Chapter 1. यूरोप में राष्ट्रवाद | BSEB 10 History Solution


BSEB Class 10 History Chapter 1 Solutions: यूरोप में राष्ट्रवाद (Nationalism in Europe)

बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (BSEB) कक्षा 10 सामाजिक विज्ञान (इतिहास की दुनिया - भाग 2) का पहला अध्याय "यूरोप में राष्ट्रवाद" मैट्रिक बोर्ड परीक्षा की दृष्टि से आधारशिला माना जाता है। इस अध्याय में 1789 की फ्रांसीसी क्रांति, नेपोलियन के सुधार, 1830 व 1848 की क्रांतियां, इटली एवं जर्मनी का एकीकरण तथा यूनान के स्वतंत्रता संग्राम का विस्तृत वर्णन है। यहाँ पाठ्यपुस्तक के अभ्यास खंड के सभी वस्तुनिष्ठ प्रश्न, रिक्त स्थानों की पूर्ति, सुमेलित प्रश्न (तीन समूह), अतिलघु उत्तरीय, लघु उत्तरीय, दीर्घ उत्तरीय प्रश्नों एवं वर्ग परिचर्चा के प्रामाणिक, सटीक और सरल भाषा में हल प्रस्तुत हैं।

वस्तुनिष्ठ प्रश्न (Multiple Choice Questions)

नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर के रूप में चार विकल्प दिए गए हैं, सर्वाधिक उपयुक्त सही विकल्प:

  1. इटली एवं जर्मनी वर्तमान में किस महादेश के अंतर्गत आते हैं?
    उत्तर: (ग) यूरोप
  2. फ्रांस में किस शासक वंश की पुनर्स्थापना वियना कांग्रेस द्वारा की गई थी?
    उत्तर: (ग) बूर्बो वंश
  3. मेजनी का सम्बंध किस संगठन से था?
    उत्तर: (ख) कार्बोनरी
  4. इटली एवं जर्मनी के एकीकरण के विरुद्ध निम्न में कौन था?
    उत्तर: (ग) ऑस्ट्रिया
  5. 'काउंट काबूर' को विक्टर इमैनुएल ने किस पद पर नियुक्त किया?
    उत्तर: (ग) प्रधानमंत्री
  6. गैरीबाल्डी पेशे से क्या था?
    उत्तर: (घ) नाविक
  7. जर्मन राईन राज्य का निर्माण किसने किया था?
    उत्तर: (ख) नेपोलियन बोनापार्ट
  8. "जालवेरिन" एक संस्था थी?
    उत्तर: (ख) व्यापारियों की
  9. "रक्त एवं लौह" की नीति का अवलम्बन किसने किया था?
    उत्तर: (ग) बिस्मार्क
  10. फ्रैंकफर्ट की संधि कब हुई?
    उत्तर: (घ) 1871
  11. यूरोप वासियों के लिए किस देश का साहित्य एवं ज्ञान-विज्ञान प्रेरणास्रोत रहा?
    उत्तर: (ख) यूनान
  12. 1829 ई० की एड्रियानोपुल की संधि किस देश के साथ हुई?
    उत्तर: (क) तुर्की

रिक्त स्थानों को भरें (Fill in the Blanks)

ऐतिहासिक तथ्यों पर आधारित रिक्त स्थानों की पूर्ति:

  • सेडान के युद्ध में ही एक महाशक्ति के पतन पर दूसरी यूरोपीय महाशक्ति जर्मनी का जन्म हुआ था।
  • सेडोवा का युद्ध ऑस्ट्रिया और प्रशा के बीच हुआ था। (1866 ई०)
  • 1848 ई० की फ्रांसीसी क्रांति ने मेटरनिख युग का भी अंत कर दिया।
  • वेटिकन सिटी के राजमहल जहाँ पोप रहते थे जो इटली के प्रभाव (या नियंत्रण) से बचा रहा।
  • यूनान को एक स्वतंत्र राष्ट्र घोषित करने के बाद बवेरिया के शासक ओटो को वहाँ का राजा घोषित किया गया।
  • हंगरी की राजधानी बुडापेस्ट है।

