Chapter 1. यूरोप में राष्ट्रवाद | BSEB 10 History Notes


BSEB कक्षा 10 इतिहास — अध्याय 1: यूरोप में राष्ट्रवाद

1. अध्याय परिचय (Introduction)

19वीं शताब्दी में यूरोप में राष्ट्रवाद एक शक्तिशाली तत्व के रूप में उभरा, जिसने सदियों पुरानी निरंकुश राजशाही और बहुराष्ट्रीय साम्राज्यवादी व्यवस्था को समाप्त कर आधुनिक राष्ट्र-राज्यों (Nation-States) की स्थापना की।

इस वैचारिक परिवर्तन का मूल स्रोत 1789 की फ्रांसीसी क्रांति थी। नेपोलियन बोनापार्ट के अभियानों ने प्रशासनिक एकीकरण और नागरिक संहिता (नेपोलियन कोड) के माध्यम से राष्ट्रवाद की भावना को पूरे यूरोप में फैलाया। वियना कांग्रेस (1815) द्वारा प्रतिक्रियावादी शक्तियों ने पुरातन व्यवस्था को पुनः स्थापित करने का प्रयास किया, किंतु 1830 और 1848 की क्रांतियों ने राष्ट्रवाद की इस लहर को स्थायी गति प्रदान की, जिसका चरमोत्कर्ष इटली और जर्मनी के एकीकरण तथा बाल्कन क्षेत्र के मुक्ति संग्राम के रूप में सामने आया।

2. अध्याय का संक्षिप्त विवरण (Overview)

  • राष्ट्रवाद का अर्थ: किसी भौगोलिक, सांस्कृतिक या सामाजिक परिवेश में रहने वाले लोगों में एक साझी पहचान, एकता और देश-प्रेम की भावना का विकास।
  • 1789 की फ्रांसीसी क्रांति और नेपोलियन: राजशाही का अंत, 'स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व' का संदेश, और नेपोलियन कोड (1804) द्वारा सामंती विशेषाधिकारों की समाप्ति।
  • वियना कांग्रेस (1815): नेपोलियन की वाटरलू पराजय के बाद ऑस्ट्रियाई चांसलर मेटरनिख के नेतृत्व में पुरातन व्यवस्था की बहाली, फ्रांस में बूर्बों वंश की वापसी और यूरोप में शक्ति संतुलन का गठन।
  • 1830 और 1848 की क्रांतियाँ: फ्रांस में चार्ल्स दशम के निरंकुश शासन के खिलाफ जुलाई 1830 की क्रांति; 1848 में लुई फिलिप और गीजो के पतन के साथ द्वितीय फ्रांसीसी गणराज्य की स्थापना और मेटरनिख का पलायन।
  • इटली का एकीकरण: मेजिनी की वैचारिक प्रेरणा (यंग इटली), काउंट कावूर की कुशल कूटनीति, गैरीबाल्डी का सैन्य पराक्रम (लाल कुर्ती दल), और विक्टर इमैनुएल द्वितीय का नेतृत्व।
  • जर्मनी का एकीकरण: बिस्मार्क की 'रक्त और लौह' (Blood and Iron) की नीति, तीन युद्ध (डेनमार्क, ऑस्ट्रिया, फ्रांस) और 1871 में प्रशा के नेतृत्व में जर्मन साम्राज्य की घोषणा।
  • यूनान का स्वतंत्रता संग्राम: ऑटोमन (तुर्क) साम्राज्य की अधीनता से मुक्ति, यूरोपीय बुद्धिजीवियों का समर्थन (कवि लॉर्ड बायरन) और 1832 की कुस्तुनतुनिया की संधि।
  • बाल्कन राष्ट्रवाद: ऑटोमन साम्राज्य के पतन के बाद स्लाव जातियों का राष्ट्रीय संघर्ष, जो आगे चलकर प्रथम विश्वयुद्ध (1914) की पृष्ठभूमि बना।

3. प्रमुख बिंदु एवं महत्वपूर्ण वन-लाइनर (Important One-Liners)

