BSEB कक्षा 10 इतिहास — अध्याय 4: भारत में राष्ट्रवाद
1. अध्याय परिचय (Introduction)
'भारत में राष्ट्रवाद' बिहार बोर्ड कक्षा 10 के इतिहास पाठ्यक्रम का सबसे विस्तृत और महत्वपूर्ण अध्याय है। 19वीं सदी के उत्तरार्ध में औपनिवेशिक शासन के शोषण, आर्थिक दोहन तथा दमनकारी प्रशासनिक नीतियों के विरुद्ध अखिल भारतीय स्तर पर राष्ट्रीय चेतना का प्रादुर्भाव हुआ।
इस अध्याय में प्रथम विश्वयुद्ध के प्रभाव, महात्मा गांधी के नेतृत्व में सत्याग्रह के प्रयोग, खिलाफत आंदोलन, असहयोग आंदोलन, सविनय अवज्ञा आंदोलन, किसान एवं मजदूर संघर्ष, जनजातीय विद्रोह, क्रांतिकारी राष्ट्रवाद तथा बिहार की विशिष्ट भूमिका का समग्र विश्लेषण किया गया है।
2. अध्याय का संक्षिप्त विवरण (Overview)
- राष्ट्रवाद के उदय के कारक: अंग्रेजी प्रशासनिक एकीकरण, पाश्चात्य शिक्षा, प्रेस व साहित्य का विकास, तथा लॉर्ड लिटन व लॉर्ड कर्जन की दमनकारी नीतियाँ।
- गांधीवादी चरण का आरंभ: दक्षिण अफ्रीका से वापसी के बाद चंपारण (1917), खेड़ा (1918) और अहमदाबाद मिल मजदूर आंदोलन (1918) के जरिए सत्याग्रह की राष्ट्रीय स्वीकार्यता।
- रॉलेट एक्ट एवं जलियांवाला बाग हत्याकांड (1919): ब्रिटिश सरकार का काला कानून और जनरल डायर द्वारा किया गया नरसंहार, जिसने राष्ट्रीय आंदोलन को उग्र मोड़ दिया।
- असहयोग व खिलाफत आंदोलन (1920–1922): प्रथम अखिल भारतीय जन-आंदोलन; चौरी-चौरा कांड के बाद गांधीजी द्वारा आंदोलन की वापसी।
- स्वराज पार्टी और साइमन कमीशन: 1923 में चितरंजन दास एवं मोतीलाल नेहरू द्वारा स्वराज दल की स्थापना; 1928 में साइमन कमीशन का देशव्यापी विरोध।
- सविनय अवज्ञा आंदोलन (1930): दांडी मार्च के साथ नमक कानून का उल्लंघन, गोलमेज सम्मेलन और गांधी-इरविन समझौता।
- किसान, मजदूर एवं जनजातीय आंदोलन: अखिल भारतीय किसान सभा, बारदोली सत्याग्रह, रम्पा विद्रोह तथा ताना भगत आंदोलन।
- स्वतंत्रता की ओर: भारत छोड़ो आंदोलन (1942), आजाद हिंद फौज और 15 अगस्त 1947 को देश की स्वतंत्रता।
3. प्रमुख बिंदु एवं महत्वपूर्ण वन-लाइनर (Important One-Liners)
प्रारंभिक पृष्ठभूमि एवं संगठन
- भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) की स्थापना: 28 दिसंबर 1885 को बंबई के गोकुलदास तेजपाल संस्कृत कॉलेज में।
- संस्थापक एवं प्रथम अध्यक्ष: संस्थापक ए. ओ. ह्यूम (A. O. Hume) थे तथा प्रथम अध्यक्ष व्योमेश चंद्र बनर्जी (W. C. Bonnerjee) थे।
- वायसराय (1885): कांग्रेस स्थापना के समय भारत का वायसराय लॉर्ड डफरिन था।
- बंगाल विभाजन (1905): लॉर्ड कर्जन द्वारा 'बांटो और राज करो' की नीति के तहत किया गया; इसके विरोध में स्वदेशी एवं बहिष्कार आंदोलन शुरू हुआ।
- बंगाल विभाजन रद्द: 1911 ई. में लॉर्ड हार्डिंग द्वितीय द्वारा दिल्ली दरबार में रद्द किया गया।
