बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (BSEB) कक्षा 10 इतिहास
अध्याय 2: "समाजवाद एवं साम्यवाद" — 50 महत्वपूर्ण प्रश्न एवं उत्तर
अति-लघु उत्तरीय प्रश्न (One-Liner / 1 अंक वाले प्रश्न)
1. वैज्ञानिक समाजवाद (Scientific Socialism) का जनक किसे माना जाता है?
कार्ल मार्क्स को।
2. कार्ल मार्क्स का जन्म कब और कहाँ हुआ था?
5 मई 1818 को जर्मनी के राइन प्रांत के त्रेयर (Trier) नगर में।
3. 'दास कैपिटल' (Das Kapital) पुस्तक की रचना किसने और कब की?
कार्ल मार्क्स ने 1867 ई. में (इसे "समाजवादियों की बाइबिल" कहा जाता है)।
4. 'कम्युनिस्ट मेनिफेस्टो' (साम्यवादी घोषणापत्र) का प्रकाशन किस वर्ष हुआ था?
1848 ई. में (कार्ल मार्क्स और फ्रेडरिक एंगेल्स द्वारा)।
5. रूस के सम्राट को क्या कहा जाता था?
ज़ार (Czar)।
6. रूस में जारशाही का अंत किस क्रांति के फलस्वरूप हुआ?
मार्च 1917 की रूसी क्रांति (फरवरी क्रांति - पुरानी रूसी पंचांग के अनुसार)।
7. बोल्शेविक क्रांति (अक्टूबर क्रांति) कब और किसके नेतृत्व में हुई थी?
7 नवंबर 1917 को (रूसी कैलेंडर के अनुसार 25 अक्टूबर 1917) व्लादिमीर लेनिन के नेतृत्व में।
8. 'खूनी रविवार' (Bloody Sunday) की ऐतिहासिक घटना कब हुई थी?
9 जनवरी 1905 (नए कैलेंडर के अनुसार 22 जनवरी 1905) को सेंट पीटर्सबर्ग में।
9. लेनिन ने 'नई आर्थिक नीति' (NEP) किस वर्ष लागू की थी?
1921 ई. में।
10. लाल सेना (Red Army) का गठन किसने किया था?
लियोन ट्रॉटस्की (Leon Trotsky) ने।
11. सोवियत संघ (USSR) में गुप्त पुलिस संगठन 'चेका' (Cheka) का गठन किसने किया था?
लेनिन ने (फेलिक्स डेज़रझिन्स्की के नेतृत्व में)।
12. रूस में कृषक-दास प्रथा (Serfdom) का अंत कब और किस ज़ार ने किया?
1861 ई. में ज़ार अलेक्जेंडर द्वितीय ने।
13. 'वार एंड पीस' (War and Peace) पुस्तक के लेखक कौन थे?
काउंट लियो टॉल्स्टॉय।
14. प्रथम इंटरनेशनल (First International) की स्थापना कब और कहाँ हुई थी?
1864 ई. में लंदन में।
15. अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस (May Day) कब मनाया जाता है?
प्रत्येक वर्ष 1 मई को (1889 के पेरिस में द्वितीय इंटरनेशनल के फैसले के बाद)।
16. फ्रांसीसी समाजवाद का विकासकर्ता किसे माना जाता है?
सेंट साइमन (Saint-Simon) को।
17. इंग्लैंड में समाजवाद (Utopian Socialism) का जनक किसे कहा जाता है?
रॉबर्ट ओवेन (Robert Owen) को।
18. रूस में 'सोवियत' का क्या अर्थ था?
मजदूरों, सैनिकों और किसानों की चुनी हुई प्रतिनिधि सभा या परिषद।
19. रूस ने प्रथम विश्व युद्ध से अलग होने के लिए जर्मनी के साथ कौन-सी संधि की थी?
मार्च 1918 में 'ब्रेस्ट-लिटोव्स्क की संधि' (Treaty of Brest-Litovsk)।
20. लेनिन की मृत्यु किस वर्ष हुई थी?
1924 ई. में।
लघु उत्तरीय प्रश्न (Short Answer Questions / 2-3 अंक वाले प्रश्न)
21. पूंजीवाद (Capitalism) और समाजवाद (Socialism) में क्या मूल अंतर है?
