BSEB कक्षा 10 इतिहास — अध्याय 4: भारत में राष्ट्रवाद
संपूर्ण 50 महत्वपूर्ण वस्तुनिष्ठ प्रश्न (MCQ), उत्तर एवं विस्तृत व्याख्या
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व्याख्या: महात्मा गांधी 9 जनवरी 1915 को दक्षिण अफ्रीका से भारत लौटे। इसी उपलक्ष्य में प्रतिवर्ष 9 जनवरी को 'प्रवासी भारतीय दिवस' मनाया जाता है।
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व्याख्या: 1917 ईस्वी में बिहार के चंपारण में गांधीजी ने नील की खेती करने वाले किसानों पर लागू तिनकठिया प्रथा के विरुद्ध अपना पहला सत्याग्रह किया, जो पूर्णतः सफल रहा।
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व्याख्या: चंपारण के मुरली भरहवा गाँव के किसान नेता राजकुमार शुक्ल ने 1916 के कांग्रेस के लखनऊ अधिवेशन में गांधीजी से भेंट कर उन्हें चंपारण आने का न्योता दिया था।
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व्याख्या: चंपारण में यूरोपीय बागान मालिकों द्वारा किसानों को अपनी कुल कृषि योग्य भूमि के प्रत्येक 20 कट्ठे में से 3 कट्ठे (3/20 भाग) पर अनिवार्य रूप से नील की खेती करने के लिए बाध्य किया जाता था, जिसे तिनकठिया व्यवस्था कहा जाता था।
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व्याख्या: सर सिडनी रॉलेट की अध्यक्षता वाली सेडिशन कमेटी की सिफारिशों पर मार्च 1919 में क्रांतिकारी गतिविधियों को कुचलने के लिए रॉलेट एक्ट पारित किया गया। इसे "बिना वकील, बिना अपील, बिना दलील" का काला कानून कहा गया।
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व्याख्या: बैसाखी के पावन पर्व पर 13 अप्रैल 1919 को पंजाब के अमृतसर स्थित जलियांवाला बाग में रॉलेट एक्ट और डॉ. सत्यपाल व सैफुद्दीन किचलू की गिरफ्तारी के विरोध में शांतिपूर्ण जनसभा हो रही थी, जिस पर जनरल ओ'डायर ने निहत्थी भीड़ पर गोलियां चलवा दीं।
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व्याख्या: जलियांवाला बाग के भीषण नरसंहार से व्यथित होकर गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर ने ब्रिटिश हुकूमत द्वारा प्रदत्त 'नाइटहुड' (Knight) की उपाधि त्याग दी, जबकि गांधीजी ने 'कैसर-ए-हिंद' पदक लौटा दिया था।
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व्याख्या: 14 अक्टूबर 1919 को लॉर्ड विलियम हंटर की अध्यक्षता में ब्रिटिश सरकार ने 'हंटर समिति' का गठन किया, जिसने लीपापोती करते हुए जनरल डायर को मात्र कर्तव्य-निष्ठा का दोषी ठहराया।
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व्याख्या: प्रथम विश्व युद्ध में तुर्की (ऑटोमन साम्राज्य) की पराजय के बाद ब्रिटेन द्वारा तुर्की के सुल्तान (जिन्हें पूरी दुनिया के मुस्लिम खलीफा मानते थे) के अधिकारों में कटौती और सेवर्स की अपमानजनक संधि के विरोध में भारत में 1919 में खिलाफत आंदोलन शुरू हुआ।
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व्याख्या: मौलाना मोहम्मद अली और मौलाना शौकत अली (जिन्हें संयुक्त रूप से 'अली बंधु' कहा जाता है) ने खिलाफत कमेटी बनाकर इस आंदोलन का नेतृत्व किया। नवंबर 1919 में दिल्ली में आयोजित अखिल भारतीय खिलाफत सम्मेलन के अध्यक्ष महात्मा गांधी चुने गए थे।
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व्याख्या: सितंबर 1920 के कलकत्ता विशेष अधिवेशन में लाला लाजपत राय की अध्यक्षता में प्रस्ताव रखा गया था, परंतु दिसंबर 1920 के नागपुर वार्षिक अधिवेशन (सी. विजयराघवाचार्य की अध्यक्षता) में असहयोग आंदोलन के कार्यक्रम को पूर्ण सहमति से विधिवत पारित किया गया।
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व्याख्या: उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले के चौरी-चौरा कस्बे में 5 फरवरी 1922 को पुलिस द्वारा प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी के जवाब में क्रोधित भीड़ ने थाने में आग लगा दी, जिसमें 22 पुलिसकर्मी जलकर मर गए।
