BSEB कक्षा 10 इतिहास — अध्याय 2: समाजवाद एवं साम्यवाद
1. अध्याय परिचय (Introduction)
औद्योगिक क्रांति के फलस्वरूप आधुनिक विश्व की आर्थिक व्यवस्था दो स्पष्ट वर्गों में विभाजित हो गई—एक ओर उत्पादन के साधनों पर नियंत्रण रखने वाला पूंजीपति वर्ग, और दूसरी ओर अपने श्रम पर आश्रित शोषित श्रमिक (सर्वहारा) वर्ग। पूंजीवाद की इस शोषणकारी व्यवस्था और सामाजिक विषमता के विरुद्ध जिस नई सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक विचारधारा का जन्म हुआ, उसे समाजवाद (Socialism) कहा गया।
अध्याय 'समाजवाद एवं साम्यवाद' प्रारंभिक आदर्शवादी (यूटोपियन) समाजवादियों की कल्पनाओं, कार्ल मार्क्स के वैज्ञानिक समाजवाद, 1917 की युगांतरकारी रूसी क्रांति (बोल्शेविक क्रांति), व्लादिमीर लेनिन की नीतियों तथा सोवियत संघ के निर्माण की ऐतिहासिक यात्रा का समग्र विश्लेषण प्रस्तुत करता है।
2. अध्याय का संक्षिप्त विवरण (Overview)
- समाजवाद का उद्भव: पूंजीवादी व्यवस्था की कमियों और मजदूरों के शोषण के विरोध में 19वीं सदी के आरंभ में एक समतामूलक समाज की मांग उठी।
- यूटोपियन (स्वप्नदर्शी) समाजवादी: सेंट साइमन, चार्ल्स फूरिये, लुई ब्लां और रॉबर्ट ओवेन जैसे प्रारंभिक विचारकों ने नैतिक आधार पर बिना वर्ग-संघर्ष के आदर्श समाज की कल्पना की।
- वैज्ञानिक समाजवाद (Scientific Socialism): कार्ल मार्क्स और फ्रेडरिक एंगेल्स ने ऐतिहासिक भौतिकवाद, द्वंद्वात्मक पद्धति और वर्ग-संघर्ष के सिद्धांत द्वारा समाजवाद को व्यावहारिक व वैज्ञानिक आधार दिया।
- जारकालीन रूस की स्थिति: जार का निरंकुश शासन, किसानों की दयनीय दशा, औद्योगिक मजदूरों का उत्पीड़न, रूसीकरण की नीति और 1905 की असफल क्रांति ('खूनी रविवार')।
- 1917 की रूसी क्रांतियाँ:
- फरवरी (मार्च) क्रांति: जार निकोलस द्वितीय का पतन और केरेन्स्की के नेतृत्व में बुर्जुआ प्रांतीय सरकार का गठन।
- अक्टूबर (नवंबर) क्रांति: लेनिन और ट्रॉटस्की के नेतृत्व में बोल्शेविकों द्वारा सत्ता पर कब्जा और विश्व के पहले सर्वहारा राज्य की स्थापना।
- लेनिन का योगदान एवं सोवियत संघ: युद्धकालीन साम्यवाद, 'चेका' और 'लाल सेना' का गठन, ब्रेस्ट-लिटोव्स्क की संधि, 1921 की नई आर्थिक नीति (NEP), और 1922 में USSR की विधिवत स्थापना।
3. प्रमुख बिंदु एवं महत्वपूर्ण वन-लाइनर (Important One-Liners)
प्रारंभिक (यूटोपियन) समाजवादी विचारक
- यूटोपियन समाजवाद (Utopian Socialism): वह विचारधारा जिसने बिना हिंसा या वर्ग-संघर्ष के केवल नैतिक उपदेशों और आदर्शवादी योजनाओं से समाज में समानता लाने की कल्पना की।
- सेंट साइमन (Saint-Simon): फ्रांसीसी विचारक, जिन्हें फ्रांसीसी समाजवाद का अग्रदूत माना जाता है; इनका मानना था कि प्रत्येक व्यक्ति को उसकी क्षमता के अनुसार काम और उसके काम के अनुसार पारिश्रमिक मिलना चाहिए।