- पूंजीवाद: उत्पादन के साधनों (जमीन, कारखाने, पूंजी) पर निजी व्यक्तियों का स्वामित्व होता है और इसका मुख्य उद्देश्य व्यक्तिगत लाभ कमाना होता है।
- समाजवाद: उत्पादन और वितरण के साधनों पर पूरे समाज या राज्य का स्वामित्व होता है और इसका मुख्य उद्देश्य सामाजिक कल्याण व समानता की स्थापना करना होता है।
22. यूरोपियन यूटोपियन (स्वप्नदर्शी) समाजवादी कौन थे? उनकी मुख्य कमजोरी क्या थी?
कार्ल मार्क्स से पहले के समाजवादी चिंतक (जैसे सेंट साइमन, चार्ल्स फूरियर, रॉबर्ट ओवेन) यूटोपियन समाजवादी कहलाए। उनकी कमजोरी यह थी कि वे वर्ग-संघर्ष और क्रांति के बिना केवल पूंजीपतियों के हृदय-परिवर्तन और आदर्शवादी योजनाओं के जरिए समाजवाद लाना चाहते थे, जो व्यावहारिक रूप से संभव नहीं था।
23. कार्ल मार्क्स के ऐतिहासिक भौतिकवाद (Historical Materialism) का क्या सिद्धांत है?
मार्क्स के अनुसार मानव समाज के विकास का मूल आधार भौतिक परिस्थितियां (उत्पादन के साधन और उत्पादन संबंध) हैं। इतिहास का प्रत्येक युग इस बात से तय होता है कि उत्पादन कैसे होता है और उस पर किसका नियंत्रण है। भौतिक साधनों में परिवर्तन से ही समाज, कानून और राजनीति बदलते हैं।
24. 'खूनी रविवार' (Bloody Sunday - 1905) की घटना क्या थी?
9 जनवरी 1905 को रूस के सेंट पीटर्सबर्ग में हजारों निहत्थे मजदूर, अपनी पत्नियों और बच्चों के साथ, रोटी की मांग करते हुए और "भगवान ज़ार की रक्षा करे" के नारे लगाते हुए विंटर पैलेस (जार के महल) की ओर बढ़ रहे थे। फादर गैपॉन के नेतृत्व वाले इस शांतिपूर्ण जुलूस पर ज़ार की सेना ने अंधाधुंध गोलियां चला दीं, जिसमें सैकड़ों निर्दोष लोग मारे गए। रविवार का दिन होने के कारण इसे 'खूनी रविवार' कहा गया।
25. 1917 की रूसी क्रांति के कोई दो प्रमुख कारण लिखें।
- ज़ार निकोलस द्वितीय का निरंकुश और अयोग्य शासन: ज़ार जनता की समस्याओं से अनभिज्ञ था और उसकी पत्नी जरीना अलेक्जेंड्रा पर रासपुतिन जैसे भ्रष्ट तांत्रिक का प्रभाव था।
- रूसी किसानों की दयनीय स्थिति: 1861 में दास प्रथा खत्म होने के बावजूद किसानों के पास बहुत छोटे खेत थे, उन पर भारी कर था और वे पुरानी तकनीकों से खेती करते हुए भूखमरी की कगार पर थे।
26. रूसीकरण की नीति (Russification Policy) क्या थी? इसने क्रांति को कैसे भड़काया?
रूस के ज़ार (विशेषकर अलेक्जेंडर तृतीय और निकोलस द्वितीय) ने साम्राज्य में रहने वाली गैर-रूसी जातियों (पोल, फिन, यहूदी, उज्बेक आदि) पर जबरन रूसी भाषा, संस्कृति और रूढ़िवादी ईसाई धर्म थोपने की नीति अपनाई ("एक ज़ार, एक चर्च, एक रूस")। इस सांस्कृतिक उत्पीड़न से गैर-रूसी अल्पसंख्यकों में भारी विद्रोह की भावना भड़क गई।
27. बोल्शेविक (Bolshevik) और मेन्शेविक (Menshevik) में क्या अंतर था?
1903 में रूसी सोशल डेमोक्रेटिक लेबर पार्टी दो गुटों में बंट गई:
- बोल्शेविक (बहुसंख्यक): लेनिन के नेतृत्व वाला यह दल अनुशासित, पेशेवर क्रांतिकारियों का संगठन चाहता था जो तुरंत सशस्त्र क्रांति कर सर्वहारा वर्ग की तानाशाही स्थापित करे।
- मेन्शेविक (अल्पसंख्यक): मार्टोव के नेतृत्व वाला यह गुट उदारवादी था और पश्चिमी यूरोप की तरह सभी के लिए खुले दल तथा संसदीय लोकतंत्र के जरिए क्रमिक सुधारों का पक्षधर था।
28. लेनिन के 'अप्रैल थीसिस' (April Theses) की मुख्य मांगें क्या थीं?