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व्याख्या: आंदोलन के हिंसक मोड़ लेने से दुखी होकर गांधीजी ने 12 फरवरी 1922 को बारदोली में कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में असहयोग आंदोलन को स्थगित करने का निर्णय लिया।
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व्याख्या: विधान परिषदों में प्रवेश कर सरकार के कार्यों में व्यवधान डालने के उद्देश्य से चित्तरंजन दास (अध्यक्ष) और मोतीलाल नेहरू (महासचिव) ने 1 जनवरी 1923 को इलाहाबाद में स्वराज पार्टी की स्थापना की।
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व्याख्या: बिहार के गया में आयोजित कांग्रेस के 37वें वार्षिक अधिवेशन (1922) की अध्यक्षता देशबंधु चित्तरंजन दास ने की थी। इसी अधिवेशन में परिषदों में प्रवेश को लेकर मतभेद के बाद स्वराज पार्टी का बीजारोपण हुआ।
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व्याख्या: 1919 के भारत शासन अधिनियम की समीक्षा के लिए नवंबर 1927 में जॉन साइमन के नेतृत्व में 7 सदस्यीय आयोग गठित हुआ, जो 3 फरवरी 1928 को बंबई पहुँचा।
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व्याख्या: भारतीयों के संवैधानिक भविष्य का निर्धारण करने वाले इस आयोग में एक भी भारतीय को शामिल न किए जाने के कारण इसे 'श्वेत आयोग' (White Commission) कहा गया और "साइमन गो बैक" के नारों से इसका देशव्यापी बहिष्कार हुआ।
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व्याख्या: 30 अक्टूबर 1928 को लाहौर में साइमन कमीशन के विरोध के समय पुलिस अधीक्षक जेम्स ए. स्कॉट के आदेश पर हुए लाठीचार्ज में लाला लाजपत राय गंभीर रूप से घायल हो गए और 17 नवंबर 1928 को उनका देहांत हो गया। उन्होंने कहा था: "मेरे सिर पर लाठी का एक-एक प्रहार ब्रिटिश साम्राज्य के ताबूत की कील साबित होगा।"
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व्याख्या: साइमन कमीशन 12 दिसंबर 1928 को पटना पहुँचा, जहाँ अनुग्रह नारायण सिंह के नेतृत्व में हजारों लोगों ने काले झंडे दिखाकर इसका जबरदस्त विरोध किया।
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व्याख्या: भारत सचिव लॉर्ड बर्कनहेड की चुनौती को स्वीकार करते हुए सभी दलों ने मिलकर पंडित मोतीलाल नेहरू की अध्यक्षता में भारत के भावी संविधान का प्रारूप तैयार किया, जिसे 'नेहरू रिपोर्ट' (1928) कहा जाता है। इसमें डोमिनियन स्टेटस और मौलिक अधिकारों की मांग की गई थी।
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व्याख्या: दिसंबर 1929 में रावी नदी के तट पर पंडित जवाहरलाल नेहरू की अध्यक्षता में आयोजित लाहौर अधिवेशन में कांग्रेस ने 'पूर्ण स्वराज' को अपना अंतिम लक्ष्य घोषित किया।
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व्याख्या: 1929 के लाहौर अधिवेशन के निर्णय के अनुसार 26 जनवरी 1930 को पूरे देश में पहली बार स्वतंत्रता दिवस मनाया गया और तिरंगा फहराया गया। इसी स्मृति को अमर रखने के लिए 26 जनवरी 1950 को संविधान लागू किया गया।
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व्याख्या: गांधीजी ने अपने 78 चुने हुए अनुयायियों के साथ 12 मार्च 1930 को अहमदाबाद के साबरमती आश्रम से गुजरात के तटीय गाँव दांडी के लिए 240 मील (लगभग 385 किमी) की पैदल यात्रा शुरू की।
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व्याख्या: 5 अप्रैल को दांडी पहुँचने के बाद, 6 अप्रैल 1930 की सुबह गांधीजी ने समुद्र तट पर नमक का एक ढेला उठाकर ब्रिटिश नमक कानून तोड़ा और देशव्यापी 'सविनय अवज्ञा आंदोलन' (Civil Disobedience Movement) की शुरुआत की।
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व्याख्या: बिहार एक भू-आबद्ध (Landlocked) राज्य होने के कारण यहाँ सारण और चंपारण जिलों में खारी मिट्टी तथा शोरे से नमक बनाकर नमक कानून का उल्लंघन किया गया।
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व्याख्या: बिहार में नमक कानून तोड़ने के बाद सविनय अवज्ञा आंदोलन का सबसे शक्तिशाली रूप 'चौकीदारी कर न देने का आंदोलन' था। जनता ने सरकार के गुप्तचर के रूप में कार्य करने वाले चौकीदारों और दफादारों को कर देने से स्पष्ट मना कर दिया।
