BSEB Class 10 Economics Chapter 1: अर्थव्यवस्था एवं इसके विकास का इतिहास (Economy and History of its Development) Full Solutions in Hindi
बिहार बोर्ड मैट्रिक परीक्षा (कक्षा 10वीं) के सामाजिक विज्ञान विषय अंतर्गत अर्थशास्त्र (हमारी अर्थव्यवस्था भाग-2) का पहला अध्याय "अर्थव्यवस्था एवं इसके विकास का इतिहास" पूरे विषय की नींव है। इस अध्याय में अर्थव्यवस्था की परिभाषा, अर्थव्यवस्था के प्रकार (पूँजीवादी, समाजवादी, मिश्रित), आर्थिक संरचना के तीनों क्षेत्र (प्राथमिक, द्वितीयक, तृतीयक), आर्थिक नियोजन, सतत विकास, मानव विकास सूचकांक (HDI) तथा बिहार के पिछड़ेपन के कारण एवं निवारण के उपाय विस्तार से समझाए गए हैं।
नीचे पाठ्यपुस्तक (BSTBPC) की प्रश्नावली के सभी वस्तुनिष्ठ प्रश्न (MCQs), रिक्त स्थानों की पूर्ति, लघु उत्तरीय प्रश्न, दीर्घ उत्तरीय प्रश्न तथा परियोजना कार्य के सटीक व सरल उत्तर दिए गए हैं।
I. सही विकल्प चुनें (Objective Questions)
1. निम्न को प्राथमिक क्षेत्र कहा जाता है –
(ख) कृषि क्षेत्र
(ग) औद्योगिक क्षेत्र
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर: (ख) कृषि क्षेत्र (प्राथमिक = कृषि, द्वितीयक = औद्योगिक, तृतीयक = सेवा क्षेत्र)
2. इनमें कौन-से देश में मिश्रित अर्थव्यवस्था है?
(ख) चीन
(ग) भारत
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर: (ग) भारत (अमेरिका में पूँजीवादी तथा चीन में समाजवादी अर्थव्यवस्था है)
3. भारत में योजना आयोग का गठन कब किया गया था?
(ख) 15 सितम्बर 1950
(ग) 15 अक्टूबर 1951
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर: (क) 15 मार्च 1950 (अब इसके स्थान पर नीति आयोग कार्यरत है)
4. जिस देश का राष्ट्रीय आय अधिक होता है वह देश कहलाता है –
(ख) विकसित
(ग) अर्द्ध-विकसित
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर: (ख) विकसित
5. इनमें से किसे पिछड़ा राज्य कहा जाता है?
(ख) केरल
(ग) बिहार
(घ) दिल्ली
उत्तर: (ग) बिहार
II. रिक्त स्थानों की पूर्ति करें
• भारत अंग्रेजी शासन का एक उपनिवेश था।
• अंग्रेजों ने भारतीय अर्थव्यवस्था का शोषण किया।
• अर्थव्यवस्था आजीविका अर्जन की प्रणाली है।
• द्वितीयक क्षेत्र को औद्योगिक क्षेत्र कहा जाता है।
• आर्थिक विकास आवश्यक रूप से परिवर्तन की प्रक्रिया है।
• भारत में आर्थिक विकास का श्रेय नियोजन को दिया जा सकता है।
• आर्थिक विकास की माप करने के लिए प्रतिव्यक्ति आय को सबसे उचित सूचकांक माना जाता है।
• साधनों के मामले में धनी होते हुए भी बिहार की स्थिति दयनीय है।
• बिहार में कृषि ही जीवन का आधार है।
• बिहार के विकास में बाढ़ एक बहुत बड़ा बाधक है।
III. लघु उत्तरीय प्रश्न (Short-Answer Questions)
प्रश्न 1. अर्थव्यवस्था किसे कहते हैं?
उत्तर: अर्थव्यवस्था एक ऐसा ढांचा या संगठन है जिसके अंतर्गत समाज के लोग विभिन्न प्रकार की आर्थिक क्रियाएँ (जैसे— कृषि, उद्योग, व्यापार, परिवहन, बैंकिंग आदि) संपादित करते हैं और अपनी आजीविका अर्जित करते हैं। आर्थर लेविस के अनुसार— "अर्थव्यवस्था का अर्थ किसी राष्ट्र के संपूर्ण व्यवहार से होता है जिसके आधार पर मानवीय आवश्यकताओं की संतुष्टि के लिए संसाधनों का प्रयोग किया जाता है।"
प्रश्न 2. मिश्रित अर्थव्यवस्था क्या है?