- चार्ल्स फूरिये (Charles Fourier): आधुनिक सामाजिक योजनाकार, जिन्होंने श्रमिकों के लिए छोटे-छोटे औद्योगिक समुदाय (फालांक्स) बनाने की योजना प्रस्तुत की।
- लुई ब्लां (Louis Blanc): फ्रांसीसी समाजवादी, जिनका मानना था कि राज्य को कारखानों का राष्ट्रीयकरण करके काम के अधिकार की गारंटी देनी चाहिए।
- रॉबर्ट ओवेन (Robert Owen):
- ब्रिटेन के प्रमुख उद्योगपति व समाजवादी सुधारक।
- इन्हें ब्रिटिश समाजवाद का जनक कहा जाता है।
- इन्होंने स्कॉटलैंड के न्यू लनार्क (New Lanark) स्थित अपनी सूती मिल में मजदूरों के काम के घंटे घटाए, वेतन बढ़ाया और उनके बच्चों के लिए स्कूल खोले, जिसके बावजूद उनके कारखाने का मुनाफा बढ़ा।
कार्ल मार्क्स एवं वैज्ञानिक समाजवाद
- कार्ल मार्क्स (Karl Marx):
- जन्म: 5 मई 1818 को जर्मनी के राइन प्रांत के ट्रियर (Trier) नगर में एक यहूदी परिवार में।
- पिता: हेनरिक मार्क्स (प्रसिद्ध वकील)।
- शिक्षा: बॉन और बर्लिन विश्वविद्यालय से विधि और दर्शनशास्त्र का अध्ययन; हीगेल के विचारों से गहरे प्रभावित।
- विवाह: बचपन की मित्र जेनी (Jenny) से 1843 में विवाह।
- फ्रेडरिक एंगेल्स (Friedrich Engels): मार्क्स के आजीवन मित्र और सह-विचारक, जिनसे मार्क्स की भेंट 1844 में पेरिस में हुई।
- कम्युनिस्ट मेनिफेस्टो (साम्यवादी घोषणापत्र):
- प्रकाशन वर्ष: 1848 ई. (कार्ल मार्क्स और फ्रेडरिक एंगेल्स द्वारा रचित)।
- प्रभाव: इसे आधुनिक समाजवाद का प्रारंभिक चार्टर माना जाता है।
- दास कैपिटा (Das Kapital):
- प्रकाशन वर्ष: 1867 ई. (मार्क्स द्वारा लिखित)।
- उपनाम: इसे 'समाजवादियों की बाइबिल' (Bible of Socialists) कहा जाता है।
- मार्क्स के सिद्धांत के प्रमुख आधार स्तंभ:
- द्वंद्वात्मक भौतिकवाद (Dialectical Materialism)
- ऐतिहासिक भौतिकवाद (Historical Materialism)
- वर्ग-संघर्ष का सिद्धांत (Theory of Class Struggle)
- अतिरिक्त मूल्य का सिद्धांत (Theory of Surplus Value)
- राज्यहीन व वर्गहीन समाज की स्थापना का लक्ष्य
मार्क्स का प्रसिद्ध कथन: "विश्व के मजदूरों एक हो जाओ! तुम्हारे पास खोने के लिए अपनी बेड़ियों के सिवा कुछ नहीं है, और जीतने के लिए सारा संसार पड़ा है।"
- प्रथम अंतरराष्ट्रीय संघ (First International): 1864 ई. में लंदन में स्थापित (अध्यक्षता कार्ल मार्क्स ने की)।
नारा: "अधिकार के बिना कर्तव्य नहीं, कर्तव्य के बिना अधिकार नहीं।" - द्वितीय अंतरराष्ट्रीय संघ (Second International):
- स्थापना: 14 जुलाई 1889 को पेरिस में।
- निर्णय: प्रतिवर्ष 1 मई को अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस (Labour Day) मनाने का संकल्प लिया गया।
1917 से पूर्व रूस की पृष्ठभूमि एवं 1905 की क्रांति