फ्रांसीसी क्रांति एवं नेपोलियन का प्रभाव

  • 1789 की फ्रांसीसी क्रांति: निरंकुश बूर्बों राजवंश के शासक लुई 16वें के समय हुई; इसने यूरोप में पहली बार स्पष्ट राष्ट्रवाद की अवधारणा रखी।
  • नेपोलियन नागरिक संहिता (Napoleonic Code): 1804 ई. में लागू हुई; इसके तहत जन्म पर आधारित विशेषाधिकार समाप्त किए गए, कानून के समक्ष समानता और संपत्ति के अधिकार को सुरक्षित बनाया गया।
  • जर्मन राइन संघ: नेपोलियन ने जर्मनी के लगभग 300 छोटे-छोटे राज्यों को समाप्त कर 39 राज्यों का 'राइन संघ' (Confederation of the Rhine) गठित किया, जिसने जर्मनी में एकीकरण की नींव रखी।
  • वाटरलू का युद्ध: 18 जून 1815 को नेपोलियन संयुक्त यूरोपीय सेना (ब्रिटेन, प्रशा, रूस, ऑस्ट्रिया) से पराजित हुआ और उसे सेंट हेलेना द्वीप निर्वासित कर दिया गया (जहाँ 1821 में उसकी मृत्यु हुई)।

वियना कांग्रेस एवं मेटरनिख युग (1815–1848)

  • वियना कांग्रेस (Vienna Congress): 1815 ई. में ऑस्ट्रिया की राजधानी वियना में आयोजित हुई।
  • वियना कांग्रेस का अध्यक्ष: ऑस्ट्रिया का चांसलर ड्यूक मेटरनिख (प्रतिक्रियावादी और पुरातन व्यवस्था का कट्टर समर्थक)।
  • मेटरनिख का मूल मंत्र: "किसी भी परिवर्तन को रोको और जैसी स्थिति है, उसे बनाए रखो"।
मेटरनिख का प्रसिद्ध कथन: "जब फ्रांस छींकता है, तो बाकी यूरोप को सर्दी-जुकाम हो जाता है।"
  • मेटरनिख युग: 1815 से 1848 ई. तक के काल को यूरोपीय इतिहास में 'मेटरनिख युग' कहा जाता है।
  • वियना व्यवस्था के मुख्य निर्णय:
    • फ्रांस में पुनः बूर्बों वंश को सत्ता सौंपी गई और लुई 18वें को राजा बनाया गया।
    • फ्रांस की सीमाओं पर शक्तिशाली राज्यों का घेरा बनाया गया ताकि वह पुनः विस्तार न कर सके।
    • इटली और जर्मनी को छोटे-छोटे कमजोर राज्यों में विभाजित रखा गया ताकि राष्ट्रीय एकता न पनप सके।

1830 एवं 1848 की क्रांतियाँ

  • जुलाई 1830 की क्रांति (फ्रांस):
    • शासक: चार्ल्स दशम (घोर प्रतिक्रियावादी शासक) और उसका प्रधानमंत्री पोलिग्नेक।
    • कारण: पोलिग्नेक ने 25 जुलाई 1830 को चार अध्यादेश जारी कर प्रेस की स्वतंत्रता छीन ली और प्रतिनिधि सभा को भंग कर दिया।
    • परिणाम: पेरिस में 'तीन गौरवशाली दिन' (Three Glorious Days: 27–29 जुलाई 1830) के गृहयुद्ध के बाद चार्ल्स दशम गद्दी छोड़कर इंग्लैंड भाग गया।
    • नया राजा: आर्लेयंस वंश का लुई फिलिप एक संवैधानिक राजा बना।
  • 1848 की क्रांति (फ्रांस):
    • शासक: लुई फिलिप।
    • प्रधानमंत्री: गीजो (Guizot), जो किसी भी सामाजिक या राजनीतिक सुधार का कट्टर विरोधी था।
    • कारण: बेरोजगारी, भुखमरी, मताधिकार का संकुचित दायरा और पूंजीपतियों का पक्षपात।
    • परिणाम: 24 फरवरी 1848 को लुई फिलिप ने गद्दी छोड़ दी; मेटरनिख भी ऑस्ट्रिया छोड़कर इंग्लैंड भाग गया (मेटरनिख युग का अंत)।
    • फ्रांस में द्वितीय गणराज्य (Second Republic) की घोषणा हुई और 21 वर्ष से ऊपर के सभी वयस्क पुरुषों को मताधिकार तथा 'काम का अधिकार' दिया गया।

इटली का एकीकरण (Unification of Italy)