उत्तर: मिश्रित अर्थव्यवस्था (Mixed Economy) वह अर्थव्यवस्था है जहाँ पूँजीवाद और समाजवाद दोनों का समन्वय पाया जाता है। इसमें उत्पादन के साधनों का स्वामित्व निजी व्यक्तियों तथा सरकार दोनों के पास संयुक्त रूप से होता है। इसका उद्देश्य निजी लाभ के साथ-साथ लोक कल्याण को बढ़ावा देना होता है। भारत मिश्रित अर्थव्यवस्था का सबसे प्रमुख उदाहरण है।
प्रश्न 3. सतत् विकास क्या है?
उत्तर: सतत् विकास (Sustainable Development) का अर्थ ऐसे विकास से है जो वर्तमान पीढ़ी की आवश्यकताओं को पूरा करने के साथ-साथ भावी (आने वाली) पीढ़ी की क्षमताओं और प्राकृतिक संसाधनों से समझौता न करे। इसमें पर्यावरण को नुकसान पहुँचाए बिना संसाधनों का विवेकपूर्ण और न्यायसंगत उपयोग किया जाता है।
प्रश्न 4. आर्थिक नियोजन क्या है?
उत्तर: राष्ट्र की प्राथमिकताओं और सामाजिक-आर्थिक उद्देश्यों को ध्यान में रखते हुए देश के प्राकृतिक, मानवीय और भौतिक संसाधनों का एक निश्चित समयावधि के अंतर्गत सुनियोजित एवं विवेकपूर्ण उपयोग करना आर्थिक नियोजन (Economic Planning) कहलाता है। भारत में इसके लिए पंचवर्षीय योजनाएँ चलाई गई थीं।
प्रश्न 5. मानव विकास रिपोर्ट (Human Development Report) क्या है?
उत्तर: मानव विकास रिपोर्ट (HDR) संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) द्वारा जारी की जाने वाली एक वार्षिक रिपोर्ट है। यह विश्व के विभिन्न देशों की तुलना केवल आय के आधार पर नहीं, बल्कि नागरिकों के तीन मुख्य पैमानों— जीवन प्रत्याशा (स्वास्थ्य), साक्षरता स्तर (शिक्षा) तथा प्रति व्यक्ति आय (जीवन स्तर) के आधार पर तैयार किए गए 'मानव विकास सूचकांक' (HDI) के आधार पर करती है।
प्रश्न 6. आधारिक संरचना (Infrastructure) पर प्रकाश डालें।
उत्तर: आधारिक संरचना से तात्पर्य उन सभी बुनियादी सुविधाओं और सेवाओं से है जो देश के आर्थिक, औद्योगिक और सामाजिक विकास की मजबूत नींव तैयार करती हैं। इसके अंतर्गत बिजली, परिवहन (सड़क, रेल, हवाई मार्ग), संचार के साधन (मोबाइल, इंटरनेट), बैंकिंग, स्कूल, कॉलेज और अस्पताल आते हैं। जिस देश का बुनियादी ढांचा जितना सुदृढ़ होगा, उसका विकास उतना ही तीव्र होगा।
IV. दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Long-Answer Questions)
प्रश्न 1. अर्थव्यवस्था की संरचना (Structure of Economy) से क्या समझते हैं? इन्हें कितने भागों में बाँटा गया है?
उत्तर:
अर्थव्यवस्था की संरचना का अर्थ: अर्थव्यवस्था की संरचना से आशय विभिन्न उत्पादन क्षेत्रों में उसके विभाजन से है। किसी देश में संपादित होने वाली विभिन्न आर्थिक गतिविधियों को उनके स्वरूप के आधार पर मुख्य रूप से तीन भागों में बाँटा गया है:
- प्राथमिक क्षेत्र (Primary Sector): इसे मुख्य रूप से कृषि क्षेत्र भी कहा जाता है। इसके अंतर्गत वे सभी गतिविधियाँ आती हैं जो सीधे प्राकृतिक संसाधनों पर निर्भर करती हैं। जैसे— कृषि, पशुपालन, मछली पालन, वानिकी (जंगल से लकड़ी एकत्र करना) तथा खनन कार्य।
- द्वितीयक क्षेत्र (Secondary Sector): इसे औद्योगिक क्षेत्र भी कहा जाता है। इसमें प्राथमिक क्षेत्र से प्राप्त कच्चे माल का प्रसंस्करण करके नई उपयोगी वस्तुएँ बनाई जाती हैं। जैसे— विनिर्माण उद्योग (कपड़ा, सीमेंट, चीनी बनाना), कुटीर एवं लघु उद्योग, भवन/सड़क निर्माण तथा गैस व बिजली उत्पादन।