निम्नलिखित सूचियों का मिलान करें (Match the Lists)

समूह (I):

समूह 'अ' समूह 'ब' (सही मिलान)
1. मेजनी (ख) इटली
2. हीगेल (क) दार्शनिक
3. बिस्मार्क (घ) जर्मन चांसलर
4. विक्टर इमैनुएल (ग) राजनीतिज्ञ

समूह (II):

समूह 'अ' समूह 'ब' (सही मिलान)
1. वियना सम्मेलन (घ) 1814-15 ई०
2. मेटरनिख का पतन (ग) 1848 ई०
3. इटली एकीकरण (क) 1871 ई०
4. सेडना युद्ध (ख) 1870 ई०

समूह (III):

समूह 'अ' समूह 'ब' (सही मिलान)
1. कोसुथ (ख) हंगेरियन राष्ट्रवादी नेता
2. एड्रियानोपुल की संधि (ग) 1829 ई०
3. यूनान की स्वतंत्रता (घ) 1832 ई०
4. पोलैण्ड में आन्दोलन (क) 1863 ई०

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न (लगभग 20 शब्दों में उत्तर दें)

1. राष्ट्रवाद क्या है?

उत्तर: राष्ट्रवाद किसी विशेष भौगोलिक, सांस्कृतिक या सामाजिक परिवेश में रहने वाले लोगों में एक साझी एकता, प्रेम और देश के प्रति निष्ठा की भावना है।

2. मेजनी कौन था?

उत्तर: मेजनी इटली के एक क्रांतिकारी, साहित्यकार, गणतंत्र के समर्थक और योग्य सेनापति थे जिन्होंने इटली के एकीकरण हेतु 'यंग इटली' और 'यंग यूरोप' की स्थापना की।

3. जर्मनी के एकीकरण की बाधाएँ क्या थीं?

  • लगभग 300 छोटे-बड़े स्वतंत्र राज्यों में विखंडन।
  • सामाजिक, राजनीतिक तथा धार्मिक विषमता।
  • ऑस्ट्रिया का अनुचित हस्तक्षेप एवं रूढ़िवादी प्रभाव।

4. मेटरनिख युग क्या है?

उत्तर: 1815 से 1848 ई० तक के काल को ऑस्ट्रिया के चांसलर मेटरनिख के नाम पर 'मेटरनिख युग' कहते हैं, जिसमें उसने पुरातन रूढ़िवादी व्यवस्था बनाए रखकर राष्ट्रवाद व लोकतंत्र को कुचला।

लघु उत्तरीय प्रश्न (लगभग 60 शब्दों में उत्तर दें)

तार्किक और बिंदुवार 60 शब्दों के मानक उत्तर:

1. 1848 के फ्रांसीसी क्रांति के कारण क्या थे?

उत्तर: 1848 की फ्रांसीसी क्रांति के प्रमुख कारण निम्नलिखित थे:

  • राजा लुई फिलिप एक कमजोर और अवसरवादी शासक था, जिसने 1840 में 'गीजो' को प्रधानमंत्री बनाया जो किसी भी सुधार का कट्टर विरोधी था।
  • सरकार केवल पूंजीपति और उच्च वर्ग का समर्थन करती थी तथा आम मजदूरों व किसानों की उपेक्षा की जा रही थी।
  • देश में भुखमरी, भयंकर बेरोज़गारी और आर्थिक संकट गहरा गया था तथा जनता मताधिकार के विस्तार की मांग कर रही थी।

2. इटली, जर्मनी के एकीकरण में ऑस्ट्रिया की भूमिका क्या थी?