- मुस्लिम लीग की स्थापना: 30 दिसंबर 1906 को ढाका में नवाब सलीमुल्लाह और आगा खां के नेतृत्व में।
- गदर पार्टी की स्थापना: 1913 ई. में सैन फ्रांसिस्को (अमेरिका) में लाला हरदयाल द्वारा की गई (अध्यक्ष: सोहन सिंह भकना)।
- कामागाटामारू कांड (1914): कनाडाई बंदरगाह वैंकूवर पर बाबा गुरदित सिंह द्वारा किराए पर लिए गए जापानी जहाज को रोके जाने की घटना।
- होम रूल लीग आंदोलन (1916): भारत में बाल गंगाधर तिलक (पुणे) और श्रीमती एनी बेसेंट (मद्रास) द्वारा शुरू किया गया।
- लखनऊ समझौता (Lucknow Pact): दिसंबर 1916 में कांग्रेस और मुस्लिम लीग के बीच हुआ (कांग्रेस के गरम दल और नरम दल का पुनर्मिलन भी इसी अधिवेशन में हुआ, जिसकी अध्यक्षता अंबिका चरण मजूमदार ने की)।
गांधीवादी युग का आरंभ (1915–1919)
- गांधीजी की भारत वापसी: 9 जनवरी 1915 को दक्षिण अफ्रीका से बंबई लौटे (इसी उपलक्ष्य में प्रतिवर्ष 'प्रवासी भारतीय दिवस' मनाया जाता है)।
- गांधीजी के राजनीतिक गुरु: गोपाल कृष्ण गोखले।
- साबरमती आश्रम की स्थापना: 1916 ई. में अहमदाबाद (गुजरात) में।
- चंपारण सत्याग्रह (1917):
- स्थान: बिहार का चंपारण जिला।
- कारण: तिनकठिया प्रणाली (किसानों को अपनी जमीन के 3/20 भाग पर नील की खेती करना अनिवार्य था)।
- गांधीजी को आमंत्रण: लखनऊ अधिवेशन (1916) में पंडित राजकुमार शुक्ल ने गांधीजी को चंपारण आने का न्योता दिया।
- परिणाम: गांधीजी का भारत में पहला सफल सत्याग्रह; तिनकठिया प्रथा समाप्त हुई और अवैध वसूली का 25% किसानों को वापस मिला।
- उपाधि: इस सफलता के बाद रवींद्रनाथ टैगोर ने गांधीजी को 'महात्मा' की उपाधि दी।
- खेड़ा सत्याग्रह (1918): गुजरात के खेड़ा जिले में फसल नष्ट होने के बावजूद लगान वसूली के विरोध में (वल्लभभाई पटेल का सक्रिय सहयोग)।
- अहमदाबाद मिल मजदूर आंदोलन (1918): प्लेग बोनस को लेकर विवाद; गांधीजी ने पहली बार भूख हड़ताल की और मजदूरों को 35% बोनस दिलवाया।
रॉलेट एक्ट, जलियांवाला बाग एवं खिलाफत आंदोलन
- रॉलेट एक्ट (मार्च 1919):
- सर सिडनी रॉलेट की अध्यक्षता में पारित 'अराजक और क्रांतिकारी अपराध अधिनियम'।
- नारा: "बिना वकील, बिना अपील, बिना दलील का कानून"।
- प्रावधान: संदेह के आधार पर किसी भी व्यक्ति को अनिश्चितकाल के लिए बिना मुकदमा चलाए गिरफ्तार करने का अधिकार।
- जलियांवाला बाग हत्याकांड:
- तिथि: 13 अप्रैल 1919 (बैसाखी का दिन), अमृतसर (पंजाब)।
- कारण: लोकप्रिय नेताओं डॉ. सैफुद्दीन किचलू और डॉ. सत्यपाल की गिरफ्तारी के विरोध में शांतिपूर्ण सभा।
- गोली चलाने का आदेश: अमृतसर के कार्यवाहक ब्रिगेडियर जनरल आर. ई. एच. डायर (General Dyer) ने दिया।
- जांच समिति: ब्रिटिश सरकार ने हंटर कमेटी (Hunter Committee) गठित की; कांग्रेस ने अपनी ओर से मदन मोहन मालवीय जांच समिति बनाई।