- तृतीयक क्षेत्र (Tertiary Sector): इसे सेवा क्षेत्र भी कहा जाता है। यह क्षेत्र किसी भौतिक वस्तु का निर्माण नहीं करता, बल्कि प्राथमिक और द्वितीयक क्षेत्र को सुचारू रूप से चलाने में सहायता प्रदान करता है। जैसे— परिवहन, संचार, व्यापार, बैंकिंग, बीमा, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएँ।
प्रश्न 2. आर्थिक विकास क्या है? आर्थिक विकास तथा आर्थिक वृद्धि में अंतर बतावें।
उत्तर:
आर्थिक विकास (Economic Development): आर्थिक विकास एक दीर्घकालिक, बहुआयामी और परिवर्तनशील प्रक्रिया है जिसके तहत किसी देश की वास्तविक राष्ट्रीय आय तथा प्रति व्यक्ति आय में निरंतर वृद्धि होती है, उत्पादन तकनीकों में आधुनिकीकरण आता है और समाज के लोगों के जीवन स्तर, स्वास्थ्य, शिक्षा और कल्याण में गुणात्मक सुधार होता है।
आर्थिक विकास तथा आर्थिक वृद्धि में अंतर:
| आधार | आर्थिक वृद्धि (Economic Growth) | आर्थिक विकास (Economic Development) |
|---|---|---|
| प्रकृति | यह केवल उत्पादन या आय में होने वाले मात्रात्मक (परिमाणात्मक) विस्तार को दर्शाती है। | यह मात्रात्मक वृद्धि के साथ-साथ सामाजिक व संस्थागत गुणात्मक परिवर्तनों को भी दर्शाती है। |
| प्रयोग का क्षेत्र | इस शब्द का प्रयोग प्रायः विकसित देशों (जैसे अमेरिका, ब्रिटेन) के संदर्भ में किया जाता है जहाँ ढांचा पहले से तैयार है। | इसका प्रयोग विकासशील या अल्पविकसित देशों (जैसे भारत, ब्राजील) के संदर्भ में समस्याओं के समाधान के लिए किया जाता है। |
| अवधारणा | यह एक संकीर्ण और सहज प्रक्रिया है। | यह एक व्यापक, जटिल और दीर्घकालिक प्रक्रिया है। |
प्रश्न 3. आर्थिक विकास की माप कुछ सूचकांकों के द्वारा करें।
उत्तर: किसी देश या राज्य के आर्थिक विकास का सटीक मूल्यांकन करने के लिए अर्थशास्त्रियों द्वारा प्रमुख रूप से निम्नलिखित सूचकांकों का प्रयोग किया जाता है:
- 1. राष्ट्रीय आय (National Income): किसी देश में एक वर्ष की अवधि में उत्पादित सभी अंतिम वस्तुओं और सेवाओं के मौद्रिक मूल्य के योग को राष्ट्रीय आय कहते हैं। सामान्यतः जिस देश की राष्ट्रीय आय अधिक और निरंतर बढ़ती है, उसे अधिक विकसित माना जाता है।
- 2. प्रति-व्यक्ति आय (Per Capita Income - PCI): यह आर्थिक विकास को मापने का सबसे उपयुक्त और लोकप्रिय मापदंड है। जब देश की कुल राष्ट्रीय आय को कुल जनसंख्या से भाग दिया जाता है, तो प्रति-व्यक्ति आय प्राप्त होती है। विश्व बैंक भी इसी आधार पर देशों का वर्गीकरण करता है।
- 3. जीवन की भौतिक गुणवत्ता सूचकांक (PQLI): मॉरिस डी० मॉरिस द्वारा विकसित इस सूचकांक में तीन बातों— जीवन प्रत्याशा (दीर्घायु), शिशु मृत्यु दर तथा मौलिक साक्षरता को शामिल किया जाता है।
- 4. मानव विकास सूचकांक (Human Development Index - HDI): महबूब-उल-हक द्वारा तैयार किया गया यह सबसे आधुनिक और मान्य सूचकांक है। इसमें तीन प्रमुख घटकों— (i) जीवन प्रत्याशा (स्वास्थ्य), (ii) शैक्षिक उपलब्धि (साक्षरता) तथा (iii) प्रति व्यक्ति सकल घरेलू उत्पाद (जीवन स्तर) का औसत निकाला जाता है। इसका मान 0 से 1 के बीच होता है।
प्रश्न 4. बिहार के आर्थिक पिछड़ेपन के क्या कारण हैं? बिहार के पिछड़ेपन दूर करने के लिए कुछ मुख्य उपाय बतावें।
उत्तर:
• बिहार के पिछड़ेपन के प्रमुख कारण:
- तेजी से बढ़ती जनसंख्या: बिहार में जनसंख्या वृद्धि दर बहुत अधिक है, जिससे विकास के अधिकांश लाभ बढ़ती आबादी की बुनियादी जरूरतों में ही खप जाते हैं।