अप्रैल 1917 में स्विट्जरलैंड से रूस लौटने पर लेनिन ने बोल्शेविक पार्टी के सामने तीन प्रमुख लक्ष्य रखे:
- प्रथम विश्व युद्ध को तुरंत समाप्त किया जाए।
- समस्त भूमि किसानों में बांटी जाए (जमींदारी समाप्त हो)।
- "सारी सत्ता सोवियतों को सौंप दी जाए" और बैंकों का राष्ट्रीयकरण हो।
29. सर्वहारा वर्ग (Proletariat) किसे कहा जाता है?
समाज का वह निर्धन, श्रमजीवी वर्ग जिसके पास उत्पादन का कोई निजी साधन नहीं होता और जो अपनी आजीविका के लिए केवल अपना शारीरिक श्रम पूंजीपतियों को बेचने पर निर्भर रहता है, उसे मार्क्सवादी शब्दावली में 'सर्वहारा वर्ग' कहा जाता है। इसमें औद्योगिक मजदूर, खेत मजदूर और गरीब किसान शामिल हैं।
30. रॉबर्ट ओवेन ने समाजवाद के व्यावहारिक प्रयोग के लिए क्या किया?
ब्रिटिश उद्योगपति रॉबर्ट ओवेन ने स्कॉटलैंड के न्यू लैनार्क में अपनी सूती मिल में काम करने वाले मजदूरों के काम के घंटे घटाए, उनकी मजदूरी बढ़ाई, अच्छे आवास बनवाए और बच्चों के लिए विद्यालय खोले। इसके बावजूद उसका मुनाफा बढ़ा। बाद में उसने अमेरिका के इंडियाना में 'न्यू हार्मनी' नाम से एक समाजवादी बस्ती बसाने का असफल प्रयोग किया।
31. 'चेका' (Cheka) क्या था और इसकी स्थापना क्यों की गई थी?
यह लेनिन द्वारा 1917 में गठित एक विशेष असाधारण गुप्त पुलिस संगठन (All-Russian Extraordinary Commission) था। इसका मुख्य उद्देश्य क्रांति के विरोधियों, कालाबाजारियों, षड्यंत्रकारियों और गृहयुद्ध के दौरान ज़ार-समर्थकों की पहचान कर उन्हें तुरंत समाप्त करना था।
32. लाल सेना (Red Army) और श्वेत सेना (White Army) के बीच गृहयुद्ध क्या था?
बोल्शेविक क्रांति के बाद 1918 से 1920 तक रूस में गृहयुद्ध छिड़ा। एक तरफ लेनिन और ट्रॉटस्की के नेतृत्व वाली कम्युनिस्टों की 'लाल सेना' थी, और दूसरी तरफ ज़ार के पुराने जनरलों, पूंजीपतियों तथा विदेशी शक्तियों (ब्रिटेन, फ्रांस, अमेरिका) समर्थित 'श्वेत सेना' थी। अंततः लाल सेना ने सभी विरोधियों को परास्त कर दिया।
33. युद्ध साम्यवाद (War Communism) क्या था?
गृहयुद्ध (1918-1921) की विषम परिस्थितियों में सेना और शहरों को भोजन उपलब्ध कराने के लिए लेनिन ने कठोर आर्थिक नीति लागू की। इसके तहत सभी उद्योगों का राष्ट्रीयकरण कर दिया गया, निजी व्यापार पर प्रतिबंध लगा, हड़तालों को गैरकानूनी किया गया और किसानों से उनकी आवश्यकता से अधिक सारा अनाज जबरन जब्त किया जाने लगा।
34. लेनिन को 'नई आर्थिक नीति' (NEP) क्यों लानी पड़ी?
'युद्ध साम्यवाद' की कठोरता और जबरन अनाज जब्ती के कारण किसानों ने खेती कम कर दी, जिससे 1920-21 में रूस में भीषण अकाल पड़ा और क्रोनस्टाट के नौसैनिकों ने विद्रोह कर दिया। देश को भुखमरी और आर्थिक तबाही से बचाने के लिए लेनिन ने साम्यवाद में अस्थायी लचीलापन लाते हुए 1921 में NEP लागू की।
35. कम्युनिस्ट इंटरनेशनल या कॉमिन्टर्न (Comintern) क्या था?