- जार (Czar): रूस के निरंकुश सम्राट को 'जार' कहा जाता था।
- रोमानोव वंश (Romanov Dynasty): रूस पर शासन करने वाला अंतिम शाही राजवंश।
- जार निकोलस द्वितीय (Nicholas II): 1917 की क्रांति के समय रूस का अंतिम निरंकुश जार।
- जारिना अलेक्जेंड्रा एवं रासपुतिन: जार की पत्नी अलेक्जेंड्रा पर रासपुतिन नामक एक भ्रष्ट और ढोंगी साधु का अत्यधिक प्रभाव था, जिसने दरबार को बदनाम कर दिया।
- रूसी कृषक दास प्रथा की समाप्ति: 1861 ई. में जार अलेक्जेंडर द्वितीय द्वारा की गई (उन्हें 'मुक्तिदाता जार' भी कहा गया)।
- मीर (Mir): रूस में किसानों की ग्राम-पंचायत / सामूहिक संस्था, जिसके पास गाँव की जमीन का सामूहिक स्वामित्व होता था।
- जार की रूसीकरण नीति: गैर-रूसी जनता (पोल, फिन, यहूदी आदि) पर एक भाषा (रूसी), एक धर्म (रूसी ऑर्थोडॉक्स) और एक जार थोपने की नीति, जिसने अल्पसंख्यकों में भारी रोष पैदा किया।
- रूस-जापान युद्ध (1904–1905): एक छोटे से एशियाई देश जापान ने विशाल रूस को पराजित कर दिया, जिसने जारशाही के खोखलेपन को पूरी दुनिया के सामने उजागर कर दिया।
- खूनी रविवार (Bloody Sunday):
- तिथि: 9 जनवरी 1905 (पुराने रूसी कैलेंडर के अनुसार) / 22 जनवरी 1905 (नए कैलेंडर के अनुसार)।
- नेतृत्व: पादरी गैपॉन (Father Gapon)।
- घटना: शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारी मजदूर रोटी, काम के घंटे घटाने और नागरिक अधिकारों की मांग को लेकर सेंट पीटर्सबर्ग स्थित 'विंटर पैलेस' (शीतकालीन महल) की ओर बढ़ रहे थे। जार के सैनिकों ने निहत्थी भीड़ पर गोलियां बरसाईं, जिसमें हजारों लोग मारे गए।
- ड्यूमा (Duma): 1905 की क्रांति के दबाव में जार निकोलस द्वितीय द्वारा घोषित रूसी संसद का नाम।
- सोवियत (Soviet): रूस में मजदूरों, सैनिकों और किसानों की चुनी हुई स्थानीय प्रतिनिधि परिषदों को सोवियत कहा गया (सर्वप्रथम 1905 की क्रांति में गठित)।
1917 की रूसी क्रांतियाँ (बोल्शेविक क्रांति)
- रूसी सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी का विभाजन (1903): लंदन सम्मेलन में दो गुटों में बंटी:
- बोल्शेविक (Bolshevik): बहुमत वाला उग्र दल, जिसके नेता व्लादिमीर लेनिन थे (कड़े अनुशासन और सशस्त्र क्रांति के पक्षधर)।
- मेंशेविक (Menshevik): अल्पमत वाला नरम दल, जिसके नेता मार्तोव थे (संसदीय पद्धति और क्रमिक सुधार के पक्षधर)।
- फरवरी क्रांति (1917):
- आरंभ: 23 फरवरी 1917 (जूलियन कैलेंडर) / 8 मार्च 1917 (ग्रेगोरियन कैलेंडर) को पेत्रोग्राद (सेंट पीटर्सबर्ग) में रोटी की मांग को लेकर महिलाओं और मजदूरों की हड़ताल से।
- परिणाम: 2 मार्च (15 मार्च) 1917 को जार निकोलस द्वितीय ने गद्दी छोड़ दी।