- त्याग-पत्र/उपाधियाँ: रवींद्रनाथ टैगोर ने 'नाइटहुड' (Sir) की उपाधि और महात्मा गांधी ने 'कैसर-ए-हिंद' पदक लौटा दिया। सर शंकरन नायर ने वायसराय की कार्यकारिणी से इस्तीफा दिया।
- बदला: 13 मार्च 1940 को लंदन में सरदार उधम सिंह ने पंजाब के तत्कालीन लेफ्टिनेंट गवर्नर माइकल ओ'डायर की गोली मारकर हत्या की।
- खिलाफत आंदोलन (1919–1920):
- कारण: प्रथम विश्वयुद्ध में पराजय के बाद ब्रिटेन द्वारा तुर्की के सुल्तान (खलीफा) का अपमान और ओटोमन साम्राज्य का विघटन (सेव्रेस की संधि)।
- भारत में नेतृत्व: अली बंधु — मौलाना मोहम्मद अली और शौकत अली।
- अखिल भारतीय खिलाफत सम्मेलन: नवंबर 1919 में दिल्ली में हुआ, जिसके अध्यक्ष महात्मा गांधी चुने गए।
असहयोग आंदोलन (1920–1922)
- अनुमोदन: सितंबर 1920 के कलकत्ता के विशेष अधिवेशन में प्रस्ताव पेश हुआ तथा दिसंबर 1920 के नागपुर अधिवेशन में इसे पूर्ण स्वीकृति मिली।
- स्वरूप: सरकारी उपाधियों का त्याग, स्कूलों, कॉलेजों, अदालतों और विदेशी वस्त्रों का बहिष्कार; चरखा, खादी तथा राष्ट्रीय शिक्षण संस्थानों (काशी विद्यापीठ, बिहार विद्यापीठ, जामिया मिलिया) का प्रसार।
- चौरी-चौरा कांड:
- तिथि: 5 फरवरी 1922।
- स्थान: गोरखपुर जिला (उत्तर प्रदेश)।
- घटना: उत्तेजित भीड़ ने पुलिस थाने में आग लगा दी, जिसमें एक थानेदार सहित 22 पुलिसकर्मी मारे गए।
- आंदोलन की वापसी: हिंसा से दुखी होकर महात्मा गांधी ने 12 फरवरी 1922 को बारदोली में कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में असहयोग आंदोलन को वापस लेने की घोषणा की।
- गांधीजी की गिरफ्तारी: मार्च 1922 में गांधीजी को गिरफ्तार कर जज सी. एन. ब्रूमफील्ड द्वारा 6 वर्ष की कैद की सजा सुनाई गई (स्वास्थ्य कारणों से 1924 में रिहा)।
स्वराज पार्टी एवं साइमन कमीशन
- स्वराज पार्टी (Swaraj Party):
- गठन: 1 जनवरी 1923 (इलाहाबाद)।
- संस्थापक: चितरंजन दास (अध्यक्ष) और मोतीलाल नेहरू (महासचिव)।
- उद्देश्य: विधान परिषदों के भीतर प्रवेश कर सरकारी कामकाज में अड़ंगा लगाना और औपनिवेशिक तंत्र का पर्दाफाश करना।
- विट्ठलभाई पटेल: 1925 में सेंट्रल लेजिस्लेटिव असेंबली (केंद्रीय विधानसभा) के पहले भारतीय अध्यक्ष चुने गए।
- साइमन कमीशन (Simon Commission):
- गठन: 8 नवंबर 1927 को ब्रिटिश सरकार द्वारा 1919 के एक्ट की समीक्षा हेतु।
- कुल सदस्य: 7 (सभी अंग्रेज सदस्य होने के कारण इसे 'श्वेत कमीशन' (White Commission) कहा गया)।
- भारत आगमन: 3 फरवरी 1928 को बंबई पहुँचा।
- विरोध का नारा: "साइमन वापस जाओ" (Simon Go Back)।
- लाला लाजपत राय पर लाठीचार्ज: लाहौर में साइमन कमीशन के विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस अधीक्षक जेम्स ए. स्कॉट के आदेश पर हुए लाठीचार्ज से घायल होकर लाला लाजपत राय की मृत्यु हुई।