  • इटली के एकीकरण की पृष्ठभूमि: 19वीं सदी के आरंभ में इटली कई राज्यों में बंटा था — उत्तर में लोम्बार्डी और वेनेशिया (ऑस्ट्रिया के अधीन), मध्य में पोप का राज्य (रोम), तथा दक्षिण में नेपल्स और सिसिली (बूर्बों वंश के अधीन)।
  • एकीकरण की अगुवाई करने वाला राज्य: सार्डिनिया-पीडमोंट (शासक: विक्टर इमैनुएल द्वितीय)।
  • इटली के एकीकरण के तीन प्रमुख नायक:
    • जोसेफ मेजिनी (Giuseppe Mazzini):
      • उपनाम: इटली के एकीकरण का 'पैगंबर' या 'मसीहा'।
      • 1831 ई. में मार्सिले में 'यंग इटली' (Young Italy) की स्थापना की।
      • 1834 ई. में बर्न में 'यंग यूरोप' (Young Europe) की स्थापना की।
      • नारा: "ईश्वर, जनता और इटली"।
    • काउंट कैमिलो दे कावूर (Count Cavour):
      • पद: सार्डिनिया-पीडमोंट का प्रधानमंत्री (1852 में विक्टर इमैनुएल द्वितीय द्वारा नियुक्त)।
      • उपनाम: इटली के एकीकरण का 'मस्तिष्क' या 'कूटनीतिज्ञ'।
      • रणनीति: क्रीमिया के युद्ध (1853-56) में बिना बुलाए फ्रांस और ब्रिटेन का साथ दिया, जिससे पेरिस शांति सम्मेलन में इटली की समस्या को अंतरराष्ट्रीय मुद्दा बना दिया। 1859 में फ्रांस की मदद से ऑस्ट्रिया को पराजित कर लोम्बार्डी जीता।
    • ग्यूसेप गैरीबाल्डी (Giuseppe Garibaldi):
      • उपनाम: इटली के एकीकरण की 'तलवार'।
      • पेशा: मूलतः एक नाविक (Sailor) था।
      • सैन्य संगठन: 'लाल कुर्ती' (Red Shirts) नामक सशस्त्र स्वयंसेवकों की सेना बनाई।
      • पराक्रम: 1860 में दक्षिणी इटली के राज्यों सिसिली और नेपल्स पर आक्रमण कर बूर्बों राजा को उखाड़ फेंका और यह विशाल क्षेत्र निःस्वार्थ भाव से विक्टर इमैनुएल द्वितीय को सौंप दिया।
  • संयुक्त इटली का प्रथम राजा: 1861 ई. में विक्टर इमैनुएल द्वितीय को औपचारिक रूप से एकीकृत इटली का सम्राट घोषित किया गया।
  • पूर्ण एकीकरण (रोम की प्राप्ति): 1870–71 ई. में सेडान के युद्ध के समय जब फ्रांस ने रोम से अपनी सेना वापस बुला ली, तब इटली की सेना ने रोम पर अधिकार कर लिया और रोम को एकीकृत इटली की राजधानी बनाया गया।

जर्मनी का एकीकरण (Unification of Germany)