उत्तर: ऑस्ट्रिया इटली और जर्मनी दोनों के एकीकरण का सबसे बड़ा शत्रु और अवरोधक था। ऑस्ट्रिया का चांसलर मेटरनिख घोर प्रतिक्रियावादी था और अपने साम्राज्यवादी नियंत्रण को बनाए रखने के लिए इन दोनों देशों में फूट डालो की नीति चलाता था। इटली के लोम्बार्डी और वेनेशिया पर ऑस्ट्रिया का सीधा कब्जा था, जबकि जर्मन महासंघ पर भी उसका राजनीतिक दबदबा था। जब तक युद्धों (1859 में काबूर द्वारा और 1866 के सेडोवा युद्ध में बिस्मार्क द्वारा) में ऑस्ट्रिया को पराजित नहीं किया गया, तब तक दोनों देशों का एकीकरण संभव नहीं हुआ।

3. यूरोप में राष्ट्रवाद को फैलाने में नेपोलियन बोनापार्ट किस तरह सहायक हुआ?

उत्तर: नेपोलियन बोनापार्ट ने अपने सैन्य अभियानों और प्रशासनिक सुधारों से संपूर्ण यूरोप में आधुनिक राष्ट्रवाद का बीजारोपण किया:

  • उसने विखंडित जर्मन क्षेत्र के 300 से अधिक छोटे राज्यों को समाप्त कर 39 राज्यों का 'जर्मन राईन महासंघ' बनाया।
  • उसने इटली के राज्यों को जीतकर 'सिसालपाइन' और 'ट्रांसपादीन' गणराज्यों में संगठित किया, जिससे इटलीवासियों में पहली बार राष्ट्रीय एकता की भावना जागी।
  • उसने विजित क्षेत्रों में 'नेपोलियन कोड' (नागरिक संहिता) लागू कर सामंती विशेषाधिकारों को खत्म किया, कानून के समक्ष समानता स्थापित की और माप-तौल की समान प्रणाली लागू की।

4. गैरीबाल्डी के कार्यों की चर्चा करें?

उत्तर: गैरीबाल्डी इटली के एकीकरण के प्रमुख योद्धा और 'तलवार' माने जाते हैं:

  • उन्होंने देशभक्त स्वयंसेवकों की एक सशक्त सैन्य टुकड़ी बनाई, जिसे 'लाल कुर्ती' (Red Shirts) कहा जाता था।
  • 1860 में उन्होंने सिसिली और नेपल्स पर सफल आक्रमण किया और वहाँ के बूर्बो राजवंश को उखाड़ फेंककर जनता की मदद से इन क्षेत्रों को जीता।
  • उन्होंने बिना किसी व्यक्तिगत सत्ता के लालच के जीते हुए इन दोनों बड़े दक्षिणी राज्यों को पीडमोंट-सार्डिनिया के राजा विक्टर इमैनुएल द्वितीय को सौंप दिया और स्वयं एक साधारण किसान की तरह शेष जीवन बिताने चले गए।

5. विलियम I के बगैर जर्मनी का एकीकरण बिस्मार्क के लिए असंभव था, कैसे?

उत्तर: विलियम I प्रशा का राष्ट्रवादी और दूरदर्शी सम्राट था। वह भली-भांति जानता था कि जर्मनी का एकीकरण केवल बातों या संसदों से नहीं, बल्कि सैन्य ताकत के बल पर ही संभव है। उसने प्रशा की सेना का पुनर्गठन और आधुनिकीकरण किया। सबसे महत्वपूर्ण बात यह थी कि उसने बिस्मार्क की कूटनीतिक प्रतिभा को पहचाना और संसद के कड़े विरोध के बावजूद उसे अपना चांसलर (प्रधानमंत्री) नियुक्त किया। विलियम I ने सैन्य बजट और युद्धों में हर कदम पर बिस्मार्क का पूर्ण समर्थन किया, जिसके बिना बिस्मार्क 'रक्त और लौह' की नीति कभी लागू नहीं कर पाता।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (लगभग 150 शब्दों में उत्तर दें)

विस्तृत और विश्लेषणात्मक बोर्ड-स्तरीय समाधान:

1. इटली के एकीकरण में मेजनी, काबूर और गैरीबाल्डी के योगदानों को बतावे?