- प्रांतीय सरकार: पहले प्रिंस ल्वोव और बाद में मेंशेविक नेता अलेक्जेंडर केरेन्स्की के नेतृत्व में उदारवादी-पूंजीवादी सरकार बनी।
- अप्रैल थीसिस (April Theses):
- निर्वासन (स्विट्जरलैंड) से लौटने पर अप्रैल 1917 में लेनिन द्वारा प्रस्तुत क्रांतिकारी कार्यक्रम।
- प्रमुख नारे: "शांति, रोटी और भूमि" तथा "सारी सत्ता सोवियतों को सौंपो"।
- अक्टूबर क्रांति (बोल्शेविक क्रांति):
- तिथि: 25 अक्टूबर 1917 (रूसी कैलेंडर) / 7 नवंबर 1917 (अंतरराष्ट्रीय नया कैलेंडर)।
- घटना: लेनिन के निर्देश पर और लियोन ट्रॉटस्की (सैन्य क्रांतिकारी समिति के अध्यक्ष) के नेतृत्व में बोल्शेविकों ने पेत्रोग्राद के सभी सरकारी भवनों, रेलवे स्टेशनों, डाकघरों और विंटर पैलेस पर अधिकार कर लिया।
- केरेन्स्की की सरकार भाग खड़ी हुई और दुनिया की पहली सर्वहारा/मजदूर सरकार स्थापित हुई।
- अरोरा जहाज (Cruiser Aurora): उस नौसैनिक युद्धपोत का नाम, जिसने विंटर पैलेस पर तोपों से गोलाबारी कर क्रांति का बिगुल फूंका था।
लेनिन का शासन एवं नव-निर्माण
- व्लादिमीर इलिच उल्यानोव (लेनिन): स्वतंत्र सोवियत सरकार (काउंसिल ऑफ पीपुल्स कमिश्नर्स) के प्रथम अध्यक्ष / शासनाध्यक्ष।
- लियोन ट्रॉटस्की (Leon Trotsky): लेनिन के प्रमुख सहयोगी, जिन्होंने बोल्शेविकों की नियमित सेना 'लाल सेना' (Red Army) का गठन किया।
- चेका (CHEKA): दिसंबर 1917 में फेलिक्स दज़रझिंस्की के अधीन गठित बोल्शेविक गुप्त पुलिस संगठन (क्रांति-विरोधियों का दमन करने हेतु)।
- ब्रेस्ट-लिटोव्स्क की संधि (Treaty of Brest-Litovsk):
- तिथि: 3 मार्च 1918।
- पक्षकार: रूस और जर्मनी के बीच।
- परिणाम: भारी भूभाग और संसाधन खोकर भी लेनिन ने रूस को प्रथम विश्वयुद्ध से अलग कर देश में आंतरिक स्थिरता कायम की।
- युद्धकालीन साम्यवाद (War Communism: 1918–1921): गृहयुद्ध के दौरान लागू कठोर आर्थिक नीति, जिसमें उद्योगों का पूर्ण राष्ट्रीयकरण और किसानों से जबरन अतिरिक्त अनाज की वसूली की जाती थी।
- नई आर्थिक नीति (NEP - New Economic Policy):
- प्रतिपादक: लेनिन द्वारा 1921 ई. में लागू।
- स्वरूप: मार्क्सवादी कठोरता से व्यावहारिक समझौता (पूंजीवाद और समाजवाद का सम्मिश्रण)।
- मुख्य प्रावधान:
- किसानों से अनाज की जबरन जब्ती बंद कर एक निश्चित टैक्स लगाया गया; बचा हुआ अनाज बाजार में बेचने की छूट मिली।
- 20 से कम मजदूरों वाले छोटे उद्योगों को निजी स्वामित्व में चलाने की अनुमति दी गई।
- विदेशी पूंजी निवेश को सीमित रूप से आमंत्रित किया गया।
- लेनिन की मृत्यु: 21 जनवरी 1924 को लेनिन का निधन हुआ।
- USSR की स्थापना: दिसंबर 1922 में सोवियत समाजवादी गणराज्यों का संघ (Union of Soviet Socialist Republics - USSR) विधिवत अस्तित्व में आया।
- कोमिंटर्न (Comintern / तृतीय अंतरराष्ट्रीय): विश्व भर में साम्यवादी क्रांतियों को बढ़ावा देने के लिए 1919 में मॉस्को में स्थापित अंतरराष्ट्रीय संगठन।