  • प्रारंभिक स्थिति: जर्मनी 300 से अधिक छोटे-छोटे खंडित राज्यों में बंटा था, जिनमें सबसे शक्तिशाली राज्य प्रशा (Prussia) था।
  • जालवेराइन (Zollverein):
    • स्थापना: 1834 ई. में प्रशा की पहल पर।
    • स्वरूप: यह एक जर्मन शुल्क संघ (Customs Union) था, जिसने व्यापारिक बाधाओं को समाप्त कर 39 राज्यों के बीच आर्थिक एकीकरण कायम किया।
    • अर्थशास्त्रियों का कथन: "जालवेराइन ने जर्मनी को आर्थिक रूप से एक राष्ट्र बनाया, जिसने बाद के राजनीतिक एकीकरण की जमीन तैयार की।"
  • फ्रैंकफर्ट संसद (1848): सेंट पॉल चर्च (फ्रैंकफर्ट) में एक अखिल जर्मन नेशनल असेंबली की बैठक हुई; जर्मन ताज प्रशा के राजा फ्रेडरिक विलियम चतुर्थ को पेश किया गया, किंतु उसने इसे ठुकरा दिया (संसद असफल रही)।
  • विलियम प्रथम: 1861 में प्रशा का राजा बना; उसने सैन्य सुधारों के लिए 1862 में ओटो वॉन बिस्मार्क को प्रशा का चांसलर नियुक्त किया।
  • ओटो वॉन बिस्मार्क (Otto von Bismarck):
    • जर्मन एकीकरण का मुख्य वास्तुकार / शिल्पकार।
    • नीति: 'रक्त और लौह की नीति' (Blood and Iron Policy) — बातचीत और भाषणों से नहीं, बल्कि सैन्य शक्ति और युद्ध से समस्याओं का समाधान।
बिस्मार्क का प्रसिद्ध कथन: "वर्तमान के बड़े प्रश्न भाषणों और बहुमत के प्रस्तावों से नहीं, बल्कि रक्त और लोहे से हल होंगे।"
  • बिस्मार्क के तीन निर्णायक युद्ध:
    • डेनमार्क से युद्ध (1864): ऑस्ट्रिया और प्रशा ने मिलकर डेनमार्क को हराया; गैस्टीन के समझौते द्वारा श्लेसविग प्रशा को और होल्सटीन ऑस्ट्रिया को मिला।
    • ऑस्ट्रिया-प्रशा युद्ध / सेडोवा का युद्ध (Battle of Sadowa - 1866): प्रशा ने ऑस्ट्रिया को निर्णायक रूप से पराजित किया; प्राग की संधि द्वारा ऑस्ट्रिया को जर्मन महासंघ से पूरी तरह बाहर कर दिया गया।
    • फ्रांको-प्रशियन युद्ध / सेडान का युद्ध (Battle of Sedan - 1870): 1 सितंबर 1870 को प्रशा ने फ्रांसीसी सेना को हराया और सम्राट नेपोलियन तृतीय को बंदी बना लिया।
  • फ्रैंकफर्ट की संधि (Treaty of Frankfurt):
    • तिथि: 10 मई 1871 (फ्रांस और प्रशा के बीच)।
    • परिणाम: फ्रांस ने जर्मनी को भारी हर्जाना दिया तथा अपने दो समृद्ध खनिज प्रांत अलसास (Alsace) और लोरेन (Lorraine) जर्मनी को सौंप दिए।
  • जर्मन साम्राज्य की घोषणा: 18 जनवरी 1871 को पेरिस के निकट वर्साय के महल के 'शीशमहल' (Hall of Mirrors) में प्रशा के राजा विलियम प्रथम को संयुक्त जर्मन साम्राज्य का सम्राट (कैसर - Kaiser) घोषित किया गया।

अन्य यूरोपीय देशों में राष्ट्रवाद (यूनान, हंगरी, पोलैंड)

  • यूनान का स्वतंत्रता संग्राम (Greek War of Independence):
    • यूनान प्राचीन काल से यूरोपीय सभ्यता, साहित्य, कला और दर्शन का पालना (Cradle of European Civilization) माना जाता था।
    • 15वीं सदी से यूनान ऑटोमन (मुस्लिम तुर्क) साम्राज्य के अधीन था।
    • हितेरिया फिलाइक (Hetaireia Philike): 1814 में ओडेसा (यूक्रेन) में यूनान की आजादी के लिए गठित गुप्त क्रांतिकारी संगठन।
    • लॉर्ड बायरन (Lord Byron): प्रसिद्ध अंग्रेज कवि, जो यूनानी मुक्ति संग्राम में लड़ने गए और 1824 में मिसोलोंगी में बुखार से उनकी मृत्यु हो गई।
    • नवारिनो का नौसैनिक युद्ध (Battle of Navarino - 1827): ब्रिटेन, फ्रांस और रूस की संयुक्त नौसेना ने तुर्क-मिस्र की सम्मिलित नौसेना को नष्ट कर दिया।
    • एड्रियानोपल की संधि (1829): रूस और तुर्की के बीच हुई; तुर्की ने यूनान की स्वायत्तता स्वीकार की।
    • कुस्तुनतुनिया की संधि (Treaty of Constantinople): 1832 ई. में संपन्न हुई; इसके तहत यूनान को एक स्वतंत्र संप्रभु राष्ट्र घोषित किया गया और बवेरिया के राजकुमार ओटो (Otto) को यूनान का पहला राजा बनाया गया।
  • हंगरी का राष्ट्रवाद:
    • राजधानी: बुडापेस्ट।
    • भाषा: मैग्यार (Magyar)।
    • प्रमुख राष्ट्रवादी नेता: लुई कोसुथ (Louis Kossuth) और फ्रांसिस डीक; इनके नेतृत्व में हंगरी ने ऑस्ट्रियाई साम्राज्य के खिलाफ विद्रोह कर अपनी अलग संसद और स्वायत्तता प्राप्त की।
  • पोलैंड का विद्रोह (1830): पोलैंड पर रूस का नियंत्रण था; 1830 में पोलिश राष्ट्रवादियों ने विद्रोह किया, जिसे रूसी सेना ने कठोरता से कुचल दिया।
  • बोहेमिया (चेक राष्ट्रवाद): ऑस्ट्रियाई साम्राज्य के अंतर्गत चेक भाषा और स्वायत्तता की मांग को लेकर संघर्ष हुआ।

