BSEB Class 10 History Chapter 4 Solutions: भारत में राष्ट्रवाद (Nationalism in India)
बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (BSEB) कक्षा 10 इतिहास (हमारी दुनिया - भाग 2) का चौथा अध्याय "भारत में राष्ट्रवाद" संपूर्ण पाठ्यक्रम का सबसे महत्वपूर्ण और सर्वाधिक अंक-भार वाला पाठ है। इस अध्याय में 1914 से लेकर स्वतंत्रता आंदोलन के विभिन्न चरणों, महात्मा गांधी के जन-आंदोलनों, किसान-मजदूर संघर्षों और प्रमुख राष्ट्रीय घटनाओं का विस्तृत विवरण दिया गया है। यहाँ BSEB पाठ्यपुस्तक के अभ्यास खंड के सभी वस्तुनिष्ठ (MCQ), रिक्त स्थान, अतिलघु उत्तरीय (20 शब्द), सुमेलित प्रश्न, लघु उत्तरीय (60 शब्द) और दीर्घ उत्तरीय (150 शब्द) प्रश्नों के संपूर्ण, सटीक और सरल भाषा में हल प्रस्तुत हैं।
वस्तुनिष्ठ प्रश्न (Objective Questions)
बोर्ड परीक्षा के लिए एक-एक अंक वाले वस्तुनिष्ठ प्रश्नों के सही विकल्प:
-
गदर पार्टी की स्थापना किसने और कब की?
उत्तर: (ग) लाला हरदयाल, 1913 -
जालियाँवाला बाग हत्याकांड किस तिथि को हुआ?
उत्तर: (क) 13 अप्रैल 1919 ई० -
लखनऊ समझौता किस वर्ष हुआ?
उत्तर: (क) 1916 -
असहयोग आंदोलन का प्रस्ताव काँग्रेस के किस अधिवेशन में पारित हुआ?
उत्तर: (क) सितम्बर 1920, कलकत्ता (नोट: विशेष अधिवेशन में स्वीकृत हुआ तथा दिसंबर 1920 के नागपुर अधिवेशन में अंतिम रूप से पारित हुआ) -
भारत में खिलाफत आंदोलन कब और किस देश के शासक के समर्थन में शुरू हुआ?
उत्तर: (क) 1920, तुर्की -
सविनय अवज्ञा आंदोलन कब और किस यात्रा से शुरू हुआ?
उत्तर: (ग) 1930, दांडी -
पूर्ण स्वराज्य की माँग का प्रस्ताव कांग्रेस के किस वार्षिक अधिवेशन में पारित हुआ?
उत्तर: (क) 1929, लाहौर -
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना कब और किसने की?
उत्तर: (ख) 1925, के० बी० हेडगेवार -
वल्लभ भाई पटेल को सरदार की उपाधि किस किसान आंदोलन के दौरान दी गई?
उत्तर: (क) बारदोली -
रम्पा विद्रोह कब हुआ?
उत्तर: (क) 1916
रिक्त स्थानों की पूर्ति करें (Fill in the Blanks)
ऐतिहासिक तथ्यों पर आधारित रिक्त स्थानों की पूर्ति:
- बाल गंगाधर तिलक और एनी बेसेंट ने होमरूल लीग आन्दोलन को शुरू किया।
- महात्मा गांधी (अथवा अली बंधु - शौकत अली और मुहम्मद अली) भारत में खिलाफत आन्दोलन के नेता थे।
- 12 फरवरी 1922 को असहयोग आन्दोलन स्थगित हो गया। (चौरी-चौरा की घटना 5 फरवरी को हुई तथा 12 फरवरी को गांधीजी ने बारदोली में आंदोलन वापस लिया)
- साइमन कमीशन के अध्यक्ष सर जॉन साइमन थे।
- बारदोली में लगान (भू-राजस्व) कर के विरोध में आन्दोलन आरंभ हुआ।
- भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के पहले अध्यक्ष व्योमेश चन्द्र बनर्जी (W. C. Bonnerjee) थे।
- 11 अप्रैल 1936 को अखिल भारतीय किसान सभा का गठन लखनऊ में हुआ।
- उड़िसा में 1914 में खोंड विद्रोह हुआ।
सुमेलित करें (Match the Following)
ऐतिहासिक घटनाओं, कालखंडों और व्यक्तियों का सही मिलान:
| स्तम्भ 1 | स्तम्भ 2 (सही मिलान) |
|---|---|
| (i) गाँधीवादी चरण | (ख) 1919-47 |
| (ii) चौरी-चौरा हत्याकांड | (क) 5 फरवरी, 1922 |
| (iii) कांग्रेस के प्रथम अध्यक्ष | व्योमेश चन्द्र बनर्जी (पाठ्यपुस्तक में मिसप्रिंट: स्तम्भ 2 में (ग) 1915 अंकित है) |
| (iv) बंगाल विभाजन वापस | (ङ) 1911 |
| (v) हिन्दू महासभा | (च) मदन मोहन मालवीय (1915 ई०) |
| (vi) मोपला विद्रोह | (घ) केरल |
अतिलघु उत्तरीय प्रश्न (लगभग 20 शब्दों में उत्तर)
संक्षिप्त और सटीक उत्तर:
1. खिलाफत आन्दोलन क्यों हुआ?