लाला लाजपत राय का अमर कथन: "मेरे शरीर पर पड़ी एक-एक लाठी ब्रिटिश साम्राज्य के ताबूत की कील साबित होगी।"
- नेहरू रिपोर्ट (1928): पंडित मोतीलाल नेहरू की अध्यक्षता में भारत के भावी संविधान का प्रारूप तैयार किया गया (डोमिनियन स्टेटस की मांग)।
- लाहौर अधिवेशन (1929):
- अध्यक्ष: पंडित जवाहरलाल नेहरू।
- ऐतिहासिक निर्णय: 'पूर्ण स्वराज' (Complete Independence) का संकल्प पारित।
- प्रथम स्वाधीनता दिवस: रावी नदी के तट पर 31 दिसंबर 1929 की मध्यरात्रि को तिरंगा फहराया गया और 26 जनवरी 1930 को देश भर में पहला स्वतंत्रता दिवस मनाने का निर्णय हुआ।
सविनय अवज्ञा आंदोलन (Civil Disobedience Movement - 1930)
- गांधीजी की 11 सूत्री मांगें: जनवरी 1930 में 'यंग इंडिया' के माध्यम से वायसराय लॉर्ड इरविन के समक्ष रखी गईं, जिसे ब्रिटिश सरकार ने ठुकरा दिया।
- दांडी मार्च (नमक सत्याग्रह):
- आरंभ: 12 मार्च 1930 (साबरमती आश्रम से)।
- समापन: 6 अप्रैल 1930 (दांडी, नवसारी जिला, गुजरात)।
- दूरी एवं दिन: लगभग 240 मील (385 किमी), 24 दिनों की पदयात्रा।
- अनुयायी: गांधीजी के साथ 78 चुने हुए सत्याग्रही थे।
- घटना: 6 अप्रैल 1930 को गांधीजी ने दांडी पहुंचकर समुद्र तट पर नमक बनाकर ब्रिटिश नमक कानून तोड़ा और देशव्यापी सविनय अवज्ञा आंदोलन की शुरुआत की।
- उत्तर-पश्चिम सीमांत प्रांत: खान अब्दुल गफ्फार खान ('सीमांत गांधी' / फ्रंटियर गांधी) ने नेतृत्व किया; उनका संगठन 'खुदाई खिदमतगार' (लाल कुर्ती दल) कहलाया। पेशावर में प्रदर्शनकारियों पर गढ़वाल राइफल्स के वीर चंद्र सिंह गढ़वाली ने गोली चलाने से इनकार कर दिया।
- धरासणा नमक डिपो सत्याग्रह: गुजरात में सरोजिनी नायडू, इमाम साहब और मणिलाल (गांधीजी के पुत्र) के नेतृत्व में अहिंसक सत्याग्रहियों पर बर्बर लाठीचार्ज हुआ।
- गांधी-इरविन समझौता (दिल्ली पैक्ट): 5 मार्च 1931 को संपन्न हुआ; गांधीजी ने सविनय अवज्ञा स्थगित करने और द्वितीय गोलमेज सम्मेलन में भाग लेने की सहमति दी।
- गोलमेज सम्मेलन (लंदन):
- प्रथम (1930): कांग्रेस ने बहिष्कार किया।
- द्वितीय (1931): गांधीजी ने एकमात्र कांग्रेस प्रतिनिधि के रूप में भाग लिया (सांप्रदायिक गतिरोध के कारण असफल)।
- तृतीय (1932): कांग्रेस अनुपस्थित रही।
- तीनों गोलमेज सम्मेलनों में भाग लेने वाले नेता: डॉ. भीमराव अंबेडकर और तेज बहादुर सप्रू।
- सांप्रदायिक पंचाट (Communal Award - 16 अगस्त 1932): ब्रिटिश प्रधानमंत्री रैम्से मैकडोनाल्ड द्वारा दलितों को पृथक निर्वाचन क्षेत्र देने की घोषणा।
- पूना पैक्ट (Poona Pact):
- तिथि: 24 सितंबर 1932 (यरवदा जेल, पुणे)।
- मध्यस्थ: मदन मोहन मालवीय, सी. राजगोपालाचारी, डॉ. राजेंद्र प्रसाद।
- पक्षकार: महात्मा गांधी और डॉ. भीमराव अंबेडकर।