उत्तर: इटली का एकीकरण इन तीन महानायकों के समन्वय का परिणाम था:

  • मेजनी (इटली का हृदय/पैगंबर): मेजनी ने इटलीवासियों में राष्ट्रीय चेतना और देशभक्ति की भावना फूंकी। उन्होंने 1831 में 'यंग इटली' और 1834 में 'यंग यूरोप' नामक गुप्त संस्थाएं बनाकर युवाओं को एकजुट किया। उन्होंने इटली को विदेशी आधिपत्य से मुक्त कराकर एक संपूर्ण गणराज्य बनाने की वैचारिक नींव रखी।
  • काउंट काबूर (इटली का मस्तिष्क): सार्डिनिया-पीडमोंट के प्रधानमंत्री काबूर एक कुशल कूटनीतिज्ञ थे। उन्होंने समझा कि विदेशी मदद के बिना ऑस्ट्रिया को नहीं हराया जा सकता। क्रीमिया युद्ध (1853-56) में फ्रांस की सहायता कर उन्होंने इटली की समस्या को अंतर्राष्ट्रीय मंच पर उठाया। इसके बाद नेपोलियन तृतीय के साथ कूटनीतिक संधि कर 1859 में ऑस्ट्रिया को हराकर लोम्बार्डी को इटली में मिलाया।
  • गैरीबाल्डी (इटली की तलवार): गैरीबाल्डी एक अदम्य साहसी सेनानी थे। उन्होंने अपने 'लाल कुर्ती' सैनिकों के दम पर 1860 में दक्षिणी इटली के दो बड़े राज्यों—सिसिली और नेपल्स को जीत लिया और निःस्वार्थ भाव से विक्टर इमैनुएल को सौंपकर एकीकरण को पूर्णता के करीब पहुंचाया। अंततः 1870-71 में रोम के विलय के साथ संयुक्त इटली का निर्माण हुआ।

2. जर्मनी के एकीकरण में बिस्मार्क की भूमिका का वर्णन करें?

उत्तर: जर्मनी का एकीकरण ऑटो वॉन बिस्मार्क की कूटनीति और दृढ इच्छाशक्ति का ऐतिहासिक परिणाम था। 1862 में प्रशा का चांसलर बनने के बाद उसने घोषणा की कि समय की बड़ी समस्याएं भाषणों और बहुमत के फैसलों से नहीं, बल्कि "रक्त और लौह की नीति" (Blood and Iron Policy) से सुलझेंगी। उसने तीन सुनियोजित युद्धों द्वारा एकीकरण को पूरा किया:

  • डेनमार्क के साथ युद्ध (1864): श्लेसविग और होल्सटीन के विवाद को लेकर बिस्मार्क ने ऑस्ट्रिया को साथ मिलाकर डेनमार्क को हराया और दोनों रियासतों पर नियंत्रण स्थापित किया।
  • ऑस्ट्रिया के साथ युद्ध / सेडोवा का युद्ध (1866): होल्सटीन के प्रश्न पर तनाव पैदा कर बिस्मार्क ने ऑस्ट्रिया के खिलाफ युद्ध छेड़ दिया। सेडोवा के मैदान में ऑस्ट्रिया को बुरी तरह हराकर जर्मन मामलों से उसका हस्तक्षेप हमेशा के लिए समाप्त कर दिया और उत्तरी जर्मन महासंघ का निर्माण किया।
  • फ्रांस के साथ युद्ध / सेडान का युद्ध (1870): दक्षिणी जर्मन राज्यों को जोड़ने के लिए बिस्मार्क ने 'एम्स टेलीग्राम' के जरिए फ्रांस को भड़काकर युद्ध के लिए उकसाया। 1870 के सेडान युद्ध में फ्रांस को करारी शिकस्त दी गई।

10 मई 1871 को 'फ्रैंकफर्ट की संधि' के तहत फ्रांस से एल्सास-लोरेन छीन लिया गया और 18 जनवरी 1871 को वर्साय के शीशमहल में विलियम I को संयुक्त जर्मनी का सम्राट घोषित किया गया।

3. राष्ट्रवाद के उदय के कारणों एवं प्रभाव की चर्चा करें?