मार्च 1919 में मॉस्को में लेनिन द्वारा स्थापित 'तृतीय इंटरनेशनल' को कॉमिन्टर्न कहा जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य दुनिया भर के कम्युनिस्ट दलों को संगठित करना, उन्हें वित्तीय व रणनीतिक सहायता देना तथा विश्व स्तर पर साम्यवादी क्रांति और उपनिवेशवाद विरोधी आंदोलनों को तेज करना था।
36. कार्ल मार्क्स के 'अतिरिक्त मूल्य के सिद्धांत' (Theory of Surplus Value) को स्पष्ट करें।
मार्क्स के अनुसार किसी वस्तु का वास्तविक मूल्य उस पर लगे मजदूर के श्रम से तय होता है। लेकिन पूंजीपति वस्तु को ऊंचे दाम पर बेचता है और मजदूर को केवल जीवन-यापन लायक न्यूनतम मजदूरी देता है। वस्तु के बिक्री मूल्य और मजदूर को दी गई मजदूरी का अंतर ही 'अतिरिक्त मूल्य' कहलाता है, जिसे पूंजीपति हड़प कर मुनाफा कमाता है।
37. प्रथम विश्व युद्ध में रूस की पराजय ने क्रांति का मार्ग कैसे प्रशस्त किया?
रूसी सेना के पास आधुनिक हथियारों, वर्दी, गोला-बारूद और भोजन की भारी कमी थी। 1914 से 1916 के बीच 60 लाख से अधिक रूसी सैनिक मारे गए या घायल हुए। सेना का मनोबल टूट गया और देश में भुखमरी फैल गई। इस सैनिक असंतोष ने जनता के साथ मिलकर ज़ार की सत्ता को उखाड़ फेंका।
38. रासपुतिन कौन था और उसका पतन क्यों हुआ?
रासपुतिन एक ढोंगी और भ्रष्ट साधु था, जो महारानी जरीना के हीमोफीलिया से पीड़ित पुत्र को सम्मोहित करने के बहाने राजदरबार में असीम प्रभाव हासिल कर चुका था। वह मंत्रियों की नियुक्ति और पदच्युति में हस्तक्षेप करता था। उसकी अनैतिक हरकतों से तंग आकर 1916 में देशभक्त रूसी रईसों ने उसकी हत्या कर दी।
39. कार्ल मार्क्स के अनुसार 'धर्म' क्या है?
कार्ल मार्क्स ने कहा था कि "धर्म जनता के लिए अफीम है।" उनका मानना था कि शासक और पूंजीपति वर्ग धर्म का उपयोग गरीबों को उनकी दुर्दशा को भाग्य या ईश्वर की मर्जी मानने के लिए बरगलाने और शोषण के विरुद्ध विद्रोह करने से रोकने के लिए एक नशे की तरह करते हैं।
40. ब्रेस्ट-लिटोव्स्क की संधि (1918) रूस के लिए अपमानजनक क्यों थी?
लेनिन ने क्रांति की रक्षा और गृहयुद्ध से निपटने के लिए जर्मनी से शांति समझौता किया। इस संधि के तहत रूस को अपना पोलैंड, बाल्टिक राज्य, फिनलैंड और यूक्रेन का बड़ा उपजाऊ भूभाग तथा लगभग एक-तिहाई कृषि भूमि, कोयला खदानें और आबादी जर्मनी को सौंपनी पड़ी थी।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Long Answer Questions / 4-5 अंक वाले प्रश्न)
41. 1917 की रूसी क्रांति (बोल्शेविक क्रांति) के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक कारणों का विस्तार से विश्लेषण करें।
1917 की बोल्शेविक क्रांति 20वीं सदी की सर्वाधिक युगांतरकारी घटना थी। इसके प्रमुख कारण निम्नलिखित थे:
- राजनीतिक कारण:
- ज़ार का निरंकुश शासन: रोमनोव वंश के ज़ार निकोलस द्वितीय देवी-अधिकार के सिद्धांत पर विश्वास करते थे और किसी भी लोकतांत्रिक सुधार के खिलाफ थे।
- संसदीय संस्था 'ड्यूमा' को पंगु बनाना: 1905 की क्रांति के बाद बनी संसद 'ड्यूमा' को ज़ार ने बार-बार भंग कर अपनी कठपुतली बनाए रखा।
- रासपुतिन का दुष्प्रभाव: ज़ार और महारानी पर रासपुतिन के प्रभाव ने राजशाही की साख धूल में मिला दी थी।
- सामाजिक कारण:
- किसानों का असंतोष: 1861 के सुधारों के बाद भी किसान भारी भूमि-करों और जमींदारों की बेगारी से त्रस्त थे।
- मजदूरों का अमानवीय शोषण: औद्योगिक मजदूरों से 12 से 15 घंटे काम कराया जाता था, वेतन न्यूनतम था और उन्हें कोई ट्रेड यूनियन बनाने का अधिकार नहीं था।
- रूसीकरण की दमनकारी नीति: गैर-रूसी जनता पर जबरन भाषा व संस्कृति थोपने से पोल, फिन और यहूदी खुलेआम बगावत पर उतर आए।
- आर्थिक कारण: प्रथम विश्व युद्ध के कारण देश में परिवहन व्यवस्था ठप हो गई, कारखाने बंद हो गए और पेट्रोग्राद में रोटी के लिए दंगे शुरू हो गए।
- तात्कालिक कारण (प्रथम विश्व युद्ध): रूसी सेना की भारी पराजय और 60 लाख से अधिक सैनिकों के हताहत होने से सेना ने ज़ार के आदेशों को मानने से इनकार कर दिया, जिससे क्रांति की ज्वाला भड़क उठी।
42. कार्ल मार्क्स के जीवन, प्रमुख विचारों और समाजवाद के विकास में उनके योगदान का मूल्यांकन करें।
कार्ल मार्क्स आधुनिक वैज्ञानिक समाजवाद के प्रणेता थे। उनके विचारों ने संपूर्ण विश्व की राजनीति को बदल दिया:
- दार्शनिक आधार: मार्क्स ने हीगल के द्वंद्ववाद (Dialectics) को अपनाया लेकिन उसे भौतिकवादी आधार दिया। उन्होंने प्रतिपादित किया कि चेतना पदार्थ को तय नहीं करती, बल्कि भौतिक पदार्थ चेतना को तय करता है।
- मार्क्सवाद के मूल सिद्धांत:
- द्वंद्वात्मक भौतिकवाद: प्रकृति और समाज में निरंतर आंतरिक विरोधों के जरिए विकास होता है।
- वर्ग-संघर्ष का सिद्धांत (Class Struggle): मार्क्स ने 'कम्युनिस्ट मेनिफेस्टो' में लिखा कि "अब तक के सभी समाजों का इतिहास वर्ग-संघर्ष का इतिहास रहा है।" हर युग में शोषक और शोषित वर्ग आपस में लड़े हैं (जैसे दास-मालिक, सामंत-किसान, पूंजीपति-मजदूर)।
- अतिरिक्त मूल्य का सिद्धांत: पूंजीपति मजदूरों के श्रम से उत्पन्न अतिरिक्त लाभ हड़पते हैं।
- राज्यविहीन एवं वर्गविहीन समाज: सर्वहारा वर्ग सशस्त्र क्रांति द्वारा पूंजीवाद को उखाड़ फेंकेगा और अंततः एक ऐसा साम्यवादी समाज बनेगा जहाँ न कोई वर्ग होगा और न ही शोषणकारी राज्य सत्ता।
- संगठनात्मक योगदान: मार्क्स ने 1864 में लंदन में प्रथम इंटरनेशनल की स्थापना कर दुनिया भर के मजदूरों को नारा दिया— "दुनिया के मजदूरो, एक हो जाओ! तुम्हारे पास खोने के लिए बेड़ियों के सिवा कुछ नहीं है।"
43. लेनिन की 'नई आर्थिक नीति' (NEP - 1921) की मुख्य विशेषताओं और इसके महत्व की समीक्षा करें।
1921 में लेनिन द्वारा लागू NEP साम्यवाद के कठोर सिद्धांतों और व्यावहारिक पूंजीवाद का एक रणनीतिक समन्वय थी:
- लागू करने की पृष्ठभूमि: गृहयुद्ध और 'युद्ध साम्यवाद' से रूसी अर्थव्यवस्था तबाह हो चुकी थी। किसानों में भारी आक्रोश था और 1921 के अकाल ने लाखों जानें ली थीं। लेनिन ने कहा था कि "दो कदम आगे बढ़ने के लिए एक कदम पीछे हटना जरूरी है।"
- NEP की प्रमुख विशेषताएं:
- अनाज की अनिवार्य जब्ती की समाप्ति: किसानों से जबरन अनाज छीनने के बजाय एक निश्चित अनाज-कर (Tax in kind) लगाया गया। शेष बचा हुआ अतिरिक्त अनाज किसान खुले बाजार में बेचने के लिए स्वतंत्र थे।
- सीमित निजी संपत्ति की अनुमति: 20 से कम मजदूरों वाले छोटे उद्योगों को निजी स्वामित्व में चलाने की छूट दी गई।
- मुद्रा और बैंकिंग की बहाली: वस्तु-विनिमय की जगह पुनः नकद मुद्रा (रूबल) और बैंकों की व्यवस्था शुरू की गई।