- परिणाम: दलितों के लिए पृथक निर्वाचन व्यवस्था समाप्त की गई तथा प्रांतीय विधानमंडलों में आरक्षित सीटें 71 से बढ़ाकर 147 कर दी गईं।
किसान, मजदूर एवं जनजातीय आंदोलन
- उत्तर प्रदेश किसान सभा: 1918 ई. में गौरीशंकर मिश्र, इंद्र नारायण द्विवेदी और मदन मोहन मालवीय के प्रयासों से।
- अवध किसान सभा: 1920 ई. में बाबा रामचंद्र और जवाहरलाल नेहरू के प्रयासों से।
- मोपला विद्रोह (1921): केरल के मालाबार तट पर मुस्लिम काश्तकारों (मोपला) द्वारा हिंदू जमींदारों और ब्रिटिश हुकूमत के विरुद्ध खूनी संघर्ष (नेता: अली मुसलियार)।
- बारदोली सत्याग्रह (1928):
- स्थान: गुजरात का सूरत जिला।
- कारण: सरकार द्वारा लगान में 22% की अनुचित वृद्धि।
- नेतृत्व: वल्लभभाई पटेल।
- उपाधि: बारदोली की महिलाओं की ओर से गांधीजी ने वल्लभभाई पटेल को 'सरदार' की उपाधि दी।
- अखिल भारतीय किसान सभा (All India Kisan Sabha):
- स्थापना: 11 अप्रैल 1936 (लखनऊ)।
- प्रथम अध्यक्ष: स्वामी सहजानंद सरस्वती।
- महासचिव: प्रो. एन. जी. रंगा।
- रम्पा विद्रोह (1922–1924): आंध्र प्रदेश के गोदावरी तटीय वन क्षेत्रों में अंग्रेजों के वन कानूनों के खिलाफ आदिवासियों का गुरिल्ला संघर्ष (नेता: अल्लूरी सीताराम राजू)।
- ताना भगत आंदोलन (1914): छोटानागपुर क्षेत्र (झारखंड) में उरांव आदिवासियों द्वारा अहिंसक व धार्मिक सुधारवादी आंदोलन (नेता: जतरा भगत)।
राष्ट्रीय आंदोलन में बिहार की ऐतिहासिक भूमिका (BSEB विशेष)
| घटना / संगठन | वर्ष | प्रमुख व्यक्ति / विवरण |
|---|---|---|
| चंपारण सत्याग्रह | 1917 | महात्मा गांधी, राजकुमार शुक्ल, डॉ. राजेंद्र प्रसाद, धरणीधर, गोरख प्रसाद। |
| रोहतास/शाहाबाद में असहयोग | 1920–22 | मौलाना मजहरुल हक ने पटना में 'सदाकत आश्रम' की नींव रखी और 'द मदरलैंड' अखबार निकाला। |
| बिहार विद्यापीठ की स्थापना | 6 फरवरी 1921 | गांधीजी द्वारा उद्घाटन; मजहरुल हक कुलाधिपति (Chancellor) और ब्रजकिशोर प्रसाद कुलपति बने। |
| स्वराज दल की बिहार शाखा | 1923 | श्रीकृष्ण सिंह (बिहार केसरी) के नेतृत्व में गठित। |
| बिहार प्रांतीय किसान सभा | 1929 | स्वामी सहजानंद सरस्वती ने सोनपुर मेले में स्थापना की (सचिव: श्रीकृष्ण सिंह)। |
| नमक सत्याग्रह (बिहार) | 1930 | चंपारण और सारण में नमकीन मिट्टी से नमक बनाकर शुरुआत; पटना में अंबिका कांत सिंह के नेतृत्व में नखास पिंड पर प्रदर्शन। |
| चौकीदारी कर बंदी आंदोलन | 1930 | सविनय अवज्ञा के दौरान बिहार में तटीय सीमा न होने के कारण चौकीदारी टैक्स देने से इनकार किया गया (विशेषकर मुंगेर, भागलपुर, सारण)। |
| बिहार सोशलिस्ट पार्टी | 1931 / 1934 | 1931 में गंगाशरण सिंह, रामवृक्ष बेनीपुरी; विधिवत स्थापना 1934 (अंजुमन इस्लामिया हॉल, पटना) में अध्यक्ष: आचार्य नरेंद्र देव, सचिव: जयप्रकाश नारायण। |