राष्ट्रवाद के उदय के प्रमुख कारण:

  • 1789 की फ्रांसीसी क्रांति: इस क्रांति ने दैवीय राजतंत्र को समाप्त कर समानता, स्वतंत्रता और बंधुत्व का नारा दिया, जिसने जनता को संप्रभुता का वास्तविक स्वामी बनाया।
  • नेपोलियन के सुधार एवं विजय अभियान: नेपोलियन ने सामंतवाद का अंत किया, एकसमान कानून बनाए और विखंडित राज्यों को बड़े राजनीतिक संघों में जोड़कर एकता की भावना जगाई।
  • मध्यम वर्ग का उदय: औद्योगीकरण के कारण शिक्षित बुर्जुआ (मध्यम वर्ग) का विस्तार हुआ, जिसने व्यक्तिगत स्वतंत्रता और राष्ट्रीय संप्रभुता की वकालत की।
  • रोमांटिकवाद (सांस्कृतिक चेतना): लोकगीतों, भाषा, इतिहास और पारंपरिक संस्कृति ने लोगों के दिलों में मातृभूमि के प्रति भावनात्मक लगाव पैदा किया।

राष्ट्रवाद के प्रभाव:

  • इसके फलस्वरूप निरंकुश और पुरातन राजतंत्रों का पतन हुआ और संवैधानिक लोकतंत्र का मार्ग प्रशस्त हुआ।
  • इटली और जर्मनी जैसे दो बड़े राष्ट्र-राज्यों (Nation-States) का विश्व मानचित्र पर उदय हुआ।
  • ओटोमन (तुर्क) साम्राज्य और ऑस्ट्रियाई-हंगेरियन साम्राज्य जैसी बहुराष्ट्रीय ताकतों का विखंडन शुरू हुआ।
  • राष्ट्रवाद की प्रेरणा आगे चलकर एशिया और अफ्रीका के औपनिवेशिक देशों तक पहुँची, जहाँ विदेशी दासता के विरुद्ध स्वतंत्रता आंदोलन आरंभ हुए।

4. जुलाई 1830 की क्रांति का विवरण दें?

1815 के वियना सम्मेलन के बाद फ्रांस में बूर्बो वंश के लुई 18वें को गद्दी पर बैठाया गया था। उसने उदारवादियों और रूढ़िवादियों के बीच संतुलन साधने का प्रयास किया। परंतु 1824 में उसकी मृत्यु के बाद उसका भाई चार्ल्स दशम शासक बना, जो घोर प्रतिक्रियावादी और स्वेच्छाचारी था:

  • क्रांति की पृष्ठभूमि: चार्ल्स दशम ने उदारवादी आंदोलनों को कुचलने के लिए कट्टर रूढ़िवादी 'पोलीगनेक' को प्रधानमंत्री नियुक्त किया। पोलीगनेक ने नागरिक अधिकारों पर कड़े प्रतिबंध लगा दिए।
  • चार अध्यादेश (25 जुलाई 1830): पोलीगनेक ने प्रतिनिधि सभा को भंग कर दिया, प्रेस की स्वतंत्रता छीन ली, मताधिकार को अत्यंत संकुचित कर दिया और नई चुनाव प्रणाली थोप दी।
  • जनविद्रोह: इस तानाशाही के विरोध में 27 से 29 जुलाई 1830 तक पेरिस की सड़कों पर जनता, छात्रों और उदारवादियों ने सशस्त्र संग्राम छेड़ दिया (जिसे इतिहास में 'तीन गौरवशाली दिन' कहा जाता है)। चार्ल्स दशम गद्दी छोड़कर इंग्लैंड भाग गया।
  • परिणाम: बूर्बो वंश का सदा के लिए अंत हो गया और उसके स्थान पर 'ऑरलियंस वंश' के लुई फिलिप को एक संवैधानिक राजतंत्र के प्रमुख के रूप में फ्रांस की गद्दी सौंपी गई।

5. यूनानी स्वतंत्रता आन्दोलन का संक्षिप्त विवरण दें?