उत्तर: प्रथम विश्व युद्ध के बाद ब्रिटेन द्वारा तुर्की के खलीफा (इस्लामी जगत के धार्मिक प्रधान) को अपदस्थ करने और तुर्की साम्राज्य के विघटन के विरोध में भारतीय मुसलमानों ने यह आंदोलन शुरू किया।
2. रॉलेट एक्ट से आप क्या समझते हैं?
उत्तर: 1919 में ब्रिटिश सरकार द्वारा बनाया गया काला कानून, जिसके तहत किसी भी भारतीय को बिना वारंट, बिना मुकदमा और बिना अपील के अनिश्चित काल तक जेल में बंद रखा जा सकता था।
3. दांडी यात्रा का क्या उद्देश्य था?
उत्तर: साबरमती आश्रम से दांडी पहुँचकर समुद्र के पानी से नमक बनाकर ब्रिटिश सरकार के नमक एकाधिकार और अन्यायपूर्ण नमक कानून को तोड़ना तथा सविनय अवज्ञा आंदोलन का बिगुल फूंकना।
4. गाँधी-इरविन पैक्ट अथवा दिल्ली समझौता क्या था?
उत्तर: 5 मार्च 1931 को गांधीजी और वायसराय लॉर्ड इरविन के बीच हुआ समझौता, जिसके तहत कांग्रेस ने सविनय अवज्ञा आंदोलन स्थगित कर द्वितीय गोलमेज सम्मेलन में भाग लेना स्वीकार किया।
5. चम्पारण सत्याग्रह के बारे में बताओ?
उत्तर: 1917 में बिहार के चंपारण में गांधीजी के नेतृत्व में किसानों पर लागू शोषणकारी 'तिनकठिया प्रणाली' (भूमि के 3/20 भाग पर नील की खेती) के विरुद्ध किया गया भारत में पहला सफल सत्याग्रह था।
6. मेरठ षड्यंत्र से आप क्या समझते हैं?
उत्तर: मार्च 1929 में ब्रिटिश सरकार द्वारा साम्यवादी प्रभाव को कुचलने के लिए 31 प्रमुख श्रमिक व वामपंथी नेताओं (जिसमें तीन अंग्रेज भी शामिल थे) को गिरफ्तार कर मेरठ में चलाया गया ऐतिहासिक मुकदमा।
7. जतरा भगत के बारे में आप क्या जानते हैं, संक्षेप में बताओ?
उत्तर: छोटानागपुर के उरांव आदिवासियों के प्रमुख नेता, जिन्होंने 1914 में 'ताना भगत आंदोलन' का नेतृत्व किया। इन्होंने सामाजिक-धार्मिक सुधारों के साथ-साथ अंग्रेजों के शोषण के विरुद्ध अहिंसक सत्याग्रह किया।
8. ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस की स्थापना क्यों हुई?
उत्तर: 31 अक्टूबर 1920 को लाला लाजपत राय की अध्यक्षता में इसकी स्थापना मजदूरों के हितों की रक्षा करने, उनके शोषण को रोकने और राष्ट्रीय स्वतंत्रता आंदोलन से जोड़ने के उद्देश्य से हुई।
लघु उत्तरीय प्रश्न (लगभग 60 शब्दों में उत्तर)
तार्किक और बिंदुवार 60 शब्दों के मानक उत्तर:
1. असहयोग आन्दोलन प्रथम जन आंदोलन था, कैसे?
उत्तर: असहयोग आंदोलन (1920-22) से पहले राष्ट्रीय आंदोलन केवल शिक्षित मध्यम वर्ग और शहरों तक सीमित था। गांधीजी के आह्वान पर पहली बार देश के किसान, मजदूर, छात्र, महिलाएं, हिंदू और मुस्लिम सभी तबके एक साथ सड़कों पर उतरे। विदेशी वस्त्रों का बहिष्कार, सरकारी उपाधियों का त्याग और अदालतों-स्कूलों का बहिष्कार पूरे देश में फैला। इस राष्ट्रव्यापी भागीदारी ने इसे भारत का पहला सच्चा जन-आंदोलन बना दिया।
2. सविनय अवज्ञा आंदोलन के क्या परिणाम हुए?