| सचिवालय गोलीकांड (पटना) | 11 अगस्त 1942 | भारत छोड़ो आंदोलन के समय सचिवालय पर तिरंगा फहराते हुए 7 छात्र शहीद हुए। आदेश देने वाला पटना का डीएम डब्ल्यू. जी. आर्चर था। |
| आजाद दस्ता (Azad Dasta) | 1942 | हजारीबाग जेल से भागकर जयप्रकाश नारायण (JP) ने नेपाल के राजविलास जंगल में भूमिगत छापामार दस्ते का गठन किया। |
क्रांतिकारी राष्ट्रवाद एवं प्रमुख संगठन
- हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन (HRA): 1924 में कानपुर में शचींद्रनाथ सान्याल, रामप्रसाद बिस्मिल और चंद्रशेखर आजाद द्वारा स्थापित।
- काकोरी ट्रेन एक्शन (काकोरी कांड): 9 अगस्त 1925 को सहारनपुर-लखनऊ पैसेंजर से सरकारी खजाना लूटा गया। रामप्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खां, राजेंद्र लाहिड़ी और रोशन सिंह को फांसी हुई।
- हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन (HSRA): 1928 में फिरोजशाह कोटला (दिल्ली) में चंद्रशेखर आजाद, भगत सिंह और सुखदेव द्वारा समाजवाद के लक्ष्य के साथ पुनर्गठित।
- सॉन्डर्स हत्याकांड: 17 दिसंबर 1928 को भगत सिंह, राजगुरु और चंद्रशेखर आजाद ने लाहौर में लालाजी की मौत के जिम्मेदार अंग्रेज पुलिस अधिकारी जॉन सॉन्डर्स को गोली मारी।
- सेंट्रल असेंबली बम कांड: 8 अप्रैल 1929 को भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त ने पब्लिक सेफ्टी बिल और ट्रेड डिस्प्यूट्स बिल के विरोध में खाली बेंचों पर बम फेंका।
- नारे: "बहरों को सुनाने के लिए धमाके की जरूरत होती है", "इंकलाब जिंदाबाद", "साम्राज्यवाद का नाश हो"।
- लाहौर षड्यंत्र केस एवं शहादत: 23 मार्च 1931 को भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को लाहौर सेंट्रल जेल में फांसी दी गई।
- जतिन दास की शहादत: जेल में कैदियों के मानवीय अधिकारों के लिए 64 दिनों की ऐतिहासिक भूख हड़ताल के बाद 13 सितंबर 1929 को शहीद हुए।
- चंद्रशेखर आजाद की शहादत: 27 फरवरी 1931 को इलाहाबाद के अल्फ्रेड पार्क में पुलिस मुठभेड़ के दौरान स्वयं को अंतिम गोली मारी।
- चटगांव शस्त्रागार छापा (1930): बंगाल में सूर्य सेन ('मास्टर दा') और उनकी 'इंडियन रिपब्लिकन आर्मी' द्वारा चटगांव शस्त्रागार पर सफल धावा।
महत्वपूर्ण राजनीतिक नारे एवं वक्तव्य
| नारा / कथन | संबंधित महापुरुष |
|---|---|
| "स्वराज हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं इसे लेकर रहूँगा" | बाल गंगाधर तिलक |
| "इंकलाब जिंदाबाद" | हसरत मोहानी (रचित) / भगत सिंह (लोकप्रिय बनाया) |
| "तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा" | सुभाष चंद्र बोस |
| "दिल्ली चलो" / "जय हिंद" | सुभाष चंद्र बोस |
| "करो या मरो" (Do or Die) | महात्मा गांधी (8 अगस्त 1942, भारत छोड़ो आंदोलन) |