- विदेशी पूंजी का आमंत्रण: देश के तीव्र औद्योगीकरण के लिए विदेशी पूंजीपतियों को रियायतें दी गईं, हालांकि बड़े उद्योग, रेलवे, खदानें और विदेशी व्यापार (Commanding Heights) पूरी तरह राज्य के नियंत्रण में रहे।
- महत्व: NEP से रूस में कृषि और औद्योगिक उत्पादन तेजी से पूर्व-युद्ध स्तर पर पहुँच गया, भुखमरी समाप्त हुई और सोवियत सत्ता आर्थिक रूप से सुदृढ़ हुई।
44. 1917 की रूसी क्रांति के वैश्विक प्रभावों (Global Impact) की विवेचना करें।
रूसी क्रांति ने केवल रूस को ही नहीं, बल्कि संपूर्ण अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को हिलाकर रख दिया:
- विश्व में पहले समाजवादी राज्य की स्थापना: इसने साबित किया कि पूंजीपतियों और सामंतों के बिना भी मजदूर-किसान अपनी सरकार चला सकते हैं।
- द्विध्रुवीय विश्व का निर्माण: विश्व स्पष्ट रूप से दो विरोधी वैचारिक खेमों में बंट गया—एक तरफ पूंजीवादी-साम्राज्यवादी गुट (अमेरिका, ब्रिटेन) और दूसरी तरफ साम्यवादी गुट (सोवियत संघ), जिसने आगे चलकर 'शीत युद्ध' (Cold War) को जन्म दिया।
- उपनिवेशवाद-विरोधी आंदोलनों को बल: सोवियत संघ ने एशिया और अफ्रीका के गुलाम देशों (भारत, वियतनाम, चीन) के राष्ट्रीय स्वतंत्रता आंदोलनों को खुला नैतिक और वित्तीय समर्थन दिया।
- पूंजीवादी देशों में सामाजिक सुधार: साम्यवादी क्रांति के डर से पश्चिमी पूंजीवादी देशों ने अपने देशों में मजदूरों के काम के घंटे 8 घंटे तय किए, न्यूनतम वेतन कानून बनाए और 'कल्याणकारी राज्य' (Welfare State) की अवधारणा अपनाई।
- नियोजित अर्थव्यवस्था का मॉडल: रूस द्वारा अपनाई गई 'पंचवर्षीय योजना' (Five-Year Plans) की सफलता को देखकर भारत सहित कई स्वतंत्र देशों ने अपने आर्थिक विकास के लिए योजनाबद्ध मॉडल को स्वीकार किया।
45. स्टालिन के 'सामूहिकीकरण' (Collectivization) और 'पंचवर्षीय योजनाओं' का सोवियत संघ पर क्या प्रभाव पड़ा?
लेनिन की मृत्यु के बाद जोसेफ स्टालिन ने सोवियत संघ की बागडोर संभाली और देश का आधुनिकीकरण किया:
- पंचवर्षीय योजनाएं (1928 से): स्टालिन ने देश को तेजी से भारी उद्योग (लोहा, इस्पात, बिजली, रसायन और मशीनरी) संपन्न राष्ट्र बनाने के लिए 'गोसप्लान' (Gosplan) के तहत केंद्रीय नियोजन शुरू किया। मात्र 10-12 वर्षों में सोवियत संघ एक पिछड़े कृषि प्रधान देश से उठकर दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी औद्योगिक महाशक्ति बन गया।
- कृषि का सामूहिकीकरण:
- छोटे-छोटे बिखरे खेतों को मिलाकर बड़े सामूहिक फार्म (जिन्हें 'कोलखोज़' कहा जाता था) बनाए गए, ताकि ट्रैक्टरों और आधुनिक मशीनों का प्रयोग हो सके।
- संपन्न किसानों (जिन्हें 'कुलाक' कहा जाता था) ने अपनी जमीन और मवेशी सरकार को सौंपने का कड़ा विरोध किया।
- स्टालिन ने बलपूर्वक लाखों कुलाकों को साइबेरिया के श्रम शिविरों (गुलॉग) में निर्वासित कर दिया या मरवा दिया।
- परिणाम: यद्यपि कृषि उत्पादन कुछ वर्षों के लिए गिर गया और अकाल पड़ा, लेकिन लंबी अवधि में इस नीति ने सोवियत संघ को इतना आत्मनिर्भर बना दिया कि वह द्वितीय विश्व युद्ध में नाजी जर्मनी को हरा सका।
46. 1905 की रूसी क्रांति के कारणों और इसके ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डालें। इसे 1917 की क्रांति की 'ड्रेस रिहर्सल' क्यों कहा जाता है?