- आधारिक संरचना का अभाव: राज्य में उन्नत सड़कों, रेल नेटवर्क, गुणवत्तापूर्ण तकनीकी संस्थानों और नियमित औद्योगिक बिजली की वर्षों तक भारी कमी रही है।
- कृषि पर अत्यधिक निर्भरता एवं पिछड़ापन: राज्य की 80% से अधिक आबादी आजीविका के लिए कृषि पर निर्भर है, जो आज भी पारंपरिक तरीकों और मानसून पर आधारित है।
- बाढ़ तथा सूखे की दोहरी मार: उत्तरी बिहार प्रतिवर्ष नेपाल से आने वाली नदियों की भीषण बाढ़ से तबाह होता है, जबकि दक्षिणी बिहार गंभीर सूखे का सामना करता है। इससे जान-माल और फसलों का भारी नुकसान होता है।
- औद्योगिक रुग्णता और खनिज संपदा का अभाव: सन् 2000 में झारखंड के अलग होने के बाद सभी प्रमुख खनिज और भारी उद्योग झारखंड में चले गए, जिससे बिहार में औद्योगिक शून्यता आ गई।
- प्रशासनिक शिथिलता व कानून-व्यवस्था: पूर्व के वर्षों में कमजोर कानून-व्यवस्था और लालफीताशाही के कारण निजी निवेशक बिहार में निवेश करने से कतराते रहे।
• पिछड़ेपन को दूर करने के मुख्य उपाय:
- जनसंख्या नियंत्रण: परिवार नियोजन कार्यक्रमों, बालिका शिक्षा और जन-जागरूकता अभियानों के माध्यम से जनसंख्या वृद्धि दर पर प्रभावी रोक लगाना।
- बाढ़ एवं सूखा नियंत्रण का स्थायी समाधान: उत्तरी बिहार की नदियों (विशेषकर कोसी, गंडक) पर स्थायी तटबंध बनाना, नहरों का जाल बिछाना और नदी जोड़ो परियोजना के जरिए दक्षिणी बिहार के सूखाग्रस्त इलाकों तक पानी पहुँचाना।
- आधारभूत संरचना का सुदृढ़ीकरण: 24 घंटे निर्बाध औद्योगिक बिजली, फोर-लेन सड़कों का निर्माण, कोल्ड स्टोरेज तथा लॉजिस्टिक्स हब की स्थापना करना।
- कृषि आधारित उद्योगों (Agro-Industries) को बढ़ावा: मखाना, लीची, आम, मक्का, आलू और गन्ना उत्पादन के प्रसंस्करण (Food Processing Units) के लिए विशेष आर्थिक नीतियां लागू करना।
- औद्योगिक निवेश को प्रोत्साहन और कानून-व्यवस्था: एकल खिड़की प्रणाली (Single Window System), टैक्स में छूट देकर और बेहतर कानून व्यवस्था प्रदान कर बाहरी उद्योगपतियों को बिहार में निवेश के लिए आकर्षित करना।
- ईमानदार व कुशल प्रशासन: भ्रष्टाचार पर शून्य सहिष्णुता (Zero Tolerance) की नीति अपनाना और सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे लाभार्थियों तक पहुँचाना।
V. परियोजना कार्य (Project Work Guidance)
प्रश्न: अपने गाँव या शहर के आर्थिक विकास के संदर्भ में एक परियोजना प्रस्तुत करें।
परियोजना प्रारूप (Project Outline):
- 1. गाँव/शहर का सामान्य परिचय: गाँव/कस्बे का नाम, कुल अनुमानित जनसंख्या तथा भौगोलिक स्थिति।
- 2. आजीविका के मुख्य साधन: कृषि (धान, गेहूँ, मक्का), स्थानीय हाट-बाजार, दुग्ध व्यवसाय, दुकानें तथा प्रवासी श्रमिकों द्वारा भेजा गया धन।
- 3. उपलब्ध बुनियादी संरचना (Infrastructure): पक्की सड़कों की स्थिति, बिजली आपूर्ति के घंटे, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC), सरकारी स्कूल व नल-जल योजना की स्थिति।
- 4. मुख्य आर्थिक समस्याएँ: सिंचाई के पर्याप्त साधनों का अभाव, जलजमाव/बाढ़, स्थानीय स्तर पर रोजगार न होना और कौशल प्रशिक्षण केंद्रों की कमी।
- 5. विकास हेतु सुझाव: गाँव में दुग्ध संकलन केंद्र (जैसे सुधा डेयरी) खोलना, सौर ऊर्जा चालित नलकूप लगाना, स्वयं सहायता समूहों को बढ़ावा देना तथा युवाओं के लिए कंप्यूटर/कौशल विकास केंद्र स्थापित करना।
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