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व्याख्या: 1930 में छपरा (सारण) जेल के कैदियों ने स्वदेशी खादी वस्त्र दिए जाने की मांग को लेकर ब्रिटिश जेल प्रशासन द्वारा दिए गए विदेशी कपड़ों को पहनने से इनकार कर दिया और नंगे रहने का फैसला किया, जिसे 'नंगी हड़ताल' कहा गया।
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व्याख्या: पख्तून नेता खान अब्दुल गफ्फार खान (बादशाह खान) को 'सीमांत गांधी' कहा जाता है। उन्होंने अहिंसक पश्तून स्वयंसेवकों का संगठन बनाया जिसे 'खुदाई खिदमतगार' (लाल कुर्ती दल - Red Shirts) कहा जाता था।
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व्याख्या: 23 अप्रैल 1930 को पेशावर में प्रदर्शनकारियों पर ब्रिटिश अधिकारियों ने गोली चलाने का हुक्म दिया, परंतु वीर चंद्र सिंह गढ़वाली के नेतृत्व में 2/18 रॉयल गढ़वाल राइफल्स के भारतीय सैनिकों ने देशवासियों पर गोली चलाने से साफ इनकार कर दिया।
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व्याख्या: वायसराय लॉर्ड इरविन और महात्मा गांधी के बीच लंबे विचार-विमर्श के बाद 5 मार्च 1931 को 'गांधी-इरविन समझौता' हुआ। इसके तहत कांग्रेस ने सविनय अवज्ञा आंदोलन को स्थगित कर द्वितीय गोलमेज सम्मेलन में भाग लेने की सहमति दी।
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व्याख्या: डॉ. भीमराव अंबेडकर और तेज बहादुर सप्रू ने लंदन में आयोजित तीनों गोलमेज सम्मेलनों में भाग लिया। गांधीजी ने केवल दूसरे गोलमेज सम्मेलन (1931) में कांग्रेस के एकमात्र प्रतिनिधि के रूप में भाग लिया था।
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व्याख्या: दलितों के लिए हिंदुओं से अलग पृथक निर्वाचक मंडल बनाए जाने के विरोध में गांधीजी ने 20 सितंबर 1932 को पुणे की यरवदा जेल में आमरण अनशन शुरू किया था।
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व्याख्या: मदन मोहन मालवीय और डॉ. राजेंद्र प्रसाद के प्रयासों से 24 सितंबर 1932 को गांधीजी और डॉ. अंबेडकर के बीच पूना पैक्ट हुआ। इसमें पृथक निर्वाचक मंडल को समाप्त कर सामान्य हिंदू निर्वाचन में ही दलितों के लिए आरक्षित सीटें 71 से बढ़ाकर 148 कर दी गईं।
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व्याख्या: 1928 में गुजरात के बारदोली में 22% लगान वृद्धि के विरोध में वल्लभभाई पटेल के कुशल नेतृत्व में किसान आंदोलन सफल रहा। उनकी संगठन क्षमता से प्रभावित होकर बारदोली की महिलाओं की ओर से गांधीजी ने उन्हें 'सरदार' की उपाधि दी।
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व्याख्या: ब्रिटिश वन कानूनों के खिलाफ आंध्र की पहाड़ियों में अल्लूरी सीताराम राजू ने आदिवासियों को संगठित कर गुरिल्ला युद्ध लड़ा। वे गांधीजी के प्रशंसक थे और लोगों को खादी पहनने तथा शराब छोड़ने के लिए प्रेरित करते थे।
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व्याख्या: 1921 में केरल के मालाबार क्षेत्र में मोपला (मुस्लिम पट्टेदार किसानों) ने हिंदू जमींदारों और ब्रिटिश शासन के अत्याचारों के खिलाफ हिंसक विद्रोह कर दिया, जिसका नेतृत्व अली मुसलियार ने किया था।
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व्याख्या: किसानों को संगठित करने और जमींदारी प्रथा के शोषण से मुक्ति दिलाने हेतु स्वामी सहजानंद सरस्वती ने नवंबर 1929 में सोनपुर मेले के अवसर पर बिहार प्रांतीय किसान सभा की स्थापना की। इसके सचिव डॉ. श्रीकृष्ण सिंह बने।
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व्याख्या: 11 अप्रैल 1936 को लखनऊ में देश के सभी किसान संगठनों को मिलाकर अखिल भारतीय किसान सभा बनाई गई, जिसके प्रथम अध्यक्ष स्वामी सहजानंद सरस्वती और महासचिव प्रो. एन.जी. रंगा चुने गए।
