Chapter 3. अच्युताष्टकम् | BSEB 10 Sanskrit Solution


तृतीयः पाठः : अच्युताष्टकम् (भगवान अच्युत/श्रीकृष्ण की स्तुति)

श्लोक 1
संस्कृत: अच्युतं केशवं रामनारायणं कृष्णदामोदरं वासुदेवं हरिम्।
श्रीधरं माधवं गोपिकावल्लभं जानकीनायकं रामचन्द्रं भजे॥1॥
हिंदी अर्थ: अच्युत, केशव, राम-नारायण, कृष्ण, दामोदर, वासुदेव, हरि, श्रीधर, माधव, गोपियों के प्रिय (गोपिकावल्लभ), जानकी के नायक और रामचंद्र का मैं भजन (स्मरण) करता हूँ।
श्लोक 2
संस्कृत: अच्युतं केशवं सत्यभामाधवं माधवं श्रीधरं राधिकाराधितम्।
इन्दिरामन्दिरं चेतसा सुन्दरं देवकीनन्दनं नन्दजं सन्दधे॥2॥
हिंदी अर्थ: अच्युत, केशव, सत्यभामा के स्वामी माधव, श्रीधर, राधिका द्वारा पूजित, लक्ष्मी के मंदिर (निवास स्थान), मन को सुंदर लगने वाले, देवकी के नंदन और नंद के पुत्र (नंदज) का मैं ध्यान करता हूँ।
श्लोक 3
संस्कृत: विष्णवे जिष्णवे शङ्खिने चक्रिणे रुक्मिणीराघिणे जानकीजानये।
बल्लवी-वल्लभाया चिंतायात्मने कंसविध्वंसिने वशिने ते नमः॥3॥
हिंदी अर्थ: सर्वव्यापक विष्णु को, विजयशील जिष्णु को, शंख और चक्र धारण करने वाले को, रुक्मिणी के प्रिय (राघिणे), जानकी के पति (जानकीजानये), गोपियों के वल्लभ (बल्लवी-वल्लभाय), चिंतन करने योग्य (चिंतायात्मने), कंस का वध करने वाले और इंद्रियों को वश में रखने वाले आपको नमस्कार है।
श्लोक 4
संस्कृत: कृष्ण गोविन्द हे राम नारायण श्रीपते वासुदेवाजित श्रीनिधे।
अच्युतानन्त हे माधवाधोक्षज द्वारकानायक द्रौपदीरक्षक॥4॥
हिंदी अर्थ: हे कृष्ण, हे गोविंद, हे राम, हे नारायण, हे श्रीपते, हे वासुदेव, हे अजिते, हे श्रीनिधे, हे अच्युत, हे अनन्त, हे माधव, हे अधोक्षज, हे द्वारकानाथ और हे द्रौपदी के रक्षक! आपको बारंबार नमस्कार है।
श्लोक 5
संस्कृत: राक्षसक्षोभितः सीतया शोभितो दण्डकारण्य-भूपुण्यटा-कारणः।
लक्ष्मणेनान्वितो वानरैः सेवितोऽगस्त्यसम्पूर्णितो राघवः पातु माम्॥5॥
हिंदी अर्थ: राक्षसों को क्षुब्ध करने वाले, सीता जी से शोभित, दंडकारण्य भूमि को पवित्र करने वाले, लक्ष्मण के साथ रहने वाले, वानरों द्वारा सेवित और अगस्त्य मुनि द्वारा पूजित श्री राघव (राम) मेरी रक्षा करें।
श्लोक 6
संस्कृत: धेनुकारिष्टकोऽनिष्टकृद् द्वेषिणां केशहा कंसहृद्वंशिकावादकः।
पूतनाकोपकः सूरजाखेलनो बालगोपालकः पातु मां सर्वदा॥6॥
हिंदी अर्थ: धेनुकासुर और अरिष्टासुर जैसे अनिष्ट करने वाले द्वेषियों का नाश करने वाले, केशी का वध करने वाले, कंस के हृदय को भयभीत करने वाले, वंशी बजाने वाले, पूतना पर क्रोध करने वाले, यमुना नदी के तट पर खेलने वाले और बाल गोपाल मेरी हमेशा रक्षा करें।
श्लोक 7
संस्कृत: विद्युदुद्योतवत्स्फुरद्वाससं प्रावृड्मभोदवत्प्रोलसद्दिग्रहम्।
वन्या मल्या शोभितोरः स्थलं लोहिताङ्घ्रिद्वयं वारिजाक्षं भजे॥7॥
हिंदी अर्थ: बिजली की तरह चमकने वाले वस्त्र धारण करने वाले, वर्षा ऋतु के मेघ के समान सुंदर शरीर वाले, वनमाला से सुशोभित वक्षःस्थल वाले, लाल चरणों वाले और कमल के समान नेत्रों वाले (वारिजाक्ष) भगवान का मैं भजन करता हूँ।
श्लोक 8
संस्कृत: कुञ्चितैः कुन्तलैर्भाजमानननं रत्नमौलिं लसत्कुण्डलं गण्डयोः।
हारकेयूरकं कङ्कणप्रोज्जवलं किङ्किणीमोज्जवलं श्यामलं तं भजे॥8॥
हिंदी अर्थ: घुंघराले बालों से सुशोभित मुख वाले, मुकुट (रत्नमौलि) धारण करने वाले, गालों पर चमकते हुए कुंडल वाले, हार, बाजूबंद (केयूर) और कंकणों से प्रज्वलित, तथा करधनी (किङ्किणी) से सुंदर, उन सांवले रूप वाले भगवान का मैं भजन करता हूँ।

अभ्यासः (प्रश्न-उत्तर)

1. विष्णोः पञ्च पर्यावाचिनः लिखत।
उत्तरम्: विष्णोः पञ्च पर्यायाः सन्ति— अच्युतः, केशवः, माधवः, वासुदेवः, हरिः (चक्रधारी, श्रीपतिः)।
(हिंदी अर्थ: विष्णु के पाँच पर्यायवाची शब्द हैं— अच्युत, केशव, माधव, वासुदेव और हरि।)
2. कविः कं भजितुम् इच्छाति?
उत्तरम्: कविः अच्युतं केशवम् रामनारायणं कृष्णं वासुदेवं च (भगवान् विष्णुम् / श्रीकृष्णम्) भजितुम् इच्छति।
(हिंदी अर्थ: कवि अच्युत, केशव, राम-नारायण, कृष्ण और वासुदेव (भगवान विष्णु/श्रीकृष्ण) का भजन करना चाहते हैं।)

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