्यकाल में पुनरुद्धार: 1541 ई. में शेरशाह सूरी ने गंगा के किनारे स्थित इस नगर का महत्व पहचानकर इसे पुनर्जीवित किया और इसका नाम 'पटना' रखा।
- सिख धर्म का पावन स्थल: सिखों के दसवें और अंतिम गुरु गुरु गोविंद सिंह जी का जन्म (1666 ई.) पटना साहिब में हुआ था (तख्त श्री हरिमंदिर जी पटना साहिब)।
- अजीमाबाद: 1704 ई. में मुगल बादशाह औरंगजेब के पौत्र राजकुमार अजीम-उस-शान ने पटना का पुनर्निर्माण कराया और इसका नाम अपने नाम पर 'अजीमाबाद' रखा।
- पटना का गोलघर:
- निर्माण वर्ष: 1786 ई.
- गवर्नर जनरल: लॉर्ड कॉर्नवालिस
- वास्तुकार/इंजीनियर: कैप्टन जॉन गार्स्टिन (John Garstin)
- उद्देश्य: 1770 के भीषण अकाल के बाद ब्रिटिश सैनिकों और जनता के लिए विशाल अन्न भंडारण (Granary) के रूप में।
- प्रथक बिहार राज्य और पटना: 1912 ई. में बंगाल से अलग होकर जब बिहार और उड़ीसा का संयुक्त प्रांत बना, तब पटना को उसकी राजधानी घोषित किया गया।
- पटना उच्च न्यायालय: स्थापना 1916 ई.।
- पटना विश्वविद्यालय: स्थापना 1917 ई.।
4. महत्वपूर्ण पारिभाषिक शब्दावली (Key Terms)
| शब्द | अर्थ / परिभाषा |
|---|---|
| शहरीकरण (Urbanization) | ग्रामीण बस्तियों का जनसंख्या, उद्योग और सेवाओं के प्रभाव से नगरों में रूपांतरित होने की प्रक्रिया। |
| महानगर (Metropolis) | अत्यधिक विशाल, घनी आबादी और विशाल आर्थिक-सांस्कृतिक प्रभाव वाला प्रमुख केंद्र नगर। |
| स्लम (Slum) | घनी, अस्वस्थ, मूलभूत सुविधाओं (पानी, नाली, प्रकाश) से विहीन मजदूरों व गरीबों की बस्तियाँ। |
| व्यक्तिवाद (Individualism) | वह सामाजिक दृष्टिकोण जो समुदाय या परिवार के बजाय व्यक्ति की स्वतंत्रता और अधिकारों को प्राथमिकता देता है। |
| वि-शहरीकरण (De-urbanization) | औपनिवेशिक काल में भारतीय पारंपरिक हस्तशिल्प और बुनकरी केंद्रों (जैसे ढाका, मुर्शिदाबाद, सूरत) का पतन और आबादी का पुनः कृषि की ओर लौटना। |
| धुआँ निरोधक कानून (Smoke Abatement Acts) | कारखानों से निकलने वाले वायु प्रदूषण को रोकने के लिए 1847 और 1853 में ब्रिटेन में बने पहले पर्यावरण कानून। |
5. सामाजिक और सांस्कृतिक परिवर्तन
- पारिवारिक ढांचे में बदलाव: संयुक्त परिवारों (Joint Families) का टूटना और एकल परिवारों (Nuclear Families) का तेजी से प्रसार।
- महिलाओं की स्थिति:
- शुरुआत में औद्योगिक क्रांति के दौरान महिलाएँ घरेलू नौकरानी या कपड़ा मिलों में काम करती थीं।
- 19वीं सदी के अंत में जब पुरुष कारखानों में अधिक कमाने लगे, तो महिलाओं को 'घरेलू चारदीवारी' तक सीमित रखने की प्रवृत्ति बढ़ी।
- 20वीं सदी में मताधिकार आंदोलनों के माध्यम से महिलाओं ने पुनः सार्वजनिक जीवन में हिस्सेदारी हासिल की।
- मनोरंजन के नए साधन: मध्यम वर्ग के लिए पुस्तकालय, संग्रहालय, थिएटर, संगीत हॉल (Music Halls) और बाद में सिनेमा आम लोगों के प्रमुख मनोरंजन बने।
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