| "अंग्रेजों भारत छोड़ो" (Quit India) | युसुफ मेहरअली (रचित) / महात्मा गांधी |
| "सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है" | बिस्मिल अजीमाबादी (पटना) / रामप्रसाद बिस्मिल |
| "सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्तां हमारा" | मुहम्मद इकबाल |
4. महत्वपूर्ण तिथिवार घटनाक्रम (Timeline: 1885–1947)
| वर्ष | प्रमुख ऐतिहासिक घटना |
|---|---|
| 1885 | भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना (बंबई)। |
| 1905 | लॉर्ड कर्जन द्वारा बंगाल का विभाजन; स्वदेशी आंदोलन का आरंभ। |
| 1906 | ढाका में ऑल इंडिया मुस्लिम लीग की स्थापना। |
| 1907 | कांग्रेस का सूरत विभाजन (नरम दल और गरम दल अलग हुए)। |
| 1911 | बंगाल विभाजन रद्द; भारत की राजधानी कलकत्ता से दिल्ली स्थानांतरित। |
| 1913 | सैन फ्रांसिस्को में लाला हरदयाल द्वारा गदर पार्टी की स्थापना। |
| 1915 | 9 जनवरी को महात्मा गांधी का दक्षिण अफ्रीका से भारत आगमन। |
| 1916 | लखनऊ समझौता; तिलक और एनी बेसेंट द्वारा होमरूल आंदोलन। |
| 1917 | चंपारण सत्याग्रह (गांधीजी का भारत में पहला सत्याग्रह)। |
| 1918 | अहमदाबाद मिल मजदूर आंदोलन एवं खेड़ा सत्याग्रह। |
| 1919 | रॉलेट एक्ट पारित; 13 अप्रैल को अमृतसर में जलियांवाला बाग नरसंहार। |
| 1920 | असहयोग आंदोलन और खिलाफत आंदोलन का विधिवत आरंभ। |
| 1922 | 5 फरवरी को चौरी-चौरा कांड; गांधीजी द्वारा असहयोग आंदोलन वापस। |
| 1923 | 1 जनवरी को चितरंजन दास व मोतीलाल नेहरू द्वारा स्वराज पार्टी का गठन। |
| 1925 | 9 अगस्त को काकोरी ट्रेन डकैती (काकोरी ट्रेन एक्शन)। |
| 1927 | साइमन कमीशन की ब्रिटेन में नियुक्ति। |
| 1928 | साइमन कमीशन का भारत आगमन; नेहरू रिपोर्ट; बारदोली सत्याग्रह। |
| 1929 | कांग्रेस का लाहौर अधिवेशन — 'पूर्ण स्वराज' का प्रस्ताव पारित। |
| 1930 | 26 जनवरी को पहला स्वतंत्रता दिवस; 12 मार्च से दांडी मार्च; सविनय अवज्ञा आंदोलन। |
| 1931 | 5 मार्च को गांधी-इरविन समझौता; 23 मार्च को भगत सिंह, सुखदेव व राजगुरु को फांसी। |
| 1932 | रैम्से मैकडोनाल्ड का सांप्रदायिक पंचाट; 24 सितंबर को पूना पैक्ट। |
| 1935 | भारत सरकार अधिनियम (Government of India Act 1935) पारित। |
| 1936 | लखनऊ में स्वामी सहजानंद द्वारा अखिल भारतीय किसान सभा की स्थापना। |
| 1939 | सुभाष चंद्र बोस द्वारा फॉरवर्ड ब्लॉक की स्थापना; द्वितीय विश्वयुद्ध का आरंभ। |
| 1942 | क्रिप्स मिशन की विफलता; 8 अगस्त को 'भारत छोड़ो आंदोलन' का प्रस्ताव पारित। |
| 1945 | द्वितीय विश्वयुद्ध समाप्त; शिमला सम्मेलन। |
| 1946 | कैबिनेट मिशन भारत आया; संविधान सभा का गठन। |
| 1947 | लॉर्ड माउंटबेटन योजना; 15 अगस्त 1947 को भारत स्वतंत्र हुआ। |
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