1905 की क्रांति रूस में निरंकुशता के खिलाफ पहली बड़ी जन-बगावत थी:
- क्रांति के कारण:
- रूस-जापान युद्ध (1904-05): एक विशाल यूरोपीय साम्राज्य (रूस) को नन्हे एशियाई देश (जापान) द्वारा हराए जाने से ज़ार की कमजोर सैन्य शक्ति और अक्षमता पूरे विश्व में उजागर हो गई।
- खूनी रविवार: 9 जनवरी 1905 को निहत्थे मजदूरों के कत्लेआम ने जनता के भीतर ज़ार के प्रति बचे-खुचे सम्मान को समाप्त कर दिया।
- क्रांति का प्रसार: पूरे देश में हड़तालें हुईं, छात्रों ने विश्वविद्यालयों का बहिष्कार किया और पोटेमकिन युद्धपोत के नाविकों ने विद्रोह कर दिया। पहली बार मजदूरों ने अपनी स्वशासी संस्था 'सोवियत' (Council) का गठन किया।
- परिणाम: घबराकर ज़ार ने 'अक्टूबर घोषणापत्र' जारी कर नागरिकों को मौलिक अधिकार दिए और संसद 'ड्यूमा' की स्थापना स्वीकार की।
- 'ड्रेस रिहर्सल' के रूप में महत्व: लेनिन ने इसे 1917 की क्रांति की रिहर्सल कहा क्योंकि 1905 की क्रांति ने मजदूरों, किसानों और सैनिकों को एकजुट होकर लड़ने का व्यावहारिक अनुभव दिया, सोवियत जैसी क्रांतिकारी संस्थाओं को जन्म दिया और ज़ारशाही की कमजोरियों को पूरी तरह बेनकाब कर दिया।
47. रूस में किसानों और मजदूरों की स्थिति 1917 से पहले कैसी थी? क्या वे क्रांति के लिए तैयार थे?
1917 से पूर्व रूस के बहुसंख्यक किसान और मजदूर अत्यंत नारकीय जीवन जीने के लिए विवश थे:
- किसानों की स्थिति:
- रूस की 80% से अधिक आबादी कृषि पर निर्भर थी। 1861 में कृषि-दासता समाप्त होने के बाद भी किसानों को जमीन के बदले भारी 'मुक्ति कर' (Redemption Dues) चुकाना पड़ता था।
- भूमि का सबसे बड़ा हिस्सा ज़ार के परिवार, चर्च और कुलीन सामंतों के पास था। किसान भूखे रहकर भी केवल लगान चुकाने के लिए अनाज बेचने को मजबूर थे।
- रूस के किसानों में एक अनूठी संस्था थी— 'मीर' (Mir या कम्यून), जहाँ जमीन का समय-समय पर परिवारों की जरूरत के अनुसार बंटवारा होता था। इस सामूहिक भावना ने किसानों को समाजवाद के स्वाभाविक रूप से अनुकूल बना दिया।
- मजदूरों की स्थिति:
- रूसी कारखानों में विदेशी पूंजी लगी थी, जिनका एकमात्र उद्देश्य अधिकतम मुनाफा था। मजदूरों से प्रतिदिन 12 से 16 घंटे काम लिया जाता था।
- कार्यस्थल गंदे, अस्वास्थ्यकर और खतरनाक थे। दुर्घटना होने पर कोई मुआवजा नहीं मिलता था।
- आवास के नाम पर वे गंदे बैरकों में ठूंसे रहते थे। अतः किसान और मजदूर दोनों ही इस अमानवीय व्यवस्था को ध्वस्त करने के लिए पूरी तरह तैयार थे।
48. प्रथम और द्वितीय इंटरनेशनल के संगठन, उद्देश्यों और उपलब्धियों का तुलनात्मक विवरण दें।
मजदूरों के अंतरराष्ट्रीय आंदोलन को संगठित करने के लिए दो प्रमुख महासंघ बने:
- प्रथम इंटरनेशनल (1864-1876):
- स्थापना: 1864 में कार्ल मार्क्स के प्रयासों से लंदन में हुई।