उत्तर: सविनय अवज्ञा आंदोलन के निम्नलिखित महत्वपूर्ण परिणाम निकले:
- इसने राष्ट्रीय आंदोलन के सामाजिक आधार को अभूतपूर्व विस्तार दिया, जिसमें महिलाओं ने रिकॉर्ड संख्या में भाग लिया।
- ब्रिटिश सरकार को समझ आ गया कि अब भारतीयों की सहमति के बिना शासन नहीं चलाया जा सकता, जिसके फलस्वरूप 1935 का भारत सरकार अधिनियम बना।
- ब्रिटिश सामानों के बहिष्कार से विदेशी व्यापार को भारी क्षति पहुंची और घरेलू खादी व स्वदेशी उद्योगों को जबरदस्त प्रोत्साहन मिला।
3. भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना किन परिस्थितियों में हुई?
उत्तर: 19वीं सदी के उत्तरार्ध में ब्रिटिश शासन के आर्थिक शोषण, लॉर्ड लिटन की दमनकारी नीतियों (वर्नाक्यूलर प्रेस एक्ट, आर्म्स एक्ट) और अल्बर्ट बिल विवाद के कारण भारतीयों में भारी रोष था। सेवानिवृत्त अंग्रेज अधिकारी ए० ओ० ह्यूम के प्रयासों से 28 दिसंबर 1885 को बंबई में कांग्रेस की स्थापना हुई। इसका उद्देश्य भारतीयों में राजनीतिक चेतना को एक अखिल भारतीय मंच प्रदान करना और शासन में सुधारों की मांग रखना था।
4. बिहार के किसान आंदोलन पर एक टिप्पणी लिखें।
उत्तर: बिहार भारतीय किसान आंदोलन का मुख्य केंद्र रहा। 1917 के चंपारण सत्याग्रह ने किसानों में नई जागृति फूंकी। 1920 के दशक में स्वामी सहजानंद सरस्वती ने 'बिहार प्रांतीय किसान सभा' (1929) की स्थापना की, जिसने जमींदारों के अत्याचारों और बकाश्त भूमि के विरुद्ध जोरदार संघर्ष किया। बाद में 1936 में अखिल भारतीय किसान सभा बनी, जिसमें राहुल सांकृत्यायन और कार्यानंद शर्मा जैसे नेताओं ने किसानों को संगठित किया।
5. स्वराज पार्टी की स्थापना एवं उद्देश्य की विवेचना करें।
उत्तर: चौरी-चौरा की घटना के बाद गांधीजी द्वारा असहयोग आंदोलन वापस लेने से उपजी निराशा के बीच 1923 में चितरंजन दास और मोतीलाल नेहरू ने 'स्वराज पार्टी' का गठन किया।
- प्रमुख उद्देश्य: विधान परिषदों में प्रवेश कर सरकार के कामकाज में अड़ंगा लगाना, औपनिवेशिक नीतियों का भीतर से विरोध करना और बजट को अस्वीकार कर यह सिद्ध करना कि वर्तमान शासन प्रणाली अलोकतांत्रिक है।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (लगभग 150 शब्दों में उत्तर)
विस्तृत और विश्लेषणात्मक बोर्ड-स्तरीय समाधान:
1. प्रथम विश्व युद्ध का भारतीय राष्ट्रीय आन्दोलन के साथ अंतर्संबंधों की विवेचना करें।
उत्तर: प्रथम विश्व युद्ध (1914-1918) ने भारतीय राजनीति की दिशा बदलकर रख दी और राष्ट्रीय आंदोलन को एक नई गति दी:
- आर्थिक कठिनाइयाँ: युद्ध के खर्च की भरपाई के लिए अंग्रेजों ने भारत में सीमा शुल्क बढ़ाया और आयकर लागू किया। आवश्यक वस्तुओं के दाम दोगुने हो गए, जिससे आम जनता, किसानों और मजदूरों में भारी असंतोष फैल गया।
- राजनीतिक चेतना: ब्रिटिश सरकार ने युद्ध के समय स्वशासन का वादा किया था, लेकिन युद्ध समाप्ति पर दमनकारी 'रॉलेट एक्ट' थोप दिया। इसने भारतीयों को एकजुट होने पर विवश किया।
- तिलक और एनी बेसेंट का योगदान: युद्ध के दौरान देश में 'होमरूल लीग आंदोलन' चला, जिसने जनमानस में स्वशासन की मांग को प्रखर बनाया।