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व्याख्या: मंदी के समय लगान न चुका पाने के कारण जमींदारों द्वारा छीनी गई रैयतों की जमीन ('बकाश्त भूमि') की वापसी के लिए मुंगेर के बड़हिया टाल क्षेत्र में कार्यानंद शर्मा के नेतृत्व में व्यापक सत्याग्रह हुआ।
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व्याख्या: 1934 में पटना के अंजुमन इस्लामिया हॉल में बिहार सोशलिस्ट पार्टी की औपचारिक स्थापना हुई, जिसके अध्यक्ष आचार्य नरेंद्र देव और महासचिव जयप्रकाश नारायण (जेपी) बनाए गए।
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व्याख्या: 1939 में त्रिपुरी कांग्रेस अधिवेशन में गांधीजी से मतभेद के बाद कांग्रेस अध्यक्ष पद से त्यागपत्र देकर नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने वामपंथी विचारधारा को आगे बढ़ाने के लिए 'फॉरवर्ड ब्लॉक' की स्थापना की।
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व्याख्या: यद्यपि INA का प्रारंभिक विचार कैप्टन मोहन सिंह का था, परंतु जुलाई 1943 में सिंगापुर पहुँचकर नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने इसकी बागडोर संभाली और "तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा" तथा "दिल्ली चलो" का नारा दिया।
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व्याख्या: क्रिप्स मिशन की विफलता और जापानी आक्रमण के खतरे के बीच 8 अगस्त 1942 को अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी ने 'भारत छोड़ो' का ऐतिहासिक प्रस्ताव पारित किया, जिसमें गांधीजी ने "करो या मरो" (Do or Die) का अमर मंत्र दिया।
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व्याख्या: 'ऑपरेशन जीरो ऑवर' के तहत 9 अगस्त की तड़के ही गांधीजी, कस्तूरबा गांधी (आगा खां पैलेस, पुणे) तथा नेहरू, पटेल, राजेंद्र प्रसाद (बांकीपुर जेल, पटना) सहित कांग्रेस के सभी शीर्ष नेताओं को बंदी बना लिया गया।
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व्याख्या: 11 अगस्त 1942 को देशभक्त छात्रों का जत्था पटना सचिवालय भवन पर राष्ट्रीय ध्वज फहराने आगे बढ़ा। पटना के तत्कालीन जिला मजिस्ट्रेट डब्ल्यू. जी. आर्चर के आदेश पर पुलिस ने गोलियां चलाईं, जिसमें उमाकांत, रामानंद, सतीश प्रसाद झा, जगपति, देवीपद, राजेंद्र और रामगोविंद नामक सात छात्र शहीद हो गए।
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व्याख्या: दिवाली की रात 1942 में जयप्रकाश नारायण अपने 5 साथियों (रामानंद मिश्र, योगेंद्र शुक्ल आदि) के साथ हजारीबाग जेल की दीवार फांदकर फरार हुए और नेपाल के जंगलों में पहुँचे।
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व्याख्या: जेपी ने नेपाल में 'आजाद दस्ता' का गठन किया, जिसका मुख्य उद्देश्य संचार साधनों (टेलीफोन तार, रेलवे पटरियां, सरकारी प्रतिष्ठान) को नष्ट कर ब्रिटिश प्रशासनिक व्यवस्था को पंगु बनाना था। इसके रेडियो और प्रचार का काम डॉ. राम मनोहर लोहिया देखते थे।
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व्याख्या: सेवानिवृत्त ब्रिटिश आईसीएस अधिकारी ए.ओ. ह्यूम के प्रयासों से 28 दिसंबर 1885 को बंबई के गोकुलदास तेजपाल संस्कृत कॉलेज में कांग्रेस की स्थापना हुई। इसके प्रथम अध्यक्ष व्योमेश चंद्र बनर्जी थे और इसमें 72 प्रतिनिधियों ने भाग लिया था।
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व्याख्या: ढाका के नवाब सलीमुल्लाह खां और आगा खां के नेतृत्व में 30 दिसंबर 1906 को ढाका में 'ऑल इंडिया मुस्लिम लीग' की स्थापना की गई, जिसका प्राथमिक उद्देश्य ब्रिटिश सरकार के प्रति वफादारी और मुसलमानों के राजनीतिक अधिकारों की रक्षा करना था।
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व्याख्या: 1916 के लखनऊ अधिवेशन में बाल गंगाधर तिलक और मोहम्मद अली जिन्ना के प्रयासों से कांग्रेस और मुस्लिम लीग के बीच ऐतिहासिक समझौता हुआ, जिसमें कांग्रेस ने मुस्लिम लीग की पृथक निर्वाचन व्यवस्था की मांग को स्वीकार कर संयुक्त रूप से राष्ट्रीय आंदोलन चलाने का निर्णय लिया।
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