यूनान 15वीं सदी से ही इस्लामी ओटोमन (तुर्की) साम्राज्य के अधीन था। यद्यपि यूनानी ईसाई संस्कृति, ज्ञान-विज्ञान और दर्शन संपूर्ण यूरोप के लिए प्रेरणास्रोत रहे थे, परंतु तुर्क शासन के अधीन वे धार्मिक और सांस्कृतिक रूप से पीड़ित थे:

  • विद्रोह की शुरुआत: 1821 ई० में एलेक्जेंडर चिप्सिलांटी के नेतृत्व में यूनान में स्वतंत्रता का बिगुल फूंका गया। ओडेसा में 'हेतेरिया फिलिके' नामक गुप्त क्रांतिकारी संस्था ने आंदोलन को गति दी।
  • यूरोपीय सहानुभूति: यूनान की प्राचीन संस्कृति के प्रति पूरे यूरोप में गहरी श्रद्धा थी। इंग्लैंड के प्रसिद्ध कवि लॉर्ड बायरन स्वयं युद्ध लड़ने यूनान गए (जहाँ 1824 में बुखार से उनकी मृत्यु हो गई)।
  • तुर्की की बर्बरता: तुर्क सुल्तान ने विद्रोह को दबाने के लिए मिस्र के पाशा की मदद ली और यूनानियों पर भीषण अत्याचार किए।
  • महाशक्तियों का हस्तक्षेप: 1827 में लंदन समझौते के तहत ब्रिटेन, फ्रांस और रूस ने संयुक्त सैन्य कार्रवाई की। नवारिनो की नौसैनिक लड़ाई में इन तीनों देशों के संयुक्त बेड़े ने तुर्की-मिस्र की नौसेना को पूरी तरह नष्ट कर दिया।
  • स्वतंत्रता की प्राप्ति: विवश होकर तुर्की ने 1829 में रूस के साथ 'एड्रियानोपुल की संधि' की। अंततः 1832 की कुस्तुनतुनिया की संधि द्वारा यूनान को एक स्वतंत्र और संप्रभु राष्ट्र की मान्यता मिली और बवेरिया के राजकुमार ओटो को वहाँ का पहला स्वतंत्र राजा बनाया गया।

वर्ग परिचर्चा (Class Discussion Guide)

कक्षा में शिक्षकों एवं सहपाठियों के साथ विमर्श हेतु आवश्यक बिंदु:

राष्ट्रवाद के कारण यूरोप के मानचित्र में आये बदलाव का अध्ययन:

  • साम्राज्यों का विघटन: विशाल और बहुजातीय ऑस्ट्रियाई-हंगेरियन व ओटोमन साम्राज्यों का विघटन आरंभ हुआ।
  • नए राष्ट्र-राज्यों का उदय: 1871 तक इटली और जर्मनी का एकीकरण होकर नए स्वतंत्र राष्ट्र बने; 1832 में यूनान और 1830 में बेल्जियम स्वतंत्र देश बनकर यूरोप के मानचित्र पर स्थापित हुए।

राष्ट्रवाद के विकास का पूरे विश्व में प्रसार:

  • यूरोप में उपजी राष्ट्रवाद और लोकतांत्रिक अधिकारों की लहर 19वीं और 20वीं सदी में एशिया, लैटिन अमेरिका और अफ्रीका तक पहुँची।
  • भारत में ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ स्वाधीनता आंदोलन तथा वियतनाम, इंडोनेशिया व मिस्र में साम्राज्यवाद विरोधी संघर्ष इसी यूरोपीय राष्ट्रवादी सिद्धांतों की वैश्विक परिणति थे।

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