- साम्प्रदायिक एकता: युद्ध में तुर्की के खलीफा के साथ हुए दुर्व्यवहार से भारतीय मुसलमानों में रोष फैला, जिसके कारण 1916 का 'लखनऊ समझौता' हुआ और कांग्रेस तथा मुस्लिम लीग एक साथ मंच पर आए। इस प्रकार प्रथम विश्व युद्ध ने गांधीजी के असहयोग आंदोलन की उर्वर जमीन तैयार की।
2. असहयोग आंदोलन के कारण एवं परिणाम का वर्णन करें।
कारण:
- प्रथम विश्व युद्ध के बाद का असंतोष: महंगाई, महामारी और बेकारी से जनता त्रस्त थी।
- रॉलेट एक्ट एवं जालियाँवाला बाग हत्याकांड (1919): जनरल डायर के बर्बर नरसंहार और हंटर कमेटी की लीपापोती ने देश को हिलाकर रख दिया।
- खिलाफत का प्रश्न: तुर्की के खलीफा के अपमान से मुस्लिम समुदाय अंग्रेजों के सख्त खिलाफ था।
गांधीजी ने इन तीनों मुद्दों को मिलाकर सितंबर 1920 में असहयोग आंदोलन शुरू किया।
परिणाम:
- जन-आंदोलन का स्वरूप: पहली बार आंदोलन महलों से निकलकर गाँवों, झोपड़ियों और आम जनता तक पहुँचा।
- अंग्रेजी शासन की नींव कमजोर होना: सरकारी संस्थाओं, नौकरियों और विदेशी वस्त्रों के बहिष्कार से औपनिवेशिक सत्ता हिल गई।
- आत्मविश्वास और निडरता: भारतीयों के मन से ब्रिटिश पुलिस और जेल का खौफ हमेशा के लिए खत्म हो गया।
- चौरी-चौरा की घटना: 5 फरवरी 1922 को गोरखपुर के चौरी-चौरा में भीड़ द्वारा थाने को जलाने की हिंसक घटना से दुखी होकर गांधीजी ने 12 फरवरी 1922 को आंदोलन वापस ले लिया, जिससे कुछ समय के लिए राजनीतिक शून्यता आई।
3. सविनय अवज्ञा आन्दोलन के कारणों की विवेचना करें।
उत्तर: 1930 में गांधीजी द्वारा शुरू किए गए सविनय अवज्ञा आंदोलन के प्रमुख कारण निम्नलिखित थे:
- साइमन कमीशन का बहिष्कार (1928): इस आयोग में एक भी भारतीय सदस्य न होने के कारण पूरे देश में तीव्र विरोध हुआ। लाला लाजपत राय पर लाठीचार्ज से आक्रोश चरम पर पहुंच गया।
- नेहरू रिपोर्ट की अस्वीकृति: भारतीयों द्वारा तैयार संवैधानिक रूपरेखा (नेहरू रिपोर्ट) को अंग्रेजों ने खारिज कर दिया।
- पूर्ण स्वराज्य की मांग (1929): कांग्रेस के लाहौर अधिवेशन में जवाहरलाल नेहरू की अध्यक्षता में पूर्ण स्वतंत्रता को राष्ट्रीय लक्ष्य घोषित किया गया।
- 1929 की वैश्विक आर्थिक मंदी: मंदी के कारण कृषि उत्पादों के दाम धड़ाम से गिर गए, जिससे किसान लगान देने में असमर्थ हो गए और उनमें गहरा असंतोष फैला।
- गांधीजी की 11 सूत्री मांगें: गांधीजी ने वायसराय लॉर्ड इरविन को 11 सूत्री मांग पत्र भेजा, जिसमें नमक कर हटाने, लगान 50% कम करने और राजनीतिक बंदियों की रिहाई की मांग थी। इरविन द्वारा इसे ठुकराने के बाद गांधीजी ने नमक कानून तोड़कर आंदोलन आरंभ किया।
4. भारत में मजदूर आन्दोलन के विकास का वर्णन करें।
उत्तर: भारत में आधुनिक कारखानों और रेलवे के विस्तार के साथ ही मजदूर आंदोलन का क्रमिक विकास हुआ:
- शुरुआती दौर (19वीं सदी): प्रारंभिक वर्षों में आंदोलन असंगठित थे। 1881 और 1891 के फैक्ट्री एक्ट ने काम के घंटे कुछ हद तक तय किए, लेकिन मजदूरों की दयनीय स्थिति में सुधार नहीं हुआ।
- प्रथम विश्व युद्ध के बाद उभार: युद्धकालीन महंगाई और रूसी क्रांति (1917) से प्रेरित होकर मजदूरों में वर्गीय चेतना जागी। कपड़ा मिलों और रेलवे में हड़तालें हुईं।
- AITUC की स्थापना (1920): लाला लाजपत राय की अध्यक्षता में 'अखिल भारतीय ट्रेड यूनियन कांग्रेस' बनी, जिसने मजदूर आंदोलन को एक संगठित और राष्ट्रीय दिशा दी।