- उद्देश्य: विभिन्न देशों के श्रमिक संगठनों को जोड़ना और वर्ग-संघर्ष को धार देना।
- अंत: मार्क्स और अराजकतावादी नेता बाकुनिन के बीच वैचारिक मतभेदों के कारण 1876 में इसे औपचारिक रूप से समाप्त कर दिया गया।
- द्वितीय इंटरनेशनल (1889-1914):
- स्थापना: 14 जुलाई 1889 (फ्रांसीसी क्रांति की शताब्दी) को पेरिस में हुई।
- उपलब्धियां: इसने 1 मई को प्रतिवर्ष 'विश्व मजदूर दिवस' मनाने का ऐतिहासिक निर्णय लिया और मजदूरों के काम के घंटे 8 घंटे तय करने की वैश्विक मांग उठाई।
- पतन: 1914 में प्रथम विश्व युद्ध छिड़ने पर इसके अधिकांश सदस्य दलों ने सर्वहारा अंतरराष्ट्रीयता को भूलकर अपनी-अपनी राष्ट्रीय सरकारों का समर्थन कर दिया, जिससे यह बिखर गया।
49. 'समाजवाद' के उदय की पृष्ठभूमि में औद्योगिक क्रांति की क्या भूमिका थी?
औद्योगिक क्रांति ने समाजवाद की उत्पत्ति के लिए भौतिक जमीन तैयार की:
- धन का असमान संकेंद्रण: मशीनी उत्पादन से अकूत संपत्ति पैदा हुई, लेकिन यह संपत्ति केवल कुछ मिल मालिकों और पूंजीपतियों की तिजोरियों में सिमट गई।
- श्रम का क्रूर शोषण: मशीनों ने इंसानी हाथ की कला छीन ली और कारीगर बेसहारा मजदूर बन गए। कम मजदूरी, कारखानों के अमानवीय माहौल और 14 घंटे के काम ने मजदूरों की जिंदगी नरक बना दी।
- महिला एवं बाल श्रम का दुरुपयोग: पूंजीपतियों ने लागत घटाने के लिए महिलाओं और छोटे बच्चों को खतरनाक मशीनों पर काम पर लगाया।
- वैचारिक प्रतिक्रिया: इस क्रूर असमानता, भूख और शोषण को देखकर संवेदनशील विचारकों (यूटोपियन और मार्क्सवादी) ने एक ऐसी वैकल्पिक सामाजिक व्यवस्था की मांग की जहाँ उत्पादन के साधन निजी मुनाफे के लिए नहीं, बल्कि पूरे समाज की भलाई के लिए संचालित हों। इस प्रकार औद्योगिक क्रांति की कोख से समाजवाद का जन्म हुआ।
50. यूटोपियन (स्वप्नदर्शी) समाजवाद और मार्क्सवादी (वैज्ञानिक) समाजवाद के बीच तुलनात्मक अंतर स्पष्ट करें।
| आधार | यूटोपियन समाजवाद (Utopian Socialism) | वैज्ञानिक समाजवाद / मार्क्सवाद (Scientific Socialism) |
|---|---|---|
| प्रणेता | सेंट साइमन, चार्ल्स फूरियर, रॉबर्ट ओवेन। | कार्ल मार्क्स और फ्रेडरिक एंगेल्स। |
| परिवर्तन का मार्ग | शांतिपूर्ण तरीके, नैतिक उपदेश और पूंजीपतियों के हृदय-परिवर्तन पर भरोसा। | वर्ग-संघर्ष और सर्वहारा वर्ग की हिंसक सशस्त्र क्रांति को अनिवार्य मानना। |
| दार्शनिक आधार | भावुकता, नैतिकता और आदर्शवादी कल्पना पर आधारित। | द्वंद्वात्मक भौतिकवाद और इतिहास के आर्थिक विश्लेषण पर आधारित। |
| वर्ग-संबंध | पूंजीपति और मजदूर के बीच सामंजस्य व सहयोग की वकालत। | पूंजीपति और मजदूर के हितों को एक-दूसरे का विरोधी और असहनीय मानना। |
| क्रांति का दृष्टिकोण | क्रांति का विरोध करते थे; क्रमिक सुधार चाहते थे। | क्रांति को इतिहास का इंजन मानते थे; सर्वहारा की तानाशाही स्थापित करना लक्ष्य था। |
0 Comments