- जोसेफ स्टालिन (Joseph Stalin): लेनिन के बाद सोवियत सत्ता संभाली; ट्रॉटस्की को निष्कासित किया और 'एक देश में समाजवाद' का नारा दिया।
- पंचवर्षीय योजनाएँ (Five Year Plans): स्टालिन ने सोवियत संघ के तीव्र औद्योगीकरण और कृषि के सामूहिकीकरण (कोलखोज - Kolkhoz) के लिए 1928 ई. में पहली पंचवर्षीय योजना शुरू की।
4. महत्वपूर्ण पारिभाषिक शब्दावली (Key Terms)
| शब्द | अर्थ / परिभाषा |
|---|---|
| पूंजीवाद (Capitalism) | वह आर्थिक प्रणाली जिसमें उत्पादन और वितरण के साधनों पर निजी व्यक्तियों का स्वामित्व और लाभ का उद्देश्य होता है। |
| सर्वहारा वर्ग (Proletariat) | समाज का वह संपत्तिहीन श्रमिक वर्ग (मजदूर, किसान, खेतिहर) जो अपनी आजीविका के लिए केवल शारीरिक श्रम पर निर्भर रहता है। |
| बुर्जुआ वर्ग (Bourgeoisie) | पूंजीपति या उच्च-मध्यम वर्ग, जिसके हाथ में कारखाने और उत्पादन के साधन होते हैं। |
| यूटोपियन (Utopian) | स्वप्नदर्शी या काल्पनिक; ऐसा विचार जो सुनने में अत्यंत सुंदर लगे परंतु व्यावहारिक रूप से लागू न हो सके। |
| सोवियत (Soviet) | रूसी कामगारों, सैनिकों और किसानों की स्थानीय प्रतिनिधि परिषद। |
| खूनी रविवार | 9 जनवरी 1905 को जार के सैनिकों द्वारा सेंट पीटर्सबर्ग में निहत्थे मजदूरों के जुलूस पर किया गया क्रूर हत्याकांड। |
| लाल सेना (Red Army) | लियोन ट्रॉटस्की द्वारा संगठित सोवियत रूस की नियमित क्रांतिकारी सेना। |
| चेका (Cheka) | लेनिन द्वारा गठित विशेष गुप्त पुलिस बल, जिसका काम क्रांति के विरोधियों को समाप्त करना था। |
| कोलखोज (Kolkhoz) | सोवियत संघ में स्टालिन द्वारा शुरू किए गए सामूहिक फार्म (सामूहिक खेती)। |
5. रूसी क्रांति के विश्वव्यापी प्रभाव (परीक्षा उपयोगी सारांश)
- सर्वहारा सत्ता की स्थापना: इतिहास में पहली बार मजदूर और किसान वर्ग किसी विशाल देश के नीति-नियंता बने।
- पूंजीवादी देशों में सुधार: सर्वहारा क्रांति के भय से पश्चिमी पूंजीवादी देशों ने अपने यहाँ मजदूरों की दशा सुधारने, काम के घंटे सीमित करने और कल्याणकारी राज्य (Welfare State) की नीतियां अपनाने पर बल दिया।
- उपनिवेशों में राष्ट्रीय मुक्ति संग्राम को बल: एशिया और अफ्रीका (भारत, चीन, वियतनाम आदि) के स्वतंत्रता सेनानियों को साम्राज्यवाद के विरुद्ध संघर्ष की वैचारिक प्रेरणा मिली।
- द्विध्रुवीय विश्व का आरंभ: द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद दुनिया दो परस्पर विरोधी गुटों में बंट गई—एक तरफ अमेरिका के नेतृत्व में पूंजीवादी गुट, दूसरी तरफ USSR के नेतृत्व में साम्यवादी गुट (जिससे 'शीत युद्ध' का आरंभ हुआ)।
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