- वामपंथी विचारधारा का प्रवेश: 1920 के दशक के अंत में कम्युनिस्टों ने मजदूर यूनियनों की बागडोर संभाली। अंग्रेजों ने इसे दबाने के लिए 'पब्लिक सेफ्टी बिल', 'ट्रेड डिस्प्यूट्स एक्ट' और 'मेरठ षड्यंत्र केस' (1929) चलाया।
- स्वतंत्रता संग्राम में योगदान: मजदूरों ने साइमन कमीशन के बहिष्कार, सविनय अवज्ञा और 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में कारखाने बंद कर स्वतंत्रता संग्राम को मजबूती दी।
5. भारतीय राष्ट्रीय आन्दोलन में गाँधी जी के योगदान की विवेचना करें।
उत्तर: भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन के 1919 से 1947 तक के कालखंड को 'गांधी युग' कहा जाता है। राष्ट्रीय आंदोलन में उनका योगदान अतुलनीय है:
- सत्य और अहिंसा का अमोघ अस्त्र: गांधीजी ने पारंपरिक सशस्त्र विद्रोह के स्थान पर सत्याग्रह, अहिंसा और सविनय अवज्ञा को संघर्ष का मुख्य हथियार बनाया, जिससे निहत्थी जनता भी साम्राज्यवादी ताकत के सामने सीना तानकर खड़ी हो सकी।
- आंदोलन का जनतंत्रीकरण: उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम को केवल शिक्षित वर्ग तक सीमित न रखकर किसान, मजदूर, छात्र, दलित और महिलाओं का साझा जन-आंदोलन बना दिया।
- तीन बड़े युगांतरकारी आंदोलन:
- असहयोग आंदोलन (1920-22): औपनिवेशिक व्यवस्था के साथ पूर्ण असहयोग का संदेश दिया।
- सविनय अवज्ञा आंदोलन (1930): दांडी यात्रा से नमक कानून तोड़कर ब्रिटिश कानूनों की वैधता को चुनौती दी।
- भारत छोड़ो आंदोलन (1942): "करो या मरो" का ऐतिहासिक मंत्र देकर अंग्रेजों को भारत छोड़ने पर विवश कर दिया।
- सामाजिक सुधार: उन्होंने अस्पृश्यता निवारण, हरिजन उत्थान, हिंदू-मुस्लिम एकता, खादी और चरखे के जरिए आत्मनिर्भरता को आंदोलन का अभिन्न अंग बनाया।
6. भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन में वामपंथियों की भूमिका को रेखांकित करें।
उत्तर: 1917 की रूसी क्रांति के प्रभाव से भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में एक सशक्त वामपंथी (मार्क्सवादी/समाजवादी) धारा का उदय हुआ:
- कम्युनिस्ट पार्टी का गठन: 1920 में ताशकंद में एम० एन० रॉय द्वारा तथा 1925 में कानपुर में 'भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी' की विधिवत स्थापना हुई।
- किसान और मजदूर वर्ग का सशक्तिकरण: वामपंथियों ने 'मजदूर किसान पार्टी' (WPP) का गठन किया। इन्होंने ट्रेड यूनियनों और किसान सभाओं को संगठित कर स्वतंत्रता संग्राम को ठोस आर्थिक व सामाजिक आधार दिया।
- कांग्रेस के भीतर समाजवादी धारा: 1934 में जयप्रकाश नारायण, आचार्य नरेंद्र देव और राम मनोहर लोहिया ने 'कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी' बनाई। जवाहरलाल नेहरू और सुभाष चंद्र बोस भी वामपंथी व समाजवादी विचारों से गहरे प्रभावित थे।
- पूर्ण स्वराज्य का दबाव: वामपंथियों का मानना था कि आजादी का मतलब केवल सत्ता का हस्तांतरण नहीं, बल्कि ज़मींदारी प्रथा और पूंजीवादी शोषण का पूर्ण खात्मा होना चाहिए। इन्होंने कांग्रेस पर पूर्ण स्वतंत्रता का प्रस्ताव पारित करने का निरंतर वैचारिक दबाव बनाया।
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