4. महत्वपूर्ण पारिभाषिक शब्दावली (Key Terms)

शब्द अर्थ / व्याख्या
राष्ट्रवाद (Nationalism) एक भौगोलिक सीमा में साझी ऐतिहासिक, भाषाई और सांस्कृतिक पहचान रखने वाले जनसमूह की सामूहिक राजनीतिक चेतना।
निरंकुशवाद (Absolutism) शासन की ऐसी व्यवस्था जहाँ शासक की शक्तियों पर किसी संविधान, कानून या संसद का कोई अंकुश न हो।
प्रतिक्रियावाद (Reactionary) पुरानी व्यवस्था, रूढ़िवादिता और विशेषाधिकारों को बनाए रखने तथा किसी भी नए सुधार का विरोध करने की प्रवृत्ति।
कार्बोनरी (Carbonari) 1810 ई. में इटली में कोयला बनाने वालों के वेश में गठित एक गुप्त क्रांतिकारी संगठन (मेजिनी भी इसका सदस्य रहा था)।
जालवेराइन (Zollverein) 1834 में प्रशा द्वारा स्थापित जर्मन राज्यों का आर्थिक शुल्क संघ, जिसने आंतरिक चुंगी समाप्त की।
रक्त और लौह की नीति सैन्य शक्ति, कठोर अनुशासन और युद्ध के बल पर राष्ट्रीय लक्ष्यों को प्राप्त करने की नीति (बिस्मार्क द्वारा प्रतिपादित)।
स्लाव (Slav) पूर्वी और दक्षिण-पूर्वी यूरोप (बाल्कन क्षेत्र) में रहने वाला प्रमुख नृजातीय भाषाई समूह (जैसे — सर्ब, क्रोएट, बोस्नियन आदि)।

5. महत्वपूर्ण तिथिवार घटनाक्रम (Timeline: 1789–1871)

वर्ष प्रमुख ऐतिहासिक घटना
1789 फ्रांस की महान क्रांति; राष्ट्रवाद का यूरोप में प्रथम प्रस्फुटन।
1804 नेपोलियन कोड लागू; नेपोलियन फ्रांस का सम्राट बना।
1815 वाटरलू का युद्ध; नेपोलियन का पतन; वियना कांग्रेस (मेटरनिख युग का आरंभ)।
1830 फ्रांस में जुलाई की क्रांति; चार्ल्स दशम का पलायन; बूर्बों वंश समाप्त।
1831 मेजिनी द्वारा 'यंग इटली' की स्थापना।
1832 कुस्तुनतुनिया की संधि द्वारा यूनान स्वतंत्र राष्ट्र घोषित।
1834 प्रशा में जर्मन व्यापारिक शुल्क संघ 'जालवेराइन' की स्थापना; 'यंग यूरोप' का गठन।
1848 यूरोप भर में 1848 की क्रांतियाँ; फ्रांस में द्वितीय गणराज्य; मेटरनिख का पतन; फ्रैंकफर्ट संसद।
1859 सार्डिनिया-पीडमोंट और फ्रांस द्वारा ऑस्ट्रिया की पराजय (लोम्बार्डी का विलय)।
1860 गैरीबाल्डी द्वारा 'लाल कुर्ती' सेना के साथ सिसिली और नेपल्स पर विजय।
1861 विक्टर इमैनुएल द्वितीय एकीकृत इटली का राजा घोषित।
1862 ओटो वॉन बिस्मार्क प्रशा का चांसलर बना।
1866 सेडोवा का युद्ध (प्रशा द्वारा ऑस्ट्रिया की पराजय); वेनेशिया इटली में शामिल।
1870 सेडान का युद्ध (प्रशा द्वारा फ्रांस की पराजय); रोम का इटली में औपचारिक विलय।
1871 18 जनवरी: वर्साय में एकीकृत जर्मन साम्राज्य की घोषणा (विलियम प्रथम कैसर घोषित)।
10 मई: फ्रैंकफर्ट की संधि (अलसास-लोरेन जर्मनी को मिले)।

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